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Manan Kumar singh
  • बिहार
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Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post चलो भी...(गजल)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई ।"
Oct 7
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post चलो भी...(गजल)
"आपका आभार आदरणीय वर्मा जी,सादर।"
Oct 2
Shyam Narain Verma commented on Manan Kumar singh's blog post चलो भी...(गजल)
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Oct 2
Manan Kumar singh posted a blog post

चलो भी...(गजल)

122  122  122  12चलो भी जला के दिखा दें दियेचले जा रहे वे अँधेरा किये।1बहुत दिन गये चोट खाते हुएरहेंगे कहाँ तक कहो मुँह सिये।2किये जा रहे मौज मस्ती बड़ीभुलाते हमें,जो हमारे हिये।3चले पाँव नंगे, मिलीं कुर्सियाँलगा आजकल हैं नशा वे पिये।4उड़ीं जो पतंगें, हुईं बेवफापिटे लोग लगता है' अपने किये।5 "मौलिक व अप्रकाशित"See More
Oct 2
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"बहुत बहुत आभार आदरणीय मोहन जी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"आपका आभार आदरणीया प्रतिभाजी। यह लघुकथा आपकी प्रेरणा का परिणाम कही जाएगी।आपने इंगित किया और रचना धरातल पर आ गयी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"आदरणीय तेजवीर भाईजी! 'स्त्री-पुरुष की मर्यादाओं पर प्रश्न-चिन्ह लगाने' से आपका आशय मैं नहीं समझ पाया।मेहरबानी होगी,यदि कुछ इंगित कर मुझे भी साथ ले लें तो।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"आभार आदरणीय तेजवीर जी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"आभार आदरणीया।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"आपका बहुत  बहुत आभार आदरणीय तेजवीर भाई जी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"आभार आदरणीय,उस्मानी जी। वस्तुतः, पुनरीक्षण का कार्य नहीं हो सका है।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"शुक्रिया आदरणीय आसिफ जी।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"जी शुक्रिया।"
Sep 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"      प्यास(विषय-स्त्री)         ----------------/ बूँद बड़बड़ाई,"मैं हूँ तो जिंदगी है...नहीं तो..।धरती मौन रही।सूखे होठों को तर करने की कोशिश की,पर नाकामी हाथ आई। हवाओं के थपेड़ों से उतरी बूँद धूल में विलीन हो…"
Sep 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"आभार आदरणीय।"
Sep 29
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"अच्छा आदरणीया,देखना पड़ेगा।आपका आभार,याद दिलाने के लिए।दूसरी लघुकथा आएगी।"
Sep 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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Manan Kumar singh's Blog

चलो भी...(गजल)

122  122  122  12

चलो भी जला के दिखा दें दिये

चले जा रहे वे अँधेरा किये।1

बहुत दिन गये चोट खाते हुए

रहेंगे कहाँ तक कहो मुँह सिये।2

किये जा रहे मौज मस्ती बड़ी

भुलाते हमें,जो हमारे हिये।3

चले पाँव नंगे, मिलीं कुर्सियाँ

लगा आजकल हैं नशा वे पिये।4

उड़ीं जो पतंगें, हुईं बेवफा

पिटे लोग लगता है' अपने किये।5 

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on October 2, 2019 at 7:28am — 3 Comments

गजल

जुबां से फूल झड़ते हैं मगर पत्थर उछालें वे

गजब दिलदार हैं, महबूब हैं बस खार पालें वे।1

लगाते आग पानी में, हमेशा ही लगे रहते

बुझे क्यूँ रार की बाती, नई तीली निकालें वे।2

दिलों की आग जब उठकर दिलों को यूँ बुलाती है

करेंगे और क्या बस शीत जल हर बार डालें वे।3

समझना हो गया मुश्किल चलन अब के रफ़ीकों का

सियाही लिख नहीं सकती है' कितना रोज सालें वे।4

हकीकत फासलों में कैद होकर छटपटाती है

सुनेंगे तो नहीं कुछ गाल जितना भी बजालें वे।5

"मौलिक व…

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Posted on September 16, 2019 at 8:10am — 6 Comments

गजल

चाँद से अब दोस्ती का सिलसिला चलता रहेगा

कब तलक वह मुस्कुराता भेदमय मामा रहेगा?1

कौड़ियों का खेल हम करते नहीं, सब जानते हैं

मुँह दिखाई तक हमारा हर कदम पहला रहेगा।2

दूरियों का गम नहीं करते कभी हम इश्क वाले

पाँव रखने में सतह पर जोर कुछ ज्यादा रहेगा।3

आज इसरो की तपिश में तन-बदन पिघला जरा-सा

कल सुहाने और होंगे साथ में नासा रहेगा।4

क्यूँ लजाना कोटि नजरें प्यार से फिर फिर निहारें

मन हुआ जाता व्यथित, पर हाथ में खाका रहेगा।5

वक्त की रुसवाइयों का…

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Posted on September 8, 2019 at 4:45pm — 2 Comments

गजल

फूल को काँटा चुभाना तो कभी अच्छा नहीं

घाव देकर मुस्कुराना तो कभी अच्छा नहीं।1

प्रेम के बिरवे उगें तो वादियाँ गुलजार हों

बेरहम पत्थर उठाना तो कभी अच्छा नहीं।2

रोशनी का सिलसिला चलने लगा,चलने भी' दो

भोर का सूरज चुराना तो कभी अच्छा नहीं।3

प्यास धरती की बढ़ा क्यूँ फिर चले काली घटा?

जल रहे को फिर जलाना तो कभी अच्छा नहीं।4

दाग औरों को लगाने को सभी बेताब हैं,

आँख से काजल उड़ाना तो कभी अच्छा नहीं।5

इल्म…

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Posted on September 1, 2019 at 8:30am — 2 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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