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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में
"आदरणीय कबीर सर सादर नमन । सबसे पहले आपके स्वस्थ रहने की दुआ करता हूँ । आपके बिना ओबीओ सूना हो जाता है । आपकी बात पर ध्यान देकर ग़ज़ल की री राइटिंग करूँगा । आपके जैसे उस्ताद दुर्लभ हैं । "
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, "ग़ालिब'की ज़मीन में ग़ज़ल का प्रयास अभी और समय चाहता है,कई अशआर में रदीफ़ से इंसाफ़ नहीं हो सका, कई अशआर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं पैदा हो सका, इस ज़मीन में फ़िल्म 'बरसात की रात'में 'साहिर की ग़ज़ल…"
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब हार्दिक आभार"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आ. भाई नवीन जी, सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में

221 2121 1221 212ढूढा हूँ मुश्किलों से सलामत गुहर को मैं।समझा हूँ तेरे हुस्न के जेरो जबर को मैं ।।यूँ ही नहीं हूं आपके मैं दरमियाँ खड़ा ।नापा हूँ अपने पाँव से पूरे सफर को मैं ।।मारा वही गया जो भला रात दिन किया ।।देखा हूँ तेरे गाँव में कटते शजर को मैं ।।मत पूछिए कि आप मेरे क्या नहीं हुए ।।पाला हूँ बड़े नाज़ से अहले जिगर को मैं ।।शायद तेरे वजूद की कोई खबर मिले ।पढ़ता रहा हूँ आज तलक हर खबर को मैं ।।कुछ तो करम हो आपका उल्फत के नाम पर ।रक्खूँगा आप पर भी कहाँ तक नज़र को मैं ।।इस फ़ासले के दौर में ऐसा न हो…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए
"लाजवाब...."
Monday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
" आ0 राम अवध विश्वकर्मा जी बह्र मुझे तो ठीक लग रही है । सम्भवतः 3 और 4 शेर का ओला दुरुस्त है ।"
Monday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"भाई बृजेश कुमार ब्रज जी सप्रेम आभार "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक और खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय..बहुतखूब"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए
"खूब ग़ज़ल हुई आदरणीय त्रिपाठी जी.."
Sunday
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आदर्णीय त्रिपाठी जी खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये बधाई। शेर नं 3 और 4 के ऊला मिसरा के बह्र को शायद एक बार पुन: अवलोकन करने की जरूरत है।"
Sunday
Rakshita Singh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आदरणीय नवीन जी नमस्कार, बहुत खूबसूरत गजल, बे अदब हो गयी है याद तेरी - बे सबब दिल में उतर जाती है। मुबारकबाद कुबूल फरमायें। "
Sunday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

बात दिल मे ही ठहर जाती है

2122 1122 22छू के साहिल को लहर जाती है ।रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ ।बात दिल में ही ठहर जाती है ।।याद आने लगे हो जब से तुम ।बेखुदी हद से गुजर जाती है ।।कुछ तो खुशबू फिजां में लाएगी ।जो सबा आपके घर जाती है ।। कितनी ज़ालिम है तेरी पाबन्दी ।यह जुबाँ रोज क़तर जाती है ।।हुस्न को देख लिया है जब से ।तिश्नगी और सवर जाती है।।ढूढिये आप जरा शिद्दत से ।दिल तलक कोई डगर जाती है ।।कर गया जख्म की बातें कोई ।रूह सुनकर ही सिहर जाती है ।।जब भी फिरती हैं निगाहें उसकी ।कोई तकदीर सुधर जाती…See More
Sunday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 शेख शहज़ाद साहब तहे दिल से शुक्रिया।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हर शे'अर में दो टूक/सटीक/पते की बात कहती बेहतरीन पेशकश के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहिब।"
Feb 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

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ग़ज़ल- समझा हूँ तेरे हुस्न के ज़ेरे ज़बर को में

221 2121 1221 212

ढूढा हूँ मुश्किलों से सलामत गुहर को मैं।

समझा हूँ तेरे हुस्न के जेरो जबर को मैं ।।

यूँ ही नहीं हूं आपके मैं दरमियाँ खड़ा ।

नापा हूँ अपने पाँव से पूरे सफर को मैं ।।

मारा वही गया जो भला रात दिन किया ।।

देखा हूँ तेरे गाँव में कटते शजर को मैं ।।

मत पूछिए कि आप मेरे क्या नहीं हुए ।।

पाला हूँ बड़े नाज़ से अहले जिगर को मैं ।।

शायद…

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Posted on February 20, 2018 at 7:28pm — 2 Comments

बात दिल मे ही ठहर जाती है

2122 1122 22



छू के साहिल को लहर जाती है ।

रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।

सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ ।

बात दिल में ही ठहर जाती है ।।

याद आने लगे हो जब से तुम ।

बेखुदी हद से गुजर जाती है ।।

कुछ तो खुशबू फिजां में लाएगी ।

जो सबा आपके घर जाती है ।।





कितनी ज़ालिम है तेरी पाबन्दी ।

यह जुबाँ रोज क़तर जाती है ।।

हुस्न को देख लिया है जब से ।

तिश्नगी और…

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Posted on February 17, 2018 at 10:52pm — 5 Comments

ग़ज़ल

2211 2211 2211 22

यूँ जिंदगी के वास्ते कुछ कम नहीं है वो ।

किसने कहा है दर्द का मरहम नहीं है वो।।

सूरज जला दे शान से ऐसा भी नहीं है ।

फूलों पे बिखरती हुई शबनम नहीं है वो ।।

बेचेगा पकौड़ा जो पढ़ लिख के चमन में ।

हिन्दोस्तां के मान का परचम नहीं है वो ।।

बेखौफ ही लड़ता है गरीबी के सितम से ।

शायद किसी अखबार में कालम नहीं है वो ।।

मेहनत की कमाई में लगा खून पसीना ।

अब लूटिए…

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Posted on February 15, 2018 at 12:57am — 5 Comments

चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए

221 2121 1221 212



पत्थर से चोट खाए निशानों को देखिए ।

बहती हुई ख़िलाफ़ हवाओं को देखिए ।।

आबाद हैं वो आज हवाला के माल पर ।

कश्मीर के गुलाम निज़ामों को देखिए ।।

टूटेगा ख्वाब आपका गज़वा ए हिन्द का ।

वक्ते क़ज़ा पे आप गुनाहों को देखिये ।।

गर देखने का शौक है अपने वतन को आज ।

शरहद पे ज़ह्र बोते इमामों को देखिए ।।

कुछ फायदे के वास्ते दहशत पनप रही ।

सत्ता में…

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Posted on February 14, 2018 at 11:28pm — 3 Comments

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said…

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