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Rakshita Singh
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  • amod shrivastav (bindouri)
 

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Rakshita Singh commented on TEJ VEER SINGH's blog post हे राम (लघुकथा)-
"आदरणीय वीर जी, सादर प्रणाम  बहुत सुंदर लघुकथा हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Oct 16
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"शिकारा ले चले ग़र्क़ाब देखने के लिए !ख़िजा में चल दिये शादाब देखने के लिए !! कि इस उल्फ़त में कुछ ऐसे दिवाने हो गये हैं !अमावस को जगे मेहताब देखने के लिए !! खड़े रहते हैं आपनी बाम की दीवारों पर !कई अरसे से हैं बेताब देखने के लिए !! मोहब्बत का…"
Aug 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर प्रणाम आदरणीय, कुछ अनुभव वास्तव में कटु होते हैं...कम शब्दों में बहुत ही सटीक व सुंदर लघुकथा हुई, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
May 31
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर प्रणाम आदरणीय, रचना पर आपकी प्रतिक्रिया पाकर बहुत अच्छा लगा। मार्गदर्शन करने व हौसला बढ़ाने के लिए ह्रदय से आभार, मैं अवश्य ही आपके द्वारा बताई गयीं त्रुटियों को सुधारने का प्रयास करूँगी ।"
May 31
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर प्रणाम आदरणीय, यथार्थ कहा आपने अपना किया तो एक ना एक दिन आगे आना ही है। बहुत अच्छी लघुकथा हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
May 31
Rakshita Singh and amod shrivastav (bindouri) are now friends
May 31
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
""अनुभव" चचा की बात मान ली होती तो आज ये दिन ना देखना पड़ता, तेरी बातों में आकर,अच्छा मैंने मुर्गी फार्म खोल लिया...घर में एक फूटी कौड़ी ना आयी और सारा पैसा ढेर हो गये। सब तेरे कारन हुआ है.... गुस्से से बौराया लाखन अपनी पत्नी सुरैया को…"
May 31
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर प्रणाम,आदरणीया। बहुत अच्छी लघु कथा हुई हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
May 30
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"आदरणीया बबिता जी, नमस्कार।  बहुत ही ह्रदयस्पर्शी लघुकथा, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
May 30
Rakshita Singh commented on विनय कुमार's blog post अब नहीं- लघुकथा
"आदरणीय विनय जी, नमस्कार बहुत ही सुंदर लघुकथा ... बहुत बहुत बधाई !"
May 24, 2020
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post रंग काला :
"आदरणीय सुशील जी नमस्कार,  बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ ...  वास्तव  में काले रंग की यह भी विशेषता है कि इस पर कोई और रंग नहीं चढ़ता !"
May 24, 2020
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"इक अजनवी से दिल का लगाना बहुत हुआ ऐ इश्क, बस अब तेरा सताना बहुत हुआ !! ले लूँ खुदा का नाम क्यों ना बंदगी कर लूँ उस वेवफा का नाम दोहराना बहुत हुआ !! बस भी करूँ कि हो चुकी हैं सुर्ख ये आँखें अश्कों को अपने यूँ ही बहाना बहुत हुआ ! अब छिड़ गयी है…"
May 23, 2020
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-118
"बेहिजाब यूँ ना फिरा करो, ज़रा रूख पे पर्दा रखा करो, देखो जमाना खराब है, तुम बुरी नज़र से बचा करो !! यूँ ही हूर सी लगती हो तुम, इस रेशमी लिवास में, कहीं कत्ल ना हो जायें सब, इतना भी तुम ना सजा करो !! हैं चाँहने वाले बहुत, माना तेरे इस शहर में,…"
Apr 24, 2020
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीया राजेश जी नमस्कार,   बहुत ही उम्दा गज़ल, हर शैर काबिल ए तारीफ... दिली मुबारकबाद कुबूल फरमायें ।"
Jun 28, 2019
Rakshita Singh commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय शेख़ जी,  बहुत ही बेहतरीन रचना बहुत बहुत मुबारकबाद ।"
Jun 22, 2019
Rakshita Singh commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै (४७ )
"आदरणीय गिरधारी जी नमस्कार,  काम तमाम तरह के शायद ही पीछा छोड़ें ख़ुद को ख़ुद से मिलना है तो वक़्त ज़रा दीजै ।  बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ बहुत बहुत बधाई ।"
Jun 22, 2019

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At 10:25pm on June 20, 2018, SudhenduOjha said…

आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद....

Rakshita Singh's Blog

उन्हें मालूम नहीं ...

बड़ी खामोशी से वो कर रहें हैं गुफ्तगू

मगर सब सुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

मोहब्बत के खिलें हैं फूल जिनके दर्मियाँ

वो काँटे चुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

यूँ शब भर जागकर सौदाई बन तन्हाई का

गलीचा बुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

किये हैं ज़ब्त, वादों में जो रिश्ते प्यार के

वो रिश्ते घुन रहें हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

वो हमसे पूंछते हैं इश्क करने की वज़ह

मोहब्बत बेवज़ह है ये उन्हें मालूम नहीं…

Continue

Posted on February 18, 2019 at 9:49am — 2 Comments

अल्फाज़

अल्फाज़ रूठें हैं -
छोटे बच्चों की तरह,  

मेरी शायरी पर -
अपने पैर पटक रहे हैं,

बहुत अरसे के बाद -
आया हूँ मिलने इनसे,

यकीनन इसलिए-
रूठे हैं मुझसे कट रहे हैं !!

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on February 8, 2019 at 10:25am — 4 Comments

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही

भरता मेरा पेट प्रिय,

जिस दिन तू गुमसुम रहती है-

भूखा मैं सो जाता हूँ !!

मैखाना, ये आँखें तेरी

पीने दे मत रोक प्रिय,

जब जब ये छलका करती हैं-

और बहक मैं जाता हूँ !!

रहता हूँ तेरे दिल में मैं

बनकर तेरा दास प्रिय,

जब भी टूटा है दिल तेरा-

तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!

मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ

जब होती हो तुम साथ प्रिय,

छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-

ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ…

Continue

Posted on January 3, 2019 at 6:41pm — 4 Comments

विरह गीत

अश्रु भरे नैन,
नाहीं आवे मोहे चैन
कैसे कटें दिन रैन,
इस विरहा की मारी के...

मन में समायो है,
ये जसुदा को जायो
कोई ले चलो री गाम मोहे,
कृष्ण मुरारी के...

कर गयो टोना,
नंनबाबा को ये छोना
देख सांवरो सलौना,
गाऊँ गीत मल्हारी के...

व्याकुल सो मन
अकुलाये से नयन
बिन धीरज धरें ना
चितवन को निहारि के...

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on August 19, 2018 at 8:58pm — 11 Comments

 
 
 

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