Added by Krishnasingh Pela on February 1, 2015 at 11:00pm — 17 Comments
चाय का घूंट लेते हुए उनकी नज़र अखबार की एक खबर पर चली गयी. इलाके में एक लड़की की इज़्ज़त लुटी, आरोपी फरार"|
मन ही मन में राहत की सांस लेते हुए उन्होंने बगल में बैठी पत्नी से कहा " अच्छा हुआ , हमारी लड़की नहीं हुई वर्ना हमें भी डर के रहना पड़ता "|
पत्नी ने एक गहरी सांस ली और पिछले दिन का अखबार निकाला , पहले पन्ने पर छपी हुई तस्वीर जिसमें लड़कियां गणतंत्र दिवस के परेड की अगुआई कर रहीं थीं , उनके सामने रख दिया | चाय उनके हाँथ में ठंडी हो रही थी , वो पत्नी से नज़र नहीं मिला पा रहे थे…
Added by विनय कुमार on February 1, 2015 at 7:00pm — 12 Comments
ऐ दिल ……
ऐ दिल तू क्यूँ व्यर्थ में परेशान होता है
हर किसी के आगे क्यूँ व्यर्थ में रोता है
कौन भला यहां तेरा दर्द समझ पायेगा
हर अरमान यहां अश्क के साथ सोता है
ऐ दिल तू क्यूँ व्यर्थ में परेशान होता है ……
ये सांझ नहीं अपितु सांझ का आभास है
पल पल क्षरण होते रिश्तों का आगाज़ है
भावों की कन्दराओं में बोलता सन्नाटा है
पाषाणों में कहाँ प्यार का सृजन होता है
ऐ दिल तू क्यूँ व्यर्थ में परेशान होता है…
ContinueAdded by Sushil Sarna on February 1, 2015 at 2:00pm — 12 Comments
221 2121 1221 212
जो तेरी है कहानी वही मेरी दास्ताँ
मैं भी अकेला और तू भी तन्हा है वहाँ
हर गाम मुँह चिढ़ाती हुई ज़िन्दगी हमें
हैरान मेरा दिल है परेशान तेरी जाँ
जो तेरी रहगुज़र है नहीं रास्ता मेरा
कोई खिंचाव तो है मगर अपने दरमियाँ
कुछ ख्वाब नातमाम अधूरी सी हसरतें
हो बेकरार तुम भी वहाँ और मैं यहाँ
ग़मगीन तुम उदास मैं भी हूँ “शकूर” और
खामोश ये जहान है चुप-चुप सा आसमाँ
-मौलिक…
ContinueAdded by शिज्जु "शकूर" on February 1, 2015 at 12:23pm — 8 Comments
Added by Dr. Vijai Shanker on February 1, 2015 at 11:55am — 14 Comments
“हमारी मिट्टी और जड़ों को खोद-खोदकर ये चूहे हमारे हरे-भरे टापू को उजाड़ बना देंगे और फिर कहीं और बढ़ जाएँगे I“
एक हरे-भरे पेड़ ने चिंता व्यक्त की |
“सकरात्मक सोचों ! जहाज़ के डूबने से पहले इन्होनें बहुत-कुछ खाया-पचाया है, ये हमें पौष्टिक खाद देंगे |”
प्रसन्न मुद्रा में एक अन्य पौधा बोला |
जोर का आँधी-पानी आया | कई विशालकाय वृद्ध पेड़ों की जड़े बाहर आ गईं और कुछ वहीं गिर पड़े |कुछ समय पश्चात वहाँ नई प्रजति के बीज जमने लगे, टापू पर नया बसंत आ चुका था |
.
सोमेश…
ContinueAdded by somesh kumar on February 1, 2015 at 10:30am — 12 Comments
मुस्कुराते हो बहुत पछताओगे
बज़्म से तुम भी निकाले जाओगे
तुम विसाले यार को बेताब हो
उस से मिल कर भी बहुत पछताओगे
साथ तेरा मिलगया मगरूर हूँ
तुम भला क्यों गीत मेरे गाओगे
रूह को माँ बाप की तस्लीम कर
साथ अपने सब उजाले पाओगे
भूख से बच्चा बिलखता हो अगर
किस तरहा से रोटियां खा पाओगे
बात सच्ची कह रहे हो तुम मनु
इस जुबा पर तुम भी छाले पाओगे
.
