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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"आदरणीय महेंद्र जी, लघुकथा को आपने इज्जत बख्शी। आपका शुक्रिया। "
9 hours ago
Mahendra Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"व्यक्ति के कई रूप होते हैं। इस बात को रेखांकित करती हुई अच्छी लघुकथा लिखी है आपने आ. मनन जी। हार्दिक स्वीकार कीजिए।"
11 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

आजकल(लघुकथा)

‘मीलॉर्ड! इसने मुझे हमेशा गलत ढ़ंग से छुआ है,मेरी रजा के खिलाफ भी।’‘और?’‘मुझे नींद से भी जगाता रहा है।’‘कब से?’‘शुरू से ही।’‘फिर भी?’‘तबसे जब मैं कली हुआ करता था।’ फूल ने अपनी वेदना का इजहार किया।जज ने अपने कोट में लगे फूल की तरफ देखा।वह अपनी जगह पर कायम था,शांतिपूर्वक।जज को तसल्ली हुई।‘फिर आज क्या हुआ?’‘आज तो कुछ नहीं हुआ,मीलॉर्ड! पर अब भी इसकी आदतें तब्दील नहीं हुईं।यह आज भी कलियों को परेशान करता है।फूलों की नींद हराम करता है।’‘तो फिर आपकी फरियाद क्या है?वादी कौन है, आप?’‘नहीं हुजूर।मैं तो आज…See More
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"आभार आदरणीय उस्मानी जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Manan Kumar singh's blog post रूप(लघुकथा)
"आदाब। वाह। परतें-दर-परतें खोलती... पोल खोलती... विवशतायें... व्यवस्थायें...बतलाती बेहतरीन शैली की लघुकथा। हार्दिक बधाई मुहतरम जनाब मनन कुमार सिंह साहिब।"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"कल वाली ट्रेन आज समय से है,यही क्या कम है? ट्रेन -परिचालन के हालातेहाल पर सटीक व्यंग्य है।आदरणीय तस्दीक जी,बधाइयां।"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"अपनी मातृभाषा,भारत की राजभाषा के प्रति अधिकांश विदेश - स्थापित हिंदुस्तानियों का यही व्यवहार उनकी असली मानसिकता को दर्शाता है। देश में रहनेवाले भी अधिकतर लोग छिटफुट अंग्रेजी बोल लेंगे,फिर हिंदी बोलनेवालों से खुद को जरा ऊपर समझकर चलेंगे।यह…"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आपका आभार आदरणीया, प्रतिभा पांडे जी। "
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आपका आभार आदरणीय भसीन जी। "
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीया प्रतिभा जी, आपकी 'मिर्ची' ने तो वाकई 'नारी-निकेतन' के बाबाजी और उनके सहयोगियों को मिर्ची का स्वाद समझा दिया। हाँ, बाट जोहें ........बाट जोयें,  नहीं। फड़कती लघुकथा के लिए आपको बधाइयाँ। शेष आदरणीय योगराज जी कह ही चुके…"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, मृत्यु की आकांक्षा लिए जीवीत व्यक्ति की मनोदशा का सम्यक चित्रण हुआ है आपकी लघुकथा में। बधाइयाँ लें। 'मर्सी किल्लिंग' की याद दिलाती रचना। "
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय उस्मानी जी, लघुकथा से आपका जुड़ाव मेरे प्रति भी स्नेह का पर्याय लगता है। आपकी सलाह काबिलेगौर है। वैसे प्रयोगधर्मी रचनाओं में तो परिमार्जन/संशोधन का अधिकतम क्षेत्र विद्यमान रहता ही है। शुक्रिया। "
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय भसीन जी, सहभागिता हेतु बधाई। विस्वासघात,दुरभिसंधि की वारदात होती रहती है। पर, यहाँ एकदम से ऐसा हो गया है,जो थोड़ा खटकता है। वैसे विषयवस्तु को सहेजने का आपका प्रयास अच्छा रहा है। हाँ, 'इंतिज़ार' शब्द की अनावश्यक पुनरावृति रचना के…"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय उस्मानी जी,लघुकथा को मान देने हेतु आपका बहुत बहुत आभार।आपका भी सुझाव ध्यातव्य प्रतीत होता है।धन्यवाद।"
Thursday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आपका आभार आदरणीय,महेंद्र जी।"
Thursday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आदरणीय चेतन भाई, आपने त्रुटियाँ इंगित करने के लिए आग्रह किया,इसलिए मैंने अपने हिसाब से कोशिश की है। जँचे,तो ठीक। नहीं, तो कोई बात नहीं। त्रुटियाँ टंकण जनित भी होती हैं। और आप चूँकि गंभीर लेखन में भरोसा  रखते हैं, इसीलिए मैंने इंगित करना मुनासिब…"
Thursday

