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Sushil Sarna
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई दोहे तो एकदम से चकित् अकर दे रहे हैं -  यह जग तो वह मंच है, जिसमें रंग अनेक ।कहीं कहकहे गूँजते, कही दर्द  अतिरेक ।। आदि - अन्त के मध्य को,…"
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की अनुभूतियों पर ही आधारित होते हैं अक्सर. आदरणीय सुशील सरना जी सचमुच ही यह जीवन का रंगमंच है और यहाँ हर कोई अपना किरदार निभाकर जाएगा. सुन्दर दोहे रचे हैं…"
Sunday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग तो वह मंच है, जिसमें रंग अनेक ।कहीं कहकहे गूँजते, कही दर्द  अतिरेक ।।निश्चित सबको छोड़ना, जीवन का यह मंच ।पर्दा गिरते ही मिटें , झूठे सभी प्रपंच ।।आदि - अन्त के मध्य को, मंच करे साकार ।इस जीवन के सत्य को, कहते हैं संसार ।।आया जो इस मंच पर, गूँजे उसका नाम ।हुआ अँधेरा बोलता , किरदारों का काम ।।करे उजागर मंच पर, सच को हर किरदार ।हरदम होती  अंत में, सदा झूठ की हार ।।मंच आइना वक्त का, जिसमें चलता काल…See More
May 30
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
Sushil Sarna replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय जी  ओबीओ को बन्द करने की सूचना बहुत दुखद है । बहुत लम्बे समय से इसके साथ जुड़ा हूँ कुछ आत्मीय संबंध से रहे हैं ।बहुत कुछ सीखा है यहाँ से । बहुत  अजीब सा महसूस हो रहा है । मेरी तो ईश से यही प्रार्थना है कि यह  अनवरत चलता रहे ।…"
May 4
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Apr 17
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Apr 14
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों में ही रह गए , हसीं उम्र के साल ।करें अधूरी हसरतें , मन में बड़ा मलाल ।।मुड़ - मुड़ देखे उम्र जो, पीछे छूटे मोड़ ।क्या है अपने पास अब, क्या आए हम छोड़ ।।रही शिकायत वक्त से, गया उम्र जो छीन ।कहाँ वक्त की धुंध में, लम्हे गए हसीन ।।उम्र ढली रहने लगे, दूर - दूर सब लोग ।तनहा बैठे भोगते , तनहाई का रोग ।।घटता जीवन देखकर, उम्र हुई बैचैन ।सोच - सोच कर भोर भी, लगती जैसे रैन ।।अन्तिम घट पर बैठकर, सोचे हर  इंसान…See More
Apr 6
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात ।।खामोशी से पूछिए, क्या है उसका दर्द ।किन राहों की है भरी, उसमें इतनी गर्द ।।लफ्ज अकेले हो गए, ठहर गए जज्बात ।कोई अपना दे गया, दिल को वह आघात ।।हुई उम्र तो सामने, उभरी हर तस्वीर ।रुखसारों पर दर्द की, शेष रही तहरीर ।।रेजा - रेजा हो गए, जीवन के सब ख्वाब ।चश्मे साहिल पर रहे, यादों के सैलाब ।।लहरों सी यह जिंदगी, रहे सदा मझधार ।कभी हकीकत ढूँढती, कभी ख्वाब से प्यार ।।करवट काँटों से भरी , तनहा सिसकें…See More
Mar 23
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम ।।उन्मादी आवेग में , कब कुछ रहता ध्यान ।अधरों की शैतानियाँ, कहते सुर्ख निशान ।।अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल शाम । जज्बातों के वेग में, बंध हुए बदनाम ।।अधर समागम जब हुआ, खूब हुआ संग्राम ।स्पर्शों के दौर में , बिखर गये सब जाम ।।अधर दलों पर डोलता, जब दिल का ईमान ।बेशर्मी के पार सब, दिल करता सोपान ।।सुशील सरना / 17-3-25मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Mar 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंच



अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।

जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।



यह जग तो वह मंच है, जिसमें रंग अनेक ।

कहीं कहकहे गूँजते, कही दर्द  अतिरेक ।।



निश्चित सबको छोड़ना, जीवन का यह मंच ।

पर्दा गिरते ही मिटें , झूठे सभी प्रपंच ।।



आदि - अन्त के मध्य को, मंच करे साकार ।

इस जीवन के सत्य को, कहते हैं संसार ।।



आया जो इस मंच पर, गूँजे उसका नाम ।

हुआ अँधेरा बोलता , किरदारों का काम ।।



करे… Continue

Posted on May 30, 2026 at 2:42pm — 4 Comments

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्र



ठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।

कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।



यादों में ही रह गए , हसीं उम्र के साल ।

करें अधूरी हसरतें , मन में बड़ा मलाल ।।



मुड़ - मुड़ देखे उम्र जो, पीछे छूटे मोड़ ।

क्या है अपने पास अब, क्या आए हम छोड़ ।।



रही शिकायत वक्त से, गया उम्र जो छीन ।

कहाँ वक्त की धुंध में, लम्हे गए हसीन ।।



उम्र ढली रहने लगे, दूर - दूर सब लोग ।

तनहा बैठे भोगते , तनहाई का रोग ।।



घटता… Continue

Posted on April 6, 2026 at 12:48pm — 3 Comments

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविध



कभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।

सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात ।।



खामोशी से पूछिए, क्या है उसका दर्द ।

किन राहों की है भरी, उसमें इतनी गर्द ।।



लफ्ज अकेले हो गए, ठहर गए जज्बात ।

कोई अपना दे गया, दिल को वह आघात ।।



हुई उम्र तो सामने, उभरी हर तस्वीर ।

रुखसारों पर दर्द की, शेष रही तहरीर ।।



रेजा - रेजा हो गए, जीवन के सब ख्वाब ।

चश्मे साहिल पर रहे, यादों के सैलाब ।।



लहरों सी… Continue

Posted on March 23, 2026 at 1:53pm — 1 Comment

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधर

अधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।

मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम ।।

उन्मादी आवेग में , कब कुछ रहता ध्यान ।

अधरों की शैतानियाँ, कहते सुर्ख निशान ।।

अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल शाम ।

जज्बातों के वेग में, बंध हुए बदनाम ।।

अधर समागम जब हुआ, खूब हुआ संग्राम ।

स्पर्शों के दौर में , बिखर गये सब जाम ।।

अधर दलों पर डोलता, जब दिल का ईमान ।

बेशर्मी के पार सब, दिल करता सोपान ।।

सुशील सरना /…

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Posted on March 17, 2026 at 2:29pm — 1 Comment

Comment Wall (35 comments)

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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