For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धर्मेन्द्र कुमार सिंह
  • Male
  • BIlaspur, HP
  • India
Share

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Friends

  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • Rahul Dangi
  • संदेश नायक 'स्वर्ण'
  • Mukesh Verma "Chiragh"
  • rajveer singh chouhan
  • गिरिराज भंडारी
  • arvind ambar
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • vijay nikore
  • आशीष नैथानी 'सलिल'
  • seema agrawal
  • deepti sharma
  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"
  • Raj Tomar
  • SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Discussions

बहर सारिणी
7 Replies

ग़ज़ल की बहरें समझना बहुत टेढ़ी खीर है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि बहर के बारे में जानकारी तो बहुत ज्यादा मिल जाती है अंतर्जाल पर पर कहीं भी व्यवस्थित ढंग से नहीं मिलती। तो जहाँ सूचना ज्यादा हो वहाँ उसको…Continue

Started this discussion. Last reply by Admin Jan 30, 2011.

 

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Page

Latest Activity

धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post कविता : शून्य बटा शून्य
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रवि प्रभाकर जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"जनाब Sheikh Shahzad Usmani साहब मैं स्वयं ओबीओ मंच पर लघुकथा का विद्यार्थी हूँ। अभी तक केवल आठ-दस लघुकथाएँ ही लिख पाया हूँ जो यहाँ ओबीओ पर ही मौज़ूद हैं। लघुकथा की सराहना के लिये तह-ए-दिल से आपका शुक्रगुजार हूँ।"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लड़ीवाला जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहब"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय गोपाल नारायण जी"
Apr 11
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी"
Apr 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"वाह आदरणीय क्या शानदार कटाक्ष किया है..वाकई में लोकतंत्र आजकल बड़ा दुखदाई प्रतीत हो रहा है..."
Apr 8
Ravi Prabhakar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"वाह! बहुत ही सधी और शानदार लघुकथा है भाई धर्मेन्‍द्र जी । आपकी कल्‍पना शक्‍ित की दाद देता हूं भाई जी । लघुकथा का शीर्षक ही सब कुछ बयां कर रहा है । बधाई स्‍वीकार करें ।"
Apr 7
Sheikh Shahzad Usmani commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"गांव/लोकतंत्र और जनता अंधे/गूंगे/बहरे /पूरी तरह से स्वस्थ दौड़ सकने वाले के प्रतीकों/बिम्बों में दिग्भ्रमित देशवासियों और दिग्भ्रमित प्रशासकों पर गहरे कटाक्ष करती मार्गदर्शक सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार आदरणीय धर्मेंद्र कुमार…"
Apr 6
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
" बहुत के आधार पर लोकतंत्र पर तंज करते सुंदर लघु कथा "
Apr 5
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"जनाब धर्मेन्द्र जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 5
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post लोकतंत्र (लघुकथा)
"बेहतरीन आ० धर्मेन्द्र जी . लोकतंत्र की बिडम्बना पर आपका यह तंज सराहनीय है . "
Apr 5

Profile Information

Gender
Male
City State
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
Native Place
प्रतापगढ़
Profession
अभियांत्रिकी

धर्मेन्द्र कुमार सिंह's Blog

लोकतंत्र (लघुकथा)

एक गाँव में कुछ लोग ऐसे थे जो देख नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो सुन नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो बोल नहीं पाते थे और कुछ ऐसे भी थे जो चल नहीं पाते थे। उस गाँव में केवल एक ऐसा आदमी था जो देखने, सुनने, बोलने के अलावा दौड़ भी लेता था। एक दिन ग्रामवासियों ने अपना नेता चुनने का निर्णय लिया। ऐसा नेता जो उनकी समस्याओं को जिलाधिकारी तक सही ढंग से पहुँचा कर उनका समाधान करवा सके।

जब चुनाव हुआ तो अंधों ने अंधे को, बहरों ने बहरे को, गूँगों ने गूँगे को और लँगड़ों ने एक लँगड़े को वोट दिया। जो…

Continue

Posted on April 4, 2018 at 9:11pm — 14 Comments

कविता : शून्य बटा शून्य

उसने कहा 2=3 होता है

 

मैंने कहा आप बिल्कुल गलत कह रहे हैं

 

उसने लिखा 20-20=30-30

फिर लिखा 2(10-10)=3(10-10)

फिर लिखा 2=3(10-10)/(10-10)

फिर लिखा 2=3

 

मैंने कहा शून्य बटा शून्य अपरिभाषित है

आपने शून्य बटा शून्य को एक मान लिया है

 

उसने कहा ईश्वर भी अपरिभाषित है

मगर उसे भी एक माना जाता है

 

