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Nutan Vyas's Page

Latest Activity

Nutan Vyas and pardeep yadav are now friends
Apr 18
Ganesh Jee "Bagi" commented on Nutan Vyas's blog post भूतिया वो पेड़
"खुबसूरत अतुकांत कविता का एक बढ़िया उदाहरण, अच्छी कविता बन पड़ी है, बधाई स्वीकार करे |"
Jan 26
Raj Lally Sharma commented on Nutan Vyas's blog post भूतिया वो पेड़
"पर अपनी सोच के दरीचे बंद कैसे करती....!! ? Khoob!"
Jan 25
Nutan Vyas posted a blog post

भूतिया वो पेड़

खिड़की से नज़र आताभूतिया वो पेड़जिसकी हर एक शाखपतझड़ की सोच में डूबीमानो उंगलियाँऔर पत्ते...आसेबी हवा के ज़ोर सेझुकते हुएपर नुकीले नाखूनों की तरहमुझ को खरोंचतेडराते और मैं.... यकलख्तकरती बंद खिड़की !पर अपनी सोच के दरीचेबंद कैसे करती....!! ?See More
Jan 24
Nutan Vyas commented on आशीष यादव's blog post हम अब नहीं फंसने वाले (कविता )
""जो रात-दिन  मेहनत कर अन्न उगाता है, सुधि लिए कभी, आखिर वो क्यों मर जाता है?"..... बहुत अच्छा लिखा है आपने ! बधाई !  "
Jan 24
Nutan Vyas commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"आभार Kiran Arya जी!"
Jan 23
Nutan Vyas is now friends with Kiran Arya, neeraj and आशीष यादव
Jan 23
Kiran Arya commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"ग़ज़ल तो बस ग़ज़ल होती, न कोई ज़लज़ला होता |.......नूतन जी एक बेहद ही खूबसूरत ग़ज़ल..........बधाई........."
Jan 23
Nutan Vyas posted a blog post

बड़ी उलझन है उलझी सी

नहीं जो हौंसला होता, न तू काफ़िर हुआ होता |सभी को भूल जाती मैं, न कोई रतजगा होता |न दी आवाज़ ही होती, न कोई सिलसिला होता |कहानी कौन कर पाता, किसे कब कुछ पता होता |ग़ज़ल तो बस ग़ज़ल होती, न कोई ज़लज़ला होता |न आती मौत इंसां को न सोने को मिला होता |बड़ी उलझन है उलझी सी, न होती मैं तो क्या होता |See More
Jan 23
Nutan Vyas commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"जी गणेश जी....आप अनुमति कहाँ माँग रहे हैं ....आदेश दीजिए!"
Jan 23
Ganesh Jee "Bagi" commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"नूतन जी यदि अनुमति हो तो उक्त सुधार किये गए मिसरे को आपकी ग़ज़ल में जोड़ दिया जाय |"
Jan 23
Nutan Vyas commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"आभार आशीष यादव जी एवं मोहिनी जी ! "
Jan 23
Nutan Vyas commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"आपका हार्दिक आभार है गणेश जी... बहर की थोड़ी बहुत जो समझ है वह  Sharad Tailang जी की वजह से है ! आपकी इस  टिप्पणी  से मेरी ग़ज़ल बेबहर होने से बच गई ! आभार  "
Jan 23
आशीष यादव commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"bahut hi achchhi ghazal kahi hai aapne.  sabhi she'r kaabil-e-daad hain. badhai swikaar karen."
Jan 22
Ganesh Jee "Bagi" commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"आदरणीया नूतन व्यास जी, अपेक्षाकृत छोटी बहर के साथ कहन को संतुलित रखना आसान नहीं होता, यदि एक मिसरा छोड़ दिया जाय तो आपने अपनी इस ग़ज़ल में मुफाईलुन-मुफाईलुन को बहुत ही बढ़िया से निभाया है, ख्याल उम्दा, अब बात करते है बेबहर मिसरा की .. न मौत आती जो…"
Jan 22
mohinichordia commented on Nutan Vyas's blog post बड़ी उलझन है उलझी सी
"मिर्ज़ा ग़ालिब की याद आ गई   "ये होता तो क्या होता " | अच्छी गज़ल |"
Jan 22

Profile Information

Gender
Female
City State
Gurgaon
Native Place
Rajasthan
Profession
Housewife

Nutan Vyas's Blog

भूतिया वो पेड़

Posted on January 24, 2012 at 7:21pm 2 Comments

खिड़की से नज़र आता

भूतिया वो पेड़

जिसकी हर एक शाख

पतझड़ की सोच में डूबी

मानो उंगलियाँ

और पत्ते...

आसेबी हवा के ज़ोर…

Continue

बड़ी उलझन है उलझी सी

Posted on January 21, 2012 at 3:00pm 9 Comments

नहीं जो हौंसला होता,
न तू काफ़िर हुआ होता |

सभी को भूल जाती मैं,
न कोई रतजगा होता |

न दी आवाज़ ही होती,
न कोई सिलसिला होता |

कहानी कौन कर पाता,
किसे कब कुछ पता होता |

ग़ज़ल तो बस ग़ज़ल होती,
न कोई ज़लज़ला होता |

न आती मौत इंसां को
न सोने को मिला होता |

बड़ी उलझन है उलझी सी,
न होती मैं तो क्या होता |

सृष्टि का ऋत

Posted on January 17, 2012 at 9:30am 1 Comment

अवश्य ही कट जाएगा,

एक दिन वह भी मुझसे,

जो शेष बचा रहा अब तक,

स्वार्थ में अपने...

नहीं इसलिए कि ,

उसका है ध्येय  अनुचित

वरन यही तो है

सृष्टि  का ऋत!

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At 7:45pm on January 15, 2012, Admin said…

 
 
 

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