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Yogi Saraswat
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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला left a comment for Yogi Saraswat
"जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए श्री योगी सारस्वत जी, प्रभु आपको चहुँ ओर विकास का मार्ग अग्रसर करे | आपका हमारा स्नेह यूँ ही बना रहे | शुभ शुभ "
Jun 1, 2013
Yogi Saraswat and अशोक कत्याल "अश्क" are now friends
May 28, 2013
Yogi Saraswat commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : धर्म की हत्या
"धर्म जान लेने या देने से नहीं जान बचाने से फैलता है   और ख़ुदा, भगवान, जीसस, वाहेगुरू किसी भी धर्म को इस धरती पर दूसरा मौका नहीं देते बहुत बढ़िया ! सुन्दर सन्देश देती हुई रचना"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post तुम कैसे श्रेष्ठ ? // गणेश जी "बागी"
"क्या होता ? नालायक कहलाता ! अल्प काल के लिए, किंतु नही घुलता तिल-तिल, प्रति-दिन, हे पूज्य! आज भी लगता है, आप ग़लत थे, किंतु, मैं भी ग़लत था, आपको सुनता रहा । बहुत सुन्दर और सरल शब्दों में मन की पीड़ा , मन की बात कही है आपने आदरणीय श्री बागी जी ! बहुत…"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on ram shiromani pathak's blog post "हास्य घनाक्षरी"
"वाणी में मधुरता थी ,जब कहती थी स्वामी !याद वो आते है दिन ,रुआंसा हो जाता हूँ !! वो पुराने दिन अब, सपने से लगते है !पति कम ज्यादा अब ,टॉमी बन जाता हूँ !! मेरा भी हाल कुछ तेरे जैसा है , अब मुझसे ज्यादा उसे प्यारा पैसा है ! हहहाआआअ गज़ब का लिखते हैं आप…"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on नादिर ख़ान's blog post किसका दोष है ??
"लो मान लिया गलती इसकी थी, या उसकी जाँच का विषय है पर घण्टों सड़क पर तड़पती ज़िंदगी मदद के लिए विनती करती कभी इशारे से बुलाती भीड़ से आस की उम्मीद लिए हर बार आखिरी कोशिश करती   लाश में तब्दील होती ज़िंदगी   किसका दोष है ?? इंसानों का…"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on कल्पना रामानी's blog post एक प्यारी सी चिरैया
"खेलते बालक भी थे, हैरान उसको देखकर, आज ही उनको दिखी थी, वो फुदकती बाग में।   नस्ल उसकी देश से अब, लुप्त होती जा रही, बनके रह जाएगी वो, केवल  कहानी बाग में।   है नियत उसके लिए अब, एक दिन हर साल का, ढूँढने आएँगे जब, उसकी निशानी बाग…"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on Abhinav Arun's blog post बनारस में एक नयी पहल " सुखनवर "
"हिंदी साहित्य के लिए बेहतर प्रयास है ये ! बधाई"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post दो घनाक्षरियां / संदीप कुमार पटेल
"मिले कल नेता जी तो , पूछ लिया हमने ये कद्दू जैसी तोंद का ये, राज तो बताइए दुबले थे आप कुर्सी मिलने से पहले तो हुआ ये कमाल कैसे, अब न छुपाइए बोले सुनो दीप भाई, श्रम बिना हो कमाई चंदा दे के लोग बोलें, काम ये बनाइए बैठे बैठे लील रहे, लाखों क्या करोड़ों…"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on केवल प्रसाद 'सत्यम''s blog post .!!!.जय जय बजरंगबली !!!
"तुम दीन दयाल सुभाय भली, दर आय सभी सुख पाय चली।रघुवीर सदा सिर हाथ रखीं, हिय छाप धरीं तन राम कली।।तुम भूत पिचास भगाय हॅसी, सिय मातु सुजान अशीष फली।तुम दानव काल समेट सभी, तुम शेषहि वीर जगाय भली।।2 जय बजरंग बली की"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on अशोक कत्याल "अश्क"'s blog post बहन हमारी
"श्री अशोक जी , आपने मुझे अपनी बहन के लिए एक प्यारा सा तोहफा दे दिया है रचना के माध्यम से ! बहुत सुन्दर"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on Sonam Saini's blog post एक बार वो लड़की बनकर तो देखे.....
"आगे बढकर पढना चाहा कदमो में मेरे डाली बेडी मैं लड़की हूँ , बस इसलिए न खेली ?????? उड़ना नहीं सीखा मैंने मेरे पंखो की भी खता नहीं उड़ने से पहले ही पंख गवां बैठी लड़की होने की मुझे सजा मिली एक बार वो लड़की -सा हो कर तो देखे खुद- ब - खुद समझ जायेगा मेरी…"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on coontee mukerji's blog post मेरा राम आयेगा
"इस बीहड़ को किसने सजाया ? रंग बिरंगे फूलों से पथ ऐसा ! '' लक्ष्मण ! है कौन मायावी ? देख भाई बढ़के तो ज़रा ! '' लक्ष्मण धनुष – बाण लिये आश्चर्य से था देख रहा, कोई मंत्र जाप कर रही थी अविराम '' मेरा राम आएगा…"
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Yogi Saraswat commented on Savitri Rathore's blog post प्रेम
"ये नयन तुम्हारी छवि के दर्पण,तुम नहीं तो अश्रु का स्थान सही।ये मन तुम्हारी स्मृतियों का आँगन,तुम नहीं तो पीड़ा का श्मशान सही।चाहा था तुमसे मैंने केवल गहन प्रेम,यदि नही तो उपेक्षा और अपमान सही। सुन्दर"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on manoj shukla's blog post भविष्य की कल्पना....हास्य व व्यंग
"हर छंद सार्थक और मुस्कराती हुई ! दिन भर मेएक किलोदवाइयाँचबाया जाता हैसाथ मेरोटी का एक टेबलेटकैपस्यूल मेदाल खाया जाता हैथोड़े दिन रुक जाइये , ये सब यहाँ भी होने लगेगा ! बड़ी मस्त मस्त सी रचना , मज़ा आया शुक्ला जी"
Apr 17, 2013
Yogi Saraswat commented on Kavita Verma's blog post हिस्सा
"अगर यही सोच रहे तो सबका जीवन खुशहाल रहे ! बहुत सुन्दर भाव और बढ़िया सन्देश देती लघु कथा"
Apr 17, 2013

