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Naveen Mani Tripathi
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Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, तरही ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'नहीं यूँ ही दीवाने आए हरम तक । इशारा तेरा भी हुआ मुख़्तसर है' भाव की दृष्टि से इस शैर के सानी मिसरे में 'भी' शब्द भर्ती का है,और क़ाफ़िया भी उचित…"
Saturday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

122 122 122 122न जाने किधर जा रही ये डगर है ।सुना है मुहब्बत का लम्बा सफर है ।।मेरी चाहतों का हुआ ये असर है ।झुकी बाद मुद्दत के उनकी नज़र है ।।नहीं यूँ ही दीवाने आए हरम तक ।इशारा तेरा भी हुआ मुख़्तसर है ।।यहाँ राजे दिल मत सुनाओ किसी को ।ज़माना कहाँ रह गया मोतबर है ।।है साहिल से मिलने का उसका इरादा ।उठी जो समंदर में ऊंची लहर है ।।है मकतल सा मंजर हटा जब से चिलमन ।बड़ी क़ातिलाना तुम्हारी नज़र है ।।बतातीं हैं बिस्तर की ये सिलवटें अब ।तुम्हें नींद आती नहीं रात भर है ।।वहीं बैठती है वो रंगीन तितली ।गुलों…See More
Friday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल -
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'नियत से आप भी अक्सर फिसल के देखते हैं' इस मिसरे में सहीह शब्द है ''नीयत"22, मिसरा बदलने का प्रयास करें ।"
Nov 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल -
"आ. भाई नवीन जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 8
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल -

1212 1122 1212 22/112न पूछिये कि वो कितना सँभल के देखते हैं ।शरीफ़ लोग मुखौटे बदल के देखते हैं ।।अज़ीब तिश्नगी है अब खुदा ही खैर करे ।नियत से आप भी अक्सर फिसल के देखते हैं ।।पहुँच रही है मुहब्बत की दास्ताँ उन तक ।हर एक शेर जो मेरी ग़ज़ल के देखते हैं ।।ज़नाब कुछ तो शरारत नज़र ये करती है ।यूँ बेसबब ही नहीं वो मचल के देखते हैं ।।गुलों का रंग इन्हें किस तरह मयस्सर हो ।ये बागवान तो कलियां मसल के देखते हैं ।।ज़मीर बेच के जिंदा मिले हैं लोग बहुत ।तुम्हारे शह्र में जब भी टहल के देखते है ।।न जाने क्या हुआ जो…See More
Nov 6
dandpani nahak left a comment for Naveen Mani Tripathi
"आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!"
Sep 29
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कुबूल है
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ग़ज़ल के सभी अशआर में रदीफ़ और क़वाफ़ी में ताल मेल नहीं है,ग़ौर करें ।"
Sep 29
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय समर कबीर सर सादर नमन के साथ आभार ।सर मैंने ग़ज़ल में कुल 11 अशआर ही भेजें हैं । 12 वाँ अशआर गिरह का है जो ग़ज़ल के शेर में शामिल नहीं है । सादर । "
Sep 28
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कुबूल है
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय त्रिपाठी जी..."
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 धामी साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 नीलेश साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आखिरी शेर में तकाबुल रदीफ़ है देखिएगा ।"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 अंजली जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 पाठक साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"भाई मनन जी समर साहब सामान्य शायर नहीं हैं अगर इनकी बात या इस्लाह को गम्भीरता से लेंगे तो आप भी अच्छे शायर बन जाएंगे ।    अंजली गुप्ता जी की इस्लाह भी वाजिब और काबिले गौर है । सादर ।"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 क़मर साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आ0 अग्रवाल साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई"
Sep 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

122 122 122 122

न जाने किधर जा रही ये डगर है ।

सुना है मुहब्बत का लम्बा सफर है ।।

मेरी चाहतों का हुआ ये असर है ।

झुकी बाद मुद्दत के उनकी नज़र है ।।

नहीं यूँ ही दीवाने आए हरम तक ।

इशारा तेरा भी हुआ मुख़्तसर है ।।

यहाँ राजे दिल मत सुनाओ किसी को ।

ज़माना कहाँ रह गया मोतबर है ।।

है साहिल से मिलने का उसका इरादा ।

उठी जो समंदर में ऊंची लहर है ।।

है मकतल सा मंजर हटा जब से चिलमन…

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Posted on November 14, 2019 at 5:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल -

1212 1122 1212 22/112

न पूछिये कि वो कितना सँभल के देखते हैं ।

शरीफ़ लोग मुखौटे बदल के देखते हैं ।।

अज़ीब तिश्नगी है अब खुदा ही खैर करे ।

नियत से आप भी अक्सर फिसल के देखते हैं ।।

पहुँच रही है मुहब्बत की दास्ताँ उन तक ।

हर एक शेर जो मेरी ग़ज़ल के देखते हैं ।।

ज़नाब कुछ तो शरारत नज़र ये करती है ।

यूँ बेसबब ही नहीं वो मचल के देखते हैं ।।

गुलों का रंग इन्हें किस तरह मयस्सर हो…

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Posted on November 6, 2019 at 2:51pm — 2 Comments

ग़ज़ल - कुबूल है

1212 1212 1212 1212

शराब जब छलक पड़ी तो मयकशी कुबूल है ।

ऐ रिन्द मैकदे को तेरी तिश्नगी कुबूल है ।

नजर झुकी झुकी सी है हया की है ये इंतिहा ।

लबों पे जुम्बिशें लिए ये बेख़ुदी कुबूल है ।।

गुनाह आंख कर न दे हटा न इस तरह नकाब ।

जवां है धड़कने मेरी ये आशिकी कबूल है ।।

यूँ रात भर निहार के भी फासले घटे नहीं ।

ऐ चाँद तेरी बज़्म की ये बेबसी कुबूल है ।।

न रूठ कर यूँ जाइए मेरी यही है…

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Posted on September 24, 2019 at 9:30pm — 2 Comments

लेती है इम्तिहान ये उल्फ़त कभी कभी

221 2121 1221 212

लेती है इम्तिहान ये उल्फ़त कभी. कभी ।

लगती है राहे इश्क़ में तुहमत कभी कभी ।।

आती है उसके दर से हिदायत कभी कभी ।

होती खुदा की हम पे है रहमत कभी कभी ।।

चहरे को देखना है तो नजरें बनाये रख ।

होती है बेनक़ाब सियासत कभी कभी ।।

यूँ ही नहीं हुआ है वो बेशर्म दोस्तों ।

बिकती है अच्छे दाम पे गैरत कभी कभी ।।

मुझ पर सितम से पहले ऐ क़ातिल तू सोच ले ।

देती सजा ए मौत है कुदरत कभी कभी…

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Posted on August 14, 2019 at 6:42pm — 4 Comments

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At 11:34am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!
At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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