For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

PHOOL SINGH
  • Male
  • India
Share

PHOOL SINGH's Friends

  • Yogi Saraswat
  • Rekha Joshi
  • Dr.Prachi Singh
  • Ashok Kumar Raktale
  • PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA
  • rajesh kumari
  • Naval Kishor Soni
  • Shubhranshu Pandey
  • DR SHRI KRISHAN NARANG
  • वीनस केसरी
  • Deepak Sharma Kuluvi

PHOOL SINGH's Groups

 

PHOOL SINGH's Page

Latest Activity

PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post पेड़-पोधे और हम
""कबीर साहब" को कोटि-कोटि प्रणाम और मेरी होसला अफजाई के लिए धन्यवाद|"
May 1
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post पेड़-पोधे और हम
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 29
PHOOL SINGH posted a blog post

पेड़-पोधे और हम

वो भी क्या दिन थे यारोजब मिलजुल कर मौज मनाते थेकभी पेड़ की डाल पर चढ़ जातेकभी तालाब में डुबकी लगाते थेरंग-बिरंगे फूलों से तबभरे रहते थे बाग-बगीचेसुंदर वातावरण बनाते औरआँगन को महकाते थे || कू-कू करती कोयल केहम सुर से सुर मिलाते थेरंग-बिरंगे तितलियों के पीछेसरपट दौड़ लगाते थेपक्षियों की चहचाहट मेंजैसे, खुद को ही भूल जाते थेमिलजुल कर मौज मनाते थे || स्वच्छ वायुं की कमी नहीं थीऔर हरियाली हर ओर फैली थीनीर भरे तालाब थे सारेंनदियाँ मदमस्त हो, बहती थीसमय पर ऋतुयें आतीऔर पर्यावरण में ताजगी थीपेड़ पोधे लगाकर…See More
Apr 26
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
""भाई ब्रिजेश" हौसलाअफजाई के लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद|"
Apr 22
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
"उत्तम सन्देशप्रद रचना आदरणीय..बधाई"
Apr 19
PHOOL SINGH posted a blog post

आओ मिलकर घर बनाये

ईट पत्थर से बना मकानउसमें रहते दो इंसानरिश्तों को वो कदर न करतेएक-दूजे से बात ना करतेकहने को एक मकान में रहतेपर एक-दूजे से घृणा करतेमकान की परिभाषाको सिद्ध करते || कच्ची मिटटी का एक, छोटा घरस्वर्ग से सुंदर, प्यारा घरएक परिवार की जान था, जो  प्रेम की सुंदर मिशाल था, वोसब सदस्य साथ में रहतेहसतें-खेलतें घुल-मिल रहतेनारी के सम्मान के संग सब  एक दूजे का आदर करतेंमुश्किल यदि कोई, घर पर आयेमिलजुल कर समाधान खोजतेऐसे अपने घर में रहते || आओ मिलकर धेय बनायेमकान नहीं, हम घर बनायेसंग में रहने की मंशा…See More
Apr 18
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
"कबीर साहब, हौसलाअफजाई के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, मुझे खुशी है कि आप मेरी रचना को पढ़ते है और कुछ अच्छा लिखने के लिए प्ररित भी|"
Apr 16
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 16
PHOOL SINGH shared a profile on Facebook
Apr 16
PHOOL SINGH posted a blog post

हैरान हो जाता हूँ, जब कभी

आँखों में अश्रु निकल आते है मेरेइतिहास में जा, जब खोजता हूँनारी उत्पीडन की प्रथाओ कीकड़ी से कड़ी मै जोड़ता हूँहैरान हो जाता हूँ, जब कभीइतिहास में जा, जब खोजता हूँ कैसी नारी कुचली जातीचुप होके क्यों, सब सहती थीबालविवाह जैसी, कुरूतियों की खातिरसूली क्यों चढ जाती थीसती होने की कुप्रथा में क्योंइतिहास नया लिख जाती थीचुप होके क्यों, सब सहती थीसूली क्यों चढ जाती थी || जब कभी में सोचता हूँइंसा नहीं क्या पशु थी वोजो काम नरबलि में भी आती थीरही सही जो कसर बची तोदेवदासी बन जाती थीविधवा होने पर ना कभीशादी वो…See More
Apr 16
vijay nikore commented on PHOOL SINGH's blog post जीना हमकों सिखा दिया
"रचना अच्छी लिखी है, आदरणीय फूल सिंह जी"
Apr 16
PHOOL SINGH commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"रातरानी खिलखिलाईरुत रचाती है सगाई आ गया मौसम बसंती प्रीत पंछी ले हिंडोले वेदना ने नेत्र खोले ब्रिजेश जी, सुंदर रचना बधाई स्वीकारें|"
Apr 15
PHOOL SINGH commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post गांव का युवा और शहर के गिद्ध
"एक अच्छा प्रस्तुतिकरण सुंदर बधाई स्वीकारें|"
Apr 15
PHOOL SINGH commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post श्वान  का दर्द
"श्वान हैरान परेशान घूमता रहता इधर उधर जाए भी तो जाए कहाँ गली ना कूंचा ना घर आश्चर्य अब उसे कोई भी नहीं करता है तंग अब वो भी रहता है मौन नही करता निंद्रा भंग अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकारें|"
Apr 15
PHOOL SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- राजनीति के पंडे
"खंडित जन विश्वास हो रहा संबंधों का ह्रास हो रहा जंगल, दंगल की भाषा का, अद्भुत यहाँ विकास हो रहा   अब वादों की फसलें होंगी, मुर्गे देंगे अंडे बहुत सुंदर बधाई स्वीकारे|"
Apr 15
PHOOL SINGH commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post संविधान शिल्पी
"बहुत सुंदर रचना बधाई स्वीकारे|"
Apr 15

