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योगराज प्रभाकर
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योगराज प्रभाकर's Discussions

ओबीओ लाईव लघुकथा गोष्ठी अंक-25 में स्वीकृत लघुकथाएँ
41 Replies

(1). योगराज प्रभाकर सावन का अँधा . युवा कवयित्री कनिका को अचानक सामने पाकर साठ से अधिक…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला May 11.

ओबीओ की सातवीं वर्षगांठ पर: सम्पादकीय सन्देश
85 Replies

आदरणीय परिवारजन,सादर अभिनन्दन.  आज हमारा प्यारा ओबीओ एक और मील का पत्थर पीछे छोड़कर, अपने आठवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. इस परिवार का मुखिया होने की हैसियत से यह मेरे लिए गर्व की बात है कि सात बरस…Continue

Started this discussion. Last reply by annapurna bajpai Apr 30.

"ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 में सम्मिलित लघुकथाएँ
24 Replies

(1). श्री मोहम्मद आरिफ जीसच्चा प्यार. समीर ने जवान लड़की को हाथों में उठाए घर में प्रवेश किया ।माँ शुभांगी कुछ समझ नहीं पाई ।आख़िर माजरा क्या है? फिर समीर ने लड़की को सोफा पर बैठाया । समीर-"माँ ,…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Mahendra Kumar Apr 7.

"ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 में स्वीकृत लघुकथाएँ
33 Replies

(1). सुश्री सीमा सिंह जी   दूध का जला “चलो, अविनाश, तुम भी हमारे साथ चलो! आज ओडियन में फिल्म देखने का प्रोग्राम है।” नेगी मैडम ने मुस्कुरा कर कहा। “नहीं, मैडम। आज माँ को डॉक्टर के पास ले जाना है,…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by योगराज प्रभाकर Mar 9.

 

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प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"//फ़लक पे ऐसा उजाला हुआ अमावस मेंज़मीं का चांद, सुना है, चुनर से निकला था// वाह वाह वाह!! बेहद खूस्र्ट ग़ज़ल हुई है, बहुत बहुत मुबारकबाद स्वीकार करें. "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बहुत खूब मो० नायब जी, अच्छी ग़ज़ल कही है. दाद स्वीकार करें.   "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आ० आदरणीय अशफाक अली जी. दाद के साथ बहुत मुबारकबाद स्वीकारें."
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"उम्दा गजल हुई है भाई महेंद्र कुमार जी, बधाई स्वीकार करें. "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"अच्छी ग़ज़ल हुई है भाई गजेंद्र श्रोत्रिय जी, बधाई प्रेषित है. सुधिजनो की सालाह पर मनन चिन्तन अवश्य करें.  "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"//ये तुमने क्या किया आँखों में डाल दीं आँखेंबड़े जतन से मैं इनके असर से निकला था// क्या तगज्जुल है वाह वाह वाह !! इस लाजवाब ग़ज़ल पर शेअर दर शेअर दाद और मुबारकबाद स्वीकार करें आ० समर कबीर साहिब."
Friday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"उम्दा ग़ज़ल हुई है आ० रवि शुक्ला भाई जी, गिरह भी बढ़िया लगाईं है.. हार्दिक बधाई स्वीकार करें.  "
Friday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"अच्छी ग़ज़ल हुई है भाई मुनीश तनहा जी, बधाई स्वीकार करें. "
Friday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"अच्छा प्रयास है आ० मोहन बेगोवाल जी, बधाई प्रेषित है. ("गवाच"=खो/Lost व "लई"=ली जैसे पंजाबी शब्दों की जगह हिंदी के उपयुक्त शब्द ढूंढें)  "
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"जो खाद बन के फना जड़ पे हो गया पत्ता कभी वो ज़र्द हो शाख ए शजर से निकला था बेहतरीन ख्याल. वाह वाह!! ग़ज़ल लाजवाब हुई है आ० गिरिराज भंडारी जी. शेअर दर शेअर दाद और मुबारकबाद प्रस्तुत है.   "
Friday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"जिधर  भी  देख  रहा  हूँ  उफक  नजर आए"खबर नहीं है कि सूरज किधर से निकला था" वाह वाह.... इस आयोजन की अब तक की बेहतरीन गिरह है आ० भाई लक्ष्मण धामी जी. बाकी अशआर भी मानीखेज़ हुए हैं. मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार…"
Friday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है आ० आशुतोष मिश्रा जी, शेअर दर शेअर बधाई प्रस्तुत है. "
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"//जलाए जाता है अखबार के दफातिर कोवो एक जिन जो उसी की खबर से निकला था// वाह वाह वाह, क्या ही उम्दा ग़ज़ल हुई है आ० साजिद हाशमी साहिब. शेअर दर शेअर दाद के साथ बधाई हाज़िर है. छठे और सातवें शेअर में तकाबुल-ए-रदीफैन है, इन पर दुबारा गौर फरमा लें.  "
Friday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"//जो शख्स ग़ैर के साये में ढूँढता है पनाह  हमारे साये के गहरे असर से निकला था. // वाह वाह वाह, क्या कहने हैं आ० निलेश नूर भाई जी. उम्दा गजल हुई है, दिली बधाई प्रेषित है.  "उमीद" और "खून रोते" को दोबारा देख लें. "
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"क्या कहने हैं आ० गिरिराज भंडारी जी, बाकमाल ग़ज़ल हुई है. ढेरों ढेर बधाई हाज़िर है. चौथे और आठवें शेअर में तकाबुल-ए-रदीफैन पर नज्र-ए-सानी अवश्य फरमाएँ.   "
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"उम्दा ग़ज़ल कही है आ० वासुदेव अग्रवाल नमन जी, हार्दिक बधाई निवेदित है.  "
Friday

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तरही ग़ज़ल-2 (आ० समर कबीर जी को समर्पित)

1222 1222 122
.
हमारा धर्म दहशत है? नहीं तो!

