For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

umesh katara
Share

Umesh katara's Friends

  • pratibha tripathi
  • वेदिका
  • rajesh kumari
 

umesh katara's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
bharatpur/ rajasthan
Native Place
bharatpur
Profession
gov.job
About me
insan bano

Umesh katara's Blog

हर आदमी रो रहा है

अभी अभी जन्मे हो

फिर भी इतना रोना धोना

बात क्या है

क्यों रो रहे हो बच्चे ?

मैंने पूछ लिया

एक प्रश्न बेवजह ।।

बच्चा चमत्कारी था

बोल पडा झट से

क्यों नहीं रोऊँ मैं

इस दुनिया में आके

जबकि इस दुनिया में

गरीब रो रहा है

अमीर रो रहा है

बेऔलाद रो रहा है

औलाद वाला रो रहा है

इस दुनिया में सब लोग

मेरी तरह नंगे हाल आये

फिर भी सब के सब रो रहे हैं

जो हँस रहा है

वो भी रो रहा है

जो रो रहा है वो भी रहा है

जब पूरी…

Continue

Posted on October 18, 2015 at 9:49am — 4 Comments

यादों को मंजूर नहीं है तेरा यूँ आना जाना

तुम मेरे हो या कोई पराये
निश्चित तो कर लेने दो
मेरी सूखी आँखों में
कुछ पानी तो भर लेने दो
या तो आकर ठहर ही जाओ
या फिर दूर चले जाओ
यादों को मंजूर नहीं है
तेरा यूँ आना जाना

उमेश कटारा
मौलिक व अप्रकाशित

Posted on July 19, 2015 at 8:54am — 3 Comments

फ़ैसला

मैं चुप था

मगर शामिल नहीं था

तुम्हारे फासलों के

फ़ैसले में



मेरी चुप्पी का

हर एक अर्थ लगाया था

तुमने अपनी समझ से



मेरे चुप रहने का अर्थ

तुमने उस दिन भी

गलत समझा था

जब कि शिरू हो रही थी

जिन्द्गी की यात्रा



और मेरी चुप्पी का अर्थ

आज भी गलत ही है

जबकि समाप्ति की ओर है

जिन्द्गी की यात्रा



क्योंकि तुमने

मेरी चुप्पी का हमेशा

वो अर्थ लगाया

जो अनुकूल था

तुम्हारे लिये



उमेश… Continue

Posted on July 5, 2015 at 12:26pm — 5 Comments

अदालत ने मेरा क़ातिल मुझे ठहरा दिया साहिब

1222 1222 1222 1222

---------------------------------------

मुहब्बत है कभी जिसने मुझे कहला दिया साहिब

मगर फिर घाव उसने ही बहुत गहरा दिया साहिब 



जरूरत ही नहीं होती मुहब्बत में व़फाओं की 

के बच्चों की तरह उसने मुझे बहला दिया साहिब



सड़क पर भूख से बेचैन माँ आँसू बहाती है

निवाला बेटे को जिसने ,कभी पहला दिया साहिब

 

मुहब्बत मिट नहीं पायी दीवारों में चुनी फिर भी

रक़ीबों ने जमाने से बहुत पहरा दिया साहिब



बहुत छेड़ा है दुनिया ने खुदा की पाक…

Continue

Posted on May 20, 2015 at 4:47pm — 10 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:13am on February 9, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:33pm on December 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

उमेश कटारा जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 3:45pm on November 3, 2013, umesh katara said…

जिन्दगी जीना सिखा रही है 
दर्द में  हँसना सिखा रही है 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"इस कदर फित्नो में उलझे कि ये हम भूल गएकिस तरफ चल पड़े हम, और किधर जाना था जनाब शिज्जु साहब उम्दा बात…"
7 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"यार,ख़ुशबू का मुक़द्दर ही यही है उसकोजिस तरफ़ लेके हवा जाए उधर जाना था...जनाब आसिफ ज़ैदी साहब उम्दा गज़ल…"
10 minutes ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मोहतरम जनाब मिर्ज़ा जावेद बेग साहब आदाब ख़ूबसूरत ग़ज़ल की ढेर सारी मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं सादर"
31 minutes ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय कृपया मार्गदर्शन करते हुए इन्ही भावों को व्यक्त करते हुए गजल कैसे बन पाएगी बताएं।"
39 minutes ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय कबीर साहब, मैं मानता हूँ यह गजल के मापदंडों पर सम्भवतः यह खरी ना उतरे। आप लोग सिखाएंगे तो…"
48 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब राकेश गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,बह्र,शिल्प,व्याकरण पर आपको अभी बहुत अभ्यास की…"
1 hour ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"अंतिम लाइन का पहला शब्द मुझको पड़ा जाए, मझको नही , टायपिंग मिस्टेक है। सादर"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"अच्छा सुझाव है ।"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"ऊला में 'उठकर' शब्द भर्ती का है,ऊला यूँ कर लें:- 'आप ने कह तो दिया है,मुझे घर जाना…"
1 hour ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"तूने ठाना आदिल, तुझको उधर जाना था, उनकी चाहत थी, तुझको मर जाना था। ** पाले पत्थरबाज, होली खून की वो…"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मोहतरम जनाब SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" साहब आदाब बहुत ख़ूबसूरत अशआर, ग़ज़ल के लिए…"
1 hour ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service