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AjAy Kumar Bohat
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dilbag virk and AjAy Kumar Bohat are now friends
Oct 23, 2014
SANDEEP KUMAR PATEL commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"क्या बात है आदरणीय बेहद प्रभावी अंदाज में मानसिकता को प्रस्तुत किया है आपने जय हो बधाई हो"
Nov 28, 2013
annapurna bajpai commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"संदेशप्रद रचना बधाई आपको । "
Nov 28, 2013
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"बहुत ही सशक्त चित्रण आदरणीय क्या प्रहार किया है आपने बहुत बहुत बधाई स्वीकारें."
Nov 28, 2013
विजय मिश्र commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"अकड़ की पकड़ होती ही कुछ ऐसी है कि मनुष्यत्व नपुंसक करदे ,नवीन विचारों का न जनमना तो छोटी बात है |कथ्य सुस्पष्ट है और चेताने वाली भाषा में है |बहुत सुंदर रचना |बधाई अजयजी"
Nov 27, 2013
Baidyanath Saarthi commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"गज़ब है श्रीमान ...आपने जो कहना चाहा है ...सफलता से पाठक तक पहुँच रही है ! ..बेजोड़ कृति ! सुनने से ज़यादा , उनके लिए महत्वपूर्ण है देखना आवाज़ कि शकलो-सूरत और इस तरह नहीं ले पाते वे ' गोद ' किसी भी नए विचार को क्यूंकि ज़िद…"
Nov 27, 2013
Arun Sri commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"मारक प्रहार किया आपने ! बहुत सशक्त !"
Nov 27, 2013
Dr Ashutosh Mishra commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"आदरणीय इस सुंदर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई "
Nov 26, 2013

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"आदरणीय , बहुत सुन्दत भाव अभिव्यक्ति , सुन्दर विचार !!!!! आपको बधाई !!!!"
Nov 26, 2013
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on AjAy Kumar Bohat's blog post " नपुंसक सोच "
"अजय  कुमार जी बड़ा अच्छा व्यंग्य  है आपका बाँझ मस्तिष्क  में विचार नहीं आते  i बड़ी सुष्ठु योजना है  i आपके भाव पसंद  आये i"
Nov 26, 2013
AjAy Kumar Bohat posted a blog post

" नपुंसक सोच "

वे विचार करते हैं पर नहीं जनम लेता कोई नया विचार बाँझ मस्तिष्क से इसी सोच विचार में बैठे रहने ने अकड़ा दी है उनकी पीठ और गर्दन कहीं से आती भी है आहट किसी  नए विचार की तो उस पर ध्यान देने कि अपेक्षा वो करते हैं प्रयास अकड़ी गर्दन घुमा कर देखने का कि ये आवाज़ कहाँ से आती है तब जाके जान पाता हूँ मैं कि सुनने से ज़यादा , उनके लिए महत्वपूर्ण है देखना आवाज़ कि शकलो-सूरत और इस तरह नहीं ले पाते वे ' गोद ' किसी भी नए विचार को क्यूंकि ज़िद है उन्हें कि पैदा हो हर नया विचार उन्ही के भीतर से जिस से आगे बढ़ सके '…See More
Nov 26, 2013
AjAy Kumar Bohat liked Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : बलात्कार (गणेश जी बागी)
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AjAy Kumar Bohat commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : बलात्कार (गणेश जी बागी)
"waah kamaal :)"
Nov 25, 2013
AjAy Kumar Bohat commented on AjAy Kumar Bohat's blog post “ पितृ-सत्ता से संवाद “
"Saurabh ji main Delhi mein rahta hoon..."
Nov 25, 2013
AjAy Kumar Bohat commented on AjAy Kumar Bohat's blog post “ पितृ-सत्ता से संवाद “
" हौसला अफजाही  के लिए सभी  ज्ञानी  सज्जनो का शुक्रिया"
Nov 25, 2013

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Roorkee, Uttarkhand.
Profession
Govt, Job
About me
I want to be near the light of Literature

AjAy Kumar Bohat's Blog

" नपुंसक सोच "

