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बाल साहित्य

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बाल साहित्य

यहाँ पर बाल साहित्य लिखा जा सकता है |

Location: World
Members: 166
Latest Activity: Jun 3

इस समूह में सभी रचनाकारों द्वारा बाल साहित्य के साथ-साथ ही, बच्चों द्वारा रचित कवितायेँ, कहानियाँ और चित्र भी सादर आमंत्रित है.

Discussion Forum

चुन्नी की बाजीजान (बाल-कविता)

कबूतर बाजी आ गईंबालकनी पर बैठ गईं।लू-लपटें चल रहींआसरा वो ढूंढ रहीं।कबूतर बाजी अंदर आईंफ्लैट पूरा जब घूम आईं।मिला न कोई अड्डा मन कापंखों से था ख़तरा तन का।कौने में दुबक कर बैठ गईंजैसे-तैसे प्राण बचा पाईं।चुन्नी ने पंखे ऑफ़ कियेकबूतरनी के फोटो…Continue

Tags: लू-लपट, पक्षी, कबूतर, कबूतरनी, बाल-कविता

Started by Sheikh Shahzad Usmani Jun 3.

'अब तुम्हारे हवाले ... बहिनों' ( संस्मरण)

उन दोनों की मैं बहुत शुक्रगुजार हूं। बताऊं क्यूं? क्योंकि इस बार के गणतंत्र दिवस में उन दोनों ने मुझे भी अपने साथ शामिल कर ही लिया। जिस तरह उन दोनों को सजाया-संवारा गया, राष्ट्रीय ध्वज से गौरवान्वित किया गया; उसी तरह मुझे भी! उन दोनों को गुड्डू ही…Continue

Tags: बाल-संस्मरण, बाल-साहित्य, संस्मरण

Started by Sheikh Shahzad Usmani Jan 20.

जुगत (बाल-लघुकथा/बाल-कहानी)

गुड्डू, गोविंद और गोपी तीनों अलग अलग कक्षाओं के थे और तीनों दोस्त भी नहीं थे। स्कूल में आज फिर वे तीनों न तो मध्यान्ह अवकाश में अपना मनपसंद गेम खेल पाये थे और न ही इस समय खेल के पीरियड में उन्हें उनकी कक्षा के साथियों ने अपने साथ किसी खेल में शामिल…Continue

Tags: बाल-कहानी, बाल-लघुकथा, लघुकथा

Started by Sheikh Shahzad Usmani Dec 28, 2018.

बाल कविता 2 Replies

फूल खिले जो बगिया मेंवह कितने सुन्दर लगते हैंलाल ,गुलाबी,नीले,पीलेमन खुशियों से भरते हैंतितली उड़ती रंग-बिरंगीफूलों पर है इधर-उधरभँवरे भी गुँजन करतेउन पर मंडराने लगते हैंचूँ-चूँ करती चिड़ियाँ भीआकर डाली पर खेल रहींइस डाली से उस डाली परउड़ कर झूला झूल…Continue

Started by Usha Awasthi. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Dec 29, 2018.

पापा जैसा चुनमुन (कहानी )

पापा जैसा चुनमुनसोमवार स्कूल का आखिरी दिन था |कल से गर्मियों की छुट्टियाँ थीं |चुनमुन स्कूल-वैन से घर लौट रहा था| ड्राईवर (संवाहक ) अंकल गाना गा रहे थे और बस चलाए जा रहे थे |“अंकल कल से आपकी भी छुट्टी पड़ गयी ?” चुनमुन ने पूछा“हाँ |” ड्राईवर अंकल ने…Continue

Tags: यातायात-साधन, काम-धंधे, दिन, के, सप्ताह

Started by somesh kumar May 21, 2018.

तब ही मंज़िल पाओगे | 2 Replies

उठो  पढ़ो  नित  नव उमंग  से , आलस दूर भगा डालो | सुबह शाम करो  याद  मन से , रोज  आदत बना डालो  | मेहनत से कभी डरो नहीं ,   आगे  कदम बढाते जा   | रोज  सुबह  की बेला में उठ , सभी पाठ दुहराते जा  | डरना नहीं किसी मौसम से , सर्दी गर्मी  हो  जाड़ा   |  लगन…Continue

Tags: |, कविता

Started by Shyam Narain Verma. Last reply by Shyam Narain Verma May 21, 2018.

कोयल (बाल कविता) 5 Replies

ताटंक छंद (16, 14 पर यति, अंत मे तीन गुरु)कोयल वसन्त ऋतु की रानी, सात सुरों की ज्ञाता हैगाती है जब अपनी धुन में,मन मधुरस हो जाता है।।दिखने में है काली लेकिन,लगती कितनी भोली हैस्वर्ग लोक से सीखी इसनेमिसरी जैसी बोली है।1।आम्र कुंज में उड़ती फिरती,लुक…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

बाल प्रार्थना (शक्ति छंद) 3 Replies

शक्ति छंद:122 122 122 12 (11=2 मांन्य)करें प्रार्थना प्रभु जरा ध्यान दोदया प्रेम दिल में भरा ज्ञान दोजुड़ें ना कभी हम किसी पाप सेबचें हम बुरे कर्म सन्ताप से।।जलाएँ न घर हम किसी और कासजाएँ वतन मिल नए दौर का।।लगे हर जगह आज घर द्वार साअखिल देश हो एक…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

गौरैया (विश्व गौरेया दिवस पर बाल कविता) 3 Replies

घर आँगन की राज दुलारी,प्यारी चुनमुन गौरैयाकभी अकेले कभी झुंड मेंकरती है ता ता थैया ।।चोंच दबाकर तिनका तिनका,अपना नीड़ बनाती हैफुदक फुदक कर घर आँगन के,कीड़े चट कर जाती है।।कभी नाचती कभी झगड़तीइधर इधर बलखाती हैछोटे छोटे पर है लेकिन,कभी पकड़ ना आती…Continue

Started by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

चन्द बाल कविताएं ( शक्ति छंद) 3 Replies

बड़ा जग भरा नीर जूठा कियामगर घूँट भर ही लिया औ पियाउँडेला गया सब,बचा जो, उसेजरूरत कहाँ है न मन में घुसेखुले में जला फूँस करते धुआँरहे खोद खुद के लिए यूँ कुआँजहर से भरी वायु होगी जहाँभला ठीक साँसें मिलेंगी कहाँचलाएं पटाखे खुशी में सभीन सोचें सही ये न…Continue

Started by सतविन्द्र कुमार राणा. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani May 20, 2018.

 
 
 

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