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हरे भरे ये वृक्ष हमारे
 देते ठंडी ठंडी छांव |
सबको जरूरत रहती इनकी
 नगर हो या हो गाँव  ||


बसंत के प्यारे मौसम में
नई -नई पत्ती जब आती हैं  |
थोड़ी सी ही जब चले पवन
झूम झूम ये लहराती हैं  ||

आते हैं जब इन पर फल
इनकी डालें झुक जाती हैं |
ना करो तुम घमंड कभी
बिन बोले ये कह जाती हैं  ||

वृक्ष सूखकर भी देखो
कितने काम हमारे आते हैं |
स्वयं जलकर आदमी को देते रोटी
परमार्थ का पाठ हमें पढ़ते हैं  ||

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Comment

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Comment by Yogi Saraswat on March 19, 2013 at 2:33pm

bahut bahut dhanywad shri ajay kumar bohat ji

Comment by Yogi Saraswat on May 26, 2012 at 3:33pm

बहुत बहुत धन्यवाद श्री भ्रमर साब ! सहयोग बनाये रखियेगा

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 25, 2012 at 11:38pm

बसंत के प्यारे मौसम में 
नई -नई पत्ती जब आती हैं  |
थोड़ी सी ही जब चले पवन 
झूम झूम ये लहराती हैं  ||

आते हैं जब इन पर फल 
इनकी डालें झुक जाती हैं |
ना करो तुम घमंड कभी 
बिन बोले ये कह जाती हैं  ||

प्रिय योगी जी सुन्दर सन्देश देती रचना काश सब हरा भरा रहे ....भ्रमर ५ 

Comment by Yogi Saraswat on May 20, 2012 at 12:17pm

आदरणीय श्री रक्ताले जी सादर नमस्कार ! बहुत बहुत शुक्रिया ! आपका आशीर्वाद मिला !

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 20, 2012 at 8:26am

योगी जी
        सादर नमस्कार,
              आते हैं जब इन पर फल
        इनकी डालें झुक जाती हैं |
              ना करो तुम घमंड कभी
        बिन बोले ये कह जाती हैं  ||
 बहुत सुन्दर सन्देश देती काव्य रचना. यदि मानव इनसे कुछ सीख सके तो क्या बात हो. बधाई.

Comment by Yogi Saraswat on May 18, 2012 at 10:21am

bahut bahut dhnywad adarniya shri dr. surya baali ji . aapka aashirwad mila , khushi hui !

Comment by Yogi Saraswat on May 16, 2012 at 4:28pm

adarniya shri dr, baali aapka aashirwad mila , bahut bahut dhnywad !

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 16, 2012 at 2:58pm

योगी जी सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई !

आते हैं जब इन पर फल
इनकी डालें झुक जाती हैं |
ना करो तुम घमंड कभी
बिन बोले ये कह जाती हैं  ||

खूबसूरत अभिव्यक्ति !

Comment by Yogi Saraswat on May 16, 2012 at 12:35pm

bahut bahut dhanywad , adarniya rekha joshi ji !

Comment by Rekha Joshi on May 16, 2012 at 10:37am

स्वयं जल कर आदमी को देते रोटी ,

परमार्थ का पाठ पढाते है |बहुत बढ़िया ,बधाई  

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