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2122 2122 2122 212 

नाम को गर बेच कर व्यापार होना चाहिए
दोस्तों फिर तो हमें अखबार होना चाहिए

आपके भी नाम से अच्छी ग़ज़ल छप जायेगी
सरपरस्ती में बड़ा सालार होना चाहिए

सोचता हूँ मैं अदब का एक सफ़हा खोलकर
रोज़ ही यारो यही इतवार होना चाहिए

क्या कहेंगे शह्र के पाठक हमारे नाम पर
छोड़िये, बस सर्कुलेशन पार होना चाहिए

हम निकट के दूसरे से हर तरह से भिन्न हैं
आंकड़ो का क्या यही मेयार होना चाहिए

नो निगेटिव न्यूज का मुद्दा मुनासिब आपका
गैर वाज़िब बात का प्रतिकार होना चाहिए

खो गया है ये कहीं विज्ञापनों के ढेर में
बीच में इनके कही अखबार होना चाहिए

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 18, 2016 at 10:15pm

अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय रवि जी, दिली दाद कुबूल कीजिए

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 18, 2016 at 8:53pm

बहुत खूब आदरणीय रवि सर | 

नाम को गर बेच कर व्यापार होना चाहिए
दोस्तों फिर तो हमें अखबार होना चाहिए

आपके भी नाम से अच्छी ग़ज़ल छप जायेगी
सरपरस्ती में बड़ा सालार होना चाहिए

सोचता हूँ मैं अदब का एक सफ़हा खोलकर
रोज़ ही यारो यही इतवार होना चाहिए | खूब | 

महीने की सर्वश्रेष्ट रचना चुने जाने की ढेरों बधाई | 

Comment by Ravi Shukla on July 18, 2016 at 5:06pm

आदरणीय अशोक जी रक्‍ताले आदरणीय शिज्‍जू जी आदरणीय पवन जी आदरणीय बृजेश जी आप सबका गजल को पसंद करने और रचना को मिलने वाले सम्‍मान को साझा करने के लिये बहुत बहुत आभार । सादर 

Comment by डॉ पवन मिश्र on July 17, 2016 at 11:38am
महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने की आकाश भर बधाई।
Comment by डॉ पवन मिश्र on July 17, 2016 at 11:35am
बहुत खूब लिखा है रवि जी। उम्दा ग़ज़ल के लिये शेर दर शेर मुबारकबाद
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 17, 2016 at 9:28am

वाह ! वाह ! बहुत ही दमदार गजल कही है आदरणीय रवि शुक्ला जी. सादर बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 17, 2016 at 8:30am
बहुत बहुत बधाई आपको आ. रवि शुक्ला जी, आपकी ग़ज़ल इस महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुनी गई है।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 21, 2016 at 9:44pm

 वाह आदरणीय वाह बहुत ही खूबसूरत 

Comment by Ravi Shukla on June 16, 2016 at 5:34pm

आदरणीय सौरभ भाई जी आपकी अपनत्‍व भरी हौसला अफजाई से दिल बहुत प्रसन्‍न है कुछ तकनीकी कारणों से पहले टिप्‍पणी नहीं भेज सके थे । हमारे लिये कहे आपके शेर का ह्रदय से स्‍वागत है  आभार स्‍वीकार कीजिये ।

Comment by Ravi Shukla on June 16, 2016 at 5:28pm

आदरणीय राहुल जी गजल आपको पसंद आई अच्‍छा लगा  आभार स्‍वीकार करे

कृपया ध्यान दे...

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