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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011. 7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

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धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"‘संपदादकीय’ इस एक शब्द ने ही सारा कुछ कह दिया।"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"इस प्रयास के लिए दाद कुबूल कीजिए दुष्यंत जी"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"अविनाश जी, बहुत अच्छे अश’आर हैं। दाद कुबूलें"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"आदरणीय योगराज जी से पूरी तरह सहमत हूँ। दिली दाद कुबूल कीजिए हरजीत सिंह जी "
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत खूब संदीप जी, दाद कुबूलें"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"अच्छी कोशिश है शैलेन्द्र जी, बधाई स्वीकारें। इसी पृष्ठ पर नीचे कुछ कड़ियाँ दी हुई हैं। ग़ज़ल समझने के लिए उन्हें जरूर पढ़ें"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत बहुत शुक्रिया दुष्यंत जी"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत खूब मजाज़ जी, शानदार अश’आर हैं, दाद कुबूलें"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"शानदार कोशिश है। गिरह जिस तरह बाँधने की कोशिश की है आपने वो बहुत शानदार है। दिली दाद कुबूल करें"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत खूब"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत खूब"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत खूब सतीश जी, बधाई स्वीकारें"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत खूब"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है अरुण जी, जुगनू और आइने वाले अश’आर कहर ढा रहे हैं। दिली दाद कुबूल कीजिए। "
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत बहुत धन्यवाद अरुण जी"
Tuesday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बहुत बहुत शुक्रिया अविनाश जी"
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

कविता : अम्ल, पानी और मैं

Posted on May 5, 2012 at 12:00am 11 Comments

दफ़्तर के काम में डूबा हुआ था मैं
अचानक किसी शब्द से चिपकी चली आई तुम्हारी याद
जैसे ढेर सारे ठंढे सांद्र अम्ल में गिर जाय एक बूँद पानी
और उत्पन्न हुई ढेर सारी ऊष्मा
पानी की तैरती बूँद को झट से उबाल दे
अम्ल छलक पड़े बाहर
कुछ मेरे कपड़ों पर
कुछ मेरे चेहरे पर
यूँ अचानक मत आया करो
मेरे भीतर का अम्ल मुझे जला देता है
मैं खुद आउँगा कतरा कतरा तुम्हारे पास
जैसे ढेर सारे पानी में खो…
Continue

नई कविता : कूप मंडूक

Posted on May 3, 2012 at 5:55pm 10 Comments

पुरखों के कुँए को ही दुनिया समझना

कूप मंडूकता है



कुँए को अपना घर समझना

पाँवों में पड़ी बेड़ियाँ हैं



कुँए की दीवारों को अभेद्य समझना

खुद को खुद की नज़रों में

दुनिया का विजेता साबित करने की कोशिश है



खुद को विश्व विजयी समझना

चुनौतियों से हारकर आलस्य का जहर पीना है



खुद को कूप मंडूक समझना

बाहर की रोशनी का अहसास है



कुँए की दीवारों के बाहर दुनिया की कल्पना

कुँए से बाहर जाने वाली सुरंग है



दुनिया के बाहर… Continue

ग़ज़ल : है मरना डूब के मेरा मुकद्दर भूल जाता हूँ

Posted on April 20, 2012 at 9:04pm 12 Comments

है मरना डूब के मेरा मुकद्दर भूल जाता हूँ
तेरी आँखों में भी है एक सागर भूल जाता हूँ

ये दफ़्तर जादुई है या मेरी कुर्सी तिलिस्मी है
मैं हूँ जनता का एक अदना सा नौकर भूल जाता हूँ

हमारे प्यार में इतना तो नश्शा अब भी बाकी है
पहुँचकर घर के दरवाजे पे दफ़्तर भूल जाता हूँ

तुझे भी भूल जाऊँ ऐ ख़ुदा तो माफ़ कर देना
मैं सब कुछ तोतली आवाज़ सुनकर भूल जाता हूँ

न जी सकता हूँ तेरे बिन, न मरने दे तेरी आदत
दवा हो या जहर दोनों मैं रखकर भूल जाता हूँ

कविता : सिस्टम

Posted on April 11, 2012 at 8:30pm 8 Comments

मच्छर आवाज़ उठाता है

‘सिस्टम’ ताली बजाकर मार देता है

और ‘मीडिया’ को दिखाता है भूखे मच्छर का खून

अपना खून कहकर

 

मच्छर बंदूक उठाते हैं

‘सिस्टम’ ‘मलेरिया’ ‘मलेरिया’ चिल्लाता है

और सारे घर में जहर फैला देता है

 

अंग बागी हो जाते हैं

‘सिस्टम’ सड़न पैदा होने का डर दिखालाता है

बागी अंग काटकर जला दिए जाते हैं

उनकी जगह तुरंत उग आते हैं नये अंग

 

‘सिस्टम’ के पास नहीं है खून बनाने वाली…

Continue

Comment Wall (17 comments)

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At 7:12am on December 24, 2011, neeraj said…
अदित्तीय प्रकरण है बी पर हमको नाज है  
हिम्मतवालो के चरणों में झुकता सदा समाज है . के लिए धन्याबाद आप सभी का नीरज 

 

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
At 1:50pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aap dawara housala aphazai ke liye shukriya.
At 10:01am on January 10, 2011, DEEPAK SHARMA KULUVI said…
BAHOOT KHOOB
At 10:00am on January 10, 2011, DEEPAK SHARMA KULUVI said…

DHANYABAAD DHARMENDER JI

KULUVI

09136211486

At 7:17pm on December 31, 2010, Veerendra Jain said…
Dharmendra ji... bahut bahut badhai aapko....
At 6:35pm on December 31, 2010, Ganesh Jee "Bagi" said…
धर्मेन्द्र भाई, ओपन बुक्स ऑनलाइन प्रबंधन द्वारा "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member
of the Month) चुने जाने पर आपको बहुत बहुत शुभकामना, बधाई हो बधाई,
At 6:33pm on December 31, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…
OBO प्रबंधन द्वारा महीने के सक्रिय सदस्य चुने जाने पर बहुत बहुत बधाई.....आशा ही नही पूर्ण विस्वास है की आपका सहयोग हमलोगों को निरंतर इसी प्रकार मिलता रहेगा.....

बहुत बहुत बधाई हो....

CONGRATS DHARMENDRA BHAI.....
At 6:26pm on December 31, 2010, Admin said…
आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में
आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य"
(Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका प्यार इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
आपका
एडमिन
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 6:11pm on December 31, 2010, Navin C. Chaturvedi said…
AMOM बनने पर बहुत बहुत बधाई डी के भाई| आपको सम्मानित कर ओबिओ परिवार गौरवान्वित हुआ|
 
 
 

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