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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
  • Male
  • Raigarh, CG
  • India
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी
7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011.

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर नमस्कार  वाह वाह लाजबाब गजल हुई  माथे से होंठों तक का सफर न मैं तय कर पाया रस्ता ऊबड़-खाबड़ था ऊपर से थी नाक बड़ी- क्या कहने  बधाई स्वीकारें "
Jul 17
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी (ग़ज़ल)

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ीमैं दस साल घटा लेता तू होती दस साल बड़ीमाथे से होंठों तक का सफर न मैं तय कर पायारस्ता ऊबड़-खाबड़ था ऊपर से थी नाक बड़ीप्यार मुहब्बत की बातें सारी भूल चुका था मैंकिस मनहूस घड़ी में फिर तुझसे मेरी आँख लड़ीलाइलाज है रोग मगर कम हो जायेगी पीड़ागर तू माथे पर रख दे लब की बूटी और जड़ीइस दुनिया की नज़रों में है बदनाम बड़ा ‘सज्जन’ तू भी हो जायेगी सुन मत हो मेरे साथ खड़ी--------(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Jul 13
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'अपने साहब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो' इस मिसरे में क़ाफ़िया दोष है,सहीह शब्द है "साहिब",देखियेगा "
Jan 28
Shyam Narain Verma commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेंद्र सिंह जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Jan 22
Manoj kumar Ahsaas commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"बड़ी रदीफ़ क्या आपने अच्छी गजल पेश की है मित्र हार्दिक शुभकामनाएं"
Jan 21
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)
"वाह..वाह..क्या कहने इस बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई, आ. भाई सर्मेन्द्र जी .."
Jan 21
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २जब चाहें तब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होदुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होये दुनिया बेहतर हो दिन भर ऐसे काम करें फिर सारी शब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होअट्ठारह घंटे खटते जो पूँजी की ख़ातिरअपने साहब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होजैसे बचपन में करते थे बिन सोचे समझे फिर बेमतलब इश्क़ करें तो कितना अच्छा होनफ़रत का विष पी-पीकर जो जॉम्बी बन फिरतेवो भी यारब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो‘सज्जन’ इक दिन सदियों की नफ़रत से तंग आकर सारे मज़हब इश्क़ करें तो कितना अच्छा…See More
Jan 19
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,  Dr. Geeta Chaudhary जी, Samar kabeer साहब और  Mahendra Kumar जी"
Jan 18
Mahendra Kumar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"बढ़िया नवगीत है आदरणीय धर्मेन्द्र जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Dec 4, 2019
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,बहुत सुंदर नवगीत लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 28, 2019
Dr. Geeta Chaudhary commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"आदरणीय धर्मेन्द्र जी, बहुत अच्छा लगा गीत, बहुत बधाई आपको।"
Nov 27, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post फुलवारी बन रहना (नवगीत)
"आ. भाई धर्मेंद्र जी, सादर अभिवादन। सुंदर गीत की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ।"
Nov 26, 2019
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

फुलवारी बन रहना (नवगीत)

जब तक रहना जीवन मेंफुलवारी बन रहनापूजा बनकर मत रहनातुम यारी बन रहनादो दिन हो या चार दिनों काजब तक साथ रहेइक दूजे से सबकुछ कह देंऐसी बात रहेसदा चहकती गौरैया सीप्यारी बन रहनाफटे-पुराने रीति-रिवाजों को न ओढ़ लेनागली मुहल्ले का कचराघर में न जोड़ लेनादेवी बनकर मत रहनातुम नारी बन रहनागुस्सा आये तो जो चाहोतोड़-फोड़ लेनाप्यार बहुत आये तोये तन-मन निचोड़ लेनाआँसू बनकर मत रहनासिसकारी बन रहना-----------------(मौलिक एवं अप्रकाशित)See More
Nov 25, 2019
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post तेरा हाथ हिलाना (नवगीत)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय dandpani nahak जी"
Nov 3, 2019
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post तेरा हाथ हिलाना (नवगीत)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी"
Nov 3, 2019
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post तेरा हाथ हिलाना (नवगीत)
"इस उत्साहवर्द्धन के लिये हृदयतल से शुक्रगुज़ार हूँ आदरणीय  Saurabh Pandey जी। स्नेह बना रहे।"
Nov 3, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
रायगढ़, छत्तीसगढ़
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी (ग़ज़ल)

