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फेर भइल बा चाक्का-जाम
दलित-गरीबन के उकसावत !

 

बचवन के मन में छटपट्टी
कोरा आँखिन में अचकच बा
बूढ़ आँखि के सोझा सबकुछ
बिला रहल,

झुठहीं मचमच बा
दिल्ली वाली अधबुढ़िया के
चाल-चलन बड़ुए भरमावत .. 

दलित-गरीबन के उकसावत ! 

 

बही-कलम ना पँजरे आइल
आखर-भँइसी एक बरोबर 

तवना पऽ

ऊ जीयसटी के
तान चढ़ावे बुढ़वा दोबर
पाना पऽ दाना जे पावे
उन्हनीं के चलले बहकावत ..

दलित-गरीबन के उकसावत ! 
************
-सौरभ

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