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Usha Awasthi
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आशीष यादव commented on Usha Awasthi's blog post आए , तोड़े गर्व
" आदरणीया उषा अवस्थी जी प्रणाम। बहुत अच्छी रचना बनी है। बधाई स्वीकार करें। "
Sep 10
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post आए , तोड़े गर्व
"आ0 समर कबीर साहेब, मुझे आपकी प्रतिक्रिया पाकर अत्यन्त हर्ष होता है। यदि रचना आपको अच्छी लगी तो अच्छी ही होगी। आभार आपका "
Sep 8
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post आए , तोड़े गर्व
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
Usha Awasthi posted a blog post

आए , तोड़े गर्व

धरणी को बरबाद करचन्द्र करो जा नष्टफिर ढूँढो घर तीसराजहाँ न कोई कष्टयह क्रम चलता ही रहेमानव ही जब दुष्टआपस में लड़ कर करेसर्व विभूति विनष्टसमझे मालिक स्वयं कोबन बैठा भगवानहिरनकशिपु सम सोच रखऔरों का अपमानकरते बम के परीक्षणखुशी मने ज्यों पर्वराम , कृष्ण सदृश कोईआए , तोड़े गर्वमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Sep 3
Dimple Sharma commented on Usha Awasthi's blog post आलस करैं न नेक
"आदरणीया ऊषा अवस्थी जी नमस्ते, गांव की महक लिए बिल्कुल गांव की भाषा में रची हुई ये रचना बहुत खुबसूरत हुई है बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Sep 2
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post आलस करैं न नेक
"मोहतरमा उषा अवस्थी जी आदाब , अच्छी रचना हुई है , बधाई स्वीकार करें I"
Aug 31
Usha Awasthi posted a blog post

आलस करैं न नेक

कपड़ा-लत्ता बाँधि कैजावैं अपने देसकितने दिनन बिता गएतबहुँ लगै परदेसपहुचैं अपने द्वार-घरलक्ष्य यही बस एकजा खेती - बाड़ी करैंआलस करैं न नेकधूप - ताप मा बिन रुकेचले जाँय सब गाँवसोचत जात , थमें नहींमिले जो चाहे छाँवनदियन नाला केर सबकचरा देब हटायलहर-लहर बहियैं सबैधरती पियै अघायबबुआ से कहिबै चलौगइया लेइ खरीददूध, दही , मट्ठा मिलैरोजहि मनिहै ईद बचै तो ओहिका बेचि कैराशन लइ कै आबबिना मिलावट बेचिहौंलालच मनहुँ न लाब  जो भी खेतन मा मिली नाज खाँय चाहे मोटदिन गुजरिहैं मजे माभलेहु पास कम नोटमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 30
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सारा हिन्दुस्तान
"रचना अच्छी लगी ,जान कर खुशी हुई । आभार आपका"
Aug 26
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post गीत , चाँद हमारे अँगना
"आशीष यादव जी ,अच्छा लगा यह जान कर कि आपने इसे गाया। मेरे जो भी गीत हैं उनकी रचना गाकर ही होती है, यह गीत 1987में लिखा था। धन्यवाद।"
Aug 26
आशीष यादव commented on Usha Awasthi's blog post सारा हिन्दुस्तान
"Very good creation हुआ है। congratulations स्वीकार कीजिए।"
Aug 26
आशीष यादव commented on Usha Awasthi's blog post गीत , चाँद हमारे अँगना
"बहुत अच्छा गीत बना है। अच्छा लगा इसको गा कर।"
Aug 26
Usha Awasthi and Sheela Sharma are now friends
Aug 24
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सारा हिन्दुस्तान
" आभार , शीला शीला जी"
Aug 24
Sheela Sharma commented on Usha Awasthi's blog post सारा हिन्दुस्तान
"आदरणीया दीदी, रचन के लिये बधाई।"
Aug 24
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post गीत , चाँद हमारे अँगना
"डिम्पिल शर्मा जी , नमस्ते। गीत आपको सुन्दर लगा , जान कर खुशी हुई । हार्दिक आभार आपका"
Aug 22
Dimple Sharma commented on Usha Awasthi's blog post गीत , चाँद हमारे अँगना
"आदरणीया ऊषा अवस्थी जी नमस्ते,वाह बहुत सुंदर, खुबसूरत गीत पर बधाई स्वीकार करें आदरणीया।"
Aug 22

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

आए , तोड़े गर्व

धरणी को बरबाद कर

चन्द्र करो जा नष्ट

फिर ढूँढो घर तीसरा

जहाँ न कोई कष्ट

यह क्रम चलता ही रहे

मानव ही जब दुष्ट

आपस में लड़ कर करे

सर्व विभूति विनष्ट

समझे मालिक स्वयं को

बन बैठा भगवान

हिरनकशिपु सम सोच रख

औरों का अपमान

करते बम के परीक्षण

खुशी मने ज्यों पर्व

राम , कृष्ण सदृश कोई

आए , तोड़े गर्व

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 3, 2020 at 7:26pm — 3 Comments

आलस करैं न नेक

कपड़ा-लत्ता बाँधि कै

जावैं अपने देस

कितने दिनन बिता गए

तबहुँ लगै परदेस

पहुचैं अपने द्वार-घर

लक्ष्य यही बस एक

जा खेती - बाड़ी करैं

आलस करैं न नेक

धूप - ताप मा बिन रुके

चले जाँय सब गाँव

सोचत जात , थमें नहीं

मिले जो चाहे छाँव

नदियन नाला केर सब

कचरा देब हटाय

लहर-लहर बहियैं सबै

धरती पियै अघाय

बबुआ से कहिबै चलौ

गइया लेइ खरीद

दूध, दही , मट्ठा…

Continue

Posted on August 30, 2020 at 11:27pm — 2 Comments

गीत , चाँद हमारे अँगना

झाँका , झाँका , देखो झाँका

चाँद हमारे अँगना

आने वाला है कोई 

बाजे मेरा कँगना

हो, हो , हो , हो

झाँका, झाँका , देखो झाँका

सुहाना समां है

खुला आसमां है

करतीं ठिठोली

तारों की टोली

झूमे , झूमे , देखो झूमे

आज हमारे अँगना 

आने....

बहे पुरवइया

डोले मन की नैया

मौसम की घड़ियाँ

जादू की छड़ियाँ

फेरें , फेरें , जादू फेरें

आज हमारे…

Continue

Posted on August 21, 2020 at 11:35pm — 8 Comments

सारा हिन्दुस्तान

पढ़ी - लिखी जो गृहणियाँ

देखें निज परिवार

घर में बूढ़ी सास हैं

और श्वसुर लाचार

शिशु जिनके हैं पालने

सेवा की दरकार

आया पर छोड़ें नहीं

सहें स्वयं सब भार

गढ़ती हैं व्यक्तित्व वह

जिस विधि कोई कुम्हार

खोट सुधार सहन करें

चाहे विघ्न हजार

सदा करें निष्काम हो

सबके सुख की वृद्धि

प्रेम , हर्ष , ऐश्वर्य की

होती तभी समृद्धि

घर कुटुम्ब के हेतु जो

अपना सुख दे…

Continue

Posted on August 19, 2020 at 7:24pm — 8 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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