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Ravi Prabhakar
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Ravi Prabhakar left a comment for Ravi yadav
"रवि भाई हार्दिक अभिनंदन"
Jan 31
Ravi Prabhakar commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post जनाजा
"आदरणीय आशुतोश जी,  प्रस्‍तुत लघुकथा का कथानक बढ़ीया है । परन्‍तु भाषा अस्‍वभाविक सी लगी।  जैसे इस संवाद में / नहीं बेटा! ऐसा नहीं है, मैंने और कई रचनाकारों ने इनकी रचना पर प्रतिक्रिया स्वरुप कुछ कमियों को इंगित किया था तो इनके…"
Nov 14, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"अच्‍छी लघुकथा आदरणीय तेजवीर सिंह जी । बधाई स्‍वीकारें ।"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"विषय को परिभाषित करने का सफल प्रयास। परन्‍तु कालखंड आभासित हो रहा है। सादर"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"ओबीओ जिन्‍दाबाद । प्रदत्‍त विषय को जिस जीवन्‍तता के साथ परिभाषित किया गया है वह सराहनीय है । आपकी लघुकथाओं की सदैव प्रतीक्षा रहती है आदरणीय लड़ीवाला जी । सादर"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"विषय को परिभाषित करने का बढ़ीया प्रयास । हार्दिक शुभकामनाएं"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"आदरणीय प्रधान संपादक की टिप्‍पणी से अक्षाक्षर सहमत । मैं जो कहना चाहता था वह उन्‍होनें कह दिया। सादर"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"बहुत बढ़ीया प्रैजेन्‍टेशन व सार्थक संदेश के साथ विषय को परिभाषित करने का शानदार प्रयास । हार्दिक शुभकामनाएं ।"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"आदरणीय भरदान संपादक महोदय, आपकी लघुकथा पठन के दौरान काफी पशोपेश में रहा। सबसे पहले तो लगा कि लघुकथा में केवल भावुकता तत्‍व की ही प्रधानता है। फिर महसूस किया कि यदि लघुकथा में भावुकता (संवेदना) ही न हो तो वह लघुकथा ही क्‍या? केवल घुंघराले बाल…"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"प्रेषित लघुकथा दिए गए विषय को बहुत अच्‍छे से परिभाषित कर रही है। लघुकथा का शीर्षक चयन भी बहुत बढ़ीया है।  जो बात सबसे अच्‍छी लगी वो है लघुकथा में परिवेश निर्माण । शाम की पीली-पीली धूप, मफलर को कसकर लपेटना, बिखरा हुआ कांच - हालांकि…"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"आदरणीय कल्‍पना जी, प्रदत्‍त विषय से न्‍याय करती इस लघुकथा का प्रस्‍तुतिकरण बढ़ीया है परन्‍तु लघुकथा अपना प्रभाव देने में पूरी तरह कामयाब नहीं हुई। अभी इस पर कुछ और परिश्रम की आवश्‍यकता महसूस हो रही है। सादर"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"प्रदत्‍त विषय 'फरिश्‍ते' को सार्थक करने का अच्‍छा प्रयास किया गया है परन्‍तु लघुकथा अभी मारक नहीं बनी । लेखकीय प्रवेश के संदर्भ में आदरणीयप्रधान संपादक जी की टिप्‍पणी पर गौर फरमाएं । आयोजन में सहभागिता हेतु हार्दिक…"
Oct 31, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"आदरणीय गोपाल श्रीवास्‍तव जी लघुकथा का प्रस्‍तुतिकरण बहुत प्रभावशाली है, पूरा दृश्‍य आंखों के सामने घूम सा गया। बहरहाल नाटकीयता कुछ अधिक हो गई । सादर"
Oct 30, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"बढ़ीया प्रयास आदरणीय राहिला जी । इस लघुकथा में मुझे सबसे ज्‍यादा पसंद आया /मैं भी बम धमाकों की.....,लेकिन अब्बा की क़सम मैनें कुछ नहीं किया। मेरा तो नाम ही काफ़ी था आतंकी होने के लिए।"कहते हुए वह नौजवान, बच्चों सा सिसक पड़ा/ ये संवाद । …"
Oct 30, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"बहुत बढ़ीया लघुकथा आदरणीय विजय जी । एकदम सधी व प्रवाहमयी लघुकथा । लघुकथा का शीर्षक भी प्रभावशाली । सादर शुभकामनाएं ।"
Oct 30, 2017
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"बढ़ीया प्रयास आदरणीय भाई जी । कथोपकथन से पता चल रहा है कि चर्चा का मूल विषय श्रेष्‍ठ पुस्‍तक के बारे में है इसलिए कथा की शुरूआती पंक्‍ित / विद्वत जनों की एक बहुत बड़ी सभा लगी थी जिसमें विभिन्न धर्म और संस्कृति के लोग एकत्र थे। चर्चा का…"
Oct 30, 2017

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A Straight Forwerd Man.

