For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Lata tejeswar
  • maharastra
  • India
Share on Facebook MySpace

Lata tejeswar's Friends

  • arvind ambar
  • Ketan Parmar
  • वेदिका
  • anwar suhail
  • SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR
  • Aditya Kumar
 

Lata tejeswar's Page

Profile Information

Gender
Female
City State
Mumbai, Maharastra
Native Place
mumbai
Profession
Author, Novelist, poetess, freelance writer
About me
जन्म स्थान--- परलाखेमुंडी, गजपति जिल्ला, ओडिसा भाषा: ओड़िया(शिक्षा) , तेलुगु(मातृ भाषा) अंग्रेजी, हिंदी, शौक्षिक-- योग्यता-डिग्री, रूचियाँ- विविध विधाओं में लेखन -- पठन के साथ-साथ संगीत के प्रती रूची लेखन की विधाएँ- कविता, मुक्तक, शेर-शायरी, हाइकू, गज़ल, यात्रा संस्मरण, लघू कथा, उपन्यास व् शोध पत्र। पहली रचना प्रकाशीत २००७ में रिलायंस की एक निजी पत्रिका में प्रकाशीत हुई प्रकाशित पुस्तकें -१. मैं साक्षी यह धरती की (काव्य संग्रह), २ हवेली(उपन्यास) , 3.'The Waves of Life' (अंग्रेजी) प्रकाशन के ओर -1. चाँदनी रात में तुम (काव्य संग्रह) 2. सैलाब दर्द की दास्ताँ(लघु उपन्यास) पांडुलिपि -1. बाल कहानियाँ 2. एक लघु उपन्यास के 50 पृष्ठ तक लिखी गयी है। पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं की संख्या- 35 से भी ज्यादा काव्य, आलेख समाज कल्याण पत्रिका, एडिटर मीडिया ट्रायल, साहित्य समीर दस्तक, दृष्टिपात, सत्य दर्शन, लोकजंग जैसे 20 प्रतिष्ठित मॉगाजिनों, अखबारों के अलावा इ-मॉगाजिन और बभिन्न हिंदी व अंग्रेजी किताबों में भी यात्रा संस्मरण कविता व कहानियाँ आदी प्रकाशीत हुई है। विभिन्न साइट्स पर यानी पोयम्स हंटर, लिटाग्राम, यू-ट्यूब पर कई विजुअल पोएट्रि अँग्रेजी में प्रशारित है। 400 से अधिक गज़लें, कविताएँ, मुक्तक, शेर ऑनलाइन फेसबुक व अन्य साइट्स और अन्य ब्लॉग्स जैसे की फेसबुक पेज पर हिंदी, अंग्रेजी में प्रकाशित व प्रशारित है। पर्याटन: अंतराष्ट्रीय प्रदेश भूटान के अलावा भारत के बिभिन्न प्रदेश के दौरा। राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय साहित्य सम्मलेन व काव्यगोष्ठी में भागीदारी। सम्मान: 1) महाराजा कृष्ण जैन स्मृति सम्मान, 2015. 2) "में साक्षी यह धरती की" के लिए साहित्य गरिमा सम्मान, 2015. 3) सोशल मीडिया प्रतिभा सम्मान (2016), 4) नारी गौरव सम्मान (2016).

Lata tejeswar's Photos

  • Add Photos
  • View All

Lata tejeswar's Blog

मैं दामिनी हूँ

मैं दामिनी हूँ



आप की जैसी एक जिंदगानी हूँ

जीना था मुझे आप की तरह

रोज़ सवेरे उठकर ऑफिस जाना था

एक छोटा सा घर बनाना था।



किसीकी बहन तो थी ही

किसीकी जननी भी कहलानी थी

माँ मुझे जीना था।



आज जल गया मेरा सवेरा

टूट गये सारे अरमान मेरे

जा रही मैं इस दुनिया को छोड़ कर

मगर माँ मुझे जीना था

रोज़ सवेरे आप का पैर छूना था।



उजाड़ गयी दुनिया मेरी

पर एक ख्वाब मुझे बुनना था

मगर माँ मुझे जीना था।



कैसे…
Continue

Posted on September 13, 2013 at 8:30pm — 24 Comments

इंतज़ार

वह एक छोटा सा टुकड़ा

जिस में मैने आशाओं को कैद कर

तुम्हें समर्पित किया था,

क्या तुमने वह

कागज का दिल

स्वीकार किया है,

कान्हा …. ?

मेघमाला के द्वारा

जो संदेश तुम्हें भेज था -

क्या उस दिल की धड़कन

तुमने सुनी थी

प्रभु. … ?



हवा में लहराते

मेरे शब्दों की गूँज

क्या तुन तक

पहुँच पायी है,

नाथ  … ?

चंद्रमा को देखते हुए

मेरे दिल में अंकित तुम्हारा रूप

जो मुझे नज़र आता है,

उस चंद्रमा में…
Continue

Posted on August 22, 2013 at 9:30am — 8 Comments

तुझे इकरार हो तो चली आना।

कभी न आएँगे तेरे दर पे

कि तेरे बिना

जीना मंजूर है हमें

कभी न ताकेंगे तेरे राह

कि तेरे बिना

जीना मंजूर है हमें।



एक आशियाना मिला था,

एक फूल खिला था,

जो मुरझा गया समय से पहले

उस फूल को लेकर

अब मैं कहाँ जाऊँ।



जिसमे सजानी थी

बचपन की यादें,

समेटनी थी कुछ खुशियाँ

तेरे साथ उन खुशियों को

ढूंढने अब मैं कहाँ जाऊँ।



एक शाम बितानी थी तेरे संग

दुनिया को भूलकर

आसमान छूना था,

उन सपनों को लेकर

अब मैं कहाँ…

Continue

Posted on July 25, 2013 at 4:00pm — 12 Comments

एक बेबस आत्मा

शून्य की गहरा अन्धकार में

भटक रही एक बेबस आत्मा ..

न कोई अपना उसका

न कोई सपना ....

रोंदू एक मोम सी गुडिया

रो रही थी उन सीढियों पर

छोड़ गई थी कोई बेबस माँ

उस भगवान की द्वार ...

रोंदू सी वह गुडिया रोए जा रही थी ...

रोती हुई गुडिया को देख

वह आत्मा कुछ ऐसे बिल्ल्ख गई

बहक गई ...

ममता जो उसकी जगगई ...

बेबस वह बच्ची को गोद में लेने

तड़प रही ...

न था उसका हाथ,

न था उसका पैर

एक हवा बन कर सहलाती रही ..

न थी वह…
Continue

Posted on July 18, 2013 at 1:30pm

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted blog posts
8 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
14 hours ago
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
18 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
18 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service