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Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

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Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी साहब, आदरणीय सुरेश कुमार जी कल्याण, आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहब्म आदरणीय सतविन्द्र कुमार भाई जी, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आदरणीय महेंद्र कुमार जी, आप सभी का सादर आभारी हूँ कि आप सभी को लघुकथा का यह प्रयास ठीक लगा और आप सभी…"
May 16
Mahendra Kumar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"देशप्रेम को केंद्र में रखकर बढ़िया लघुकथा लिखी है आपने दरणीय चंद्रेश जी. मेरी तरफ से हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर."
May 15
laxman dhami commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"कोटि कोटि नमन"
May 8
सतविन्द्र कुमार commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"आदरणीय चंद्रेश कुमार छतलानी जी,सामयिक घटना से कथानक निकाल कर आपने उत्तम सन्देश का सम्प्रेषण किया है।हार्दिक बधाई स्वीकारिये!"
May 7
सतविन्द्र कुमार commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"आदरणीय चंद्रेश कुमार छतलानी जी,सामयिक घटना से कथानक निकाल कर आपने उत्तम सन्देश का सम्प्रेषण किया है।हार्दिक बधाई स्वीकारिये!"
May 7
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चार महारथी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बहुत ही बढ़िया रचना कही है आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहब, अपराध कर के जो पकड़ा जाये वो अपराधी और जो बच जाये वो महारथी| सादर बधाई स्वीकार करें इस रचना के सृजन हेतु| "
May 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"देश-भक्त सैन्य-सम्मान के लिए इस तरह की फाइन आर्ट लघुकथाग्राफ़ी का दायित्व निभाने में सफल इस समसामयिक किन्तु सर्वकालिक प्रस्तुति के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं आदरणीय डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी जी।"
May 6
सुरेश कुमार 'कल्याण' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"आदरणीय चंद्रेश जी सम्मान भरी एवं बहुत ही सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई। सादर।"
May 6
Mohammed Arif commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post बैक टू बटालियन
"आदरणीय चंद्रेश जी आदाब, देशभक्ति के जज़्बै से भरपूर, कसावट कथानक और सधे संवादों वाली लघुकथा के लिए आपको ढेरों बधाईयाँ ।"
May 6
Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

बैक टू बटालियन

सुनसान रात में लगभग तीन घंटे दौड़ने के बाद वह सैनिक थक कर चूर हो गया था और वहीँ ज़मीन पर बैठ गया। कुछ देर बाद साँस संयत होने पर उसने अपने कपड़ों में छिपाया हुआ मोबाईल फोन निकाला। उस पर नेटवर्क की दो रेखाएं देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गयी और बिना समय गंवाये उसने अपनी माँ को फोन लगाया। मुश्किल से एक ही घंटी बजी होगी कि माँ ने फोन उठा लिया। सैनिक ने हाँफते स्वर में कहा, “माँ मैं घर आ रहा हूँ।” “अच्छा! तुझे छुट्टी मिल गयी? कब तक पहुंचेगा?” माँ ने ख़ुश होकर प्रश्न दागे। “छुट्टी नहीं मिली, मैं बंकर छोड़…See More
May 6
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May 1
Chandresh Kumar Chhatlani replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ लाईव लघुकथा गोष्ठी अंक-25 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी रजत जयंती अंक के सफल संचालन और सफलता पूर्वक समापन हेतु आदरणीय योगराज जी सर और पूरी ओबीओ टीम को सादर हार्दिक बधाई| "
May 1
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"दोनों ही रचनाएँ उत्तम सृजन का बेहतरीन उदाहरण हैं आदरणीय गणेश जी "बागी" सर, सादर बधाई स्वीकार करें| उत्तम शीर्षक, अच्छा कथ्य और तीक्ष्ण पंच युक्त लघुकथा 'बाज़ार' ने मुझे विशेष प्रभावित किया| सादर,"
Apr 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
" इस सन्देशप्रद और उत्तम रचना के सृजन हेतु सादर बधाई स्वीकार करें आदरणीय समर कबीर साहब|"
Apr 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
"रचना पढ़ते ही बरबस मुंह से वाह निकल गया आदरणीया कल्पना दी| सादर बधाई स्वीकार करें इस उत्तम सृजन हेतु|"
Apr 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-25 (रजत जयंती)
" बहुत बढ़िया रचनाएँ कही हैं आदरणीया जानकी जी, दोनों सृजन हेतु सादर बधाई स्वीकार करें|"
Apr 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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बैक टू बटालियन

