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भोजपुरी साहित्य

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 15, 2012 at 6:32pm

आदरणीया मंजरी पाण्डेय जी, इ दू लाईन हियरा के ख़ुशी के पूरा बयान कर देत बा, बधाई रउआ के |

Comment by mrs manjari pandey on December 15, 2012 at 6:21pm

             दू गो इ पंक्ति भोजपुरी के सुखद समाचार पर।

             कहवाँ से आइल किरिनिया हो हियरा हुलसाईल
             चनवा क जइसे चननिया हो अँगना अन्जोराइल।

Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on November 28, 2012 at 10:25am

अपनी माटी के महक जब ह्रदय में एहसास करावेला त ई मन भाव से भर जाला ,भोजपुरी प्यार दुलार त जनम-जनम का नाता बाय जे कभी ना टूट सकी।।।।।।।।।।।।

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 14, 2012 at 9:22am

भोजपुरी में होत बा, हाटे हॉट प्रयोग|

लड़िकाई में लगत हौ, इशक,विशक क रोग|

इशक,विशक क रोग,नीम पर चढल करैला|

बुढवा हौ मदमस्त की बिगडल जात गदेला|

कईसे मरद कहावत बाट, पहिन ल चूड़ी|

कहें मनोज कुमार श्लील अब ना भोजपुरी||

Comment by sujeet kumar yadav on September 3, 2011 at 2:11am

आँख से लोर ढरकावाल जीन करा,

दिल के बात बतावल जीन करा|

लोग मुट्ठी मे नून लेके घूमेलन,

आपन जखम देखावल जीन करा|

Comment by sanjiv verma 'salil' on May 13, 2011 at 6:17pm
भोजपुरी के संग: दोहे के रंग

संजीव 'सलिल'

भइल किनारे जिन्दगी, अब के से का आस?
ढलते सूरज बर 'सलिल', कोउ न आवत पास..
*
अबला जीवन पड़ गइल, केतना फीका आज.
लाज-सरम के बेंच के, मटक रहल बिन काज..
*
पुड़िया मीठी ज़हर की, जाल भीतरै जाल.
मरद नचावत  अउरतें, झूमैं दै-दै ताल..
*
कवि-पाठक के बीच में, कविता बड़का सेतु.
लिखे-पढ़े आनंद बा, सब्भई जोड़े-हेतु..
*
रउआ लिखले सत्य बा, कहले दूनो बात.
मारब आ रोवन न दे, अजब-गजब हालात..
*
पथ ताकत पथरा गइल, आँख- न  दरसन दीन.
मत पाकर मतलब सधत, नेता भयल विलीन..
*
हाथ करेजा पे धइल, खोजे आपन दोष.
जे नर ओकरा सदा ही, मिलल 'सलिल' संतोष..
*
मढ़ि के रउआ कपारे, आपन झूठ-फरेब.
लुच्चा बाबा बन गयल, 'सलिल' न छूटल एब..
*
कवि कहsतानी जवन ऊ, साँच कहाँ तक जाँच?
सार-सार के गह 'सलिल', झूठ-लबार न बाँच..
***********************************

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 17, 2011 at 7:05pm
जय हो देवकांत भाई , एकदम साच बात रौआ कहनी हा आ उहो बिना लाग लपेट के | स्वागत बा राउर |
Comment by देवDevकान्‍तKant पाण्‍डेयPandey on January 17, 2011 at 4:32pm

अपने माटी के महक जहां रही उहवां त हम रहबे करब ।

 
 
 

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