Profile Information

Gender
Male
City State
Ghaziabad, Uttar Pradesh
Native Place
Aligarh, Uttar Pradesh
Profession
Teaching
About me
Basically , I am A Teacher of Mechanical Engineerin but writting is my passion.

Yogi Saraswat's Blog

प्रेमिकाएं और डाक टिकट

अपनी पुरानी  डायरी में से आपके लिए कुछ हाज़िर कर रहा हूँ ! आशा है आपको पसंद आएगा !



ये प्रेमिकाएं बड़ी विकट  होती हैं

बिल्कुल  डाक टिकट होती हैं

क्योंकि जब ये सन्निकट होती हैं

तो आदमी की नीयत में थोडा सा इजाफा हो जाता है !

मगर जब ये चिपक जाती हैं तो

आदमी बिलकुल लिफाफा हो जाता है !!



सम्बन्धों के पानी से

या भावनाओं की गोंद से चिपकी हुई

जब ये साथ चल पड़ती हैं तो

अपने आप में हिस्ट्री बन जाती हैं !

जिंदगी के डाक खाने में उस लिफ़ाफ़े की

रजिस्ट्री…

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Posted on March 30, 2013 at 10:44am — 16 Comments

क्षणिकाएं

लोकतंत्र

जहाँ हर नेता भ्रष्ट

हर अधिकारी घूस खाने को

स्वतंत्र है |

यही तो अपना

लोकतंत्र है ||



पहचान

लोकसभा और विधानसभा को

बना दिया जंग का मैदान |

देख कर इन नेताओं के कारनामे

लोग हो रहे हैरान ||



उजले कपड़ों के पीछे लिपटे

इंसानों की शक्लों में घूम रहे शैतान |

पचा गए यूरिया , खा गए चारा

बच के रहना मेरे भाई

कहीं खा ना जायें इंसान ||



कहें 'योगी ' कविराय

इन नेताओं से उठा…

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Posted on September 7, 2012 at 2:00pm — 8 Comments

कंक्रीट के वृक्ष

यहाँ वृक्ष हुआ करते थे

जो कभी

लहलहाते थे

चरमराते थे

उनके पत्तों का

आपस का घर्षण

मन को छू लेता था

उनकी डालों की कर्कश

कभी आंधी में

डराती थी मन को  |

बारिश के मौसम की

खुशबू और ताज़गी

कुछ और बढ़ा देती थी

जीवन को  ||



उन वृक्षों की पांत

अब नहीं मिलती

देखने तक को भी

लेकिन , हाँ !