सुनसान रात में लगभग तीन घंटे दौड़ने के बाद वह सैनिक थक कर चूर हो गया था और वहीँ ज़मीन पर बैठ गया। कुछ देर बाद साँस संयत होने पर उसने अपने कपड़ों में छिपाया हुआ मोबाईल फोन निकाला। उस पर नेटवर्क की दो रेखाएं देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गयी और बिना समय गंवाये उसने अपनी माँ को फोन लगाया। मुश्किल से एक ही घंटी बजी होगी कि माँ ने फोन उठा लिया।

 

सैनिक ने हाँफते स्वर में कहा, “माँ मैं घर आ रहा हूँ।”

 

“अच्छा! तुझे छुट्टी मिल गयी? कब तक पहुंचेगा?” माँ ने ख़ुश होकर प्रश्न…

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Posted on May 5, 2017 at 11:00pm — 8 Comments

उसकी ज़रूरत (लघुकथा)

उसके मन में चल रहा अंतर्द्वंद चेहरे पर सहज ही परिलक्षित हो रहा था। वह अपनी पत्नी के बारे में सोच रहा था, “चार साल हो गए इसकी बीमारी को, अब तो दर्द का अहसास मुझे भी होने लगा है, इसकी हर चीख मेरे गले से निकली लगती है।“

 

और उसने मुट्ठी भींच कर दीवार पर दे मारी, लेकिन अगले ही क्षण हाथ खींच लिया। कुछ मिनटों पहले ही पत्नी की आँख लगी थी, वह उसे जगाना नहीं चाहता था। वह वहीँ ज़मीन पर बैठ गया और फिर सोचने लगा, “सारे इलाज कर लिये, बीमारी बढती जा रही है, क्यों न इसे इस दर्द से हमेशा के लिए…

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Posted on March 6, 2017 at 11:00am — 6 Comments

लहराता खिलौना (लघुकथा)

देश के संविधान दिवस का उत्सव समाप्त कर एक नेता ने अपने घर के अंदर कदम रखा ही था कि उसके सात-आठ वर्षीय बेटे ने खिलौने वाली बन्दूक उस पर तान दी और कहा "डैडी, मुझे कुछ पूछना है।"

 

नेता अपने चिर-परिचित अंदाज़ में मुस्कुराते हुए बोला, "पूछो बेटे।"

 

"ये रिपब्लिक-डे क्या होता है?" बेटे ने प्रश्न दागा।

 

सुनते ही संविधान दिवस के उत्सव में कुछ अवांछित लोगों द्वारा लगाये गए नारों के दर्द ने नेता के होंठों की मुस्कराहट को भेद दिया और नेता ने गहरी सांस भरते हुए…

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Posted on January 27, 2017 at 9:11am — 4 Comments

कोई तो मरा है (लघुकथा)

भोजन कक्ष में बैठ कर परिवार के सभी सदस्यों ने भोजन करना प्रारंभ किया ही था कि बाहर से एक कुत्ते के रोने की आवाज़ आई। घर की सबसे बुजुर्ग महिला यह आवाज़ सुनते ही चौंकी, उसने सभी सदस्यों की तरफ देखा और फिर चुपचाप भोजन करने लगी।

 

उसने मुश्किल से दो कौर ही खाये होंगे और कुत्ते के रोने की आवाज़ फिर आई, अब वह बुजुर्ग महिला चिंताग्रस्त स्वर में बोली, "यह कुत्ता क्यों रो रहा है?"

 

उसके पुत्र ने उत्तर दिया, "चिंता मत करो, होगी कुछ बात।"

 

"नहीं! यह तो अपशगुन…

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Posted on January 18, 2017 at 8:59pm — 11 Comments

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At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

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