For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कितना अच्छा होता .....

कितना अच्छा होता .....

कितना अच्छा लगता है
फर्श पर
चाबी के चलते खिलौने देखकर
एक ही गति
एक ही भाव
न किसी से कोई गिला
न शिकवा
ऐ ख़ुदा
कितना अच्छा होता
ग़र तूने मुझे भी
शून्य अहसासों का
खिलौना बनाया होता
अपना ही ग़म होता
अपनी ही ख़ुशी होती
न लबों से मुस्कराहट जाती
न आँखों में नमी होती
सब अपने होते
हकीकत की ज़मीं न होती
ख़्वाबों का जहां न होता
बस ऐ ख़ुदा
तूने हमें भी वो चाबी अता की होती
तो न कोई तड़प होती
न कोई अरमां होता

ये
दिल
दर्द से आशना होता

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 393

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on October 4, 2016 at 10:27pm

आद.  Arpana Sharma जी प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय बधाई का हार्दिक आभार। 

Comment by Arpana Sharma on October 4, 2016 at 3:42pm
आदरणीय सुशील जी, बहुत ही सुंदर भावार्थ लिए कविता है। आपको बहुत बधाई
Comment by Sushil Sarna on October 3, 2016 at 2:48pm

आदरणीय  PRAMOD SRIVASTAVA जी प्रस्तुति पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया एवम आत्मीय बधाई का हार्दिक आभार। 

Comment by PRAMOD SRIVASTAVA on October 3, 2016 at 2:44pm

बहुत ही सुंदर रचना के लिए बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on September 28, 2016 at 3:34pm

आदरणीय रामबली गुप्ता जी प्रस्तुति पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया एवम आत्मीय बधाई का हार्दिक आभार। 

Comment by रामबली गुप्ता on September 23, 2016 at 11:36am
वाकई अनूठी रचना हुई है आद0 भाई सुशील सरना । दिल से बधाई लीजिये।
Comment by Sushil Sarna on September 22, 2016 at 8:29pm

आदरणीय कल्पना भट्ट जी प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय बधाई का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on September 22, 2016 at 8:29pm

आदरणीय शिज्जु शकूर जी प्रस्तुति पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया एवम आत्मीय बधाई का हार्दिक आभार। 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 22, 2016 at 4:02pm

आदरणीय सुशिल सरना जी बहुत बहुत बधाई |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 22, 2016 at 3:43pm

आदरणीय सुशील सरना सर आपकी रचना को महीने की सर्वश्रेष्ठ चुने जाने पर बहुत बहुत बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी दिल से शुक्रिया आपका "
32 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
" आदरणीय Sushil Sarna  जी दिल से शुक्रिया आपका "
32 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
" आदरणीय Naval Kishor Soni जी दिल से शुक्रिया आपका "
32 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post जीवन के दोहे :
"लाजवाब दोहे"
36 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आल्हा
"सुंदर भाव से संजोयी रचना पर बधाई स्वीकारें आदरणीय, सादर"
50 minutes ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"जनाब अजय तिवारी साहिब विस्तार से बता चुके हैं,मिसरा बदलने का प्रयास करें ।"
1 hour ago
pratibha pande commented on विनय कुमार's blog post नींव की ईंट--लघुकथा
"बहुत गहन बात सहज ढंग से कह दी आपने ।हार्दिक बधाई आदरणीय विनय जी। विवरण थोड़ा कम होता तब भी प्रभाव मे…"
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (तोड़ते भी नहीं यारी को निभाते भी नहीं)
"आदरणीय तस्दीक साहब, खुबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

'सैलाब में प्रत्याशी, मतदाता या किसान!' (लघुकथा)

"कौन? ... कौन डूब रहा है इस सैलाब में इतने रेस्क्यू ऑपरेशंस के बावजूद?" "आम आदमी साहिब! आम मतदाता…See More
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service