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ये अंतर क्यों है ?

ओ सर्वव्यापी , ओ सर्वशक्तिमान
जब सब में है तू विद्यमान
तो इस दुनियाँ में ये
ऊँच-नीच का अंतर क्यों है ?

कोई कहे तुझे खुदा , कोई कहे तुझे भगवान्
करते जब सब तेरा ही गुणगान
तो इस मृत्युलोक  में
तेरे नाम में ये अंतर क्यों है ?

ओ सर्वरक्षक , सर्वगुणों की खान
कैसा है तेरा विधान
जब सब तेरे बनाये हुए हैं
तो ये गोरे काले का अंतर क्यों है ?

तू है सबका प्यारा , तू है सबसे महान
कोई पढ़े गीता यहाँ , कोई पढ़े कुरआन
पूजे जब हर कोई तुझको
तो ये हिन्दू -मुस्लिम का अंतर क्यों है ?

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Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 13, 2012 at 11:31am

सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत बधाई !

Comment by yogesh shivhare on September 13, 2012 at 11:21am

बहुत ही सुन्दर रचना  योगी जी ...बेहतरीन लाजवाब...

तू है सबका प्यारा , तू है सबसे महान
कोई पढ़े गीता यहाँ , कोई पढ़े कुरआन
पूजे जब हर कोई तुझको
तो ये हिन्दू -मुस्लिम का अंतर क्यों है ?


Comment by Yogi Saraswat on August 31, 2012 at 11:23am

बहुत बहुत आभार श्री फूल सिंह जी ! आपका सहयोग और समर्थन लगातार मिल रहा है ! मेरे लिए ख़ुशी की बात है ! सहयोग बनाये रखियेगा  ! धन्यवाद

Comment by PHOOL SINGH on August 28, 2012 at 4:58pm

योगी जी प्रणाम,

बहुत ही भावपूर्ण रचना के लिए धन्यवाद........

फूल सिंह

Comment by Yogi Saraswat on July 4, 2012 at 2:35pm

आदरणीय श्री भ्रमर साब  , सादर नमस्कार ! आपको मेरे शब्द पसंद आये और आपने कीमती विचार दिया  , बहुत बहुत आभार ! आपके आशिरवाद और सहयोग की कामना करता हूँ !

Comment by Yogi Saraswat on July 4, 2012 at 2:33pm

आदरणीय रेखा जोशी जी , सादर नमस्कार ! आपको रचना पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! आपके आशीर्वाद और सहयोग की कामना करता हूँ !

Comment by Yogi Saraswat on July 4, 2012 at 2:32pm

आदरणीय श्री डॉ. सूर्य बाली जी , सादर नमस्कार ! आपको रचना पसंद आई , बहुत बहुत आभार ! सहयोग की कामना करता हूँ !

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 4, 2012 at 2:21pm

प्रिय योगी जी बहुत सुन्दर सन्देश देती रचना.... लेकिन काश ये अंतर कभी मिट पाता कुछ स्वार्थी लोग भाईचारे की जगह अपना उल्लू सीधा करते हैं लड़ाते रहते हैं 

कोई कहे तुझे खुदा ,कोई काहे तुझे भगवान् ?

प्रिय योगी जी आप का प्रश्नवाचक  अर्थ है
या कोई कहे  तुझे भगवान् ....

 

भ्रमर ५ 
Comment by Rekha Joshi on June 29, 2012 at 12:46pm

योगी जी ,सादर नमस्ते ,

कोई कहे तुझे खुदा , कोई काहे तुझे भगवान् 
करते जब सब तेरा ही गुणगान 
तो इस मृत्युलोक  में 
तेरे नाम में ये अंतर क्यों है ? ,बहुत बढ़िया रचना बधाई 
Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 29, 2012 at 12:00pm

योगी भाई नमस्कार ! बड़े दिनो बाद इतनी सुंदर कविता पढ़ने को मिली...कहाँ ग़ायब हो गए थे?  मजहबी एकता को दरसाती हुई सुंदर रचना के लिए कोटी कोटी बधाइयाँ !

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