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योगराज प्रभाकर
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योगराज प्रभाकर's Discussions

ओबीओ की सातवीं वर्षगांठ पर: सम्पादकीय सन्देश
84 Replies

आदरणीय परिवारजन,सादर अभिनन्दन.  आज हमारा प्यारा ओबीओ एक और मील का पत्थर पीछे छोड़कर, अपने आठवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. इस परिवार का मुखिया होने की हैसियत से यह मेरे लिए गर्व की बात है कि सात बरस…Continue

Started this discussion. Last reply by rajesh kumari on Friday.

"ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 में सम्मिलित लघुकथाएँ
24 Replies

(1). श्री मोहम्मद आरिफ जीसच्चा प्यार. समीर ने जवान लड़की को हाथों में उठाए घर में प्रवेश किया ।माँ शुभांगी कुछ समझ नहीं पाई ।आख़िर माजरा क्या है? फिर समीर ने लड़की को सोफा पर बैठाया । समीर-"माँ ,…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Mahendra Kumar Apr 7.

"ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 में स्वीकृत लघुकथाएँ
33 Replies

(1). सुश्री सीमा सिंह जी   दूध का जला “चलो, अविनाश, तुम भी हमारे साथ चलो! आज ओडियन में फिल्म देखने का प्रोग्राम है।” नेगी मैडम ने मुस्कुरा कर कहा। “नहीं, मैडम। आज माँ को डॉक्टर के पास ले जाना है,…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by योगराज प्रभाकर Mar 9.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 में स्वीकृत लघुकथाएँ
59 Replies

(1). श्री मिथिलेश वामनकर जी ढहते किले का दर्द “आइये पंडितजी, आइये, बैठिये।” “ठाकुर साहब ये क्या सुन रहा हूँ? आप पुत्री के विवाह के लिए सहमत हो गए हैं। आपको पता है शास्त्रों में प्रतिलोम-विवाह…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Manan Kumar singh Feb 8.

 

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Monday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते हुए दोनों कुंडलिया छंद सुन्दर रचे हैं भाई सुरेश कुमार कल्याण जी, बधाई स्वीकारें. दूसरे कुंडलिया के दोहे के तीसरे चरण के प्रारम्भ में जगण (विचार) आने से गेयता बाधित हुई है, इस तरफ ध्यान अवश्य दें."
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"दोनों छंद सुंदर हुए हैं आ० डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी. बधाई प्रेषित है.  "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह!! बेहतरीन छंद हुए हैं आ० अशोक कुमार रक्ताले जी, जितनी प्रशंसा की जाये कम होगी. मेरी दिली बधाई स्वीकार करें. "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"सार छंद के माध्यम से प्रदत्त चित्र को परिभाषित करने का अच्छा प्रयास हुआ है आ० सतीश मापतपुरी भाई जी, बधाई स्वीकार करें. सुधिजनो के सुझावों का संज्ञान अवश्य लें. "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"बेहतरीन कुण्डलिया छंद रचे हैं आ० अशोक कुमार रक्ताले जी, बहुत बहुत बधाई. "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"दोनों कुण्डलिया छंद अच्छे हुए हैं भाई सतविन्दर कुमार जी, बधाई प्रेषित है. "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र को परिभाषित करते इन छंदों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आ० वासुदेव अग्रवाल नमन जी. "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"सार छंद बढ़िया हुए हैं आ० प्रतिभा पांडे जी, बधाई प्रेषित है. आ० र्सौरभ पांधे जी के सुझाव से मेरी भी सहमति है.  "
Saturday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"//छन्न पकैय्या छन्न पकैय्या, प्रश्न चित्र में दीखे अपना पन कुत्तों से ही क्या, अब इंसा भी सीखे // लाजवाब!! लाजवाब!! क्या गज़ब के सार छंद रचे हैं आ० गिरिराज भंडारी जी. ढेरों ढेर बधाई निवेदित है.  "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"कुन्डलिया और सार छंद के माध्यम से प्रदत्त चित्र को बखूबी परिभाषित किया है आ० तस्दीक अहमद खान साहिब, हार्दिक बधाई स्वीकार करें.  "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"तीनो कुण्डलिया छंद प्रशंसनीय हैं आ० प्रतिभा पांडे जी, बहुत बहुत बधाई प्रस्तुत है. "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"क्या कहने हैं आ० सत्यनारायण सिंह जी, दोनों कुण्डलिया छंद अति सुन्दर रचे हैं, ढेरों ढेर बधाई निवेदित है.  "
Saturday

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योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"//मानव अति कामी क्रोधी पशु ,पक्षी के हत्यारे.! फिर भी प्रभु को सब जीवों में, मानव लगते प्यारे.!// वाह वाह, अति सुन्दर छंद रचे हैं आ० अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, बहुत बहुत बधाई स्वीकर करें. "
Saturday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ की सातवीं वर्षगांठ पर: सम्पादकीय सन्देश
"कुछ दिनों से अस्वस्थता के कारण नेट पर ज्यादा न बैठने की हिदायत थी इस लिए आज इस पोस्ट पर देर से पँहुची| देखते ही देखते ओबिओ सात वर्ष का हो गया अर्थात हम आठवीं कक्षा में प्रवेश कर गए वैसी ही सुखद अनुभूति हो रही है | आद० वो दिन मुझे याद है जब मैंने…"
Friday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ की सातवीं वर्षगांठ पर: सम्पादकीय सन्देश
"’ले लुकटिया, चल डुमरिया’ :-))))))))) "
Friday

