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shashiprakash saini's Page

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Roshni Dhir commented on shashiprakash saini's blog post ये ख़ासियत रही उस मुलाक़ात की
"well written  "
May 7
Roshni Dhir liked shashiprakash saini's blog post ये ख़ासियत रही उस मुलाक़ात की
May 7
shashiprakash saini commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
"सराहना हेतु आभार संदीप जी "
Mar 13
shashiprakash saini commented on SHARIF AHMED QADRI "HASRAT"'s blog post ग़ज़ल
"बहोत अच्छी गज़ल है  बधाई स्वीकारे हसरत जी "
Mar 13
shashiprakash saini commented on Arun Kumar Pandey 'Abhinav''s blog post कविता : - स्नेह अटल है !
"अरुण जी बहोत ही बेहतरीन कविता है बधाई स्वीकारे "
Mar 13
shashiprakash saini commented on AVINASH S BAGDE's blog post खुशबू के घर
"//चार पैसे जो मुट्ठी में क्या आ गए, यार बिछड़े हुये तंगदिलों में मिले// वाह  आदरणीय अविनाश जी ज़िंदगी की सच्चाई इतनी सरलता और खूबसूरती से कह दी अपने बधाई स्वीकारे  "
Mar 13
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
"आदरणीय शशिप्रकाश जी, बहुत ही उम्दा भावों की प्रस्तुति| साभार,"
Mar 11
shashiprakash saini commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
"आप सब ने मेरे भावो को सराहा इस के लिए दिल से आभारी हू  सौरभ सर , आनंद जी , डॉ. प्राची जी और प्रदीप जी का धन्यवाद "
Mar 11
Saurabh Pandey commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
"ईट पत्थर से कोई घर न बना है पत्थर जड़ा के ताज में कोई सुन्दर न बना है अपनों की दुआ मिले तो घर भी बना ले वाह ! दस्तूर संभवतः पुल्लिंग है. कृपया आश्वस्त होलें. शुभेच्छा"
Mar 10
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
"ईट पत्थर से कोई घर न बना है पत्थर जड़ा के ताज में कोई सुन्दर न बना है अपनों की दुआ मिले तो घर भी बना ले दिल जीत लाए तो सुन्दर भी बना ले आशीर्वाद देता रहे उस हाथ की जरुरत है अपनो की दुआ बहुत ज़रूरी है. बधाई. "
Mar 10
shashiprakash saini commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
"सराहना हेतु आभार मीनू जी "
Mar 10
minu jha commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
"सैनी जी सच कहा आपने,साथी मनचाहा हो तो तकलीफें भी अच्छी लगने लगती है,सुंदर रचना"
Mar 10
shashiprakash saini posted a blog post

तेरे साथ की जरुरत है

तन की नक्काशी कही धोखा ना देदेमन से पुकारे की एक आवाज की जरुरत हैसाथ तेरे चलने से जले या ना जले दुनियापर क़यामत तक चले की तेरे साथ की जरुरत है  झुर्रियाँ बाल सफ़ेदसब उम्र के फरेबतन न भाया भाया मनदिल में दिखा न ऐबदिल-ए-जज़्बात को तेरे जज़्बात की जरूरत है  ईट पत्थर से कोई घर न बना हैपत्थर जड़ा के ताज में कोई सुन्दर न बना हैअपनों की दुआ मिलेतो घर भी बना लेदिल जीत लाए तो सुन्दर भी बना लेआशीर्वाद देता रहे उस हाथ की जरुरत है  है नयी दुनिया पर दस्तूर पुरानीप्रेम सच्चा हो तभी चलती है कहानीमै दिल से बात…See More
Mar 10
shashiprakash saini replied to Admin's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १७
"धन्यवाद सौरभ सर होली की हार्दिक शुभकामनाएं"
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shashiprakash saini replied to Admin's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १७
"आपको और समस्त OBO परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं धरम जी "
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"होलिका जलाओ रातभर की हर गम धुआँ होजाएरंग इतना बरसे की रंगी ये समा होजाए निकाल दिल का मलाल चेहरों पे मल दो गुलालरंग में रंगे है अनेक सेफिर भी लगे है एक सेमुह में गुजिया की मिठास हाथों में ठंडाई गिलास चेहरे पे…"
Mar 7

Profile Information

Gender
Male
City State
navimumbai maharashtra
Native Place
ghazipur (U.P)
Profession
student (mba @ FMS BHU Varanasi)

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Shashiprakash saini's Blog

तेरे साथ की जरुरत है

Posted on March 10, 2012 at 2:00am 7 Comments

तन की नक्काशी कही धोखा ना देदे

मन से पुकारे की एक आवाज की जरुरत है

साथ तेरे चलने से जले या ना जले दुनिया

पर क़यामत तक चले की तेरे साथ की जरुरत है

 

 

झुर्रियाँ बाल सफ़ेद

सब उम्र के फरेब

तन…

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ये आज का युवा हैं

Posted on February 5, 2012 at 12:22am 8 Comments

आंधी हैं हवा हैं

बंधनों में क्या हैं

ये उफनता दरिया हैं  

किनारे तोड़ निकला हैं

मस्ती में मस्तमौला हैं

मुश्किल में हौसला हैं

अपनी पे आजाए तो जलजला हैं

ये आज का युवा हैं

 

कभी बेफिक्री का धुआँ हैं

कभी पानी का बुलबुला हैं

कभी संजीदगी से भरा हैं

ये आज का युवा हैं

पंखों को फडफडाता हैं

पेडों पे घोंसला बनाता है

अब की उड़ना ये चाहता हैं

दाव पे ज़िंदगी लगता हैं

हारा भी…

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कोयलिया जब गाती है

Posted on January 19, 2012 at 4:00am 2 Comments

चल झूठ रूठना है तेरा

आंखें सब बतलातीं है

कोयलिया जब गाती है

याद मीत की आती है

 

आँखों से अब ना आस गिरा

बातों पे रख विश्वास जरा

जाने दे मत रोक मुझें

सर पे दुनियां दारी है

कोयलिया जब गाती है

याद मीत की आती है

 

न तू भूलीं न मैं भुला

जब झूलें थे सावन झुला

मौसम अब के बरसातीं है

कोयलिया जब गाती है

याद मीत की आती है

 

चलतें थे तट पे साथ प्रिये

नटखट हाथों में हाथ…

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छन्न पकैया , मेहनत की है रोटी

Posted on January 4, 2012 at 2:30pm 17 Comments

आदरणीय योगराज प्रभाकर जी से प्रभावित होकर मैंने भी  छन्न पकैया  में  कुछ लिखने का प्रयास किया है. मेरी मूल रचना में कुछ कमियाँ थी जो योगराज जी ने सुधारी, योगराज सर आपका बहोत बहोत शुक्रिया. वरिष्टजनों का मार्गदर्शन चाहूँगा !

 

.

छन्न पकैया , छन्न पकैया , मेहनत की है रोटी,

कहने को युवराज है, लेकिन बाते छोटी-छोटी ||१||

.

छन्न पकैया, छन्न पकैया , खूब बड़ी महंगाई

कुर्सी पे हाकिम जो बैठा , शुतुरमुर्ग है भाई…

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At 10:38pm on January 8, 2012, arun kumar nigam said…

शशिप्रकाश जी, धन्यवाद.

At 11:04am on December 31, 2011, Arun Srivastava said…

स्वागत है सर !

At 9:31pm on December 29, 2011, Admin said…

 
 
 

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