मैंने कहा इस तरह तो आप हर वह बात सिद्ध कर देंगे

जो आपके फायदे की है

 

उसने…

Continue

Posted on February 1, 2018 at 8:45pm — 6 Comments

ग़ज़ल : बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २

आह निकलती है यह कटते पीपल से

बरसेगा तेज़ाब एक दिन बादल से

 

माँगे उनसे रोज़गार कैसे कोई

भरा हुआ मुँह सबका सस्ते चावल से

 

क़ै हो जाएगी इसके नाज़ुक तन पर

कैसे बनता है गर जाना मखमल से

 

गाँव, गली, घर साफ नहीं रक्खोगे गर

ख़ून चुसाना होगा मच्छर, खटमल से

 

थे चुनाव पहले के वादे जुम्ले यदि

तब तो सत्ता पाई है तुमने छल से

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Posted on November 10, 2017 at 2:38pm — 4 Comments

बिना तुम्हारे, हे मेरी तुम, सब आधा है (नवगीत)

बिना तुम्हारे

हे मेरी तुम

सब आधा है

 

सूरज आधा, चाँद अधूरा

आधे हैं ग्रह सारे

दिन हैं आधे, रातें आधी

आधे हैं सब तारे

 

जीवन आधा

दुनिया आधी

रब आधा है

 

आधा नगर, डगर है आधी

आधे हैं घर, आँगन

कलम अधूरी, आधा काग़ज़

आधा मेरा तन-मन

 

भाव अधूरे

कविता का

मतलब आधा है

 

फागुन आधा, मधुऋतु आधी

आया आधा सावन

आधी साँसें, आधा है दिल

आधी है…

Continue

Posted on February 9, 2017 at 9:39am — 10 Comments

Comment Wall (23 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:19am on September 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय बड़े भाई  धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:41pm on September 22, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय धर्मेन्द्र जी

At 11:20am on September 22, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:23pm on December 13, 2012, seema agrawal said…

स्वागत है धर्मेन्द्र जी 

At 6:18pm on September 22, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:06am on September 22, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई धर्मेन्द्रजी, 

सरल, सफल, सहज, सुगढ़
सुफल, सुमिल, सुधी
सस्वर.. .
संयत, सुहृद, सुभाव, सशब्द
संभव सदा
सबल-प्रखर.. .
शुभभावना-शुभकामना-सुसंस्मरण संप्रेष्य है !

अनेकानेक बधाइयाँ.

At 9:20am on September 22, 2012, Er. Ambarish Srivastava said…

कविता शुचिता शिल्प से, शोभित मित्र कविन्द्र.

जन्मदिवस    शुभकामना,   भाई   जी   धर्मेन्द्र..    सादर   

At 8:15am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय धर्मेन्द्र सर.........

At 12:10pm on September 21, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए स्वीकारे आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी, 

प्रभु आपको समाज और देश निर्माण में योगदान देने की शक्ति प्रदान करे | आपका 

हमारा स्नेह बना रहे |

At 1:55pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aapki zarra-nawazee ke liye sukariya.
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी दिल से शुक्रिया आपका "
32 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
" आदरणीय Sushil Sarna  जी दिल से शुक्रिया आपका "
32 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- लोकतंत्र
" आदरणीय Naval Kishor Soni जी दिल से शुक्रिया आपका "
32 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post जीवन के दोहे :
"लाजवाब दोहे"
36 minutes ago
Shyam Narain Verma commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आल्हा
"सुंदर भाव से संजोयी रचना पर बधाई स्वीकारें आदरणीय, सादर"
50 minutes ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"जनाब अजय तिवारी साहिब विस्तार से बता चुके हैं,मिसरा बदलने का प्रयास करें ।"
1 hour ago
pratibha pande commented on विनय कुमार's blog post नींव की ईंट--लघुकथा
"बहुत गहन बात सहज ढंग से कह दी आपने ।हार्दिक बधाई आदरणीय विनय जी। विवरण थोड़ा कम होता तब भी प्रभाव मे…"
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अबतक तो बस तन्हा हूँ - गजल ( लक्ष्मण धामी मुसाफिर)
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नासिर काज़मी की ज़मीन में ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. 'अनमोल भले…"
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (तोड़ते भी नहीं यारी को निभाते भी नहीं)
"आदरणीय तस्दीक साहब, खुबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

'सैलाब में प्रत्याशी, मतदाता या किसान!' (लघुकथा)

"कौन? ... कौन डूब रहा है इस सैलाब में इतने रेस्क्यू ऑपरेशंस के बावजूद?" "आम आदमी साहिब! आम मतदाता…See More
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service