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आते जाते पल (लघुकथा)

वह अपनी धुंधली आँखों से बीत रहे वर्ष की पीठ पर बने रंग बिरंगे चित्रों को बहुत गौर से निहार रही थी, वह अभी उनमें छुपे चेहरों को पहचानने का प्रयास ही कर रही थी कि सहसा वे चित्र चलने फिरने और बोलने लग पड़ेI   

"माँ जी! कितनी दफा कहा है कि इन बर्तनों को हाथ मत लगाया करोI" 

नये टी सेट का कप उससे क्या टूटा उसके घर में कलेश ने पाँव पसार लिए थेI 

अगले दृश्य में नए साल की इस झांकी को होली के रंगों ने ढक लियाI  

"बेटा ये बहू की पहली होली है, तो इस बार त्यौहार धूमधाम से..."…

Continue

Posted on January 1, 2017 at 12:01am — 15 Comments

अधूरी कथा के पात्र (लघुकथा) .

अचानक स्कूटर खराब हो जाने के कारण वापिस लौटने में काफी देर हो चुकी थी अत: वह काफी तेज़ी से स्कूटर चला रहा थाI एक तो अँधेरा ऊपर से आतंकवादियों का डरI इस सुनसान रास्ते पर बहुत से निर्दोष लोगों की हत्याएँ हो चुकी थींI वह अपने अंदर के भय को पीछे बैठी पत्नी से छुपाने का प्रयास तो कर रहा था, किन्तु उसकी पत्नी स्कूटर तेज़ रफ़्तार से सब कुछ समझ चुकी थीI स्कूटर नहर की तरफ मुड़ा ही था कि अचानक हाथों में बंदूकें पकडे पाँच सात नकाबपोश साए सड़क के बीचों बीच प्रकट हो गएI

“रुक जा ओये!” एक…
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Posted on December 27, 2016 at 10:00am — 10 Comments

तुम क्या हो? (अतुकांत कविता)

तुम क्या हो?    

किसी समुद्री मछली के उदर में

किसी ब्रह्मचारी के पथभ्रष्ट शुक्राणु का अंश मात्र

किन्तु उसका निषेचन?

अभी बहुत समय बाकी है उसमे  

बहुत.....

हे प्रिये!

बुरा नहीं स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझना

अमरत्व का दिवा-स्वप्न भी बुरा नहीं

किन्तु समझना आवश्यक है

यह जान लेना आवश्यक है कि

अमर होने ने लिए मरण आवश्यक है

मरण हेतु जन्म अति आवश्यक

फिर तुम्हें तो अभी जन्म लेना है

जन्म लेने से पूर्व…

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Posted on December 14, 2016 at 12:42pm — 7 Comments

ग़ज़ल - आग यूँ ही नहीं लगी होगी

2122 1212 22/112

.

आह मज़लूम ने भरी होगी.

आग यूँ ही नहीं लगी होगीI



एक गोली कहीं चली होगी.

एक दुनिया उजड़ गई होगीI



शर्म से लाल हो गया पीपल,

बेल कोई लिपट गई होगीI



झूमकर नाचने लगी मीरा, 


शाम की बांसुरी बजी होगीI



जुगनुओं का हुजूम जब निकला,

चाँद की नींद…
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Posted on October 17, 2016 at 11:24am — 23 Comments

Comment Wall (78 comments)

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At 9:37pm on April 21, 2016, Dr. Ehsan Azmi said…
धन्यवाद सर
At 9:37pm on April 19, 2016, Radha Shrotriya"Asha" said…

Shukriya sir 

At 8:45pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

जन्मदिन की ढेरों  शुभकामनाएँ आदरणीय 

At 3:38pm on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सर, मुझे अपनी सूची में जुड़ने का सुअवसर प्रदान करने के लिए।
At 3:04am on November 18, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
प्रतिष्ठित ई-साहित्यिक-पत्रिका "ओपन बुक्स ऑनलाइन" के विख्यात प्रधान संपादक वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय गुरुजी श्री योगराज प्रभाकर जी के जन्मदिन की वर्षगाँठ पर मेरी तरफ से हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ ।
At 12:39am on November 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

परम आदरणीय योगराज प्रभाकर सर, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 10:21am on July 12, 2015, kanta roy said…
सर जी , मेरा कमेंट बाॅक्स नहीं खुल पा रहा है लघुकथा की कक्षा में । क्यों ???
At 4:05pm on January 3, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

नए वर्ष में         नए हर्ष में

सुधियों     का      मकरंद i

जीवन का परिमल बन जाए

महकाये      हर      छंद I

      -गोपाल नारायन  श्रीवास्तव

At 10:08pm on December 8, 2014, poonam dogra said…

Thank you so much Yograj ji for adding me..

At 7:37pm on November 28, 2014, Rahul Dangi said…
आदरणीय समझाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! क्या "गुनाह " शब्द भी उर्दू में गुना हो सकता है और क्या हम ये शब्द हिन्दी गजल में भी उपयोग कर सकते है !

राहत इन्दौरी जी के इस अशआर में भी काफिया समझाने का कष्ट करे!

3
सूरज सितारे चाँद मेरे साथ मेँ रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे

शाख़ों से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
 
 
 

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