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Manan Kumar singh
  • बिहार
  • India
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narendrasinh chauhan commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(क्या करेगा...)
"सुन्दर रचना "
yesterday
Sushil Sarna commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(क्या करेगा...)
"सीढियाँ दी तोड़ जब ऊपर चढ़ेआदमी का आदमी चारा हुआ।7वाह आदरणीय मनन जी बहुत सुंदर ग़ज़ल बनी है ... दिल बधाई स्वीकार करें।"
Friday
Mohammed Arif commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(क्या करेगा...)
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब,शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
Friday
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल(क्या करेगा...)

2122 2122 212---------------क्या करेगा माँद का मारा हुआबन गया मुजरिम अभी हारा हुआ।1लोग कसते फब्तियाँ,बेजार वह'लाल' कल का आज बेचारा हुआ।2मौसमों की मार खाकर शीत जलपर्वतों से भी ढुलक खारा हुआ।3दी हवा जब,थरथरायीं चोटियाँ,छटपटाता आज,नक्कारा हुआ।4बंदगी में थे खड़े सब लोग तबअब ठिठोलीबाज जग सारा हुआ।5जो मिली कुर्सी,सलामत भी रहेहर दिशा में आज यह नारा हुआ।6सीढियाँ दी तोड़ जब ऊपर चढ़ेआदमी का आदमी चारा हुआ।7मुँह जबानी बाँटते ठंढ़क बहुतआसमानी आजकल पारा हुआ।8'मौलिक व अप्रकाशित'See More
Friday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(झूठ बहुत ...)
"आभारी हूँ आदरणीया।"
Friday
Manan Kumar singh added a discussion to the group बाल साहित्य
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गजल(पेड़)

बच्चो! मीठी बोली बोलोबातों में कुछ मिसरी घोलो।1काँटे लाख तुम्हे भटकायें,फूलों का उपहार सँजो लो।2पेड़ लगाओ,पानी दो फिरउनके अच्छे साथी हो लो।3फल-फूलों से घर भर देंगेछाँव तले मस्ती में डोलो।4पी जाते जहरीली गैसेंऑक्सीजन में खुद को तोलो।5काट रहे जो, उनको कह दो-'पेड़ लगाओ,आँसू धो लो'।6सूखी लकड़ी से घर बनतेचिड़ियों जैसे तुम भी सो लो।7'मौलिक व अप्रकाशित'See More
Jun 19
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गजल(आम)

22 22 22 22आम बनाता काम सुनो जीरोग रहें सुरधाम सुनो जी।1भिन्न बने सब,रंग अलग हैंइनके कितने नाम, सुनो जी।2बीजू की बलिहारी जाऊँबंबइया अभिराम सुनो जी।3पेड़ झुके जाते हैं लदकरटपकें, खाओ आम सुनो जी।4लटके ऊँचे,ढ़ेला मारो,गिरते,पूरनकाम सुनो जी।5रखवाला चिल्लाता धायेभागे और धड़ाम सुनो जी।6कितना-कितना नाच नाचता!एक रसीला आम सुनो जी।7'मौलिक व अप्रकाशित'See More
Jun 13
Manan Kumar singh added a discussion to the group बाल साहित्य
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गजल(सेबों की है बात निराली)

22 22 22 22सेबों की है बात निरालीइनके बिन कब पूरी थाली?1इनका सेवन कर लो,वरनाडॉक्टर करते हैं घर खाली।2कहते,एक अगर नित खाओरोगों की बज जाये ताली।3खेती भी कर सकते इनकीसुधरेगी हालत यूँ माली।4लाल लटकते,पात हरे सबकरते रहते हैं रखवाली।5झोंके खाकर गिरते नीचे,खाओ बच्चो! दे-दे ताली।6और खरीदे में देखो जी,लोगों ने है मोम लगा ली।7धोओ,पोंछो फिर तुम खाओ,सेहत की छाये हरियाली।8सिंदूरी सरकार बने हैं,बाँट रहे घर-घर वे लाली।9@मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jun 11
Manan Kumar singh replied to Manan Kumar singh's discussion गजल(केले की महिमा) in the group बाल साहित्य
"जी आदरणीय, आपकी भावनाओं से अभिभूत हूँ।"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Manan Kumar singh's discussion गजल(केले की महिमा) in the group बाल साहित्य
"आदरणीय मेरे कहे का तात्पर्य यह है कि इस रचना की विधा अवश्य ग़ज़ल विन्यास पर आधारित है. लेकिन शीर्षक ’केलेकी महिमा’ होने से इस रचना को शीर्षक तक केन्द्रित रखना श्रेयस्कर था. साथ ही, शीर्षक में ग़ज़ल आदि लिखने की कोई सार्थक आवश्यकता महसूस नहीं…"
Jun 6
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अक्ल के मारे हुए हैं..)
"आदरणीय महेंद्र जी,मेरा लघु प्रयास आपको भा गया,यह मेरे लिए प्रेरणाकारक है।आपका हार्दिक आभार,सादर।"
Jun 5
Mahendra Kumar commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(अक्ल के मारे हुए हैं..)
"अक्ल के मारे हुए हैंहम सभी हारे हुए हैं। ...वाह! छोटी बह्र में बढ़िया अशआर कहे हैं आपने आ. मनन जी. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jun 5
Manan Kumar singh replied to Manan Kumar singh's discussion गजल(केले की महिमा) in the group बाल साहित्य
"पाँच बसंतों की महिमा मेरी गजलें सुनकर याद कर लेती हैं,मुझे सुनाती भी हैं।"
Jun 5
Manan Kumar singh replied to Manan Kumar singh's discussion गजल(केले की महिमा) in the group बाल साहित्य
"आदरणीय सौरभ जी,स्नेहिल सुझाओं से कृतार्थ हूँ।आपकी प्रेरणा मेरे लिए अमूल्य है।रही बात गजल और नाम वगैरह की,तो यह रचना महिमा(पोती)की फरमाईश का नतीजा है।अतः,रचना के क्रम में स्वतः ही ये सब घटित हुए हैं,अलग सेकोई आयास नहीं किया गया है,सादर।पुनश्च, बहुत…"
Jun 5

