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Mohammed Arif
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Mohammed Arif commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post ऐडवर्स रिपोर्ट(लघु कथा )
"आदरणीय गोपाल नारायण जी आदाब, जागरूकता का अलख जगाती बेहतरीन लघुकथा । बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post पीते हैं ...
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, सच कहा आपने हम कुछ न कुछ पीते जा रहे हैं और जी रहे हैं । सुंदर रचना । बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते...तत्र..!' (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय शेख शहज़ाद ऊस्मानी जी आदाब, लघुकथा के बहाने अच्छा कटाक्ष । बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on vijay nikore's blog post अनुभव-धारा
"आदरणीय विजय निकोर जी आदाब, बहुत ही सुंदर रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on जयनित कुमार मेहता's blog post पारसाई ही मेरी दौलत है (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित कुमार जी आदाब, बहुत ही शानदार ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
4 hours ago
Mohammed Arif posted a blog post

धीरे-धीरे नदियाँ रेत बन गईं / कविता

धीरे-धीरेनदियाँ रेत बन गईंहरे-भरे खेतों मेंऊँची-ऊँचीअट्टालिकाएँ तन गईंघरों में अनबन कीदीवारें खड़ी हो गईंजीते जी बूढ़ी माँभुखमरी की निशानी बन गईंमौसम सनकीपागल जैसे हो गएबारिश अब दूर की कौड़ी हो गईदेशकिसान आत्म हत्या कारोज़ उत्सव बना रहा हैसरकार कीझूठी सफलताओं मेंकरोड़ों बहाया जा रहा हैसरकारीआँकड़ों मेंग़रीबी रोज़ घट रही हैसरकार कीउद्योगपतियों के साथअच्छी पट रही हैकिसानआत्महत्या कीफहचान बन गया हैकर्ज़, भुखमरी कीशान बन गया हैजीते जी उसेखाद-बीज, भूमि सेवंचित किया जा रहा हैआत्महत्याकरने परकरोड़ों कामुआवज़ा…See More
9 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब आदाब, आपकी आमद से इयोजन में रवानी आ गई । हर शे'र लाजवाब । ख़ासतौर से गिरह का शे'र बहुत ही बेहतरीन बन पड़ा है । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
23 hours ago
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - तेरी महफ़िल में दीवाने रहेंगे
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल । दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
23 hours ago
Mohammed Arif commented on विनय कुमार's blog post बढ़ता धुआं- लघुकथा
"आदरणीय विनय कुमार जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन कसावट वाले कथानक वाली लघुकथा । साथ ही जिज्ञासा का संचार भी करती हुई । अनहोनी या अप्रत्याशित होने का नाम ही जीवन है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
23 hours ago
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT's blog post मूक दर्शक (लघुकथा)
"आदरणीय कल्पना भट्ट जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन कटाक्षपूर्ण लघुकथा । सारगर्भित भी और अपनी बात भी रख दी आपने । बड़ी ही सहजता से सबकुछ कह दिया । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, हर शे'र मारक क्षमता वाला । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"मिलने ख़ुदा से आए थे बारिश की आस में, संसद भवन में आग लगा कर चले गए । वाह!वाह!! क्या कमाल का मक्ता है । हर शे'र में ताज़गी का अहसास । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय महेंद्र कुमार जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"सोया पड़ा था दर्द,जगा कर चले गए कुछ दोस्त याद उनकी दिला कर चले गए वाह!वाह!! वल्लाह कमाल का मतला है । मज़ा का गया । लंबे सफ़र की रात में दुनिया सराय है हम भी यहाँ पे रात बिता कर चले गए । वाह!वाह!! क्या सूफीयाना अंदाज़ है । कमाल है भई । शे'र दर…"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आदरणीय मजाज़ सुल्तानपुरी आदाब, हर शे'र बेजोड़, नायाब । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post पिता (पितृ दिवस विशेष)
"बहुत-बहुत आभार आदरणीय गोपाल नारायण जी । लेखन सार्थक हुआ ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आदरणीय अमित कुमार जी आदाब, बहुत बेहतरीन अशआर । ख़ासतौर से गिरह का मिसरा लाजवाब । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain M.P.
Native Place
Ujjain
Profession
Teacher
About me
Poet

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धीरे-धीरे नदियाँ रेत बन गईं / कविता

धीरे-धीरे

नदियाँ रेत बन गईं

हरे-भरे खेतों में

ऊँची-ऊँची

अट्टालिकाएँ तन गईं

घरों में अनबन की

दीवारें खड़ी हो गईं

जीते जी बूढ़ी माँ

भुखमरी की निशानी बन गईं

मौसम सनकी

पागल जैसे हो गए

बारिश अब दूर की कौड़ी हो गई

देश

किसान आत्म हत्या का

रोज़ उत्सव बना रहा है

सरकार की

झूठी सफलताओं में

करोड़ों बहाया जा रहा है

सरकारी

आँकड़ों में

ग़रीबी रोज़ घट रही है

सरकार की

उद्योगपतियों के साथ

अच्छी पट रही… Continue

Posted on June 25, 2017 at 9:59am

पिता (पितृ दिवस विशेष)

पिता संबल है , सहारा है ,
पिता आहुति है , उजियारा है ।
पिता साहस है , आधार है ,
पिता ग़लतियों पर वार है ।
पिता बच्चों का संसार है ,
पिता कुसंग को ललकार है ।
पिता समाज पर उपकार है ,
पिता सच्चाई की पुकार है ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on June 17, 2017 at 10:58pm — 4 Comments

मुक्तक

(1) कुछ लोग ये चमन जला रहे हैं,
मज़बूर का बदन जला रहे हैं,
थमा के हाथों में हथियार वो,
ख़ुशियों भरा वतन जला रहे हैं ।
(2)संस्कारों का अब पतन हो रहा,
व्याभिचार के घर हवन हो रहा,
अनशन, भूख हड़ताल से हारा,
जीते जी किसान दफ़न हो रहा ।
(3)परिंदों के लिये जहान कहाँ है,
मुहब्बत करना आसान कहाँ है,
सभी ग़मों के समंदर में डूबे,
चेहरों पे अब मुस्कान कहाँ है ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on June 12, 2017 at 11:30am

माँ

(1) इबादत ,भक्ति और संवाद है माँ,
कोमल,निश्छल और निर्विवाद है माँ,
दुखों की गठरी कांधों पे ढोहती,
ममता की वर्षा से आबाद है माँ ।
(2)रोशनी, दीपक कभी राहत है माँ,
घरेलू नुस्खा कभी हिक़मत है माँ,
लय,छंद,गति,पाठ कभी शब्द साग़र,
संबल-सहारा कभी चाहत है माँ ।
(3)शीतल छाया कभी सहूलत है माँ,
आँसू ,सिसकी कभी हिदायत है माँ,
पंचतंत्र, जातक कथाओं-सी सीख,
घरेलू झगड़ों की अदालत है माँ ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on June 7, 2017 at 12:05pm — 12 Comments

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At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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"बेहतरीन ग़ज़ल "
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"आ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आभार ।"
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"भाई जयनित मेहता जी आभार मित्र"
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"आ0 अनिता मौर्या जी शुक्रिया ।"
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पश्चिम का आँधी
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आप बिलकुल सही हैं, यह १६ १० मात्रा पर ही है, फुर्र हुई चिट्ठी…"
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