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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान ।सोच रहा वह  इश्क में, क्या पाया नादान ।।आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत के ईनाम ।नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।ख्वाबों सा हर पल लगे, उन बांहों में यार ।जिस्मानी जन्नत मिली, दिल को मिला करार ।।कैसी ख्वाहिश कर बैठा , पागल दिल नादान ।आसमान सम चाँद पर, खो बैठा ईमान ।।सुशील सरना / 4-2-26मौलिक एवं अप्रकाशित See More
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो, छूती  मेघ पतंग ।गलत हाथ में जो गई, खंडित  होते अंग ।। ... वाह वाह ... क्या व्यंजना है  .. वाह वाह ...    शुभ-शुभ"
10 hours ago
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yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर ।।लगने को ऐसा लगे, जैसे सब हों साथ । वक्त पड़े तो छोड़ दे, खून, खून का हाथ ।।पहले जैसे अब कहाँ, जीवन में  संबंध । आती है अपनत्व में , स्वार्थ भाव की गंध ।।वाणी कर्कश हो गई, भूले करना मान । संबंधों को लीलती , धन की झूठी शान ।।रिश्तों में माधुर्य का, वक्त गया है बीत । अब तो बस पहचान की ,निभा रहे हैं रीत ।।सुशील सरना / 1-2-26मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Sunday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"आदरणीय अशोक जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी "
Jan 25
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय अशोक जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी "
Jan 25
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . .बेटी
"आदरणीय अशोक जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय जी "
Jan 25
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . .बेटी
"सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।.....मानना क्या यह तो सत्य ही है. बेटियों के हित का सुन्दर कुण्डलिया छंद रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Jan 25
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, पतंग के माध्यम से आपने बहुत कुछ कह दिया है. बहुत सुन्दर और सार्थक इस दोहावली के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Jan 25
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . .
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, निर्धन की पीड़ा पर सार्थक कुण्डलिया छंद रचा है आपने.हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Jan 25
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . .बेटी

कुंडलिया. . . . बेटीबेटी  से  बेटा   भला, कहने   की   है   बात । बेटा सुख का   सारथी, सुता   सहे  आघात ।।सुता   सहे    आघात, पराई   हरदम   रहती ।जीवन के वह दर्द, सदा ही चुप - चुप सहती ।।जाने   कितने  रूप,सुता   यह   ओढ़े    लेटी ।सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।सुशील सरना / 20-1-26मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jan 25
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार "
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए हार्दिक आभार आदरणीय जी ।"
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना , जीवन भरा  विवेक ।। साँसों का आरम्भ है, जीवन का प्रारम्भ ।अंत दिशा में जीव को, झोंके उसका दंभ ।। कब होता आरम्भ से ,कभी अंत का भान ।साँसों के …"
Jan 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिल

रात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।

फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन ।।

उल्फत की दहलीज पर, दिल बैठा हैरान ।

सोच रहा वह  इश्क में, क्या पाया नादान ।।

आँसू आहें हिचकियाँ, उल्फत के ईनाम ।

नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।

ख्वाबों सा हर पल लगे, उन बांहों में यार ।

जिस्मानी जन्नत मिली, दिल को मिला करार ।।

कैसी ख्वाहिश कर बैठा , पागल दिल नादान ।

आसमान सम चाँद पर, खो बैठा ईमान ।।

सुशील सरना…

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Posted on February 4, 2026 at 8:57pm

दोहा सप्तक. . . .नैन

दोहा सप्तक. . . . नैन

नैन द्वन्द्व में नैन ही, गए नैन से हार ।

नैनों को मीठी लगे, नैनों से तकरार ।।

नैनों की तकरार है, बड़ा अजब आनन्द ।

हृदय पृष्ठ पर प्रेम के,  अंकित होते छन्द ।।

नैनों के संवाद की, होती मोहक नाद ।

नैन सुने बस नैन के, अनबोले संवाद ।।

नैनों की होती सदा, मौन सुरों में बात ।

नैनों की मनुहार में, बीते सारी रात ।।

बड़ा मनोरम नैन का, होता है संसार ।

नैनों के इसरार को, नैन करें स्वीकार ।।

नैन उदधि में प्रेम का, जब…

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Posted on February 3, 2026 at 8:02pm

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

मिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।

निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर ।।

लगने को ऐसा लगे, जैसे सब हों साथ ।

वक्त पड़े तो छोड़ दे, खून, खून का हाथ ।।

पहले जैसे अब कहाँ, जीवन में  संबंध ।

आती है अपनत्व में , स्वार्थ भाव की गंध ।।

वाणी कर्कश हो गई, भूले करना मान ।

संबंधों को लीलती , धन की झूठी शान ।।

रिश्तों में माधुर्य का, वक्त गया है बीत ।

अब तो बस पहचान की ,निभा रहे हैं रीत ।।

सुशील…

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Posted on February 1, 2026 at 4:00pm — 2 Comments

कुंडलिया. . .बेटी

कुंडलिया. . . . बेटी

बेटी  से  बेटा   भला, कहने   की   है   बात ।
बेटा सुख का   सारथी, सुता   सहे  आघात ।।
सुता   सहे    आघात, पराई   हरदम   रहती ।
जीवन के वह दर्द, सदा ही चुप - चुप सहती ।।
जाने   कितने  रूप,सुता   यह   ओढ़े    लेटी ।
सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।

सुशील सरना / 20-1-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Posted on January 20, 2026 at 2:21pm — 2 Comments

Comment Wall (35 comments)

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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