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Mohammed Arif
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Latest Activity

Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बोलती निगाहें (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                     अत्यंत सामयिक-प्रासंगिक लघुकथा । कथा में जीवंतता भी है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post पश्चाताप (लघुकथा)
"आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब,                                    पौराणिक प्रसंग को आधार बनाकर स्त्री की मनोदशा मेंं झाँकने का अच्छा प्रयास किया आपने । यह लघुकथा…"
21 hours ago
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post ग़ुलामी बहुआयामी (अतुकान्त कविता)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                      डिज़िटल आँधी ने सबकुछ तहस-नहस करके रख दिया है । हम सबकुछ भूल गए हैं । आपकी अबतक की…"
21 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,                                   प्रदत्त चित्रानुकूल सटीक और सारगर्भित शब्द निरूपण । इसमें चिंता भी है, शिकायत भी है और शिक्षा…"
Saturday
Mohammed Arif commented on ram shiromani pathak's blog post दोहे(विविधा)
"आदरणीय राम शिरोमणि जी आदाब,                           समसामयिक विषयों पर लिखें गए थोकबंद दोहों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।      नोट:- एक साथ इतनी संख्या मेंं…"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी आदाब,                             प्रदत्त चित्र को आधार बनाकर रचे गए चौपई छंद वाकई बेजोड़ और सटीकता लिए हुए हैं । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब,                          प्रदत्त चित्रानुकूल सटीक और सारगर्भित चित्रण । पढ़कर अच्छा लगा । दूसरे छंद में रची गई रचना भी लाजवाब । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।…"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी आदाब,                      प्रदत्त चित्र के अनुकूल बहुत ही बेहतरीन चित्रण । आपने दूसरा छंद चौपाई छंद लिया है । जिसमें 16 मात्राएँ होती है । जबि इस बार के छंदोत्सव का छंद…"
Friday
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 85 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी आदाब,                                  प्रदत्त चित्र के अनुकूल शक्ति छंद के माध्यम से सजीव चित्रण । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Mohammed Arif commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (जिस को कुछ ग़म न हो कमाई का)
"उस पे आती हैं मुश्किलें तस्दीक काम करता है जो भलाई का |सच है , सच है । जो भलाई करता है उसे ही बुराई का सामना करना पड़ता है । बहुत ही अच्छे अश'आरों सजी ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें आदरणीय तस्दीक अहमद साहब ।"
Wednesday
Mohammed Arif commented on Satyanarayan Singh's blog post जताएं मातृ दिन पर हम
"आदरणीय सत्यनारायण जी आदाब,                       मातृ दिवस पर माता को समर्पित बेहतरीन रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
May 15
Mohammed Arif commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आदाब,                               माँ की गरिमा-गौरव को रेखांकित करते बेहतरीन दोहे । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
May 15
Mohammed Arif commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"आदरणीय नीलेश जी आदाब,                           लाजवाब ग़ज़ल । दिल को सुकून की बारिश देने वाली ग़ज़ल । वैसे भी मालवांचल में भीषण गरमी और उत्तर भारत में आँधी-तूफान का ज़बर्दस्त दौर चल रहा है…"
May 15
Mohammed Arif commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"आदरणीय राम शिरोमणि जी आदाब,                        एक अच्छी ग़ज़ल का सफल प्रयास । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का…"
May 15
Mohammed Arif commented on babitagupta's blog post 'एक फरियाद - माँ की'
"आदरणीया बबीता गुप्ता जी आदाब,                               लाजवाब और विचारोत्तेजक रचना । मैं आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी की बातों से सहमत हूँ । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
May 15
Mohammed Arif commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post कड़वे जलवे (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,                                     मानवीकरण रूप में बेहतरीन कटाक्षपूर्ण लघुकथा । कुछ सामयिकता का पुट लिए भी है । हार्दिक…"
May 15

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Gender
Male
City State
Ujjain M.P.
Native Place
Ujjain
Profession
Teacher
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लघुकथा--शगुन

विवाह में शामिल होने आए दोस्त , रिश्तेदार क़रीबी और परिवार के सदस्य सभी यह जानने के बड़े उत्सुक थे कि आख़िर राहुल मंच से ऐसी क्या घोषणा करेगा जिससे उसकी शादी हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन जाएगी । प्रीतिभोज से निवृत्त होकर सभी मेहमान मंच के सामने एकत्रित हो गए । राहुल अपनी जीवन संगिनी वर्षा का हाथ थामे मंच पर उपस्थित हुआ । हाथ जोड़कर दोनों ने सबका अभिवादन किया और कहा-" साथियों , आप सभी का आभारी हूँ कि आपने अपनी गरिमामयी उपस्थित देकर मेरा मान बढ़ाया । ज़्यादा कुछ नहीं कहूँगा । आज के इस विवाह आयोजन को…

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Posted on May 1, 2018 at 10:30am — 10 Comments

लघुकथा--बोध

प्रसंग था 'दशा और 'बोध ' किसे कहते हैं ? जिज्ञासु और दार्शनिक के बीच इस विषय को लेकर काफी वाद-विवाद चला । जिज्ञासु दार्शनिक के तर्कों से संतुष्ट नहीं हो रहा था । अंत में दार्शनिक ने जो सांकेतिक जवाब दिया उसे सुनकर जिज्ञासु अभिभूत हो गया । दार्शनिक ने उंगली से चींटियों के जाते हुए झुण्ड की ओर इशारा कर दिया ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 23, 2018 at 9:00am — 16 Comments

कविता -- अनकही ख़ामोशियाँ



अनकही ख़ामोशियाँ

बहुत कुछ कहती है

उनका शोर बहुत दूर तक सुनाई देता है

उन ख़ामोशियों की ज़मीन पे

बीज अंकुरित होते हैं

बहुत कुछ कहने के

मगर अनकही ख़ामोशियाँ

ख़ामोश बनकर रह जाती है

जैसे हड़ताल की अधूरी रह जाती है माँगें

जो कभी पूरी नहीं होती है

और माँगें हड़ताल को चलाती है

अतीत की स्मृतियों को भी

दबाती है अनकही ख़ामोशियाँ

धीरे-धीरे अनकही ख़ामोशियाँ

कब भीतर की तपिश बन जाती है

पता ही नहीं चलता है

यह तपिश

लावा बनकर फूट पड़ती है…

Continue

Posted on April 8, 2018 at 9:06am — 12 Comments

लघुकथा--हठ


एक दिन तंग आकर ज़िंदगी मौत से बोली-" आख़िर तू मुझे कब तक डसती रहेगी ?"
मौत खिलखिलाकर बोली-" जब तक तू जीने की हठ करती रहेगी ।"

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Posted on April 1, 2018 at 9:00am — 8 Comments

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At 8:39pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ मोहम्मद साहब प्रणाम
बहुत शुक्रिया
आपकी सलाह पर तुरंत अमल होगा
At 8:57am on March 6, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ सर
आपको कविता अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत शुक्रिया
At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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"//अतीत के अँधेरों में खोये हुए ...// ... आरंभिक फ्लैैशबैैक का बहुत बढ़िया मार्गदर्शक…"
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"आ. दिनेश जी,भरपूर और मुकम्मल ग़ज़ल हुई है..बहुत बहुत बधाई .."
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