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Kiran Arya
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Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Computer Analyst in JNU.
About me
अपनी सोच को सकारत्मक सोच संग विकसित करने की कोशिश करती एक साधारण महिला............

Kiran Arya's Blog

मेरे हमसफ़र

उदास सी थी वो सहर

खामोश स्तब्ध शाम थी

हवा भी कुछ रुकी सी थी

राहों की वो विरानियाँ

आँख में गई ठहर.....



एहसासों की एक लहर

यादों के नर्म बिछोने सी

विरह के लिए खिलोने सी

इश्क की रवानियाँ

रूह को सहलाए हर पहर.....



नदी से निकले एक नहर

अपनी ही धुन में बहती सी

विरक्ति को हाँ सहती सी

छोड़ गई निशानियाँ

दर्द बन गया जहर......



तुझ बिन सूना दिल का शहर

पलकें नम झुकी सी थी

आहटें खटकती सी थी …

Continue

Posted on December 11, 2013 at 2:30pm — 1 Comment

मेरे कुछ दोहे

१.

मात पिता तो बोझ सम, आपन पूत सुहाय ।

जियबे पर ...पानी नही, मरे गया लइ जाय ॥

२.

धूल संस्कृति फाँकती, ....संस्कार हैं रोय ।

अंधी दौड़ विकास की, मानो सबकुछ होय॥

३.

है विवेक तो तनिक नहिं, शब्दन की भरमार।

अधकचरा से ज्ञान पर,...... हिला रहे संसार॥

४.

ज्ञान समुन्दर उर बसै, फिर भी भटकय जीव।

मन ना बस में करि सकै, ..तन जैसे निर्जीव॥

५.

देख मनुष का गर्व यों, ..सोच रहे भगवान ।

धरा नरक बन जाय जो, सारे होयँ समान…

Continue

Posted on December 9, 2013 at 1:00pm — 17 Comments

आस की कश्तियाँ

मायूसियों ने आज फिर दस्तक दी

खयालो के बंद दरवाजो से निकल

मन के आँगन में बिखरने को

बेताब सी मायूसियाँ

लेकिन आस की एक लौ

जिससे रोशन है दिल की बस्तियाँ

मुस्कुरा के बोली बुझने ना देना मुझे

जीवन में आयेंगे कठोर थपेड़े

वक़्त की आंधियों में

हमने मिटती देखी हैं

इन थपेड़ो की गिरफ्त में कई हस्तियाँ

जिंदगी की उलझनों से…

Continue

Posted on September 13, 2012 at 1:30pm — 20 Comments

दिल मेरा

हमको यह गुमा था की हम है दिलो के खरेदार…

Continue

Posted on January 20, 2012 at 3:19pm — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

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At 7:40pm on December 10, 2012, vijay nikore said…

तुम लगे सोचने ख़त्म करने को सिलसिला आवाजाही का

तब तक मन का जीव मुक्त हो चुका था हर आजमाइश से

किरण जी, बहुत खूब... बहुत खूब!

विजय निकोर

At 12:45am on April 9, 2012, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

तुम एक और आजमाइश संग खड़े मुस्काते नज़र आये

हम फिर जुट गए उस पर खरा उतरने की जुगत में

जब होने लगा यकीन तुम्हे प्यार पे मेरे आजमयिशो से परे

तुम लगे सोचने ख़त्म करने को सिलसिला आवाजाही का..

इस आजमाईश का दौर खत्म ही नहीं होता ....सुन्दर भाव .....जय श्री राधे 

भ्रमर ५ 
भ्रमर का दर्द और दर्पण 
At 12:27am on January 21, 2012, Shanno Aggarwal said…

स्वागतम किरन आर्य जी  :)

At 7:15pm on January 16, 2012, Admin said…

 
 
 

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