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indravidyavachaspatitiwari
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  • vijay nikore
 

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indravidyavachaspatitiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- असर होता है // दिनेश कुमार
"आपसी प्यार मकीनों में हो ,घर तब होगा दरो -दीवार का ढांचा तो खँडर होता है। श्री दिनेश कुमार जी आपने प्यार को दिखाकर जो कहना चाहा है वह दिल को छू रहा है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Jan 1
indravidyavachaspatitiwari replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा हितैषी" सम्मान
"रवि यादव जी के सम्मान की खबर से प्रसन्नता हुई । उनके कार्यो से उत्साहित होने का अवसर लघुकथा लेखकों को मिलेगा और जो नव लघुकथाकार हैं उन्हें अपनी रचनाओं में निखार लाने के लिए प्रयत्नशील होना होगा। ऐसे का सम्मान करके ओबीओ परिवार अपने को सम्मानित महसूस…"
Dec 14, 2017
indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"घर जमाई जब आप कहते हैं कि उसने गलती की है तो उसको सजा जरूर मिलेगी । हम सब उस पर राजी हैं लेकिन आपको यह तो समझना चाहिए कि उसे माफी की भी तो जरूरत है। यदि उसे माफ कर दिया जाय और आगे के कार्यो पर ध्यान देकर उसे रास्ते पर लाया जाये तो हो सकता है कि वह…"
Nov 30, 2017
indravidyavachaspatitiwari added 2 discussions to the group सामाजिक सरोकार
Nov 7, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on Admin's group ग़ज़ल की कक्षा
"मैने नया ज्वाइन किया है । आशा करता हूं कि गजल की विधा के बारे मंे काफी प्रगति होगी और कामयाबी के पास पहुंच जाऊंगा।"
Nov 6, 2017
indravidyavachaspatitiwari joined Admin's group
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
Nov 6, 2017
indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-31 (विषय: फ़रिश्ते)
"ॅूुफरिश्तेेआज तक आपके सामने हमने अपनी जुबान नही खोली है इस बार भी मुझे माफ ही कर दें। आपकी आज्ञा मेरे सिर माथे पर। यह कहकर मुनीब ने पना सिर उनके चरणों में झुका दिया। मुनीब ने जब सिर उठाया तो देखा कि उनकी आंखें आसंुओं से तरबतर थीं।मुनीब को वह दिन याद…"
Oct 31, 2017
indravidyavachaspatitiwari added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
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भोजपुरी

हमनी के भोजपुरी भाषा के संबंध में एतने जानी ले जा कि एकरा अंदर एतना क्षमता बा कि उ कवनो विषय या विधा पर आपन विचार व्यक्त करें में तनिकांे कसर ना रख सकेले। भोजपुरी भाषा के बारे में सोचला पर लागे ला कि एकर एरिया भी काफी बड़ा बाटे। ए इलाका से अनेक क्षेत्र में प्रतिष्ठित लोगन के प्रादुर्भाव भइल बा जवना से इ इलाका ओकरा प्रकाश से जगमगात रहेला। भोजपुरी भाषा के बोले वाला आज तक सबका जानकारी में बा कि भारत से बाहर व लगभग संसार के हर क्षेत्र में बा लोग। उहवां भोजपुरी परम्परा के जीवित रखले बा लोग। भोजपुरी…See More
Oct 30, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on Admin's group आध्यात्मिक चिंतन
"हमारे प्रभु का नाम हजार बार लेने से और अनेकों बार लेने से जो सुख मिलता है उसका वर्णन करना किसी के वश में नहीं है। क्योंकि उनकी दयालुता का ध्यान करने पर आपके हृदय को इतनी शांति मिलती है कि आप चाह करके भी उसकी चर्चा दूसरे से करने से अलग नहीं रह सकते।…"
Oct 28, 2017
indravidyavachaspatitiwari joined Admin's group
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आध्यात्मिक चिंतन