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

PHOOL SINGH's Blog

पेड़-पोधे और हम

वो भी क्या दिन थे यारो

जब मिलजुल कर मौज मनाते थे

कभी पेड़ की डाल पर चढ़ जाते

कभी तालाब में डुबकी लगाते थे

रंग-बिरंगे फूलों से तब

भरे रहते थे बाग-बगीचे

सुंदर वातावरण बनाते और

आँगन को महकाते थे ||

 

कू-कू करती कोयल के

हम सुर से सुर मिलाते थे

रंग-बिरंगे तितलियों के पीछे

सरपट दौड़ लगाते थे

पक्षियों की चहचाहट में

जैसे, खुद को ही भूल जाते थे

मिलजुल कर मौज मनाते थे ||

 

स्वच्छ वायुं…

Continue

Posted on April 26, 2019 at 2:32pm — 2 Comments

आओ मिलकर घर बनाये

ईट पत्थर से बना मकान

उसमें रहते दो इंसान

रिश्तों को वो कदर न करते

एक-दूजे से बात ना करते

कहने को एक मकान में रहते

पर एक-दूजे से घृणा करते

मकान की परिभाषा

को सिद्ध करते ||

 

कच्ची मिटटी का एक, छोटा घर

स्वर्ग से सुंदर, प्यारा घर

एक परिवार की जान था, जो  

प्रेम की सुंदर मिशाल था, वो

सब सदस्य साथ में रहते

हसतें-खेलतें घुल-मिल रहते

नारी के सम्मान के संग सब  

एक दूजे का आदर…

Continue

Posted on April 16, 2019 at 4:47pm

हैरान हो जाता हूँ, जब कभी

आँखों में अश्रु निकल आते है मेरे

इतिहास में जा, जब खोजता हूँ

नारी उत्पीडन की प्रथाओ की

कड़ी से कड़ी मै जोड़ता हूँ

हैरान हो जाता हूँ, जब कभी

इतिहास में जा, जब खोजता हूँ

 

कैसी नारी कुचली जाती

चुप होके क्यों, सब सहती थी

बालविवाह जैसी, कुरूतियों की खातिर

सूली क्यों चढ जाती थी

सती होने की कुप्रथा में क्यों

इतिहास नया लिख जाती थी

चुप होके क्यों, सब सहती थी

सूली क्यों चढ जाती थी ||

 

जब कभी…

Continue

Posted on April 16, 2019 at 10:45am — 4 Comments

देशभक्ति का चोला

देशभक्ति का चोला पहन

देश का युवा घूम रहा

मतवाला होके डोल रहा

ऐसा देशभक्ति में डूब रहा||

 

घूम घूम कर,

झूम झूम कर

वीरो की गाथा खोज रहा

ऐसा देशभक्ति में डूब रहा||

 

बलिदान को अपने वीरो के

हर पल हर क्षण को

रम रमा कर यादों में अपनी

खोया-खोया फिर रहा||

ऐसा देशभक्ति में डूब रहा||

 

"मौलिक और अप्रकाशित"

 

Posted on April 12, 2019 at 3:30pm

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा जी बहुत बहुत बधाई बढ़िया पेशकश की ।"
56 minutes ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब उस्मानी साहब दूसरी शानदार पेशकश की मुबारकबाद क़ुबूल करें मोहतरम ।"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बहुत बहुत धन्यवाद नियम से अवगत ककराने के लिये सादर।"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय Anamika singh Ana जी बहुत शुक्रिया। पोस्ट के लिये माज़रत मंच संचालक महोदय से विनती है इस…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह। शुक्रिया जनाब अशोक कुमार रक्ताले साहिब।  फ़व्वारे में जलधाराओं का प्रवाह निरंतर ऊपर की ओर…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सार छंद रचने का सुन्दर प्रयास हुआ है. हार्दिक…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया अनामिका सिंह अना जी सादर, प्रदत्त चित्र पर पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देता सुंदर सार छंद…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"पूरी तरह प्रदत्त चित्र पर आधारित उसे परिभाषित करती विषयांतर्गत बेहतरीन दोनों छंदों के लिए हार्दिक…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत-बहुत शुक्रिया। वास्तव में वहां प्रभाव और  गेयता बढ़ा दी आपने। यही सब सीखने के लिए सहभागिता…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"सतविंदर  कह मार्ग, एक होता मन चाहा लेकिन देखो चार, दिखाए है चौराहा।.........वाह ! बहुत…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"सुस्वागतम।आदाब। मेरी रचना पर अपना अमूल्य समय देकर राय साझा करने और मुझे प्रोत्साहित करने के लिए…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 97 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर कुण्डलिया छंद रचने का सुन्दर प्रयास हुआ है.…"
2 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service