For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Naveen Mani Tripathi
Share

Naveen Mani Tripathi's Friends

  • Ajay Tiwari
 

Naveen Mani Tripathi's Page

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 जब  मुलाकात में सौ बार  बहाना आया ।। कैसे कह दूँ मैं तुझे प्यार निभाना आया ।।क़ातिले इश्क़ का इल्ज़ाम लगा जब तुम पर । पैरवी करने यहां सारा ज़माना आया ।।आज की शाम तेरी बज़्म में हंगामा है। मुद्दतों बाद जो मौसम ये सुहाना आया ।।रिन्द की तिश्नगी से रूबरू था तू साकी । और इल्जाम है तुझको न पिलाना आया ।।उसकी ख़ामोश मुहब्बत पे है चर्चा इतनी । राज  उल्फ़त  का उसे  कैसे छुपाना ।।गुफ्तगूं  होने  लगी  शह्र  के बाजारों में । मेरे लब पे जो तेरा एक तराना आया ।।इतना…See More
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हिज्र में अश्क़ बह गए इतने ।अब तलक वो नदी तो खारी है ।। वाह बहुत सुंदर भावों की ग़ज़ल पेश की है सर आपने। दिल से बधाई स्वीकार करें।"
16 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब हार्दिक आभाव"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सादर हार्दिक बधाई ।"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन और आभार।"
Mar 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'सब   बताता   है   नूर   चेहरे   का' इस मिसरे में तनाफ़ुर है,'सब' की जगह "ये" कर लें…"
Mar 12
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1212 22 दरमियाँ    हुस्न    पर्दा    दारी   है । कैसे    कह   दूँ  के   बेक़रारी   है ।।ऐ  कबूतर  जरा  सँभल   के  उड़ । देखता  अब   तुझे    शिकारी   है ।।कौन  कहता  बहुत  ख़फ़ा  हैं  वो । आना  जाना  तो  उनका   जारी है ।।सब   बताता   है   नूर   चेहरे   का । रात    उसने   कहाँ    गुजारी    है ।।कैसे  कर  लूं  यकीन  मैं  तुम  पर । साफ   नीयत   कहाँ   तुम्हारी  है ।।अब  तलक  होश  में  नहीं  हो तुम । आंख  में   इश्क़   की  खुमारी   है ।।उसकी  किस्मत  को   दाद  देता  हूँ । जुल्फ   जिसने  …See More
Mar 10
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आपने छोटी 'ह'(जिसे उर्दू में 'ह' ख़फ़ी कहते हैं) लिए हैं ,और 'सलाह' और 'निकाह' शब्द के अंत में बड़ी 'ह' लिया जाता है,इसलिए उर्दू में इसकी इजाज़त नहीं है ।"
Mar 8
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर क्षमा कीजियेगा आपके नाम के साथ आदर सूचक शब्द टाइप करने में छूट गया है । "
Mar 7
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सादर नमन के साथ हार्दिक आभार । कृपया सलाह और निक़ाह उर्दू के हिसाब से कौन सा तकनीकी कारण इस पर भी प्रकाश डालने का कष्ट करें । खुद की जानकारी के लिए आवश्यक समझता हूँ। सादर "
Mar 7
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'आप गुजरे गली से जब उनके' इस मिसरे में 'उनके' की जगह "उनकी" कर लें । 'लोग मुझसे सलाह कर बैठे' इस मिसरे का क़ाफ़िया उर्दू के हिसाब…"
Mar 7
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

यह खबर इज़्तिराब की सी है

2122 1212 22यह ख़बर इज़्तिराब की सी है ।बात जब इंकलाब की सी है ।।वह बगावत पे आज उतरेगा ।उसकी आदत नवाब की सी है ।।हम सफ़र ढूढना बहुत मुश्किल ।सोच जब इंतखाब की सी है ।।देखकर जिसको बेख़ुदी में हूँ ।उसकी फ़ितरत शराब की सी है ।।आ रहे रात में सनम शायद ।रोशनी आफ़ताब की सी है ।।रोज पढ़ता हूँ उसको शिद्द्त से ।वो जो मेरी किताब की सी है ।।उसकी ख़ुश्बू बता रही मुझको ।पंखुरी वह गुलाब की सी है ।।हिज्र में अश्क़ इस तरह बहते ।धार कुछ तो "चिनाब" की सी है ।।कुछ तो होगी अना की फितरत भी ।जो ग़ज़ल महताब की सी है ।।उसके चहरे…See More
Mar 6
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब हार्दिक आभार ।"
Mar 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, उम्दा गजल हुयी है । हार्दिक बधाई।"
Mar 5
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 हरिओम श्रीवास्तव साहब हार्दिक आभार "
Mar 5
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 आसिफ़ जैदी साहब तहेदिल से शुक्रिया ।"
Mar 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22