मौलिक एवं अप्रकाशित
विजय कुमार मनु
Added by vijay on February 1, 2015 at 8:00am — 7 Comments
पात्र परिचय
गोपाल - एक गरीब बालक (उम्र करीब दस साल )
जमुना - गोपाल की माँ
मुनिया - गोपाल की छोटी बहन
गुप्ता जी - प्रतिष्ठित व्यापारी
रमेश - गुप्ता जी का छोटा भाई
गोलू - गुप्ता जी का सात वर्षीय पुत्र
शामू - गुप्ता जी का नौकर
(प्रथम दृश्य)
(छोटी सी झोपड़ी में जमुना , टूटी…
ContinueAdded by डिम्पल गौड़ on January 31, 2015 at 11:00pm — 6 Comments
सुनो,
है ईश्वर ऐसा करो
मुझे पागल कर दो
शरीर से दिमाग का
संपर्क खत्म कर दो
मेरे एहसास
मेरी प्यास
मेरी तृष्णा
मेरा प्यार
मेरी लालसा
से मेरा नाता खत्म कर दो
न मर्म रहे
न भावना
न दर्द रहे
न रोग ....
सुनो....
है ईश्वर ऐसा करो
मुझे पागल कर दो
जीवन तो तब भी रहेगा
दौड़ेगा रगों मे खून
देखुंगा, सुनुंगा
खा भी लूँगा
दोगे कपड़े तो…
ContinueAdded by Amod Kumar Srivastava on January 31, 2015 at 8:00pm — 7 Comments
Added by ram shiromani pathak on January 31, 2015 at 10:00am — 25 Comments
राधॆश्यामी छन्द :
=====================
भारत की यह पावन धरती,प्रगटॆ कितनॆं भगवान यहाँ !!
समय समय पर महापुरुष भी,दॆनॆ आयॆ सद्ज्ञान यहाँ !!
वॆद,ऋचायॆं लिखकर जिसनॆ,जीवन शैली सिखला दी है !!
एक शून्य मॆं सारी दुनियाँ,जॊड़,घटा कर दिखला दी है !!
इतिहास यहाँ का भरा पड़ा, वलिदानों की गाथाऒं सॆ !!
गूँज रहा है शौर्य आज भी, वीरॊं की अमर चिताऒं सॆ !!
शौर्य-शिरॊमणि यॆ भारत है,सत्य,अहिंसा की है डॊरी !!
एक दृष्टि सॆ पूर्ण पुरुष है,एक…
Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 31, 2015 at 12:30am — 8 Comments
माँ तू सुनती क्यों नहीं
तूँ बुनती क्यों नहीं
इक नई सी जिंदगी
वो घुटनों पे चलना
वो आँखों को मलना
वो मिटटी को खाना
बिना सुर के गाना
वो चिल्ला के कहना
मुझे रोटी देना
आज फिर चूल्हे पे पानी
तूँ पकाती क्यों नहीं
माँ तूँ सुनती क्यूँ नहीं
वो तेरी हथेली
में कितनी पहेली
वो मेरा कसकना
वो तेरा सिसकना
वो ममता की छाया
मुझे याद आया
वो मुस्कान तेरी
वो पेशानी मेरी
आज फिर से बोशा
सजाती क्यूँ नहीं
माँ…
Added by vijay on January 30, 2015 at 7:30pm — 12 Comments
सुकन्या भारतीय वायुसेना में नौकरी के पहले दिन तैयार होते ही भागी भागी आयी और अपनी माँ मधु को एक सैल्यूट करते हुए कहा, "माँ देखो, तुम्हारा सपना, तुम्हारे सामने| अब और क्या चाहिये तुम्हे?"
