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Sushil Sarna
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Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तितली-पुष्प प्रेम :
"आ. भाई सुशील जी, सम्वादात्मक रुप में सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।""
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बहुत अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
Saturday
Sushil Sarna replied to Saurabh Pandey's discussion मात्रिक पदों में शब्द-संयोजन in the group भारतीय छंद विधान
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम ... सर छंदों में गेयता के आधारभूत सिद्धांतों को आपने बहुत ही सरल और सुंदर ढंग से समझाया है। इस हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया।"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय vijay nikore जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का तहे दिल से शुक्रिया।"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

पानी पर चंद दोहे :

पानी पर चंद दोहे :प्यासी धरती पर नहीं , जब तक बरसे नीर। हलधर कैसे खेत की, हरित करे तकदीर।१ ।पानी जीवन जीव का, पानी ही आधार। बिन पानी इस सृष्टि का, कैसे हो शृंगार।२ ।पानी की हर बूँद में, छुपा हुआ है ईश। अंतिम पल इक बूँद से, मिल जाता जगदीश।३ । पानी तो अनमोल है, धरती का परिधान। जीवन ये हर जीव को, प्रभु का है वरदान।४ ।बूँद बूँद अनमोल है, इसे न करना व्यर्थ। अगर न चेते आज तो, होगा बड़ा अनर्थ।५ ।जल संरक्षण के लिए, किया न अगर प्रयास। कैसे मानव फिर भला, बुझ पाएगी प्यास।६ ।श्यामवर्ण सा हो गया,…See More
Friday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"बहुत ही सुन्दर क्षणिकाएँ कही हैं। हार्दिक बधाई, मित्र सुशील जी।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पानी पर चंद दोहे :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।आदरणीय आप सही हैं टंकण त्रुटि रह गई। अभी संशोधित करता हूँ। हार्दिक आभार इस त्रुटि की तरफ ध्यान आकर्षित करने का। "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।"
Thursday
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है मेरे दामन से लिपट कर के वो रो लेती है मेरी तन्हाई मेरे साथ ही सो लेती है वाह आदरणीय सलीम साहिब वाह क्या खूब दर्दीले अहसासों को आपने लफ्ज़ अता किये हैं। इस बेहतरीन…"
Thursday
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हर इक सू से सदा ए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगतीं ।सुना है इस वतन को बेटियां अच्छी नहीं लगतीं ।। न जाने कितने क़ातिल घूमते हैं शह्र में तेरे ।यहाँ कानून की खामोशियाँ अच्छी नहीं लगतीं ।। वाह आज के नंगे यथार्थ को कितनी संजीदगी से आपने अपनी ग़ज़ल में पेश किया…"
Thursday
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सदमे में है बेटियाँ चुप बैठे हैं बाप - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदम युग से आज तक, नर बदला क्या खासबुझी वासना की नहीं, जीवन पीकर प्यास।१। जिसको होना राम था, कीचक बन तैयारपन्जों से उसके भला, बचे कहाँ तक नार।२। वाह बहुत सुंदर आदरणीय लक्ष्मण धामी जी ... क्या अहसास हैं ... खूबसूरत अशआर की ये ग़ज़ल काबिले तारीफ़ है।…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

कुछ क्षणिकाएँ : ....

कुछ क्षणिकाएँ : ....बढ़ जाती है दिल की जलन जब ढलने लगती हैसाँझ मानो करते हों नृत्य यादों के अंगार सपनों की झील पर सपनों के लिए...................आदि बिंदु अंत बिंदु मध्य रेखा बिंदु से बिंदु की जीवन सीमा.......................तृषा को दे गईदर्दतृप्ति को करते रहे प्रतीक्षा पुनर्मिलन का अधराँगन में विरही अधरभोर होने तक......................निर्जीव राहें उदास दुआएँ गतिहीन हवाएँ शायद चल दिया एक अंत अनंत की तलाश मेंसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

तितली-पुष्प प्रेम :

तितली-पुष्प प्रेम :
तितली पूछे फूल से ,बता मुझे इक बात।
...........कैसे तेरी गंध से, भर जाते आघात।
...............हाली सी मुस्कान ले, यूँ बोला फिर पुष्प-…
Continue

Posted on December 7, 2019 at 6:00pm — 1 Comment

दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......

दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......

शराबों में शबाबों में ख़्वाबों में किताबों में।

ज़िंदगी उलझी रही सवालों और जवाबों में।

.कैद हूँ मुद्दत से मैं आरज़ूओं के शहर में -

उम्र भर ज़िन्दा रहे वो दर्द के सैलाबों में।

.........................................................



पूछो ज़रा चाँद से .क्यों रात भर हम सोये नहीं।

यूँ बहुत सताया याद ने .फिर भी हम रोये नहीं।

सबा भी ग़मगीन हो गयी तन्हा हमको देख के-

कह न सके दर्द अश्क से ज़ख्म हम ने धोये…

Continue

Posted on December 6, 2019 at 5:32pm

कुछ क्षणिकाएँ : ....

कुछ क्षणिकाएँ : ....

बढ़ जाती है

दिल की जलन

जब ढलने लगती है

साँझ

मानो करते हों नृत्य

यादों के अंगार

सपनों की झील पर

सपनों के लिए

...................

आदि बिंदु

अंत बिंदु

मध्य रेखा

बिंदु से बिंदु की

जीवन सीमा

.......................

तृषा को

दे गई

दर्द

तृप्ति को

करते रहे प्रतीक्षा

पुनर्मिलन का

अधराँगन में

विरही अधर

भोर होने…

Continue

Posted on December 3, 2019 at 8:07pm — 3 Comments

३ क्षणिकाएँ :

३ क्षणिकाएँ :

दूर होती गईं

करीब आती आहटें

शायद

घुटनें टेक दिए थे

साँसों ने

इंतज़ार के

.............................

दूर चला जाऊँगा

स्वयं की तलाश में

आज रात

जाने किसके बिम्ब में

हो गया है

समाहित

मेरा प्रतिबिम्ब

..............................

हां और न के

लाखों चेहरे

हर चेहरे पर

गहराती झुर्रियाँ

हर झुर्री

विरोधाभास को जीतने की

दफ़्न…

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Posted on November 26, 2019 at 4:30pm — 12 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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