काश कहीं से मिल जाती इक जादू की हाथ घड़ी

मैं दस साल घटा लेता तू होती दस साल बड़ी

माथे से होंठों तक का सफर न मैं तय कर पाया

रस्ता ऊबड़-खाबड़ था ऊपर से थी नाक बड़ी

प्यार मुहब्बत की बातें सारी भूल चुका था मैं

किस मनहूस घड़ी में…

Continue

Posted on July 12, 2020 at 11:29pm — 1 Comment

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो (ग़ज़ल)

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २

जब चाहें तब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

दुनिया में सब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

ये दुनिया बेहतर हो दिन भर ऐसे काम करें 

फिर सारी शब इश्क़ करें तो कितना अच्छा हो

अट्ठारह घंटे खटते जो…

Continue

Posted on January 18, 2020 at 11:25pm — 4 Comments

फुलवारी बन रहना (नवगीत)

जब तक रहना जीवन में

फुलवारी बन रहना

पूजा बनकर मत रहना

तुम यारी बन रहना

दो दिन हो या चार दिनों का

जब तक साथ रहे

इक दूजे से सबकुछ कह दें…

Continue

Posted on November 25, 2019 at 7:33pm — 5 Comments

तेरा हाथ हिलाना (नवगीत)

ट्रेन समय की 

छुकछुक दौड़ी

मज़बूरी थी जाना

भूल गया सब

याद रहा बस 

तेरा हाथ हिलाना

तेरे हाथों की मेंहदी में

मेरा नाम नहीं…

Continue

Posted on October 31, 2019 at 8:07pm — 12 Comments

Comment Wall (23 comments)

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At 12:19am on September 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय बड़े भाई  धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:41pm on September 22, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय धर्मेन्द्र जी

At 11:20am on September 22, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:23pm on December 13, 2012, seema agrawal said…

स्वागत है धर्मेन्द्र जी 

At 6:18pm on September 22, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:06am on September 22, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई धर्मेन्द्रजी, 

सरल, सफल, सहज, सुगढ़
सुफल, सुमिल, सुधी
सस्वर.. .
संयत, सुहृद, सुभाव, सशब्द
संभव सदा
सबल-प्रखर.. .
शुभभावना-शुभकामना-सुसंस्मरण संप्रेष्य है !

अनेकानेक बधाइयाँ.

At 9:20am on September 22, 2012, Er. Ambarish Srivastava said…

कविता शुचिता शिल्प से, शोभित मित्र कविन्द्र.

जन्मदिवस    शुभकामना,   भाई   जी   धर्मेन्द्र..    सादर   

At 8:15am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय धर्मेन्द्र सर.........

At 12:10pm on September 21, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए स्वीकारे आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

प्रभु आपको समाज और देश निर्माण में योगदान देने की शक्ति प्रदान करे | आपका 

हमारा स्नेह बना रहे |

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
 
 
 

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"आदरणीय अंकित जी बहुत सुंदर रचना है। बधाई स्वीकार करें।"
16 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं आदरणीय।प्रेरणादायक।हार्दिक बधाई"
16 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बहुत आभार आपका।"
17 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय "
17 hours ago
अंकित कुमार नौटियाल replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
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"आदरणीय अंकित कुमार नौटियाल जी सादर प्रस्तुत रचना को सराहने के लिए आपका अतिशय आभार. सादर"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुत छंदों की सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी. सादर"
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DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for Chetan Prakash
"भाई चेतन जी नमन - इस्लाह का सलीका आ जायेगा मैंने आज तलक मुकम्मल तो कोई देखा नहीं गलतियां निकालोगे-…"
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