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Manan Kumar singh's discussion गजल(केले की महिमा) in the group बाल साहित्य
"केले की महिमा को केले की विशेषताओं के इर्द-ग़िर्द ही रहने देना था. रचना सुन्दर बन पड़ी है. लेकिन ग़ज़ल कहने और तदनुरूप बरतने के फेर में कथ्य के लिहाज़ से प्रस्तुति नियत नहीं रह पायी है. जबकि बाल-रचनाओं के लिए ऐसा होना आवश्यक हुआ करता है. ऐसा ही होना ही…"
Jun 5
Manan Kumar singh added a discussion to the group बाल साहित्य
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गजल(केले की महिमा)

22 22 22 22केले की है महिमा,भाईउसकी होती देख बड़ाई।1कच्चा, सब्जी में आ जातापक जाये फिर गटको भाई।2छिलके दूर कहीं रखना जी,पाँव पड़ें, तो राम दुहाई।3कब्ज हरेगा, रक्त बढ़ेगा,लौह करेगा तन, हरषाई।4बाबाजी ने गज्ल बनायीगाते चलते महिमा भाई।5नाम न आने पर देखा हैसोमूजी रहते छड़िआई।6बाल बचे जो,वे लहरायें,छतरी ओढ़े टकलू नाई।7@मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jun 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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गजल(क्या करेगा...)

2122 2122 212

---------------

क्या करेगा माँद का मारा हुआ

बन गया मुजरिम अभी हारा हुआ।1



लोग कसते फब्तियाँ,बेजार वह

'लाल' कल का आज बेचारा हुआ।2



मौसमों की मार खाकर शीत जल

पर्वतों से भी ढुलक खारा हुआ।3



दी हवा जब,थरथरायीं चोटियाँ,

छटपटाता आज,नक्कारा हुआ।4



बंदगी में थे खड़े सब लोग तब

अब ठिठोलीबाज जग सारा हुआ।5



जो मिली कुर्सी,सलामत भी रहे

हर दिशा में आज यह नारा हुआ।6



सीढियाँ दी तोड़ जब ऊपर… Continue

Posted on June 23, 2017 at 8:53am — 3 Comments

गजल(अक्ल के मारे हुए हैं..)

2122 2122

अक्ल के मारे हुए हैं

हम सभी हारे हुए हैं।1



आज मसले बेवजह के

देखिये नारे हुए हैं।2



जो नहीं थोड़ा सुहाये,

आँख के तारे हुए हैं।3



लूटते हैं जिस्म-ईमां

जान हम वारे हुए हैं।4



दान कर दीं कश्तियाँ भी

आज बेचारे हुए हैं।5



कान देते, बात बनती

वे उबल पारे हुए हैं।6



बाग भर मैं देख आया,

तिक्त फल सारे हुए हैं।7



सब लिये हैं गीत अपने

भाव को टारे हुए हैं।8



हंस ढूँढ़े, मिल… Continue

Posted on June 2, 2017 at 8:24pm — 13 Comments

गजल(झूठ बहुत ...)

22 22 22 22

झूठ बहुत तुमने बोले हैं

भाव सभीने ही तोले हैं।1



नासमझी का दामन पकड़े

छोड़े तुमने बस गोले हैं।2



कर्त्ता हो,बलिहारी समझो,

शब्दों के पीछे झोले हैं।3(झटके)



निज करनी मत पर्दा डालो,

राज कहाँ हमने खोले हैं?4



लिंग-वचन नियमित रहने दो,

कथ्य बहुत क्यों कर डोले हैं?5



चाहे कुछ भी कर लोगे क्या?

तथ्यों के अपने झोले हैं।6(झोलियाँ)



तुमने कुछ समझा है?,बोलो-

शेर बने क्या मुँहबोले हैं?7

@'मौलिक… Continue

Posted on May 28, 2017 at 10:30pm — 9 Comments

गजल( वह जमीं पर आग यूँ बोता रहा)

2122  :    2122         212 

::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

वह जमीं पर आग यूँ बोता रहा

और चुप हो आसमां सोया रहा।1



आँधियों में उड़ गये बिरवे बहुत

साँस लेने का कहीं टोटा रहा।2



डुबकियाँ कोई लगाता है बहक

और कोई खा यहाँ गोता रहा।3



पर्वतों से झाँकती हैं रश्मियाँ

भोर का फिर भी यहाँ रोना रहा।4



हो…

Continue

Posted on May 22, 2017 at 8:27am — 7 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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"आ0 अनिता मौर्या जी शुक्रिया ।"
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
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"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आप बिलकुल सही हैं, यह १६ १० मात्रा पर ही है, फुर्र हुई चिट्ठी…"
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