तो पूरी क़ौम सहमत है? नहीं तो!
.
तेरे हाथों में ख़ंजर है, मेरे भी
ये क्या अच्छी अलामत है? नही तो



फ़क़त मंदिर ओ मस्जिद के मसौदे,

यही क़ौमी क़यादत है? नही तो!  



अज़ीमुशशां मक़ाबिर के जो खालिक,

कहीं उनकी भी तुर्बत है? नही तो!


जहाँ पत्थर की हर देवी सुरक्षित,…
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Posted on May 7, 2017 at 7:30pm — 18 Comments

आते जाते पल (लघुकथा)

वह अपनी धुंधली आँखों से बीत रहे वर्ष की पीठ पर बने रंग बिरंगे चित्रों को बहुत गौर से निहार रही थी, वह अभी उनमें छुपे चेहरों को पहचानने का प्रयास ही कर रही थी कि सहसा वे चित्र चलने फिरने और बोलने लग पड़ेI   

"माँ जी! कितनी दफा कहा है कि इन बर्तनों को हाथ मत लगाया करोI" 

नये टी सेट का कप उससे क्या टूटा उसके घर में कलेश ने पाँव पसार लिए थेI 

अगले दृश्य में नए साल की इस झांकी को होली के रंगों ने ढक लियाI  

"बेटा ये बहू की पहली होली है, तो इस बार त्यौहार धूमधाम से..."…

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Posted on January 1, 2017 at 12:01am — 15 Comments

अधूरी कथा के पात्र (लघुकथा) .

अचानक स्कूटर खराब हो जाने के कारण वापिस लौटने में काफी देर हो चुकी थी अत: वह काफी तेज़ी से स्कूटर चला रहा थाI एक तो अँधेरा ऊपर से आतंकवादियों का डरI इस सुनसान रास्ते पर बहुत से निर्दोष लोगों की हत्याएँ हो चुकी थींI वह अपने अंदर के भय को पीछे बैठी पत्नी से छुपाने का प्रयास तो कर रहा था, किन्तु उसकी पत्नी स्कूटर तेज़ रफ़्तार से सब कुछ समझ चुकी थीI स्कूटर नहर की तरफ मुड़ा ही था कि अचानक हाथों में बंदूकें पकडे पाँच सात नकाबपोश साए सड़क के बीचों बीच प्रकट हो गएI

“रुक जा ओये!” एक…
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Posted on December 27, 2016 at 10:00am — 10 Comments

तुम क्या हो? (अतुकांत कविता)

तुम क्या हो?    

किसी समुद्री मछली के उदर में

किसी ब्रह्मचारी के पथभ्रष्ट शुक्राणु का अंश मात्र

किन्तु उसका निषेचन?

अभी बहुत समय बाकी है उसमे  

बहुत.....

हे प्रिये!

बुरा नहीं स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझना

अमरत्व का दिवा-स्वप्न भी बुरा नहीं

किन्तु समझना आवश्यक है

यह जान लेना आवश्यक है कि

अमर होने ने लिए मरण आवश्यक है

मरण हेतु जन्म अति आवश्यक

फिर तुम्हें तो अभी जन्म लेना है

जन्म लेने से पूर्व…

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Posted on December 14, 2016 at 12:42pm — 7 Comments

Comment Wall (79 comments)

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At 4:25pm on May 22, 2017, Lajpat Rai Garg said…

यॊगराज जी,
आपकी लघुकथा-अधूरी कथा के पात्र- पंजाब के आतंकवाद की याद ताजा कर गई. सुंदर रचना के लीये बधाई.

At 9:37pm on April 21, 2016, Dr. Ehsan Azmi said…
धन्यवाद सर
At 9:37pm on April 19, 2016, Radha Shrotriya"Asha" said…

Shukriya sir 

At 8:45pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

जन्मदिन की ढेरों  शुभकामनाएँ आदरणीय 

At 3:38pm on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सर, मुझे अपनी सूची में जुड़ने का सुअवसर प्रदान करने के लिए।
At 3:04am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
प्रतिष्ठित ई-साहित्यिक-पत्रिका "ओपन बुक्स ऑनलाइन" के विख्यात प्रधान संपादक वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय गुरुजी श्री योगराज प्रभाकर जी के जन्मदिन की वर्षगाँठ पर मेरी तरफ से हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ ।
At 12:39am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

परम आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:21am on July 12, 2015, kanta roy said…
सर जी , मेरा कमेंट बाॅक्स नहीं खुल पा रहा है लघुकथा की कक्षा में । क्यों ???
At 4:05pm on January 3, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

नए वर्ष में         नए हर्ष में

सुधियों     का      मकरंद i

जीवन का परिमल बन जाए

महकाये      हर      छंद I

      -गोपाल नारायन  श्रीवास्तव

At 10:08pm on December 8, 2014, poonam dogra said…

Thank you so much Yograj ji for adding me..

 
 
 

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