Ravi Prabhakar's Blog

सिसकियां (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘चल अब छोड़, जाने भी दे! इसमें इतना रोने की क्या बात है, यह कोई नयी बात थोड़े ही है। हम जैसे लोगों के साथ तो ये हमेशा से ही होता आया है। तू इतने टेसुए क्यों बहा रही हो ? वैसे गल्ती भी तेरी ही है, अगर तुझे प्यास लगी थी तो अपने पीने का पानी बाहर ही तो रखा होता है फिर तू रसोईघर में क्यों गई ?’ सिसक रही अपनी पत्नी को वो दिलासा दे रहा था।

‘मैं तो यही सोच कर इनके यहां काम करने को लगी थी कि चलो पढ़-लिख कर अफसर बन गए है तो क्या हुआ, हैं तो ये हम लोगों में से ही ना। पर ये लोग... कोई और हमारे…

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Posted on January 18, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

मुखौटे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

 ‘बेशक हमारे भाई साहिब को देश छोड़े एक अर्सा हो गया यू.एस.ए. में उन्होनें अपना बिजनेस एम्पायर खड़ा कर लिया है पर उन्हें अपने देश और अपनी संस्कृति से अब भी बहुत प्यार है। इसलिए वो अपने बेटे के लिए मेम नहीं बल्कि एक सुसंस्कृत भारतीय बहू चाहते है।’ शहर के नामचीन बिल्डर अपनी डाॅक्टर पत्नी सहित मेयर साहिब के घर उनकी इकलौती बेटी के लिए अपने भतीजे के रिश्ते के सिलसिले के लिए बतिया रहे थे।

‘यह तो बहुत अच्छी बात है। मेरी बहन व बहनोई भी यू.एस.ए. सिटीज़न हैं । वो आपके भाई साहिब को बहुत…

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Posted on December 19, 2015 at 1:46pm — 9 Comments

संत्रास (लघुकथा) : रवि प्रभाकर

ढलती शाम के वक्त खचाखच भरी बस में सेंट की खूशबू में लबालब जैसे ही वह दो लड़कियां चढ़ी तो सभी का ध्यान उनके जिस्म उघाड़ू तंग कपड़ों की ओर स्वत ही खिंचता चला गया । बस की धक्कमपेल का नाजायज़ फायदा उठाते हुए कुछ छिछोरे किस्म के लड़के रह रह कर उन्हे स्पर्श करते हुए बीच बीच में कुछ असभ्य कमेंट भी कर रहे थे परन्तु वो दोनों लड़कियां इन सबसे बेपरवाह आपस में हँस-हँस कर बातें करने में व्यस्त थीं।

‘इधर बैठ जाओ बेटी !’ सीट पर बैठा हुआ एक बुर्जुग बच्चे को सीट से अपनी गोद में बिठा कर थोड़ा एक तरफ…

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Posted on July 21, 2015 at 8:30am — 22 Comments

चट्टे-बट्टे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘मंत्री जी ! ‘भाई’ अब फिर से नयी ‘डिमांड’ कर रहा है। पिछले हफ्ते डी.आई.जी. साहिब को ‘सेवा’ पहुँचाई है और अभी ‘पार्टी फंड’ भी जमा करवाना है । आपको तो पता ही है कि आपके इलेक्शन के वक्त भी हम किसी भी तरह पीछे नहीं हटे थे।  तो फिर कभी ‘भाई’ तो कभी पुलिस।  ऐसे कैसे चलेगा ?’

‘अरे परेशान काहे हो रहे हो। अब अकेले तुम्हारी वजह से ही तो इलेक्शन नहीं न जीते हैं हम... सभी ने साथ दिया था हमारा और ध्यान भी तो सभी का ही रखना पड़ेगा ना। और तुम घबरा काहे रहे हो, ऊ ससुरा जो पुल बना रहे हो ना उसमें से दो…

Continue

Posted on July 18, 2015 at 12:08am — 9 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 1:26am on May 1, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आदरणीय रवि प्रभाकर जी , लघु-कथा पर अपनी द्वितीय प्रस्तुति पर आपकी प्रतिक्रिया अभी विलम्ब से देखी , आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद। सादर।
At 4:34pm on September 30, 2014, MAHIMA SHREE said…

नमस्कार आ. रवि प्रभाकर भाई साहब ..स्वागत है :)

At 1:57pm on January 7, 2014, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री रवि प्रभाकर  जी आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित \ पुरस्कृत  किये जाने पर हार्दिक बधाई और नव वर्ष की  हार्दिक शुभकामनायें !!

At 6:59pm on January 6, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी

सर्व् श्रेष्ठ होना चरम उपलब्धि है i ओ बी ओ का यह सम्मान आपके आत्म  विश्वास को अधिकाधिक बढ़ाएगा , यही कामना है i

At 7:26pm on January 5, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:25am on January 1, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 7:02pm on October 21, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 3:40pm on October 20, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 12:40pm on October 20, 2010, Admin said…

 
 
 

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