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Nazeel
  • Male
  • Dabwali , Haryana
  • India
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Nazeel updated their profile
Dec 6, 2015
Dr Ashutosh Mishra commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीय नजील जी ..आपसे पहली बार परिचय हुआ ...आपके प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनाएं सादर "
Apr 10, 2015
Nazeel commented on JAWAHAR LAL SINGH's blog post कोकिला मुझको जगाती- जवाहर
"आदरणीय  भाई जी अच्छी कोशिश  की है आपने  बधाई।  आप आदरणीय तिलक राज कपूर जी की ग़ज़ल की कक्षा  ग्रुप ज्वाइन कर ले  और आदरणीय भाई वीनस  केसरी जी का का ग्रुप ग़ज़ल की बाते  ज्वाइन कर ले । वाही से आपको  बहुत…"
Apr 9, 2015
Nazeel commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी  आपका बहुत बहुत धन्यावाद।  भाई जी  मैं  गुनीजनो   की सलाह पर  ही  ध्यान  दे रहा हूँ । आपका हार्दिक आभार । "
Apr 9, 2015
Nazeel commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीय डॉ.  विजय  शंकर जी  हौसला देने के लिए  हार्दिक आभार। । "
Apr 9, 2015
Nazeel commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post न जाने किये कौन से रतजगे हैं /// हिंदी गजल (प्रयास जारी}
"आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी  अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारे।  आप  जैसे गुनीजनो की रचनाओ से हर दिन बहुत कुछ सिखने को मिल  रहा है । एक बार फिर से हार्दिक बधाई । "
Apr 9, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीय नज़ील भाई , अच्छी गज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ । जानकारों की सलाहों का खयाल कीजियेगा ॥"
Apr 9, 2015
Nazeel commented on rajesh kumari's blog post मुक्ति बोध (लघु कथा ...'राज')
"आदरणीया राजेश कुमार जी  बहुत  सुन्दर  है  आपकी रचना  . आज़ादी की कीमत  कैद होने वाला ही जान सकता है  … हार्दिक बधाई  बेहद खूबसूरत रचना पर। "
Apr 9, 2015
Dr. Vijai Shanker commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"बहुत ही खूबसूरत , बहुत बहुत बधाई , सादर।"
Apr 9, 2015
Nazeel commented on मिथिलेश वामनकर's blog post ग़ज़ल - लफ्ज़ सजाना पड़ता है.... (मिथिलेश वामनकर)
"आदरणीय मिथिलेश   भाई जी  अच्छी रचना  लिए  हार्दिक बधाई "
Apr 9, 2015
Nazeel posted a blog post

बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....

१ २ २ २ १२ १ २२२ बड़ी मुश्किल उसे मनाया है ॥ बहुत कुछ दांव पे लगाया है ॥ किसे कहते कि बेवफा है वो ,हँसा हम पे जिसे बताया है ॥ बसा दिल-ओ-दिमाग में वो ही ,अचानक सामने जो आया है ॥ लगे ऐसा हमें खुदा ने उसे ,हमारे के लिए बनाया है ॥ हुआ है एहसास जन्नत का , जो माँ ने गोद में सुलाया है ॥ कहाँ होशो-हवास की बातें ,किसी पे जब शबाब आया है ॥ लगे है वो पवित्र गंगा सा ,करिंदा जो पसीने से नहाया है ॥मौलिक /अप्रकाशितSee More
Apr 9, 2015
Nazeel commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीय मिथिलेश भाई जी बहुत बहुत धन्यवाद  । आप जैसे गुणीजनों  की की सोहबत  में बहुत कुछ  सीखने को  मिलता है।  जो   शेयर  बेबह्र है उसको सुधारने  की कोशिश करता हूँ ।  हार्दिक आभार । "
Apr 9, 2015
Nazeel commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आपका तहे दिल से शुक्रिया. आपने रचना पर गौर फ़रमाया गलती सुधारने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।"
Apr 9, 2015
Nazeel commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीय भाई कृष्णा मिश्रा जी आपका हार्दिक आभार …मित्रवत सुझाव देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यावाद , देखता हूँ किन शायरों में ध्यान की दरकार है। हार्दिक धन्यावाद"
Apr 9, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"आदरणीय नाज़िल जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, हार्दिक बधाई .... शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाएं  मैं भी आदरणीया राजेश दीदी से सहमत हूँ  बड़ी मुश्किल कर लीजिये  ये शेर बेबह्र हो रहा है - लगे है वो पवित्र गंगा सा ,करिंदा जो पसीने से नहाया है…"
Apr 8, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Nazeel's blog post बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....
"मतला अच्छा है पर बड़ी मुश्किल कर लीजिये हुआ है एहसास जन्नत का , जो माँ ने गोद में सुलाया है ॥ ---सुन्दर शेर है  लगे ऐसा हमें खुदा ने उसे ,हमारे के लिए बनाया है ॥ ----हमारे लिए होता है हमारे के लिए नहीं ---हमारे वास्ते बनाया है कर सकते…"
Apr 8, 2015

