Roshni Dhir commented on shashiprakash saini's blog post ये ख़ासियत रही उस मुलाक़ात की
shashiprakash saini commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
shashiprakash saini commented on SHARIF AHMED QADRI "HASRAT"'s blog post ग़ज़ल
shashiprakash saini commented on Arun Kumar Pandey 'Abhinav''s blog post कविता : - स्नेह अटल है !
shashiprakash saini commented on AVINASH S BAGDE's blog post खुशबू के घर
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
shashiprakash saini commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
Saurabh Pandey commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
shashiprakash saini commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
minu jha commented on shashiprakash saini's blog post तेरे साथ की जरुरत है
shashiprakash saini posted a blog post
shashiprakash saini replied to Admin's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १७
shashiprakash saini replied to Admin's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १७
shashiprakash saini replied to Admin's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १७Posted on March 10, 2012 at 2:00am 7 Comments 0 Likes
तन की नक्काशी कही धोखा ना देदे
मन से पुकारे की एक आवाज की जरुरत है
साथ तेरे चलने से जले या ना जले दुनिया
पर क़यामत तक चले की तेरे साथ की जरुरत है
झुर्रियाँ बाल सफ़ेद
सब उम्र के फरेब
तन…
ContinuePosted on February 5, 2012 at 12:22am 8 Comments 1 Like
आंधी हैं हवा हैं
बंधनों में क्या हैं
ये उफनता दरिया हैं
किनारे तोड़ निकला हैं
मस्ती में मस्तमौला हैं
मुश्किल में हौसला हैं
अपनी पे आजाए तो जलजला हैं
ये आज का युवा हैं
कभी बेफिक्री का धुआँ हैं
कभी पानी का बुलबुला हैं
कभी संजीदगी से भरा हैं
ये आज का युवा हैं
पंखों को फडफडाता हैं
पेडों पे घोंसला बनाता है
अब की उड़ना ये चाहता हैं
दाव पे ज़िंदगी लगता हैं
हारा भी…
ContinuePosted on January 19, 2012 at 4:00am 2 Comments 0 Likes
चल झूठ रूठना है तेरा
आंखें सब बतलातीं है
कोयलिया जब गाती है
याद मीत की आती है
आँखों से अब ना आस गिरा
बातों पे रख विश्वास जरा
जाने दे मत रोक मुझें
सर पे दुनियां दारी है
कोयलिया जब गाती है
याद मीत की आती है
न तू भूलीं न मैं भुला
जब झूलें थे सावन झुला
मौसम अब के बरसातीं है
कोयलिया जब गाती है
याद मीत की आती है
चलतें थे तट पे साथ प्रिये
नटखट हाथों में हाथ…
ContinuePosted on January 4, 2012 at 2:30pm 17 Comments 0 Likes
आदरणीय योगराज प्रभाकर जी से प्रभावित होकर मैंने भी छन्न पकैया में कुछ लिखने का प्रयास किया है. मेरी मूल रचना में कुछ कमियाँ थी जो योगराज जी ने सुधारी, योगराज सर आपका बहोत बहोत शुक्रिया. वरिष्टजनों का मार्गदर्शन चाहूँगा !
.
छन्न पकैया , छन्न पकैया , मेहनत की है रोटी,
कहने को युवराज है, लेकिन बाते छोटी-छोटी ||१||
.
छन्न पकैया, छन्न पकैया , खूब बड़ी महंगाई
कुर्सी पे हाकिम जो बैठा , शुतुरमुर्ग है भाई…
Continue
arun kumar nigam said… शशिप्रकाश जी, धन्यवाद.
Arun Srivastava said… स्वागत है सर !
Admin said… आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिककर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करेऔर फिर रन करा दे |
4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँक्लिक करे |
वीनस केसरी replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें (चिन्हित बेबहर मिसरों के साथ)
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें (चिन्हित बेबहर मिसरों के साथ)
Laxman Prasad Ladiwala commented on Laxman Prasad Ladiwala's blog post व्यंग रचना- अर्थ-तंत्र पर भारी
Saurabh Pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें (चिन्हित बेबहर मिसरों के साथ)
Laxman Prasad Ladiwala commented on Laxman Prasad Ladiwala's blog post व्यंग रचना- अर्थ-तंत्र पर भारी
pandurang m deshmukh commented on PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA's blog post बेटी न होती© 2012 Created by Admin.
कुछ आवश्यक लिंक्स
| 2-ग़ज़ल तक्तीह प्रणाली पर एक चर्चा | 3-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -1, | 4-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -2 |
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचना और विचार उनकी निजी सम्पति है जिससे सहमत होना OBO प्रबंधन के लिये आवश्यक नहीं है | OBO पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप मे प्रयोग बिना लेखक या प्रबंधन के अनुमति के बिना करना वर्जित है |

