For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dr T R Sukul
Share

Dr T R Sukul's Friends

  • Kalipad Prasad Mandal
  • vijay nikore
  • Abid ali mansoori
  • MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)
 

Dr T R Sukul's Page

Latest Activity

Dr T R Sukul shared their blog post on Facebook
Friday
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"ए पावस! तू पायेगी यश , कुछ मेरी भी सुन ले भीगी इन पलकों के, मोती तू चुन ले।     भीगे वसन को सुखा लूॅं , चार पल पर्ण कुटिया सुधारूं, तू भी तब तक कुछ आराम ले ले, साॅंस मेरी भी कुछ चैन पाये, नींद ये नैन पायें कुछ ऐसा तू गुन…"
Jul 14
Dr T R Sukul replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक 27 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"आदरणीय महोदय, विद्वान मित्रों के सुझावों का आदर करते हुए निवेदन है कि क्रमांक ४ पर अंकित मेरी कथा का शीर्षक  'देवकीनंदन' के स्थान पर  "भंवरजाल" करने की कृपा करें। "
Jul 5
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-27
"देवकीनन्दन ‘‘ मैं ने सदा ही आप लोगों की ही इच्छाओं के अनुकूल काम किया, आज जब मैं अपनी पसन्द की लड़की से विवाह करने की अनुमति चाहता हॅूं तो आपको क्यों आपत्ति है?‘‘ ‘‘ इसलिए कि वह लड़की अपनी जाति की नहीं है, खानदान का…"
Jun 29
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"लेखनी ----- देती हो तुम, आकार । मन की गहराई से उत्सर्जित भावों को, भावनाओं को । सुखद अलौकिक तरंगों को, दुखद लौकिक वेदनाओं को। तुमने गढ़ी है, मूक भाषा प्रणय की । विपन्न, शोषित, तिरस्कृतों की हृदयरेखा भी पढ़ी है। यह भी सबकुछ जानती हो तुम, कि विजय के…"
Jun 9
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आभार आदरणीय  तस्दीक अहमद साहब। "
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आभार आदरणीया  नयना (आरती ) जी। "
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आभार आदरणीया  रश्मि  जी।"
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आभार आदरणीया कल्पना जी।"
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी।"
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आदरणीय योगराज जी ! यदि कथा में छोटे भाई की उत्कंठा को शान्त करने के लिए बड़े भाई द्वारा दिया गया उत्तर स्पष्टीकरण माना जाय तो वह उन सभी पात्रों सहित पाठकों के लिए सबक़ या सीख भी देता है। इस प्रकार कोई इसे सीख, कोई सबक़ , कोई शिक्षा और अन्य विद्वान इस…"
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"जी हाँ आदरणीय सुनील जी ! इसे आदरसूचक ही मानिए। यदि आपने "पंक्चुएशन " पर ध्यान दिया होता तो यह भ्रम उत्पन्न नहीं होता।सादर"
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आभार आदरणीय ओमप्रकाश जी। "
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"बहुत कठिन है डगर .. .. दादी माॅं को मृत्युशैया पर देख परिवार के सभी सदस्य उनके चारों ओर एकत्रित हो गए। और वे, उन सबसे यह पूछने में व्यस्त थी कि ‘‘आज क्या पकाया गया है, घर के सभी कमरों को ठीक ढंग से धोया गया है कि नहीं, सभी ने स्नान कर…"
May 30
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-79
"हार्दिक आभार आदरणीया  प्रतिभा पण्डे जी।"
May 13
Dr T R Sukul replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-79
"हार्दिक आभार आदरणीय सतीश   जी।"
May 13

Profile Information

Gender
Male
City State
Sagar Madhyapradesh
Native Place
Sagar
Profession
Retired from govt service since 8/2012
About me
I have been a lecturer in physics for twenty years and then worked as education officer, assistant director deputy director , etc and now working in the field of spiritual science and yogic science.