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Gender
Male
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Sirsa , Hry
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Masitan
Profession
photography
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बहुत कुछ दांव पे लगाया है .....

१ २ २ २ १२ १ २२२
बड़ी मुश्किल उसे मनाया है ॥
बहुत कुछ दांव पे लगाया है ॥
किसे कहते कि बेवफा है वो ,
हँसा हम पे जिसे बताया है ॥
बसा दिल-ओ-दिमाग में वो ही ,
अचानक सामने जो आया है ॥
लगे ऐसा हमें खुदा ने उसे ,
हमारे के लिए बनाया है ॥
हुआ है एहसास जन्नत का ,
जो माँ ने गोद में सुलाया है ॥
कहाँ होशो-हवास की बातें ,
किसी पे जब शबाब आया है ॥
लगे है वो पवित्र गंगा सा ,
करिंदा जो पसीने से नहाया है ॥
मौलिक /अप्रकाशित

Posted on April 7, 2015 at 9:30pm — 15 Comments

वो सताए है मुझे यादों में शामो - सहर ..... Nazeel



२१२२  २१२२  २१२२  २१२

जिंदगी मेरी कहाँ जाके गई है तू ठहर ॥

ले गई है फिर वहां ,जो छोड़ आया था  शहर



है खुदा भी एक ,एक ही आसमां , एक ही  ज़मीं

सरहदों पर किस लिए हमने मचाया है  कहर   



मारता आया है बरसों  बाद भी अक्सर  हमें ॥

घुल गया था जो दिलों  में  लकीरो  का जहर



भूल कर भी भूल सकता हूँ भला कैसे  उसे  ,

वो सताए है मुझे यादों में शामो - सहर



वायदा करके नहीं आये अभी तक क्यों  भला ,

यूँ अकेला बैठ…

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Posted on April 1, 2015 at 8:44pm — 16 Comments

वो वायदे गिनने लगे हैं आज कल...

२२१२ २२१२ २२१२

खामोश से रहने लगे हैं आजकल ॥

हम रात भर जगने लगे हैं आजकल ॥

इन महफ़िलों को क्या हुआ किसको पता ,

सब  चेहरे ढलने लगे है आजकल ॥

सदियों से लूटा है खुदा के नाम पे ,

तो कब नया ठगने लगे है आज कल ॥

निभते नहीं हैं जो सियासत में कभी ,

वो वायदे गिनने लगे हैं आज कल ॥

कैसे कहें , कितना चाहें हैं उसे ,

बस सोच के डरने लगे हैं आज कल ॥

मालूम होता तो बता पाते तुझे ,

वो दूर क्यों हटने…

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Posted on March 21, 2015 at 9:30pm — 10 Comments

माना होता खुदा को एक हमने

2222 1222 1222

लोगों को लूटने का फ़लसफ़ा होता ||

तो अपने नाम पर बाबा लगा होता ||

तूं तूं - मैं मैं न होती इस कदर हम में ,

तेरा मेरा अगर इक रास्ता होता ||

माना होता खुदा को एक हमने तो ,

फिर घर न कोई किसी का जला होता ||

उनको आया नज़र फर्के- लिबासां ही ,

काश !ये इक रंग का खूं भी दिखा होता ||

फिर मैं भी मानता परवाह है उसको ,

ग़र आंसू पोंछ बांहो में कसा होता ||

समझौता कर लिया हालात से…

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Posted on March 15, 2015 at 8:00pm — 11 Comments

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At 9:06pm on December 14, 2011, Admin said…

 
 
 

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