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पुस्तक समीक्षा Discussions (112)

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Featured Discussions

''परों को खोलते हुए'' की काव्यात्मक समीक्षा....................आदित्य चतुर्वेदी........समीक्षक

''परों को खोलते हुए'' की काव्यात्मक समीक्षा....................आदित्य चतुर्वेदी........समीक्षक //1// देखिए तीस परों को खोलते हुएअक्षर-अक्ष…

Started by aditya chaturvediLatest Reply

''छन्द काव्यामृत"...-----------------.रचनाकार- डा0 आशुतोष बाजपेयी

!!! पुस्तक समीक्षा !!! ''छन्द काव्यामृत"..... ............पारंपरिक छन्द विधाओं का परिपालन करते हुए सरस, सहज और धारा प्रवाह विचार, बोधगम्य…

Started by केवल प्रसाद 'सत्यम'Latest Reply

Discussions Replies Latest Activity

पुस्तक समीक्षा : मोहरे (उपन्यास)

समीक्षा पुस्तक   : मोहरे (उपन्यास) लेखक              : दिलीप जैन मूल्य               :  रुपये 150/- प्रकाशक           : बोधि प्रकाशन, जयपुर…

Started by Ashok Kumar Raktale

0 Feb 19, 2024

पुस्तक समीक्षा: सुर्ख़ लाल रंग (कहानी संग्रह)

पुस्तक का नाम : सुर्ख़ लाल रंग विधा: कहानी सँग्रह लेखक: विनय कुमार  प्रकाशक: अगोरा प्रकाशन  मूल्य : 499/- रु (सज़िल्द) 160 /- (अज़िल्द) प्रथम…

Started by KALPANA BHATT ('रौनक़')

1 Sep 18, 2023
Reply by विनय कुमार

पुस्तक समीक्षा : ‘कहे जैन कविराय’ (कुण्डलिया संग्रह)

रचनाकार : अशोक कुमार जैन प्रकाशक : अमोघ प्रकाशन, गुरुग्राम-122001(हरियाणा) मूल्य : रूपये १००/- मात्र.                ‘कहे जैन कविराय’ कुण…

Started by Ashok Kumar Raktale

0 Sep 30, 2022

समीक्षा : चाक पर घूमती रही मिट्टी

पुस्तक : चाक पर घुमती रही मिट्टी (ग़ज़ल संग्रह) रचनाकार : आराधना प्रसाद प्रकाशक : ग्रथ अकादमी, 19, पहली मंज़िल, 2, अंसारी रोड,दरियागंज, नई दि…

Started by Ashok Kumar Raktale

0 Jul 9, 2022

"लघुकथा कौमुदी"  -  यथार्थ और कल्पना के बीच की ज़मीन पर पनपती लघुकथाएँ. . .

"लघुकथा कौमुदी"  -  यथार्थ और कल्पना के बीच की ज़मीन पर पनपती लघुकथाएँ. . . वर्तमान में लघुकथा, साहित्य की एक ऐसी विधा बन चुकी है जिसकी कथ्…

Started by VIRENDER VEER MEHTA

0 May 1, 2022

समीक्षा -समकालीन मुकरियाँ

समीक्षा : ‘समकालीन मुकरियाँ ’ सम्पादक – त्रिलोक सिंह ठकुरेला ISBN : 978-81-95138-18-0 प्रकाशक – राजस्थानी ग्रन्थागार, जोधपुर मूल्य : रुपय…

Started by Anamika singh Ana

1 Jan 24, 2022
Reply by Ashok Kumar Raktale

समीक्षा : 'न बहुरे लोक के दिन' (नवगीत संग्रह)

‘न बहुरे लोक के दिन’ रचनाकार – अनामिका सिंह प्रकाशक – बोधि प्रकाशन, जयपुर (राज.) ISBN : 978-93-5536-091-5 मूल्य -  रूपये 250/-             …

Started by Ashok Kumar Raktale

2 Jan 14, 2022
Reply by Ashok Kumar Raktale

समीक्षा पुस्तक : दोहा-सागर

समीक्षा : दोहा-सागर रचयिता : पंकज शर्मा ‘तरुण’ प्रकाशक : उत्कर्ष प्रकाशन, 142, शाक्य पूरा, कंकर खेडा, मेरठ केंट-२५०००१, (उ.प्र.) प्रथम संस्…

Started by Ashok Kumar Raktale

0 May 1, 2020

देवभूमि के इतिहास का गौरव-पृष्ठ है –यह उपन्यास ‘चन्द्रवंशी’ ::डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

अतीत से जुड़ना भी एक मानवीय प्रवृत्ति है I जिन साहित्यकारों को अतीत से मोह होता है वे प्रायशः भारतीय इतिहास के किसी गौरवशाली पृष्ठ को टटोलते…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Dec 31, 2019

समीक्षा पुस्तक : टुकड़ा-टुकड़ा धूप (दोहा संकलन)

पुस्तक : टुकड़ा-टुकड़ा धूप (दोहा संकलन) सम्पादक : रेखा लोढ़ा ‘स्मित’ सह-सम्पादक : वीरेंद्र कुमार लोढ़ा मूल्य : रूपये 150/- मात्र प्रकाशक : बोधि…

Started by Ashok Kumar Raktale

1 May 7, 2019
Reply by Saurabh Pandey

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दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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