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Mohammed Arif
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Mohammed Arif commented on Manan Kumar singh's blog post नकल (लघु कथा)
"आदरणीय मनन कुमार जी आदाब,                              बहुत ही बढ़िया और सारगर्भित अतिसूक्ष्म लघुकथा । साहित्य में चोरी कोई नई बात नहीं है । साहित्य की चोरी अब और भी आसान हो…"
7 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"
"कविता की सराहना और अनुमोदन का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी ।"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"
"मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब , सीख देती ज़बरदस्त कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
8 hours ago
Mohammed Arif commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश छतलानी जी आदाब,                                  गौमाता और गौ रक्षा के नाम पर देशभर में हिंसक वारदातों को ख़ूब अंजाम दिया गया । नतीजा सब शून्य । आज भी…"
10 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"
"पर्यावरणीय चेतना और मर्म को निरपेक्ष प्रतिक्रिया से सुशोभित करने का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी ।"
11 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohammed Arif's blog post पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"
"आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। सच है आज इंसान आदमखोर हो गया है। आपकी पँक्तियाँ अब आदमखोर  शेरों को नहीं इंसानों को कहना होगा…"
12 hours ago
Mohammed Arif commented on vijay nikore's blog post विकल विदा के क्षण
"आदरणीय विजय निकोर जी आदाब,                                    सुंदर, अनुपम अनुभूतियों से गूँथित प्रवाहमयी भावों का गुलदस्ता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
17 hours ago
Mohammed Arif posted a blog post

पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"

हमने एक दुनिया उजाड़ दीशेरों और नील गायों कीख़रीद ली उनकी खालबारह सींगों केसींगों से कर रहे हैंघर की दीवारों का श्रृंगारअब आदमखोर शेरों को नहींइंसानों को कहना होगा बेहतरहिंसक हरकतें सारीचुरा ली है शेरों से इंसानों नेकितने ही लक्षण आ गए हैंपशुओं वाले इंसानों मेंऐसे में लाजमी हैजंगलों का ख़त्म होनाशेरों का ख़त्म होना ।मौलिक एवं अप्रकाशित ।See More
18 hours ago
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post है बड़ा अच्छा तरीका ज़ुल्म ढाने के लिए
"आदरणीय नवीनमणि त्रिपाठी जी आदाब,                                 बेहतरीन अश'आरों से सजी ग़ज़ल । हर शे'र बढ़िया । दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन…"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post मोम नहीं जो दिल पत्थर है-ग़ज़ल
"आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब,                                शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिलाओ किसी से नज़र धीरे धीरे )
"मुहब्बत में अंजाम की फ़िक्र मत कर करे है यह दिल पे असर धीरे धीरे |  वाह! वाह! बहुत ही सच्चा शे'र हुआ है। शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी ।"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- सर पे मेरे तभी ईनाम न था।
"आदरणीय राम अवध जी आदाब,                         बड़े पैमाने च्छे अश'आरों से सजी बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post गऊ ठीक-ठाक नहीं (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी आदाब,                                 स्त्री-पुरुष समानता के छद्म युग में हमेशा हार स्त्री की और जीत पुरुषों की होती है । हम लाख नारी समनता का…"
21 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत ही बेहतरीन छंद । हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय सतविंद्र कुमार जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्रानुकूल बहुत ही सरस भाषा में सरसी छंद । हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय अशोक रक्ताले जी ।"
yesterday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 80 in the group चित्र से काव्य तक
"बढ़िया चित्रानुरूप सरसी छंद । हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय सुरेश कल्याण जी ।"
yesterday

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पर्यावरणीय कविता --"हिंसक"


हमने एक दुनिया उजाड़ दी
शेरों और नील गायों की
ख़रीद ली उनकी खाल
बारह सींगों के
सींगों से कर रहे हैं
घर की दीवारों का श्रृंगार
अब आदमखोर
शेरों को नहीं
इंसानों को कहना होगा बेहतर
हिंसक हरकतें सारी
चुरा ली है
शेरों से इंसानों ने
कितने ही लक्षण आ गए हैं
पशुओं वाले इंसानों में
ऐसे में लाजमी है
जंगलों का ख़त्म होना
शेरों का ख़त्म होना ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on December 17, 2017 at 7:10am — 4 Comments

जाड़े के दोहे

तेवर देखे ठंड के , थर-थर काँपे गाँव ।
सभी तलाशे धूप को , सूनी लगती छाँव ।।

यार बढ़े हैं आज तो , ठंडक के वो भाव ।
बस्ती के हर मोड़ पर , सुलगे देख अलाव ।।

बदला मौसम ने ज़रा , देखो अपना रूप ।
कितनी प्यारी लग रही , जाड़े की ये धूप ।।

अदरक वाली चाय से , होती सबकी भोर ।
बच्चों का भी शाम से , थम जाता है शोर ।।

किट-किट करते दाँत हैं , काँप रहे हैं हाथ ।
गर्मी लाने के लिये , गर्म चाय का साथ ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on December 10, 2017 at 10:35pm — 16 Comments

कविता--उम्मीद की कुनकुनी धूप

लो फिर आ गई !

नए साल के स्वागत में

उम्मीद की कुनकुनी धूप

भरोसे की मुँडेर पर

आशा-आकांक्षा की परियाँ भी

धीरे-धीरे उतरेंगी धैर्य के आँगन में

नई सोच का बाज़ीगर

सजाएगा नये-नये सपनें

जमा है जो तुम्हारे पास

अडिग विश्वास की पूँजी

अब उसे खर्च करना होगा

नये साल में मितव्ययिता के साथ

नया साल आहिस्ता-आहिस्ता

आज़माएगा तुम्हें

सावधान !! डरना नहीं

धारण कर लो अपना

फौलादी इरादों वाला कवच

जो तुमने गढ़ा है श्रम से ।

मौलिक एवं अप्रकाशित…

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Posted on December 5, 2017 at 12:06am — 12 Comments

लघुकथा--रिटर्न गिफ़्ट

" सबसे पहले मैं आप सभी उपस्थित महानुभावों , परम मित्रों , परिजनों , रिश्तेदारों और मीडिया जगत के तमाम साथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ । आप सभी ने मेरे छोटे से आग्रह पर उपस्थित होकर मेरा मान बढ़ाया । मैं कोई बहुत बड़ा आदमी नहीं हूँ । साधारण-सा , अदना-सा आपके बीच का आदमी हूँ । कई दिनों से बेचैनी में था । सोच रहा था अपने अट्ठावनवें जन्म दिन पर क्या रिटर्न गिफ्ट दूँ ? तो मैं आप सभी के समक्ष घोषणा करता हूँ आज के अपने अट्ठावनवें जन्म दिन पर रिटर्न गिफ्ट के तौर पर जीते जी अपनी एक किडनी दान करता… Continue

Posted on December 1, 2017 at 12:35am — 18 Comments

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At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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"बहुत शुक्रिया लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी"
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