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आजकल(लघुकथा)

‘मीलॉर्ड! इसने मुझे हमेशा गलत ढ़ंग से छुआ है,मेरी रजा के खिलाफ भी।’

‘और?’

‘मुझे नींद से भी जगाता रहा है।’

‘कब से?’

‘शुरू से ही।’

‘फिर भी?’

‘तबसे जब मैं कली हुआ करता था।’ फूल ने अपनी वेदना का इजहार किया।

जज ने अपने कोट में लगे फूल की तरफ देखा।वह अपनी जगह पर कायम था,शांतिपूर्वक।जज को तसल्ली हुई।

‘फिर आज क्या हुआ?’

‘आज तो कुछ नहीं हुआ,मीलॉर्ड! पर अब भी इसकी आदतें तब्दील नहीं हुईं।यह आज भी कलियों को परेशान करता है।फूलों की नींद हराम…

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Posted on October 1, 2022 at 5:00pm

रूप(लघुकथा)

रूपसी के कोठे पर रसिया लोगों की भीड़ है।सभी अपनी हाल की देहरादून यात्रा का बड़े हौसलापूर्वक वर्णन कर रहे हैं। लखू सेठ, "बड़ी सुखद यात्रा रही,रूपसी बाई।"

गगन बिहारी पांडे बोले,"लगा जैसे स्वर्ग सीधे धरती पर उतर आया हो।"

छोटू दादा: अपुन तो दंग रह गए वहां की अतिथि शाला देखकर।बड़ी भली व्यवस्था थी, देवि।"

अपने प्रति इतना आदरपूर्वक संबोधन सुनकर रूपसी चौंक -सी गई।

"कौन अतिथि शाला,दादा?" रूपसी ने सवाल किया।

"मंजरी सदन।"

"अच्छा।पहुंच ग....ए.....।"रूपसी कहते -कहते रूक…

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Posted on September 16, 2022 at 7:27pm — 5 Comments

दिन ढले,रातें गईं....(गजल)

2122 2122 2122 212

दिन ढले,रातें गईं,बढ़ती ही जाती पीर है

'याद कर जिंदा रहें कल',आपकी तकरीर है। 1

हो रहा सब कुछ हवा तो क्या हुआ तकदीर है

चूमने को पास मेरे आपकी तस्वीर है।2

ले गईं मोती बहाकर जब समद की शोखियाँ

बन रहे तब से घरौंदे और मन मतिधीर है।3

आंसुओं का मोल किसने है चुकाया इस जहां?

सोचता रख लूं संजो इनकी बड़ी तासीर है।4

फूल की ख्वाहिश लिए चलता रहा मैं रात -दिन

क्या हुआ अब सामने…

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Posted on September 8, 2022 at 7:08pm — 2 Comments

प्रतिद्वंदी (लघुकथा)

दो भिखारी बीच सड़क पर झगड़ रहे थे। ट्रैफिक दोनों तरफ रुका हुआ था।लोग मौन तमाशबीन बने थे।

"तुम मेरे मुहल्ले में क्यों घुसे?" पहला भिखारी चिल्लाया।

"कौन तेरा मुहल्ला?दूसरे ने सवाल दागा।

"वही बाबा लोगों वाला।वहां केवल मैं भीख मांग सकता हूं,तुम नहीं।"

"क्यों बे? मैं क्यों नहीं?"

"इसलिए कि सामने के मुहल्ले से केवल तुझे भीख मिलती है,मुझे कभी नहीं।तेरी दुआ ही वहां फलती है,मेरा आशीष नहीं।"

"मैं तो बाबा वाले मुहल्ले में भी दुआ बांट आता हूं।कुछ मांगता भी नहीं।"

"अरे,…

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Posted on August 22, 2022 at 1:00pm — 2 Comments

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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