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N .B. Nazeel liked Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
May 3
N .B. Nazeel replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २२ सभी ग़ज़लें एक साथ
"Bahut bahut aabhar sir ji ,mai kisi karanvash mushayre me bhag nahi le saka par yahaa par sabhi rachnaae ek sath padh kar dil khush ho gaya."
May 1
N .B. Nazeel liked Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २२ सभी ग़ज़लें एक साथ
May 1
N .B. Nazeel liked Admin's discussion एक घोषणा :- प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र "हमारा मेट्रो" आपकी रचनाओं को नियमित प्रकाशित करेगी...
May 1
N .B. Nazeel replied to Admin's discussion "OBO लाइव महा उत्सव" अंक १७
"आओ मिल के होली का हुडदंग मचाए               रंग -बिरंगे हुए हैं हम  सब होली में |             पहचाने कैसे ,कौन- कौन हैं टोली मैं || 1                         ***************            आओ मिल के होली का…"
Mar 5
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"आपने गांव का भाव पूर्ण चित्रण किया है नजील जी।बधाई स्वीकार कीजिए।अब गांव कुछ-कुछ बदलने लगा है।"
Mar 4
N .B. Nazeel commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"सही फ़रमाया आनंद जी आपने कोशिशे कभी अदनी नहीं होती ......क्योंकि कोशिश से ही हम कुछ प्राप्त कर सकते हैं .....:-)"
Mar 4
N .B. Nazeel commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"धन्यावाद मृदु  जी ...... उत्साहित करने हेतु हार्दिक आभार ......."
Mar 4
N .B. Nazeel commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"धन्यावाद प्रदीप कुमार सिंह  जी ...... उत्साहित करने हेतु हार्दिक आभार ......."
Mar 4
N .B. Nazeel commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"धन्यावाद वाहिद  जी ...... उत्साहित करने हेतु हार्दिक आभार ......."
Mar 4
N .B. Nazeel commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"धन्यावाद बागी जी ...... उत्साहित करने हेतु हार्दिक आभार .........मेरे ख्याल से जो अपनापन गाँव के जीवन में है वो शहरी जीवन में  नहीं"
Mar 4
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"गाँव की मिट्टी से जुड़े ख़ूबसूरत जज़्बात की पेशगी पर बधाई नज़ील साहब|"
Mar 4
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"कैसी हवा आई है ये  मगरिब से "नजील ",मुझको सताए है अब डर अपने गाँव का || बहुत सुंदर भाव, प्रस्तुति. बधाई."
Mar 3
SHAILENDRA KUMAR SINGH 'MRIDU' commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"थी वो महकती मिटटी और वो कच्ची गली ,घूमे  ख़्यालों में  मंज़र अपने  गाँव का || अच्छी ग़ज़ल की प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें |"
Mar 3
Ganesh Jee "Bagi" commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"खुबसूरत अशआर कहे है नज़ील जी, गाँव की बात ही न्यारी है, अच्छी ग़ज़ल की प्रस्तुति पर दाद कुबूल करें |"
Mar 3
N .B. Nazeel commented on N .B. Nazeel's blog post भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का
"धन्यवाद प्रवीन जी ...... अदनी सी कोशिश को उत्साहित करने हेतु  हार्दिक आभार  ..........:-)"
Mar 3

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Male
City State
SIRSA, HARY
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MASITAN

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भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का

Posted on March 3, 2012 at 7:00pm 11 Comments

भूला कहाँ हूँ कच्चा घर अपने गाँव का ||

जो बना था लकड़ी का दर अपने गाँव का ||

थी वो महकती मिटटी और वो कच्ची गली ,

घूमे  ख़्यालों में  मंज़र अपने  गाँव का ||

आँखे हुई नम , देखकर  पानी  बरसात  का ,

जो याद आये जोहड़ अक्सर अपने गाँव का ||

जब…

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वो कोशिश करते रहे रुसवा करने की ,

Posted on February 6, 2012 at 8:10pm 0 Comments

मांगी जो उनसे जिगर में पनाह हमने ||

देखें ऐसे जो किया हो गुनाह हमने ||

आज तक न मिला मुहब्बत सा बहर गहरा,

देखे लाखों बहर गहरे अथाह हमने ||

हमको उसने भी दिया ना जवाब कोई ,…

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मेरे घर के नज़दीक दीवारों पे

Posted on January 31, 2012 at 4:30pm 5 Comments

मेरे घर के नज़दीक दीवारों पे ||
आए नज़र मुझे तू इश्तिहारों पे ||

है सच्चाई की शरीफ कूचों में भी ,
अक्सर बिकता है हुस्न चौबारों पे ||

शायद सब जायज है इस सियासत में,
बस मुद्दे ही हैं किस्मत के मारो पे ||

मुमकिन ना है अब वस्ल होगा उनसे ,
बसते हैं जो आजकल वो सितारों पे ||

आखिर आए है मौसिमे -वीरानी ,
इस फिजा को महकाती इन बहारों पे ||

तेरे बिना लगती है जिंदगी अधूरी सी |

Posted on January 21, 2012 at 7:45pm 6 Comments

तेरे बिना लगती है जिंदगी अधूरी सी |

अपनी बज़्म की है अब हर ख़ुशी अधूरी सी ||



बन के अब्र कोई ,बरसाए बारिशे-उल्फत ,

मुहब्बत के बिन तो है दिल की ज़मीं अधूरी सी ||



इसको गुनाह समझ ,चाहे समझ खता इसको ,

हमसफ़र के बिन लगती है खुदी अधूरी सी ||



जाम छलके हैं चाहे रोज़ मैकदे में, पर ,

तेरे बिन साकीया ,मैकशी अधूरी सी |



मैं चाहता हूँ अक्सर देखना खुदा को ,

जाने क्यों रह जाए बन्दगी अधूरी सी |



उनके ख्यालों में खोकर "नजील" अब मै तो… Continue

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At 9:06pm on December 14, 2011, Admin said…

 
 
 

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