लौकी

लौकी
------
‘‘ अरे, सेठजी ! नमस्कार। अच्छा हुआ आप यहीं सब्जी बाजार में मिल गए, मैं तो आपके ही घर जा रहा था। समाचार यह है कि महाराज जी पधारे हैं, उनका कहना है कि इस एरिया में अहिंसा मंदिर का निर्माण कराना है जिसमें आपका सहयोग... ..।‘‘
‘‘ जी बिलकुल ! मेरी ओर से ग्यारह हजार , शाम को आपके पास पहुॅंचा दूॅंगा।‘‘
यह सुनकर, सब्जी का थैला टाॅंगे सेठजी के शिष्यनुमा नौकर से न रहा गया वह बोला,
‘‘सेठजी ! अभी आपने सब्जी की दूकान पर लौकी लेते समय लम्बी बहस के बाद, पूरे बाजार में बीस रुपये प्रति किलो रेट मिल रही लौकी पन्द्रह रुपये में खरीद कर ही साॅंस ली, जबकि इनके एक इशारे पर ग्यारह हजार रुपये दे दिए ?‘‘
‘‘ अरे तू नहीं समझेगा, पाॅंच रुपया अधिक देता तो वह पता नहीं उनका किस प्रकार दुरुपयोग करता , बीड़ी या शराब पीने में लगाता, परन्तु इस प्रकार बचाकर हमने मंदिर के काम में लगा दिया उससे तो सब लोगों का भला ही होगा ?‘‘
‘‘ पर आपने ही तो सिखाया है कि किसी को भी मन, कर्म और वचन से कष्ट पहुँचाना हिंसा कहलाती है। आपने उस किसान को आर्थिक नुकसान पहुॅंचाकर मानसिक कष्ट दिया जो लाभ के लिये नहीं अपनी आजीविका के लिए सब्जी बेचने बाजार में आया है। तो, इस प्रकार हिंसा करके जोड़ा गया धन अहिंसा मंदिर में लगाने पर क्या उसकी पवित्रता खंडित न होगी ? ‘‘
‘‘ अरे! प्रवचन न दे, चल आगे, अभी और बहुत कुछ खरीदना है, तू क्या यह नहीं जानता कि सब्जी उगाने से लेकर बेचने तक की क्रियाओं में किसानों के द्वारा कितने जीवों की हिंसा होती है ? तो क्या सब्जी भाजी खाना छोड़ देना चाहिए ? ‘‘
‘‘ वही तो मैं कह रहा हॅूं कि आप अहिंसा अहिंसा चिल्लाते हैं पर हिंसा से अर्जित भोजन करने से चूकते नहीं । आपकी कथनी और करनी में अन्तर क्यों है, मुझे आपके यहाॅं नौकरी नहीं करना। सम्हालो अपना थैला , मैं तो चला, इस माह के चार दिन का मेरा वेतन भी मेरी ओर से मंदिर को दे देना।‘‘
(मौलिक और अप्रकाशित )

Dr T R Sukul's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

Dr T R Sukul's Blog

लघुकथा

लखूचंद 

=====

एक दिन कालेज के कुछ युवक लखूचंद के सामने ही उसकी जमकर तारीफ कर रहे थे ,

‘‘‘ अरे ये तो लखूचंद के एक हाथ का कमाल है , दोनों हाथ होते तो पूरे जिले में मिठाई के नाम पर केवल इन्हें ही जाना जाता। लेकिन यार , ये तो बताओ कि दूसरा हाथ क्या जन्म से ही ऐसा है या बाद में कुछ हो गया ?‘‘

बहुत दिन बाद लखूचंद को अपनी जवानी के दिन याद आ गए, बोले ,



‘‘ युवावस्था में मैं यों ही बहुत धनवान होने का सपना देखा करता । पिताजी कहते थे कि मैं उनकी हलवाई की दूकान सम्हालूं…

Continue

Posted on March 26, 2017 at 11:54am — 1 Comment

लौकी (लघुकथा)

‘‘ अरे, सेठजी ! नमस्कार। अच्छा हुआ आप यहीं सब्जी बाजार में मिल गए, मैं तो आपके ही घर जा रहा था। समाचार यह है कि महाराज जी पधारे हैं, उनका कहना है कि इस एरिया में अहिंसा मंदिर का निर्माण कराना है जिसमें आपका सहयोग... ..।‘‘

‘‘ जी बिलकुल ! मेरी ओर से ग्यारह हजार , शाम को आपके पास पहुॅंचा दूॅंगा।‘‘

यह सुनकर, सब्जी का थैला टाॅंगे सेठजी के शिष्यनुमा नौकर से न रहा गया वह बोला,

‘‘सेठजी ! अभी आपने सब्जी की दूकान पर लौकी लेते समय लम्बी बहस के बाद, पूरे बाजार में बीस रुपये प्रति किलो…