वृक्ष अब भी हैं

वही डिजाईन

वही उंचाई

शायद उंचाई तो कुछ

और भी ज्यादा हो

मगर इनसे…

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Posted on August 21, 2012 at 1:00pm — 20 Comments

ये अंतर क्यों है ?

ओ सर्वव्यापी , ओ सर्वशक्तिमान

जब सब में है तू विद्यमान

तो इस दुनियाँ में ये

ऊँच-नीच का अंतर क्यों है ?



कोई कहे तुझे खुदा , कोई कहे तुझे भगवान्

करते जब सब तेरा ही गुणगान

तो इस मृत्युलोक  में

तेरे नाम में ये अंतर क्यों है ?



ओ सर्वरक्षक , सर्वगुणों की खान

कैसा है तेरा विधान

जब सब तेरे बनाये हुए हैं

तो ये गोरे काले का अंतर क्यों है ?



तू है सबका प्यारा , तू है सबसे महान

कोई पढ़े गीता यहाँ , कोई पढ़े कुरआन…

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Posted on June 29, 2012 at 10:00am — 10 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 4:11pm on June 1, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए श्री योगी सारस्वत जी, प्रभु आपको चहुँ ओर विकास का

मार्ग अग्रसर करे | आपका हमारा स्नेह यूँ ही बना रहे | शुभ शुभ 

At 6:32pm on March 31, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आये आपके घर खुशियों की डोली ,हमारी तरफ से आपको हैप्पी होली . आदरणीय धन्यवाद , आपकी हौसला अफजाई मेरी कविता के पौधे में खाद का काम कर रहे हैं . एक बार फिर धन्यवाद"

At 8:10pm on July 6, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

योगी जी आपकी सुंदर प्रतिकृया मिली उसके लिए आपका बहुत बहुत आभारी हूँ। लेकिन क्षमा चाहूंगा इतनी तारीफ के लायक मैं नहीं हूँ...मैं तो अभी ग़ज़ल की एबीसीडी सीख रहा हूँ...इतने बड़े शायरों से मेरी तुलना करना सूरज को दिया दिखाने जैसे है। फिर भी आपकी भावनाओं का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।

At 7:05am on June 1, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

योगी जी जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई ! ईश्वर आपको सदा स्वस्थ और मस्त रखें और आप साहित्य और देश की सेवा ऐसे ही करते रहें !!

At 12:24pm on May 25, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

योगी भाई बहुत बहुत आभार ! आपकी सुंदर प्रतिक्रियाएँ मिलती रहती हैं। अच्छा लगता है।

At 8:56pm on May 19, 2012, JAWAHAR LAL SINGH said…

वृक्ष सूखकर भी देखो
कितने काम हमारे आते हैं |
स्वयं जलकर आदमी को देते रोटी
परमार्थ का पाठ हमें पढ़ते हैं  ||

क्या यथार्थ बातें कही है आपने! योगी भी तो ऐसे ही होते हैं, अपने तन की सुध न रखकर अपनों के लिए रोते हैं! .....मैंने केवल तुकबंदी भिड़ाने की कोशिश की है....

 

At 5:51pm on May 17, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

aadarniya yogi ji. sadar vrakshon ki upyogita par aapki pahli rachna ka swagat hai. aap sundar likhen, likhne ki takniki main ijafa karen. badhai.

At 5:46pm on May 17, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

aadarniy yogi ji, aapka hardik swagat hai.

At 3:34pm on May 15, 2012, Rekha Joshi said…

yogi ji ,apka swaagt hae ,bahut achchha likha hae ,badhaai 

 
 
 

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