वे विचार करते हैं

पर नहीं जनम लेता कोई नया विचार बाँझ मस्तिष्क से

इसी सोच विचार में बैठे रहने ने

अकड़ा दी है उनकी पीठ और गर्दन

कहीं से आती भी है आहट

किसी  नए विचार की

तो उस पर ध्यान देने कि अपेक्षा

वो करते हैं प्रयास

अकड़ी गर्दन घुमा कर देखने का कि

ये आवाज़ कहाँ से आती है

तब जाके जान पाता हूँ मैं कि

सुनने से ज़यादा , उनके लिए महत्वपूर्ण है

देखना आवाज़ कि शकलो-सूरत

और इस तरह नहीं ले पाते

वे ' गोद ' किसी भी नए विचार को…

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Posted on November 25, 2013 at 10:18pm — 10 Comments

“ पितृ-सत्ता से संवाद “

नारी को दुर्गा, नारी को शक्ति, नारी को जननी , कह कर बुलाते हो

और जब वो नन्ही सी बेटी बन कर आये

इस खबर से क्यों तुम डर जाते हो…

जानते हो भलीभांति , जब खोली तुमने आँखें

तो पाया माँ का प्यार ,

बहन का दुलार

आगे किसी मोड़ पर जीवन-संगिनी भी मिली

सेवा समर्पण लिए

 

प्रश्न मेरा केवल इतना है तुमसे, लेकिन

क्या सीखा है तुमने ... केवल लेना ही लेना ???

तुमको तो बनाया है, सर्वथा-शक्तिशाली

उस सर्व-शक्तिमान ने

तभी तो…

Continue

Posted on August 19, 2013 at 2:00pm — 5 Comments

"श्री कृष्ण को समर्पित कुछ दोहे"

सुध-बुध सारी भूल गयी, भूली जान-अजान,

कान्हा ने जब छेड़ दी, मधुर-मुरली की तान.



मुख पर छाए लालिमा, खिले अधर मुस्कान,

कान्हां जी को कैसा लागे राधा-राधा नाम.



जिसके हरी हैं सारथि, निश्चय उसकी जीत,

जिस मन हरी बसें, उस मन प्रीत ही प्रीत.



लाज बचाई आपने, सुन अबला मन की पीर,

अबला अब सबला भयी , छोटो है गयो चीर.



दरस तुमरे पाने को, जुग-जुग जाते बीत,

भाग बढे सुदामा के, जो भये तुम्हारे मीत.



हर युग अवतार लिए, खेले क्या-क्या दांव,…

Continue

Posted on August 10, 2012 at 8:30am — 8 Comments

"निशानी"

थाम कर तुम्हारी उँगलियाँ
जब ये चलेगा
मोहब्बत की एक नयी इबारत
लिखी जाएगी,
पहली मुलाक़ात की
'निशानी'
अपना कलम मैं तुमको दे आया हूँ
जो भी लिखोगे इस से
वो तकदीर मेरी
बन जाएगी.......

Posted on June 28, 2012 at 4:38pm — 1 Comment

Comment Wall (8 comments)

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At 12:59am on August 13, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

janmdiwas ki hardik shubhkaamnaayein...

At 3:17pm on April 7, 2012, anamika ghatak said…

dhanyawad 

At 8:56pm on January 8, 2012,
सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम
said…

आपके निमंत्रण हेतु धन्यवाद.

At 8:20am on May 7, 2011, Abhinav Arun said…

आपकी रचना को माह की श्रेष्ट रचना चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें अजय जी | हार्दिक शुभकामनाएं भी आपके लेखन को नित नयी ऊंचाई मिले !!!!!!!

At 11:03pm on May 5, 2011, Admin said…

आदरणीय अजय कुमार बोहत जी ,

सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की कविता "हिंसा" को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (Best Creation of the Month) के रूप मे सम्मानित किया गया है तथा ओपन बुक्स ऑनलाइन के मुख्य पृष्ठ पर आपके छाया चित्र के साथ स्थान दिया गया है,
इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे,धन्यवाद,
आपका
एडमिन
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:41pm on December 31, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 4:03pm on December 31, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 12:55pm on December 31, 2010, Admin said…
 
 
 

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