For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dear friends:

As many of us have noticed, usually there is not much response to the discussions at various Groups. This is true with English poems, as well, and one feels like a loner walking at night in the darkness in a big city with no street lights. Some response ( street light ) feels good to the writer, making him/her feel that the effort was worthwhile. Where as we need to curb our ego, this is not the gross ego. A writer's ego is a very subtle ego, and upon receiving responses, it encourages the writer to be more creative, and to continue on the path.

 

I respectfully urge members of all Groups to consider the above thought and see how we all can be supportive of creative ability of each other, by giving constructive comments to the discussions more frequently than we do now.

 

Regards,

Vijay Nikore

Views: 108

Replies to This Discussion

Well shared Resp. Vijayjee.. .

I am very much with you that those who are the members of the group should come out with comments on the post, making the writer judge the status of the post.  A comment guides the writer and encourages him/her.  But we must accept as well that English does not appeal to a maximum of our members unless there is professional compulsion. But members must second or reject the post based on the content. At least should they say whether the efforts by the writer is positive.

Thanks & regards

आदरणीय विजय जी की बात से मैं पूरी तरह सहमत हूं। मैंने यह बात महसूस की है। मेन पेज पर भी मैं यह महसूस करता हूं कि कुछ गिने चुने व्यक्ति हैं जिनकी टिप्पणी लगभग हर रचना पर मिलती है। शेष कभी कभार कहीं कहीं नजर आते हैं। यह हतोत्साहित करने वाला माहौल है। कुछ सदस्य तो मेरे विचार से ओबीओ पर आते हैं अपनी रचना पोस्ट करते हैं और निकल लेते हैं। इनमें से कई तो अपनी रचना पर प्राप्त टिप्पणी पर आभार भी व्यक्त नहीं करते। ऐसे में अन्य रचनाकारों का हतोत्साहित होना लाजिमी है।
समूहों की स्थिति और भी खराब है। मैंने भी एक समूह में एक लेख पोस्ट किया था परन्तु कोई टिप्पणी नहीं प्राप्त कर सका। इस स्थिति से रचनाकार का उत्साह कम होता है।
सभी सदस्यों को यह समझना चाहिए कि अन्य रचनाकारों की रचना पर टिप्पणी करना एक ऐसा कर्म है जो स्वयं को सुधारने का अवसर प्रदान करता है। हम जब किसी रचना का विश्लेषण कर उस पर टिप्पणी करते हैं तो हमें यह भी पता चलता है कि किस तरह की कमियां रचनाओं में रह जाती हैं और किस तरह की चीजें पाठक को अखरती हैं।
मेरा भी सभी सदस्यों से अनुरोध है कि सभी रचनाकारों की रचनाओं पर अपनी टिप्पणी दर्ज करने का प्रयास करें।
सादर!

res sirs

exactly well said ......members  should atleast spare time to comment ,,,not on all the post but if  possible , to encourage good  poetry .........it gives a boost to a new writer or member of the group .....i want to put forward a suggestion ........that if  some post is not up to the standard ...of the group or carrying some technical flaws or mistakes the group should encourage the poet by accepting it with some suggestions or  desired modifications , ...    

Yes sir I too agree . Regards

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी आदाब, बहुत ही सुंदर मत्तगयंद छंद की रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
6 minutes ago
Mohammed Arif commented on vijay nikore's blog post बिखराव
"आदरणीय विजय निकोर जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन अहसासों की ख़ुशबू से महकी हुई प्यार कुछ-कुछ बिछोह की…"
9 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आदरणीय विजय निकोर साहिब , सादर प्रणाम  ... सृजन के भावों को आत्मीय भावों से अलंकृत का हार्दिक…"
14 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

अजल की हो जाती है....

अजल की हो जाती है....ज़िंदगी साँसों के महीन रेशों से गुंथी हुई बिना सिरों वाली एक रस्सी ही तो है…See More
15 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार। इंगित…"
19 minutes ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"आदरणीय मो.आरिफ साहिब , आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।"
19 minutes ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अजल की हो जाती है....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत ही उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें…"
30 minutes ago
Samar kabeer commented on रोहिताश्व मिश्रा's blog post एक कोशिश
"जनाब रोहिताश्व मिश्रा जी आदाब,बहुत अर्से बाद आपको मंच पर सक्रिय देखकर अच्छा लगा,सक्रियता बनाये रखें…"
39 minutes ago
Manoj kumar shrivastava posted a blog post

प्रश्न तुमसे है

ओ साहब!!!क्या तुम आधुनिक लोकतंत्र कोलूटने वाले नेता हो!या रहीसी के दम पर बिकने वाले अभिनेता हो!क्या…See More
1 hour ago
vijay nikore posted a blog post

बिखराव

हुआ होगा कुछ आज ही के दिनभयानक सनसनी अभी अचानकथम गईहवा आदतन अंधेरे आसमान मेंकहाँ से कहाँ का लम्बा…See More
1 hour ago
रामबली गुप्ता posted a blog post

पूनम का रजनीश लजाया-रामबली गुप्ता

मत्तगयन्द सवैयासूत्र=211×7+22; सात भगण+गागासुंदर पुष्प सजा तन-कंचन केश-घटा बिखराय चली है।हैं मद…See More
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल -आग हम अंदर लिए हैं

2122 2122 2122 2122वो किसी पाषाण युग के वास्ते अवसर लिए हैं ।देखिये कुछ लोग अपने हाथ मे पत्थर लिए…See More
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service