जब  मुलाकात में सौ बार  बहाना आया ।।

कैसे कह दूँ मैं तुझे प्यार निभाना आया ।।

क़ातिले इश्क़ का इल्ज़ाम लगा जब तुम पर ।

पैरवी करने यहां सारा ज़माना आया ।।

आज की शाम तेरी बज़्म में हंगामा है।

मुद्दतों बाद जो मौसम ये सुहाना आया ।।…

Continue

Posted on March 19, 2019 at 1:09am

ग़ज़ल

2122 1212 22

दरमियाँ    हुस्न    पर्दा    दारी   है ।

कैसे    कह   दूँ  के   बेक़रारी   है ।।

ऐ  कबूतर  जरा  सँभल   के  उड़ ।

देखता  अब   तुझे    शिकारी   है ।।

कौन  कहता  बहुत  ख़फ़ा  हैं  वो ।

आना  जाना  तो  उनका   जारी है ।।

सब   बताता   है   नूर   चेहरे   का ।

रात    उसने   कहाँ    गुजारी    है ।।

कैसे  कर  लूं …

Continue

Posted on March 10, 2019 at 9:00am — 5 Comments

यह खबर इज़्तिराब की सी है

2122 1212 22



यह ख़बर इज़्तिराब की सी है ।

बात जब इंकलाब की सी है ।।

वह बगावत पे आज उतरेगा ।

उसकी आदत नवाब की सी है ।।

हम सफ़र ढूढना बहुत मुश्किल ।

सोच जब इंतखाब की सी है ।।

देखकर जिसको बेख़ुदी में हूँ ।

उसकी फ़ितरत शराब की सी है ।।

आ रहे रात में सनम शायद ।

रोशनी आफ़ताब की सी है ।।

रोज पढ़ता हूँ उसको शिद्द्त से ।

वो जो मेरी किताब की सी है…

Continue

Posted on March 6, 2019 at 6:55pm

ग़ज़ल



2122 1212 22

खूब सूरत गुनाह कर बैठे ।

हुस्न पर हम निगाह कर बैठे ।।

आप गुजरे गली से जब उनके ।

सारी बस्ती तबाह कर बैठे ।।

कुछ असर हो गया जमाने का ।

ज़ुल्फ़ वो भी सियाह कर बैठे ।।

देख कर जो गए थे गुलशन को ।

आज फूलों की चाह कर बैठे ।।

जख्म दिल का अभी हरा है क्या ।

आप फिर क्यों कराह कर बैठे ।।

किस तरह से जलाएं मेरा घर ।

लोग मुझसे सलाह कर बैठे ।।

लोग नफरत की इस सियासत…

Continue

Posted on March 4, 2019 at 1:00pm — 11 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Md. anis sheikh replied to Admin's discussion "OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ
"राणा साहब आपने मेरे प्रश्न के उत्तर के लिए इतनी चर्चा की और अपना कीमती समय दिया उसका मैं आभारी हूँ,…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh replied to Admin's discussion "OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ
"जिन्हें, उन्हें, तुम्हें, क्यों आदि शब्दों को लेकर मेरी  वीनस भाई से विस्तार से चर्चा हुई है…"
12 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"हार्दिक बधाई आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी। वरिष्ठ जनों की बच्चों जैसी खाद्य…"
13 hours ago
विनय कुमार posted blog posts
14 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
15 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 जब  मुलाकात में सौ बार  बहाना आया ।। कैसे कह दूँ…See More
15 hours ago
विनय कुमार commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वाह, बहुत बढ़िया और हक़ीक़त के करीब की रचना, बुढ़ापे में तो खाने पीने की लालसा और बढ़ जाती है लेकिन…"
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Neelam Upadhyaya's blog post जब तुम थीं माँ
"आदरणीया नीलम जी इस भावपूर्ण रचना के लिए दिल से बधाई।"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वर्तमान में पारिवारिक परिवेश में पनपते विचारों का गहन मंथन चित्रित किया है सर आपने। इस लघु कथा में…"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हिज्र में अश्क़ बह गए इतने ।अब तलक वो नदी तो खारी है ।। वाह बहुत सुंदर भावों की ग़ज़ल पेश की है सर…"
16 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब हार्दिक आभाव"
19 hours ago
Nikhil Srivastava is now a member of Open Books Online
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service