मधु की आखों में चमक के साथ साथ आंसू भी आ गये| उसने कहा, "एक वादा और चाहिये, बेटे| यदि तेरे भी बेटी हुई और तेरा पति और सास उसकी हत्या करने की कोशिश करे, तो तू मेरे जैसे अपनी बेटी को लेकर भाग मत आना| तेरी बेटी की रक्षा करने का कोई न कोई तरीका तुझे तेरे अफसर सिखा ही देंगे|"
(मौलिक…
ContinueAdded by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on January 30, 2015 at 7:00pm — 14 Comments
दीवारें चहकने सी लगे
मकान जब घर बनता है
तेरे आने से घर मेरा
जन्नत बनता है
खुशियाँ , सावन की
घटाएँ बनने लगी
किलकारी से तेरी
मेरी दुनिया सजने लगी
खिड़कियाँ घर की
उम्मीद का सूरज लाए
सुगन्धित मस्त पवन
गीत बहारों के गुनगुनाएँ
आँगन में फागुन
रंग नए बिखरा गया
बसंती खेत की तरह
मेरे घर को वो लहरा गया
सरसों की फसल सम
मनभावन सा घर
पूज्य है मुझको मेरा छोटा सा घर…
Added by डिम्पल गौड़ on January 30, 2015 at 10:08am — 13 Comments
"यार,काव्य-गोष्ठी तो बहुत कर लीं पर काव्य-सम्मेलनों से बुलावा नहीं आता |"
"अरे मिट्टी के माध, अच्छी कविता लिखना–पढ़ना ही काफ़ी नहीं|"
"तो !"
"तोता बनना सीखो |"
"कैसे?"
"सज्जन के घर राम-राम |और चोर के घर-माल-माल |और फिर पाँचों अंगुलियाँ घी में | "
.
सोमेश कुमार (मौलिक एवं अप्रकाशित )
Added by somesh kumar on January 30, 2015 at 10:00am — 16 Comments
2122 2122 212
जब हमें दिल का लगाना आ गया
राह में देखो ज़माना आ गया
ख़त तुम्हारा देखकर बोले सभी
खुशबू का झोंका सुहाना आ गया
इक पता लेके पता पूंछे चलो
बात करने का बहाना आ गया
नाम तेरा जपते जपते यूँ लगे
अब तुझे ही गुनगुनाना आ गया
ज़िन्दगी रफ़्तार में चलती रही
मौत बोली अब ठिकाना आ गया
बेरुखी ने ही दिखाया गई हमें
फूल पत्थर पर चढ़ाना आ गया
शख्स इक गुमनाम देखा बोले सब
शहर में…
Added by gumnaam pithoragarhi on January 30, 2015 at 8:00am — 14 Comments
"आप का नाम क्या है ?" बगल में आई नयी पड़ोसन ने पूछा |
वो सोच में पड़ गयी , क्या बताये | शादी के बाद जब से इस घर में आई है तब से तो किसी ने उसके नाम से नहीं पुकारा | शुरू में बहू , फिर मुन्ने की माँ और अब मिसेस शर्मा , यही सुनती आई है वो | शायद तीस साल बहुत होते हैं किसी को खुद का वजूद भूलने के लिए | वो अपना वजूद ढूँढ रही थी , पड़ोसन चली गयी थी |
.
मौलिक एवम अप्रकाशित
Added by विनय कुमार on January 29, 2015 at 9:30pm — 20 Comments
2122 2122 2122 2122
******************************
मन किसी अंधे कुए में नित वफ़ा को ढूँढता है
जबकि तन लेकर हवस को रात दिन बस भागता है
*****
तार कर इज्जत सितारे घूमते बेखौफ होकर
कह रहे सब खुल के वचलना चाँद की भोली खता है
*****
जिंदगी भर यूँ अदावत खूब की तूने सभी से
मौत के पल मिन्नतें कर राह में क्यों रोकता है
****
जाँच को फिर से बिठाओ आँसुओं कोई कमीशन
घाव की मौजूदगी में दर्द …
Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 29, 2015 at 11:14am — 28 Comments
Added by Dr. Vijai Shanker on January 29, 2015 at 10:29am — 30 Comments
212 212 212 212
मेरे हँसने हँसाने पे शक़ है उसे
बेव़जह मुस्कुराने पे शक़ है उसे
.................
अलव़िदा कह गया जाता-जाता मग़र
आज़तक भूलपाने पे शक़ है उसे
....................
हर किसी से करूँ ज़िक्र मैं यार का
पर व़फायें निभाने पे शक़ है उसे
...................
कब से तनहाई दुल्हन बनी है मेरी
पर तुझे भूल जाने पे शक़ है उसे
.................
आँसुओं से समन्दर भी मैंने भरा
मेरे आँसू बहाने पे शक़ है उसे
उमेश…
ContinueAdded by umesh katara on January 29, 2015 at 9:19am — 27 Comments
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