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Naveen Mani Tripathi
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सुनील प्रसाद(शाहाबादी) commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई है मुबारक हो।"
17 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"सुन्दर रचना "
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"आ0 कबीर सर और आ0 गिरिराज सर बीच मे एक शेर ऐसा गया जो मतले की तरह था । मैंने कुछ अनावश्यक शेर हटा कर ग़ज़ल में संसोधन किया है अब नई ग़ज़ल यह होगी । 1222 1222 122 अना की बात में कुछ दम नहीं है । कहा किसने तेरा परचम नहीं है ।। मिलेंगी कब तलक ये स्याह…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन भाई , अच्छी गज़ल  कही है , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।"
Tuesday
Gajendra shrotriya commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"अच्छी गज़ल है। गुणीजनों के परामर्श द्वारा यथोचित सुधार अपेक्षित हैं। शुभकामनाएँ।"
Tuesday
Shyam Narain Verma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"वाह ! बहुत खूब | सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई"
Tuesday
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Naveen Mani Tripathi जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है है, इन दो मिसरों को थोडा देख लें बह्र कुछ अटक रही है , सादर  वह दर्द मिटाने का वादा किया था वरना ।ज़ालिम की अदालत में सच पर गिरी है बिजली।"
Tuesday
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ क़ुबूल करें ।"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

वज़्न - 221 1222 221 1222पिजरे से परिंदे को आज़ाद नहीं करते ।कुछ लोग मुहब्बत को आबाद नहीं करते ।।फ़ितरत है पतंगों की शम्मा पे मचलने की ।ऐसे जुनूं पे आलिम इमदाद नहीं करते ।।वह दर्द मिटाने का वादा किया था वरना ।रह रह के मुकद्दर को हम याद नही करते ।।ज़ालिम की अदालत में सच पर गिरी है बिजली।मालूम अगर होता फरियाद नही करते ।।वो साथ निभाएंगे कहना है बहुत मुश्किल ।वो वक्त कभी हम पर बर्बाद नहीं करते ।।हसरत ही मिटा बैठे कुछ लोग ज़माने में ।खुशियों की तमन्ना को ईज़ाद नहीं करते ।।दरिया का समंदर से मिलने का इरादा…See More
Tuesday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,आपने एक साथ दो ग़ज़लें पोस्ट कर दीं, 11वें शैर के बाद दूसरी ग़ज़ल शुरू हो गई है,ज़ियादा तर अशआर में क़ाफ़िया पैमाई के अलावा कुछ नहीं है,मैं जनाब गिरिराज भंडारी जी से सहमत हूँ,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Mahendra Kumar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन जी, अच्छी ग़ज़ल है आपकी. हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर."
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल
"आदरणीय नवीन भाई , अच्छी गज़ल कही है , हार्दिक बधाइयाँ ।  कुछ शेर जो आपकी समझ से कमज़ोर हों कम कर दीजिये .. मै भी सीखने वाला हूँ ... और कुछ कहने के लायक मै ख़ुद को नही समझता ।"
Sunday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

गज़ल

1222 1222 122अना की बात में कुछ दम नहीं है ।कहा किसने तेरा परचम नहीं है ।।मिलेंगी कब तलक ये स्याह रातें ।मेरी किस्मत में क्या पूनम नही है ।।अभी तक मुन्तजिर है आंख उसकी ।वफ़ा के नाम पर कुछ कम नहीं है ।।चिरागे इश्क़ पर है नाज़ उसको ।उजाला भी कहीं मध्यम नहीं है ।।सजा देंगे हमे ये हुस्न वाले ।हमारे हक़ का ये फोरम नहीँ है ।।तेरी जुल्फों की मैं तश्वीर रख लूँ।मगर मुद्दत से इक अल्बम नही है ।।मिरे घर आ गयी हैं भूल से वह । मिरे घर आज फिर बेगम नहीं हैं ।।समझदारी बड़ी कच्ची है साहब ।ये व्हिस्की है ये कोई रम नही…See More
Sunday
Ravi Shukla commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी  अच्छी ग़ज़ल ।  मुबारकबाद क़ुबूल करें"
May 18
Naveen Mani Tripathi commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - जाने किस किस से तेरी अनबन हो ( गिरिराज भंडारी )
"लाजबाब सर ।"
May 16
Naveen Mani Tripathi commented on जयनित कुमार मेहता's blog post रेत पर फूल खिलाने आये (ग़ज़ल)
"बहुत उम्दा पेशकश ।"
May 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