इस समूह मे सदस्य गण आध्यात्मिक विषयों पर चिंतन एवं स्वस्थ चर्चायें कर सकतें हैं ।See More
Oct 28, 2017
indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-88
"नाम हमारा काम है उसका वो आज आजाये तो। कहते है हम आज है आशिक कल दुश्मन बनजाए तो । अपना अपना सुख है ंसबको यदि वो इसे अजमाएतो । कहा है वह कही का देखा जान पे यदि बनआए तो । आपका जिस्म है यदि तांबा तो दुजा सोना हो जाए तो । कहना है ये आज हमारा दुख तुमको…"
Oct 27, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post बशीर बद्र साहब की जमीन पर एक तरही ग़ज़ल
"बहुत अच्छी गजल बनी है। इल्म की किताब की कल्पना अनोखी है। बहुत‘-2 बधाईयां।"
Oct 26, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on Dr.Prachi Singh's blog post दीप जला क्या // डॉ० प्राची
"दीपावली के त्योहार पर एक प्लास्टिक बीनने वाली लड़की केा माध्यम बनाकर उस गरीब वर्ग का दर्द उकेरने के लिए हार्दिक बधाई। बहुत हृदयग्राही रचना बनी है।"
Oct 20, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे बड़ी रदीफ़ में ग़ज़ल का प्रयास, सिर्फ रदीफ़ और क़ाफ़िया में पूरी ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा
"नयन की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओ।इतनी सटीक प्रहार करता है कि मन प्रफुल्ल हो जाता है। इतनी हृदयग्राही रचना के लिए बधाई कबूल करें।"
Oct 20, 2017
indravidyavachaspatitiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-84
"लाल सूरज सूरज को हमने देखा सुबह के समय जब वह अपनी लाली बिखेरता चला आ रहा था आसमान में पानी के भीतर मां को देखकर मन में उठा था हूक कि वह भींग रही है लेकिन जब उसका मन प्रसन्न था हमें भी खुशी हुई थी सूरज के आने के बाद उसने प्रार्थना की सूरज जी आज की…"
Oct 14, 2017
indravidyavachaspatitiwari commented on Balram Dhakar's blog post अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल
"आपकी गजल बढिया है आपका गाना बढिया धाकड़ साहब हमने भई आपको माफ करना देर से जाना!बढिया है।"
Oct 6, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
ballia utter predesh
Native Place
india
Profession
journlism
About me
i am simple man. i want peacefull nature

Indravidyavachaspatitiwari's Blog

आशा का पौधा

एक पौधा हमने रोपा था

सात वर्ष पहले

सोचा था वह

बढेंगा , फूलेगा, फलेगा।

धीरे-धीरे

उसमें आया विकास का

बवंडर

जो हिला गया

चूल-चूल उस वृक्ष के

जिसके लिए हम सोच रहे थे

कि कैसे उसे जड़ से

उखाड़ फेंके

एक ही झटके से उखड़ कर

धराशायी हो गया

हमने चैन की सांस ली

उस तरफ देखा तो

हमारा पौधा जो

अभी नाबालिग बच्चा था

अपनी हरियाली लिए

धीरे-धीरे झूम रहा था

हमें यह देख कर प्रसन्नता हुयी

उससे आशा की…

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Posted on April 25, 2017 at 7:30am — 2 Comments

धोखा न देना

सीमा पार से आके तुमने हमको जो ललकारा है

भागो तुम उस पार चलो यह भारतवर्ष हमारा है।

आये दिन जो तुम करते रहते हो उत्पात यहां

अब हम नहीं सहेंगे यह सब यह संकल्प हमारा है।

ऐसा क्या व्यवहार तुम्हारा जो कहके जाते हो पलट

अपनी सीमा पर है नहीं नियंत्रण यह दुर्भाग्य तुम्हारा है।

सरहद पर जो आते हैं करते स्वागत है हम उन का

मित्र तुम्हारे चरणों में यह झुका शीश हमारा है।

आये हो तो रहो यहां होकरके निर्भीक मगर

धोखा देने वालों पर गिरता फिर खड्ग…

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Posted on October 15, 2016 at 6:19am — 3 Comments

ये क्या हुआ?



वह अपने महल के अंदर बैठा हुआ था और अपने साथियों के साथ जश्न मनाने की तैयारी हो रही थी। उसके सैनिकों द्वारा छद्म वेश में जाकर दुश्मन देश के सैनिक अड्डे पर भीषण आक्रमण के परिणाम स्वरूप वहां पर भयंकर तबाही मची हुई थी और उस देश का अगुवा बौखला उठा थां । आज तक उससे कहा जा रहा था िकवह हमारा दोस्त है लेकिन इस तरह से पीठ के उपर छुरा मार कर घायल कर दिया गया था और उसी से वह छटपटा रहा था । उस देश के लगभग 50 सैनिक मौके पर ही मर गये थे। साजो सामान के नुकसान भी करोड़ों के उपर था। उसने अपने अनुचरों को…

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Posted on October 7, 2016 at 1:29pm

कूटनी

पहले के जमाने में कुटनी औरते आती थीं और आपका सारा भेद लेकर चली जाती थी। आज भी यह परम्परा बरकरार है। कुछ औरतों का काम है कि अन्य घरों का समाचार लेकर अपने इच्छित स्थानों पर पहुंचाती हैं।और उसके द्वारा संबंधित व्यक्ति का मनमाना नुकसान करती हैं। क्या आज के समाज में ऐसे लोगों का बहिष्कार संभव नहीं है? यदि आप ऐसों से बच जाते हैं तो आगे आप का भला ही भला है।ी

एक ऐसी ही कहानी है कुटनी की जो हमारे गांव की है और आये दिन किसी न किसी के घर में हंगामा बरपा कर ही चैन लेती है। नाम है उसका रेशमी काकी।…

Continue

Posted on July 27, 2016 at 6:30pm

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At 2:26am on September 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

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