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Sushil Sarna
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार ।"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"आदरणीय समर कबीर जी, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"आ. भाई सुशील सरना जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Sushil Sarna commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
"वाह आदरणीय बहुत ही दिलकश गजल हुई है । दिल से मुबारक कबूल करें ।"
Sunday
Sushil Sarna commented on Harash Mahajan's blog post मुहब्बत की जब इंतिहा कीजियेगा
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति आदरणीय हार्दिक बधाई सर"
Sunday
Sushil Sarna commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')
"वाह आदरणीय शानदार गजल"
Sunday
Sushil Sarna commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आदरणीय बहुत सुंदर प्रस्तुति हार्दिक बधाई"
Sunday
Sushil Sarna posted blog posts
Sep 18
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय  Harash Mahajan जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार ।"
Sep 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन पर आपका द्वारा दिया गया संशोधन कहीं भी हिन्दी शब्दकोष में नज़र नहीं आया। बहरहाल दस्ता की टंकण त्रुटि को संशोधित कर दासता कर रहा हूँ। समय देने का दिल से आभार।"
Sep 17
Harash Mahajan commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी सादर अभिवादन । बहुत ही सुंदर दोहों का सृजन । सादर ।"
Sep 17
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"// यहां दासता का भाव हमारी सोच में भाषा की गुलामी से है ।// इसके लिये 'दास्ता' नहीं "दाश्त:" सहीह शब्द है ।"
Sep 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । इंगित त्रुटि मैं अभी संशोधित कर रहा हूँ ।आभार"
Sep 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आदरणीय समर कबीर जी, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है ।सर यहां दासता का भाव हमारी सोच में भाषा की गुलामी से है ।सादर"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । हिन्दी दिवस पर सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई । ७ वें दोहे में दास्ता की जगह दासता कर लीजिएगा । सादर ..."
Sep 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

क्षणिकाएं : जिन्दगी पर

क्षणिकाएं : जिन्दगी पर

जिंदगी

जीती रही

मिट जाने के बाद भी

जिंदगी के लिए

कैद में

निर्जीव फ्रेम के

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

लगा देती है

जिन्दगी

आंखों की चौखट पर

सांकल

हर प्रतीक्षा की

सांसो से

अनबन

होने के बाद

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हो गया

गिलास खाली

पानी

बिखर जाने के बाद

थी

फिर भी उसमें

शेष

थोड़ी सी

नमी

अनदेखी

जिन्दगी…

Continue

Posted on September 17, 2020 at 8:52pm — 4 Comments

हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :

हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
हिन्दी हिन्दुस्तान के,माथे का सरताज।
जन-जन की ये आत्मा,हर मन की आवाज।।१
अपने मन की कीजिये, निज भाषा में बात।
सहज सरल प्यारी लगे,…
Continue

Posted on September 14, 2020 at 2:00pm — 8 Comments

बिना दिल के ......

बिना दिल के ......

लहरों से टकराती

हवाओं से उलझती कश्ती को

आख़िरकार

किनारा मिल ही गया

मगर

अभी तो उसे जीना था

वो समंदर

ज़िंदा थीं जिसमें

उसकी बेशुमार ख्वाहिशें

उसके साथ जीने की

लगता था

उसके बिना

रेतीले किनारों पर

मेरा बदन मृत सा पड़ा जी रहा था

इस आस में

कि मेरा समंदर

मुझे नहीं छोड़ेगा

इन रेतीले किनारों में

दफन होने के लिए

वो जानता है

बिना दिल के भी

कहीं ज़िस्म…

Continue

Posted on September 7, 2020 at 7:30pm — 8 Comments

ज़िंदगी ........

ज़िंदगी ........

झड़ जाते हैं

मौसमों की मार सहते सहते

एक एक करके सारे पात

किसी वयोवृद्ध वृक्ष के

भ्रम है उसकी अवस्था

क्योँकि

उम्र के चरम के बावज़ूद

रहती है ज़िंदा

अपने मौसम की प्रतीक्षा में

आदि किरण

ज़िंदगी की



लौट आते हैं उदास विहग

ज़िंदगी के

पुनः उन्हीं पर्ण विहीन शाखाओं पर

अंकुरित होती है जहाँ

फिर से शाखाओं की कोरों पर

पीत पुष्पों से

लौटे मौसम का अभिनन्दन करती…

Continue

Posted on September 3, 2020 at 9:30pm — 6 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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"सादर अभिवादन।"
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