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MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)
  • Male
  • Khairabad, Sitapur U.P.
  • India
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Samar kabeer commented on MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)'s blog post हमेशा जिसने मेरे साथ बस जफ़ा की है-ग़ज़ल
"जनाब रिज़वान साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'किसी ने आज ख़ुदा से इल्तिजा की है' ये मिसरा बह्र से ख़ारिज हो रहा है,शायद 'से'के बाद "ये"लिखने से रह गया । आपने मंच के नियमानुसार ग़ज़ल के अरकान नहीं लिखे ?"
Nov 12, 2017
Mohammed Arif commented on MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)'s blog post हमेशा जिसने मेरे साथ बस जफ़ा की है-ग़ज़ल
"आदरणीय रिज़वान खैराबादी जी आदाब, छोटी बह्र की बेहतरीन । हर शे'र उम्दा । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
Nov 12, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) posted a blog post

हमेशा जिसने मेरे साथ बस जफ़ा की है-ग़ज़ल

हमेशा जिसने मेरे साथ बस जफ़ा की हैउसी के वास्ते दिल ने मेरे दुआ की हैशराब लाने में ताख़ीर क्यों भला की हैये इंतज़ार की शिद्दत भी इंतहा की हैतुम्हारे शेर से बेहतर हमारे शेर कहाँकि शेर ग़ोई की हमने तो इब्तदा की हैहर एक लफ्ज़ संवर जाये शेर के मानिंदकिसी ने आज ख़ुदा से इल्तजा की हैबड़ी कशिश है मेरे यार तेरे जलवों मेंइसी लिए तो मेरे दिल ने भी खता की हैक़सम जो खाई है मजबूर हो के उल्फत मेंक़सम तुम्हारी नहीं ये क़सम खुदा की हैजुनून-ए-इश्क़ में क्या कह रहे हो ऐ रिज़वानहवास-ओ-होश की अपने कभी दवा की है"मौलिक व…See More
Nov 11, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आ० राजेश कुमारी जी, ग़ज़ल में शिरकत एवं मुबारकबाद के लिए आपका हार्दिक आभार. आपकी हौसला अफज़ाई का दिल से शुक्रिया. सादर."
Sep 23, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आ० कल्पना जी, ग़ज़ल में शिरकत एवं मुबारकबाद के लिए आपका हार्दिक आभार. आपकी हौसला अफज़ाई का दिल से शुक्रिया. सादर."
Sep 23, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"आ.अमित जी , अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया जनाब समर साहब"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया जनाब"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया जनाब मिश्रा जी"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया जनाब सलीम साहब"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया जनाब"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया जनाब"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"हौसला अफजाई का आपका तहे दिल से शुक्रिया"
Sep 22, 2017
MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-87
"शुक्रिया जनाब आरिफ जी"
Sep 22, 2017

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Gender
Male
City State
Sitapur
Native Place
Khairabad
Profession
Student

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MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)'s Blog

हमेशा जिसने मेरे साथ बस जफ़ा की है-ग़ज़ल

हमेशा जिसने मेरे साथ बस जफ़ा की है

उसी के वास्ते दिल ने मेरे दुआ की है



शराब लाने में ताख़ीर क्यों भला की है

ये इंतज़ार की शिद्दत भी इंतहा की है



तुम्हारे शेर से बेहतर हमारे शेर कहाँ

कि शेर ग़ोई की हमने तो इब्तदा की है



हर एक लफ्ज़ संवर जाये शेर के मानिंद

किसी ने आज ख़ुदा से इल्तजा की है



बड़ी कशिश है मेरे यार तेरे जलवों में

इसी लिए तो मेरे दिल ने भी खता की है



क़सम जो खाई है मजबूर हो के उल्फत में

क़सम तुम्हारी नहीं ये क़सम… Continue

Posted on November 10, 2017 at 10:53pm — 2 Comments

जश्न मिल जुल कर मनाओ यौमे आज़ादी है आज - ग़ज़ल

आग नफरत की बुझाओ यौमे आज़ादी है आज

दिल से दिल अपने मिलाओ यौमे आज़ादी है आज



मंदिरों मस्जिद के झगड़े छोड़ कर ऐ दोस्तों

बात कुछ आगे बढ़ाओ यौमे आज़ादी है आज



जो हक़ीक़त थी वो सब इतिहास बन कर रह गई

याद शोहदा की दिलाओ यौमे आज़ादी है आज



जान जब क़ुर्बान करते हो वतन के वास्ते

तो तिरंगा भी उठाओ यौमे आज़ादी है आज



हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के झगड़े भूल कर

"जश्न मिल जुल कर मनाओ यौमे आज़ादी है आज"



हमने छत दीवारो दर अपने सजायें हैं सभी

तुम… Continue

Posted on August 14, 2017 at 12:46pm — 8 Comments

ग़ज़ल - तड़प रहा हूँ मगर मुस्कुरा रहा है कोई

तड़प रहा हूँ मगर मुस्कुरा रहा है कोई

सितम पे और सितम आज ढा रहा है कोई



अदाओं नाज़ से दामन बचा रहा है कोई

की आज मुझसे निगाहें चुरा रहा है कोई



सहूंगा कैसे मैं ग़म अर्स-)ए जुदाई का

बिछड़ के मुझसे बहुत दूर जा रहा है कोई



हवाएं बुग्जो अदावत की लाख तेज़ सही

मग़र चराग़ वफ़ा के जला रहा है कोई



कमा के नेकियाँ फिर आज आखरत के लिए

नये मकान का नक्शा बना रहा है कोई



वफ़ा ही करता रहा आज तक मगर "रिज़वान"

नज़र से अपनी मुझे क्यूँ गिरा रहा है… Continue

Posted on May 28, 2016 at 3:30pm — 6 Comments

मोहब्बत की जो दिल में बहार रखते हैं

सुकून रखते है हर पल क़रार रखते हैं

मोहब्बत की जो दिल में बहार रखते हैं।।



वो आयेगा तो बहारें भी साथ लायेगा

उसी के आने का हम इन्तज़ार रखते हैं।।



कहाँ-कहाँ से मिले ज़िन्दगी की राहों में

हम अपने ज़ख्मों का खुद ही शुमार रखते हैं।।



कफ़न भी बांध के हमराह अपने सारे जवाँ

जो सरहदों पे हैं आँखें भी चार रखते हैं।।



यही है फितरते इन्सां तो इसको क्या कहिये

सब अपने-अपने लहू से ही प्यार रखते हैं।।



तालुक़ात कहाँ तक निभायें हम उनसे

जो… Continue

Posted on January 30, 2016 at 11:38am — 7 Comments

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