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"माँ शारदे वंदना "

भवदिव्य भाव मनोरमां,झन झनक झन झनकार दे
जय जयति जय जय ,जयति जय जय जयति जय माँ शारदे
कमलासिनी वरदायिनी माता हमें वरदान दे
जय जयति ........

चरणों में तेरे हैं समर्पित ज्ञान की ले याचना
वेदों का कर दो दान माते कर रहे हम प्रार्थना
माँ हम फसें मझधार में भवतारिणी तू तार दे
जय जयति.......

माँ छेड़ दो वो राग जिससे स्वरमयी धारा बहे
लोकों में तीनो मातु तेरी लोग सब जै जै कहें
स्वरदायनी माँ स्वरस्वती स्वर का हमें अधिकार दे
जय जयति.....

आओ विराजो कंठ में लग जाये गीतों की झड़ी
जो भी रचूँ रचना अमर हो,अमर कविता की लड़ी
हो जाय जीवन सफल माते अमित कष्ट निवार दे 
जय जयति.....

मौलिक अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on February 13, 2016 at 7:41am
सुंदर!जय माँ शारदे!

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