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Pradeep Kumar Shukla
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Pradeep Kumar Shukla commented on Pradeep Kumar Shukla's blog post "विडम्बनाएं"
"Dhanyavaad  नादिर ख़ान sahab"
Mar 17, 2014
नादिर ख़ान commented on Pradeep Kumar Shukla's blog post "विडम्बनाएं"
"बहुत उम्दा रचना है आदरणीय प्रदीप जी, जिंदगी का निचोड़ आपकी रचना मे समाहित है... कितनी गहराई से सोच कर आपने इसे लिखा भाई कमाल है ।"
Mar 17, 2014
Pradeep Kumar Shukla commented on Neeraj Kumar Neer's blog post होली और बादर : गीत
"sundar holi geet Neeraj ji, badhai"
Mar 17, 2014
Pradeep Kumar Shukla commented on कल्पना रामानी's blog post कहमुकरियाँ-36 से 50/कल्पना रामानी
"bahut hi khoobsoorati se rachi gayin paheliyan, badhai Kalpana ji"
Mar 17, 2014
Pradeep Kumar Shukla commented on Pradeep Kumar Shukla's blog post "विडम्बनाएं"
"is sundar kaavyatmak pratikriya ke liye haardik aabhaar  मनोज कुमार सिंह 'मयंक' ji,  aapko bhi holi ke dheron shubhkaamnayein"
Mar 17, 2014
मनोज कुमार सिंह 'मयंक' commented on Pradeep Kumar Shukla's blog post "विडम्बनाएं"
"जन्म मृत्यु का चक्र वक्र हो या फिर सीधा | कोटि कोटि ब्रम्हांड, काल ने सबको जीता || द्वैत भाव भाव दुर्धर्ष पराक्रम से जय होगा | बिंदुमात्र अस्तित्व सिंधु बन कर लय होगा || उन्नत वैचारिक कविता के लिए कोटिशः बधाइयां आदरणीय प्रदीप भाई...सपरिवार,सस्नेह…"
Mar 17, 2014
Pradeep Kumar Shukla posted a blog post

"विडम्बनाएं"

किरणों को अभिशाप पड़ेंगी वे जिन जिन परकर देंगी परछाईं काली किसी पटल पर ।हर जीवन के संग जनमती मृत्यु, अजय हैहर आशा में छुपा निराशा का भी भय है ॥धन औ ऋण का योग बनाता सदा शून्य हैगोल शून्य सा भाल किन्तु रत धन औ ऋण में ।हासिल जिसका शून्य पराजय वह कहलातीकिन्तु शून्य को छू पाऊँ तो अजय विजय है ॥हर आशा में छुपा निराशा का भी भय है ॥जन्मदिवस कि ख़ुशी प्रसव के पीर से उपजीराम नाम का ज्ञान मरा में छुपा मिला था ।शब्द तो कहते हैं, पर क्या यह बात सही है ?हर बार निराशा के आखिर में आशा तय है ?हर आशा में छुपा…See More
Mar 17, 2014
Dr Ashutosh Vajpeyee and Pradeep Kumar Shukla are now friends
Dec 3, 2013
Pradeep Kumar Shukla might attend बृजेश नीरज's event
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ओबीओ लखनऊ चैप्टर काव्य गोष्ठी at कैफ़ी आज़मी अकादमी, गुरुद्वारा रोड, पेपर मिल कॉलोनी,

