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Usha Awasthi
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Usha Awasthi's blog post स्वयं को एक बार देखो
"आद0 ऊषा अवस्थी जी सादर अभिवादन। अच्छी कविता का सृजन हुआ है, बधाई स्वीकार कीजिये"
Feb 2
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post स्वयं को एक बार देखो
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 29
Vinita Shukla commented on Usha Awasthi's blog post स्वयं को एक बार देखो
"अति सुन्दर."
Jan 29
Usha Awasthi posted a blog post

स्वयं को एक बार देखो

अवनि के विस्तृत पटल पर प्रकृति के नित नव सृजन, संगीत की अद्भुत समन्वित राग-रागनियों के रस , लय , छन्द का विस्तार देखो स्वयं को एक बार देखो चहुँ दिशाओं में थिरकतीं इन्द्रधनुषी नृत्य करतीं रंगों की मनहर ऋचाएँ  सृष्टिकर्ता प्रकृति का प्रतिपल नया अभिसार देखो स्वयं को एक बार देखो विपुल रवि , ग्रह , चन्द्र मंडित गहन अनुशासित अखंडित ज्योति किरणों से प्रभासित व्योम में , गतिमान सामंजस्य का श्रृंगार देखो स्वयं को एक बार देखो काल रथ आरूढ़ शक्ती रचना और संहार करती व्यवस्थित गणितीय नियम से ,  पार इन…See More
Jan 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post जाने कितने बढ़े हुए हैं
"आ. ऊषा जी, अच्छी रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 17
Mahendra Kumar commented on Usha Awasthi's blog post जाने कितने बढ़े हुए हैं
"आदरणीया ऊषा अवस्थी जी, इस बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 16
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post जाने कितने बढ़े हुए हैं
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 14
Usha Awasthi posted a blog post

जाने कितने बढ़े हुए हैं

जाने कितने बढ़े हुए हैं दुष्ट, अधर्मी, व्यभिचारी पग-पग पर धोखा देते जो लोभी, कृपण,अनाचारी इनकी घातों का कब तक,अब बोझ सहन करना होगा? कलियुग के इन दुष्ट,पापियों  का, कुछ तो करना होगा अन्यायी, पापाचारी जो कामी, भ्रष्ट, दुराचारी जो इनकी कुटिल कुचालों का प्रतिरोध हमे करना होगा मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jan 14
Sheikh Shahzad Usmani replied to Usha Awasthi's discussion बाल कविता in the group बाल साहित्य
"प्रकृति व पर्यावरण चेतना पर बहुत बढ़िया बालमन की रचना। हार्दिक बधाई आदरणीया उषा अवस्थी साहिबा।"
Dec 29, 2018
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"//जनाब मुहम्मद आरिफ साहब, आप ख़ुलेआम (श्रीमती उषा अवस्थी जी, जोकि एक वरिष्ठ नागरिक हैं) को अपमानित कर रहे हैं. एक बुजुर्ग महिला, हरेक नाम के साथ आदरणीय जोड़कर लिखेगी तो अटपटा नहीं लगेगा? वे सब नामों के आगे 'जी' लगाकर संबोधित कर रही हैं.…"
Oct 10, 2018
Vinita Shukla commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"जनाब मुहम्मद आरिफ साहब, आप ख़ुलेआम (श्रीमती उषा अवस्थी जी, जोकि एक वरिष्ठ नागरिक हैं) को अपमानित कर रहे हैं. एक बुजुर्ग महिला, हरेक नाम के साथ आदरणीय जोड़कर लिखेगी तो अटपटा नहीं लगेगा? वे सब नामों के आगे 'जी' लगाकर संबोधित कर रही हैं. क्या…"
Oct 9, 2018
Mohammed Arif commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"आदरणीया उषा अवस्थी जी आदाब,                                      ओबीओ साहित्य का एक लब्ध प्रतिष्ठ मंच है । इस मंच पर बहुत ही सम्मान और गरिमा का ध्यान दिया…"
Oct 9, 2018
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"समर कबीर जी, हर बात हरेक पर लागू नहीं होती,धन्यवाद।"
Oct 8, 2018
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"नीलम उपाध्याय जी, धन्यवाद।"
Oct 8, 2018
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"मोहम्मद आरिफ जी, शुक्रिया।"
Oct 8, 2018
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post रिश्ते तो कपड़े हैं
"मोहम्मद आरिफ जी, शुक्रियि।"
Oct 8, 2018