Continue

Posted on March 6, 2017 at 10:00pm — 12 Comments

केवल तुम

51

केवल तुम

=======

मैं बार बार मन ही मन हर्षित सा होता हॅूं,

हर ओर तुम्हारा ही तो अभिनन्दन है।

मन मिलने को आतुर फिर भी कुछ डर है सूनापन है,

हर साॅंस बनाती नव लय पर संगीत अनोखी धड़कन है,

अब तो हर द्वारे आहट पर तेरा ही अवलोकन है,

मैं इसीलिये नवगीत कंठ करता रहता हॅूं

हर शब्द में बस तेरा ही तो आवाहन है।

मन की राह बनाकर इन नैनों के सुमन बिछाये हैं,

मधुर मिलन की आस लिये ये अधर सहज मुस्काये हैं,

हर पल बढ़ते संवेदन…

Continue

Posted on November 26, 2016 at 12:45pm — 6 Comments

प्रदूषण

151  प्रदूषण



जिंदगी जन्म से डूबी थी अश्रुसागर में,

अब तो लहरों के भंवर और भी गहरा रहे हैं!!



सांस की आस ले बाहर की ओर झाॅंका तो,

प्रदूषण की भभक से ही चेतना थर्रा गई।

डूबती उतरा रही नव कल्पनायें भी

घड़कते घड़घडाते घोष से घबरा गई।

विषैले गगनभेदी विकिरणों के दीर्घ ध्वज लहरा रहे हैं!!



स्वार्थी अर्थलोलुप वणिकवृत्ति व्याप्त घर घर में

मनुष्यता हर मनुज से दूर, कोसों दूर पाई।

परस्पर निकटतम संबंध भी दूषित विखंडित,

आत्मीयता, भ्रातृत्व और…

Continue

Posted on August 7, 2016 at 3:18pm

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 3:54pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय टी आर शुक्ल जी, ओ बी ओ द्वारा आपकी माह की सर्वश्रेष्ठ रचना के चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:59pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय डॉ. टी. आर. शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी कविता "कवच और कुंडल" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:43pm on December 2, 2015, Dr T R Sukul said…

Your attention is requested sir, towards my poems posted recently.

Respectfully,

Dr TRSukul.

At 3:15pm on August 15, 2015, vijay nikore said…

आदरणीय शुक्ल जी,

आपकी १९८५ की कविता पढ़कर आनन्द आया...सुन्दर भाव और शब्द संयोजन।

आपसे ऐसी ही और भी कविताएँ मिलेंगी, यह आशा है।

सादर

विजय निकोर

At 3:35am on August 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post आलोकग्रह ... (संस्मरण -- डा० रामदरश मिश्र जी)
"जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,अपनी याददाश्त को काग़ज़ पर उकेरना भी एक फ़न है, और इस फ़न में भी आपकी महारत…"
1 minute ago
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें और गुणीजनों की…"
5 minutes ago
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT's blog post सोमेश्वर मंदिर ( संस्मरण)
"बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,यादों पर मबनी आपकी याददाश्त के पन्नों से उभरे इस सृजन पर बधाई स्वीकार करें…"
8 minutes ago
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post जनता(ब्यथा और प्रण ):-मोहित मुक्त
"जनाब मोहित मुक्त जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
12 minutes ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post दुनिया के मर्ज़ (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें…"
15 minutes ago
Manisha Saxena commented on Manisha Saxena's blog post शुरूआत (लघुकथा)
"धन्यवाद कल्पना जी |"
38 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(सुन तो ले दास्ताने बर्बादी ) -----------------------------------------
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत, प्रशंसा और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत…"
58 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(सुन तो ले दास्ताने बर्बादी ) -----------------------------------------
"मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत, प्रशंसा और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post जाम ... (एक प्रयास)
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'ख़्वाब डूबे गर्द…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(सुन तो ले दास्ताने बर्बादी ) -----------------------------------------
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(सुन तो ले दास्ताने बर्बादी ) -----------------------------------------
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी आदाब, बहुत ही अच्छी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल…"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT's blog post पक्का घड़ा ( लघुकथा )
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब, आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर लिखी गई औसत दर्ज़े की लघुकथा । कथानक में और…"
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service