वज़्न - 221 1222 221 1222

पिजरे से परिंदे को आज़ाद नहीं करते ।

कुछ लोग मुहब्बत को आबाद नहीं करते ।।



फ़ितरत है पतंगों की शम्मा पे मचलने की ।

ऐसे जुनूं पे आलिम इमदाद नहीं करते ।।



वह दर्द मिटाने का वादा किया था वरना ।

रह रह के मुकद्दर को हम याद नही करते ।।



ज़ालिम की अदालत में सच पर गिरी है बिजली।

मालूम अगर होता फरियाद नही करते ।।



वो साथ निभाएंगे कहना है बहुत मुश्किल ।

वो वक्त कभी हम पर बर्बाद नहीं करते ।।



हसरत ही… Continue

Posted on May 23, 2017 at 1:28am — 7 Comments

गज़ल

1222 1222 122

अना की बात में कुछ दम नहीं है ।

कहा किसने तेरा परचम नहीं है ।।



मिलेंगी कब तलक ये स्याह रातें ।

मेरी किस्मत में क्या पूनम नही है ।।



अभी तक मुन्तजिर है आंख उसकी ।

वफ़ा के नाम पर कुछ कम नहीं है ।।



चिरागे इश्क़ पर है नाज़ उसको ।

उजाला भी कहीं मध्यम नहीं है ।।



सजा देंगे हमे ये हुस्न वाले ।

हमारे हक़ का ये फोरम नहीँ है ।।



तेरी जुल्फों की मैं तश्वीर रख लूँ।

मगर मुद्दत से इक अल्बम नही है… Continue

Posted on May 21, 2017 at 6:06am — 3 Comments

ग़ज़ल

*221 1221 1221 122



-------------



सबसे न बताओ के परेशान यही है ।

आशिक़ हूँ यकीनन मेरी पहचान यही है ।।



यूँ ही न् गले मिल तू जरा सोच समझ ले ।

इस शह्र के हालात पे फरमान यही है ।।



कहने लगी है आज से मुझको भी सरेआम ।

ठहरा है जो मुद्दत से वो मेहमान यही है ।।



बर्बाद गुलिस्तां को सितम गर ने किया जब।

लोगो ने कहा प्यार का तूफ़ान यही है ।



अक्सर ही नकाबों में छुपाते हैं ये चेहरा ।

बैठा जो तेरे हुस्न पे दरबान यही है… Continue

Posted on May 15, 2017 at 1:03pm — 10 Comments

ग़ज़ल।--हो गई बात कुछ इशारों से ।

2122 1212 22

फूल ढूढे गए किताबों से ।

हो गयी बात कुछ इशारों से ।।



कुछ गलत फहमियां हुई होंगी ।।

उस से मिलता कहाँ मै वर्षों से ।।



फेसबुक से उसे भी नफरत है ।

डर उसे है अनाम रिश्तों से ।।



कुछ तो है वो खफा ख़फ़ा शायद ।

लग गया बेलगाम बातों से ।।



आशिकी का नशा हुआ महंगा ।

रिन्द घटने लगे हैं खर्चों से ।।



बाद मुद्दत के जब मिले उस से ।

दर्द छलका तमाम आंखों से ।।



हो यकीनन जफ़ा के काबिल तुम ।।

शर्म तुमको… Continue

Posted on April 30, 2017 at 8:03am — 3 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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