November 21, 2013 from 5pm to 7:30pm
ओबीओ लखनऊ चैप्टर द्वारा दिनांक २१.११.२०१३ को सायं ५.०० बजे से आल इंडिया कैफ़ी आज़मी अकादमी, पेपर मिल कॉलोनी, निशातगंज, लखनऊ में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया है.इस काव्य गोष्ठी में आप सब सादर आमंत्रित हैं.कार्यक्रम का विवरण-कार्यक्रम: काव्य गोष्ठीदिनांक: २१.११.२०१३स्थान: कैफ़ी आज़मी अकादमी, गुरुद्वारा रोड, पेपर मिल कॉलोनी, निशातगंज, लखनऊ समय:सायं ५.०० बजे से पंजीकरण सायं ५.३० से रात्रि ७.३० तक काव्य गोष्ठी संयोजक शरदिंदु मुखर्जी 9935394949See More
Nov 13, 2013
Pradeep Kumar Shukla commented on sharadindu mukerji's blog post आँखों देखी – 5 आकाश में आग की लपटें
"waah, vaastav mein behad rochak anubhav raha hoga ... aise avismarniy anubhav aur is lekh Ke sarvottam rachna chune jaane par aapko bahut bahut badhai"
Nov 13, 2013
कल्पना रामानी left a comment for Pradeep Kumar Shukla
"आदरणीय प्रदीप जी, मेरी मित्र मंडली में आपका हार्दिक स्वागत"
Nov 8, 2013
कल्पना रामानी left a comment for Pradeep Kumar Shukla
Nov 8, 2013
Pradeep Kumar Shukla replied to बृजेश नीरज's discussion ओबीओ लखनऊ चैप्टर के संयोजक का चुनाव
"bahut bahut badhai Shardindu Sir ko"
Nov 8, 2013
Pradeep Kumar Shukla commented on Saurabh Pandey's blog post छठ महापर्व // -- सौरभ
"is vistrit jaankari ke liye vishesh dhanyavaad sir"
Nov 7, 2013
Pradeep Kumar Shukla commented on Dr Ashutosh Vajpeyee's blog post बलिष्ठ हुआ कलि है
"waah ... bahut sundar ... badhai aur dhanyavaad Dr. Ashutosh Vajpayee ji"
Oct 29, 2013
Pradeep Kumar Shukla and anwar suhail are now friends
Oct 29, 2013

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur, UP
Native Place
Lucknow
Profession
Govt. Servant

Pradeep Kumar Shukla's Blog

"विडम्बनाएं"

किरणों को अभिशाप पड़ेंगी वे जिन जिन पर

कर देंगी परछाईं काली किसी पटल पर ।

हर जीवन के संग जनमती मृत्यु, अजय है

हर आशा में छुपा निराशा का भी भय है ॥

धन औ ऋण का योग बनाता सदा शून्य है

गोल शून्य सा भाल किन्तु रत धन औ ऋण में ।

हासिल जिसका शून्य पराजय वह कहलाती

किन्तु शून्य को छू पाऊँ तो अजय विजय है ॥

हर आशा में छुपा निराशा का भी भय है ॥

जन्मदिवस कि ख़ुशी प्रसव के पीर से उपजी

राम नाम का ज्ञान मरा में छुपा मिला था…

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Posted on March 17, 2014 at 12:41am — 4 Comments

'सास बहू के झगड़े'

 

माँ ममता की लाली घर आँगन छा जाए

जब प्राची की गोद बाल दिनकर आ जाए ।

कलरव कर कर पंछी अपना सखा बुलाएं

चलो दिवाकर खुले गगन क्रीड़ा हो जाए ॥

 

सब जग में सुन्दरतम तस्वीर यही मन भाती

गोद हों शिशु अठखेलियाँ मैया हो दुलराती |

लगे ईश सी चमक मुझे उन नयनों से आती

तभी यक़ीनन नित प्रातः प्राची पूजी जाती ||

 

शीत काल है जब जब कठिन परीक्षा आई

खेल हुआ है कम तब तब रवि करे पढाई ।

और, स्वतंत्र हो खूब सूर्य तब चमक…

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Posted on September 24, 2013 at 4:00pm — 14 Comments

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At 2:26pm on November 8, 2013, कल्पना रामानी said…

आदरणीय प्रदीप जी, मेरी मित्र मंडली में आपका हार्दिक स्वागत

At 2:25pm on November 8, 2013, कल्पना रामानी said…

At 11:33pm on September 25, 2013, annapurna bajpai said…

आदरणीय प्रदीप जी आपका ओ बी ओ परिवार मे  स्वागत है ।  

 
 
 

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