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

स्वयं को एक बार देखो

अवनि के विस्तृत पटल पर

प्रकृति के नित नव सृजन,

संगीत की अद्भुत समन्वित

राग-रागनियों के रस , लय ,

छन्द का विस्तार देखो

स्वयं को एक बार देखो



चहुँ दिशाओं में थिरकतीं

इन्द्रधनुषी नृत्य करतीं

रंगों की मनहर ऋचाएँ 

सृष्टिकर्ता प्रकृति का प्रतिपल

नया अभिसार देखो

स्वयं को एक बार देखो



विपुल रवि , ग्रह , चन्द्र मंडित

गहन अनुशासित अखंडित

ज्योति किरणों से प्रभासित

व्योम में , गतिमान

सामंजस्य का श्रृंगार देखो…

Continue

Posted on January 27, 2019 at 8:30pm — 3 Comments

जाने कितने बढ़े हुए हैं

जाने कितने बढ़े हुए हैं
दुष्ट, अधर्मी, व्यभिचारी
पग-पग पर धोखा देते जो
लोभी, कृपण,अनाचारी

इनकी घातों का कब तक,अब
बोझ सहन करना होगा?
कलियुग के इन दुष्ट,पापियों 
का, कुछ तो करना होगा

अन्यायी, पापाचारी जो
कामी, भ्रष्ट, दुराचारी जो
इनकी कुटिल कुचालों का
प्रतिरोध हमे करना होगा


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on January 11, 2019 at 6:30pm — 3 Comments

आधुनिक शिक्षा संस्थान

शिक्षा संस्थाओं के
हाल आज और हैं
छात्र यूनियनों में
लड़ाई  के दौर हैं

शिक्षालय आज 
राजनीति के अड्डे हैं
कमाई,चुनाव के
थ॓धों पर थंधे हैं

फैली अराजकता
अलग -अलग झंडे हैं
परिसर में घूमते
दलालों के पंडे हैं


मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 4, 2018 at 10:30am

प्राचीन गुरुकुल

पूर्णतया शिक्षा को गुरू समर्पित थे

कंद,मूल,फल,बिना जोता अन्न खाते थे

पठन -पाठन को समय बचाते थे

तभी तो गुरुजन श्रृषि कहलाते थे



गुरुकुल के प्राँगण में व्यर्थ वाद वर्जित था

गुरू ज्ञान-धारा से हर छात्र सिंचित था

चरणों में उनके नतमस्तक हो जाते थे

तभी तो गुरुजन श्रृषि कहलाते थे



राजा उनसे मिलने गुरुगृह जब जाते थे

आयुध अपने बाहर रख अन्दर आते थे

उलझनें शासन की,उन स॔ग सुलझाते थे

तभी तो गुरुजन श्रृषि कहलाते थे



मौलिक एव॔…

Continue

Posted on August 4, 2018 at 10:30am — 8 Comments

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At 9:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
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"आदरणीय हरिआेम श्रीवास्तव जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
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"आदरणीय शैलेश चंद्राकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
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"प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय नीलम उपाघ्याय जी।"
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी।"
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"आपका दिल से आभार आदरणीय"
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"एक ही है लेकिन जबरदस्त है"
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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"एक ही लेकिन जबरदस्त है आदरणीया"
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Shlesh Chandrakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"वाह वाह भावपूर्ण, समयसापेक्ष सृजन आदरेय.... बहुत बधाई"
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anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"हार्दिक आभार आदरणीय"
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