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Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)

अंतिम दर्शन हेतु उसके चेहरे पर रखा कपड़ा हटाते ही वहाँ खड़े लोग चौंक उठे। शव को पसीना आ रहा था और होंठ बुदबुदा रहे थे। यह देखकर अधिकतर लोग भयभीत हो भाग निकले, लेकिन परिवारजनों के साथ कुछ बहादुर लोग वहीँ रुके रहे। हालाँकि उनमें से भी किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि शव के पास जा सकें। वहाँ दो वर्दीधारी पुलिस वाले भी खड़े थे, उनमें से एक बोला, "डॉक्टर ने चेक तो ठीक किया था? फांसी के इतने वक्त के बाद भी ज़िन्दा है क्या?"दूसरा धीमे कदमों से शव के पास गया, उसकी नाक पर अंगुली रखी और हैरत भरे स्वर में…See More
Monday
vijay nikore commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत ही सुन्दर लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई"
Jun 12
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत ही संवेदनशील मार्मिक विषय को चुना है आपने आदरणीय और मुझे लगता है उसके साथ बखूबी न्याय किया..बधाई"
Jun 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत सुंदर कथा हार्दिक बधाई ।"
Jun 8
Mahendra Kumar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"क्या कोई पापी ऐसा भी हो सकता है जिसे नर्क में भी जगह न मिले? इस प्रश्न को केंद्र में रख कर एक सशक्त लघुकथा लिखी है आपने आदरणीय चंद्रेश कुमार छ्तलानी जी. शीर्षक भी एकदम सटीक है. मेरी तरफ़ से भी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jun 8
Neelam Upadhyaya commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश जी, नमस्कार । समसामयिक विषय और सामाजिक सरोकार से भरपूर महत्वपूर्ण संदेश देती बहुत हे बेहतरीन लघुकथा । प्रस्तुति के हार्दिक बधाई ।"
Jun 8
babitagupta commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"आदरणीय सर जी, बहुत ही सटीक वाक्यों में संदेश देती लघुकथा कि पापी को नरक में भी जगह नहीं है।हार्दिक बधाई।"
Jun 7
TEJ VEER SINGH commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश जी।वाह, क्या गज़ब की लघुकथा। आपकी सोच और कल्पनाशीलता की दाद देनी पड़ेगी। कायल हो गया आपकी रचना धर्मिता का। बहुत समय बाद आपकी लघुकथा पढ़ने को मिली, लेकिन मज़ा आगया।पुनः बधाई।"
Jun 7
Shyam Narain Verma commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"बहुत सुन्दर !! लघुकथा के लिये बधाइयाँ ॥सादर "
Jun 7
Rakshita Singh commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"आदरणीय चन्द्रेश जी, नमस्कार  भाव विभोर कर देने बाली बहुत ही सुन्दर लघुकथा । दिलीमुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"सांकेतिकता/ प्रतीकात्मकता भी है।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)
"स्वर्ग-नरक के पूर्व की कार्रवाई पर बेहतरीन परिकल्पना के साथ अभीष्ट संदेश सम्प्रेषित करती समसामयिक विचारोत्तेजक और प्रभावोत्पादक सामाजिक सरोकार की अद्भुत बेहतरीन लघुकथा के लिये तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और आभार मुहतरम जनाब डॉ. चन्द्रेश कुमार…"
Jun 6
Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)

अंतिम दर्शन हेतु उसके चेहरे पर रखा कपड़ा हटाते ही वहाँ खड़े लोग चौंक उठे। शव को पसीना आ रहा था और होंठ बुदबुदा रहे थे। यह देखकर अधिकतर लोग भयभीत हो भाग निकले, लेकिन परिवारजनों के साथ कुछ बहादुर लोग वहीँ रुके रहे। हालाँकि उनमें से भी किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि शव के पास जा सकें। वहाँ दो वर्दीधारी पुलिस वाले भी खड़े थे, उनमें से एक बोला, "डॉक्टर ने चेक तो ठीक किया था? फांसी के इतने वक्त के बाद भी ज़िन्दा है क्या?"दूसरा धीमे कदमों से शव के पास गया, उसकी नाक पर अंगुली रखी और हैरत भरे स्वर में…See More
Jun 6
pratibha pande commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"जिसे पीड़ित समझा गया वो शातिर निकला  वाह .. बोध कथा से प्रतीक लेकर शानदार सृजन  हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश  जी "
Apr 20
Rahila commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"समसामयिक रचना,बेहद प्रभावी और वर्तमान हालातों पर सटीक चोट करती हुई। बहुत बधाई आपको"
Apr 20
Tasdiq Ahmed Khan commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"जनाब चंद्रेश कुमार साहिब, अच्छी लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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अस्वीकृत मृत्यु (लघुकथा)

