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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आ0 डिम्पल जी हार्दिक आभार"
Aug 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आ0 मुसाफ़िर साहब सादर आभार"
Aug 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आ0 नाहक जी हार्दिक आभार।"
Aug 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आ0अमीरुद्दीन अमीर साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहेदिल से शुक्रिया । आपकी सलाह सहीह है कि मज़ा शब्द ग़ज़ल को बे बह्र कर रहा है । उसके जगह लुत्फ़ या जोश शब्द का प्रयोग करूँगा । ये हुस्न ढल सकेगा नहीं इस जहान में  यह भी गुमान आज के फ़ानी में आएगा । इस शेर…"
Aug 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आ0 कबीर सर सादर नमन मतले में ज़लज़ला शब्द का प्रयोग मैंने पानी के लिए किया है न कि दरिया के लिए । सुना है ग़ज़ल का प्रत्येक स्वतन्त्र होता है । यह ज़रूरी नही कि उसका सम्बन्ध अगले शेर से हो ।  दरिया का ज़िक्र मेरे दूसरे शेर में है । दरिया का मज़ा यहां…"
Aug 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आ0 आप ठीक कह रहे है मज़ा को लुफ़्त कर दिया"
Aug 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आ0 सर ज़लज़ला का अर्थ सैलाब होता है । जैसे बाढ़ के पानी की तरह । मतलब आंखों में पानी का बाढ़ आ जाना मैंने शेर में इसी अर्थ के रूप में प्रयोग किया है ।"
Aug 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"221 / 2121 / 1221 / 212 इक ज़लज़ला सा आंखों के पानी में आएगा ।जब मेरा ज़िक्र तेरी कहानी में आएगा ।। यूँ रोकिए न धार मुहब्बत की है नदी ।दरिया को मज़ा उसकी रवानी में आएगा ।। ऊला को पढ़ के ख़ुद को तसल्ली न दीजिये ।हर दर्द मेरे शेर के सानी में आएगा…"
Aug 28
Dimple Sharma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय डॉ नवीन मणि त्रिपाठी जी नमस्ते,इस खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Aug 8
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेज वीर सिंह साहब हार्दिक आभार ।"
Aug 6
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 आशीष यादव जी हार्दिक आभार"
Aug 6
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय  डॉ नवीन मणि त्रिपाठी जी। बेहतरीन गज़ल। क्यूँ लिये थे मांग मुझसे मेरी धड़कनों को तुम ।जब तुम्हें था दिल सभाँलने का तज्रिबा नहीं ।"
Aug 6
आशीष यादव commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक बार फिर से आपकी एक और बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली। दिली मुबारकबाद।"
Aug 5
आशीष यादव commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आहा! बहुत सुंदर। बहुत अच्छी रचना बनी है। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Aug 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।""
Aug 5
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी मुसाफिर साहब तहेदिल से शुक्रिया"
Aug 5

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



ख़ाक हो गयी खुशी, था आग का पता नहीं ।

ख़्वाब सारे जल गए, मगर धुआँ उठा नहीं ।

पूछिये न हाले दिल यूँ बारहा मेरा सनम ।

ये हमारे दर्दोगम का सिलसिला नया नहीं ।।

इक नज़र से दिल मेरा वो लूट कर चला गया ।

इस सितम पे क्यूँ अभी तलक कोई खफ़ा नहीं ।।

रूबरू था हुस्न …

Continue

Posted on August 4, 2020 at 11:31pm — 7 Comments

ग़ज़ल

2212 2212 2212 2212

मैं ठोकरें खाता रहा मुझ पर तरस आता था कब ।

इस ज़िंदगी पर सच बताएं आपका साया था कब ।।1

जीता रहा मैं बेखुदी में मुस्कुरा कर उम्र भर।

अब याद क्या करना कि मैंने होश को खोया था कब ।।2

वो कहकशां की बज़्म थी, उन बादलों के दरमियां ।

मुझको अभी तक याद है वो चाँद शर्माया था कब ।।3

जलते रहे क्यूँ शमअ में परवाने सारी रात तक ।

तू वस्ल के अंज़ाम का ये फ़लसफ़ा समझा था कब ।।4

जो अश्क़ में डूबा मिला था…

Continue

Posted on August 4, 2020 at 5:44pm — 4 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 2122

अपनी  रानाई  पे  तू  मग़रूर  है  क्या ।

बेवफ़ाई  के  लिए  मज़बूर  है  क्या ।।

कम न हो पाये अभी तक फ़ासले भी ।।

तू  बता  उल्फ़त  की  दिल्ली  दूर  है क्या ।।

दूर तक चर्चा है क़ातिल के हुनर की ।

वो ज़रा  सी उम्र में मशहूर  है  क्या ।।

तोड़ देना दिल किसी का बेसबब ही ।

शह्र   का   तेरे  नया  दस्तूर  है  क्या ।।…

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Posted on July 9, 2020 at 3:00pm — 3 Comments

ग़ज़ल-महफ़िल में वो बाहर जब आकर चली गई

हासिल ग़ज़ल

221 2121 1221 212

बेचैनियों का दौर बढा कर चली गयी ।

महफ़िल में वो बहार जब आ कर चली गयी ।।

उसकी मुहब्बतों का ये अंदाज़ था नया ।

अल्फ़ाज़ दर्दो ग़म के छुपाकर चली गयी।।

उसको कहो न बेवफ़ा जो मुश्क़िलात में ।

कुछ दूर मेरा साथ निभाकर चली गयी ।।

साक़ी भुला सका न उसे चाहकर भी मैं ।

जो मैक़दे में जाम पिलाकर चली गयी ।।

हैरां थी मुझ में देख के चाहत का ये शबाब…

Continue

Posted on June 18, 2020 at 1:37pm

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At 10:37pm on May 11, 2020, Naveen Mani Tripathi said…

आ0 मिथिलेश वामनकर साहब

आ0 किशोर कान्त साहब

आ0तेजवीर सिंह साहब

आ0 दण्ड पाणि नाहक साहब

आप सभी आदरणीय को तहेदिल से शुक्रिया और नमन ।

At 12:06pm on May 8, 2020, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें। स्वस्थ रहें। दीर्घायु बनें।जीवन में हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 11:34am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!
At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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