अंतिम दर्शन हेतु उसके चेहरे पर रखा कपड़ा हटाते ही वहाँ खड़े लोग चौंक उठे। शव को पसीना आ रहा था और होंठ बुदबुदा रहे थे। यह देखकर अधिकतर लोग भयभीत हो भाग निकले, लेकिन परिवारजनों के साथ कुछ बहादुर लोग वहीँ रुके रहे। हालाँकि उनमें से भी किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि शव के पास जा सकें। वहाँ दो वर्दीधारी पुलिस वाले भी खड़े थे, उनमें से एक बोला, "डॉक्टर ने चेक तो ठीक किया था? फांसी के इतने वक्त के बाद भी ज़िन्दा है क्या?"

दूसरा धीमे कदमों से शव के पास गया, उसकी नाक पर अंगुली रखी और…

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Posted on June 6, 2018 at 6:00pm — 11 Comments

भेड़िया आया था (लघुकथा)

“भेड़िया आया... भेड़िया आया...” पहाड़ी से स्वर गूंजने लगा। सुनते ही चौपाल पर ताश खेल रहे कुछ लोग हँसने लगे। उनमें से एक अपनी हँसी दबाते हुए बोला, “लो! सूरज सिर पर चढ़ा भी नहीं और आज फिर भेड़िया आ गया।“

 

दूसरा भी अपनी हँसी पर नियंत्रण कर गंभीर होते हुए बोला, “उस लड़के को शायद पहाड़ी पर डर लगता है, इसलिए हमें बुलाने के लिए अटकलें भिड़ाता है।“

                                  

तीसरे ने विचारणीय मुद्रा में कहा, “हो सकता है... दिन ही कितने हुए हैं उसे आये हुए। आया था तब…

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Posted on April 18, 2018 at 7:00pm — 10 Comments

शह की संतान (लघुकथा)

तेज़ चाल से चलते हुए काउंसलर और डॉक्टर दोनों ही लगभग एक साथ बाल सुधारगृह के कमरे में पहुंचे। वहां एक कोने में अकेला खड़ा वह लड़का दीवार थामे कांप रहा था। डॉक्टर ने उस लड़के के पास जाकर उसकी नब्ज़ जाँची, फिर ठीक है की मुद्रा में सिर हिलाकर काउंसलर से कहा, "शायद बहुत ज़्यादा डर गया है।"

 

काउंसलर के चेहरे पर चौंकने के भाव आये, अब वह उस लड़के के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा, "क्या हुआ तुम्हें?"

 

फटी हुई आँखों से उन दोनों को देखता हुआ वह लड़का कंधे पर हाथ का स्पर्श…

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Posted on February 3, 2018 at 10:10pm — 10 Comments

वैध बूचड़खाना (लघुकथा)

सड़क पर एक लड़के को रोटी हाथ में लेकर आते देख अलग-अलग तरफ खड़ीं वे दोनों उसकी तरफ भागीं। दोनों ही समझ रही थीं कि भोजन उनके लिए आया है। कम उम्र का वह लड़का उन्हें भागते हुए आते देख घबरा गया और रोटी उन दोनों में से गाय की तरफ फैंक कर लौट गया। दूसरी तरफ से भागती आ रही भैंस तीव्र स्वर में बोली, “अकेले मत खाना इसमें मेरा भी हिस्सा है।”

गाय ने उत्तर दिया, “यह तेरे लिए नहीं है... सवेरे की पहली रोटी मुझे ही मिलती है।”

“लेकिन क्यूँ?” भैंस ने उसके पास पहुँच कर प्रश्न…

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Posted on December 17, 2017 at 2:03pm — 21 Comments

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At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

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"कृपा कर इस ग़ज़ल के अरकान लिखने का कष्ट करें ।"
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"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
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Mahendra Kumar posted blog posts
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