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Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

Latest Activity

Chandresh Kumar Chhatlani replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ की सातवीं वर्षगांठ पर: सम्पादकीय सन्देश
"ओबीओ के सात सफल वर्ष सम्पूर्ण करने पर आदरणीय योगराज जी सर, ओबीओ प्रबंधन टीम और सभी सम्मानित सदस्यों को बहुत-बहुत बधाई और इसी तरह सफलताओं के और कई वर्ष पूरे करने हेतु हृदय से शुभकामनाएं अर्पित करता हूँ| "
Apr 2
Chandresh Kumar Chhatlani replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 में सम्मिलित लघुकथाएँ
" आदरणीय सर,   निवेदन है कि मेरी रचना को संकलन में निम्नानुसार बदल देवें, सादर मैं गुलाम हूँ   देशभक्ति से ओतप्रोत एक समारोह से रात में लौटते हुए बेख्याली में उसकी कार किसी अनजाने रास्ते पर बढ़ने लगी, उसके दिमाग में यह स्वर गूँज…"
Apr 1
Chandresh Kumar Chhatlani replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 में सम्मिलित लघुकथाएँ
"हर बार की तरह इस बार भी त्वरित संकलन हेतु सादर आभार आदरणीय योगराज प्रभाकर जी सर|"
Apr 1
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"बहुत कुछ कह कर भी कुछ नहीं कहा, बहुत बढ़िया रचना का सृजन किया है आदरणीय तेज वीर सिंह जी सर| सादर बधाई स्वीकार करें|"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"  बदले की भावना में आखिर एक संवाद को ही अनुत्तरित प्रश्न बना कर संवाद कहने वाले के सामने खड़ा कर दिया, बहुत अच्छे विषय का चयन किया है आदरणीय वीर मेहता भाई जी| सादर बधाई स्वीकार करें| सादर दो प्रश्न पूछना चाहूँगा, एक, //वह रोज़ लिफ्ट मांगती थी और…"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"बहुत अच्छी रचना कही है आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण जी सर, सादर बधाई स्वीकार करें|"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"बहुत बढ़िया रचना कही है आदरणीया नीता कसार जी, सादर बधाई स्वीकार करें|"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"एक अलग अंदाज़ में राजनेता की घरेलू परेशानियों को उजागर करने जैसे उत्तम विषय का चयन हेतु बहुत-बहुत बधाई आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहब| गुरुजनों और सुधीजनों के सुझावों अनुसार बदलाव करें तो निःसंदेह श्रेष्ठतर रचना बन जायेगी| सादर,"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"आदरणीया सीमा जी, बच्चे के साथ आमतौर जिस भाषा में बात की जाती है उसी भाषा में कही गयी आपकी इस प्रभावशाली रचना में पूछा गया प्रश्न कई घरो में आज भी अनुत्तरित ही है| विषय को पूर्ण संतुष्ट करती रचना पर सादर बधाई स्वीकार करें| पहले पैराग्राफ में //मोहिता…"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"सादर आभार आदरणीय सतविन्द्र कूमार भाई जी, सच तो यह है कि यह रचना पहले ही बन गयी थी, विषय बाद में देखा| तब लगा कि यह रचना विषय अनुकूल हो सकती है| अंत भी पहले ही लिख दिया था, बाद में रचना को केवल कसने का प्रयास किया| मित्र की हालत यह बताई कि अधिकतर इस…"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"धन्यवाद आदरणीय विनय कुमार जी सर, लकड़ियाँ वही हैं जो उसने स्वप्न में देखीं थीं और धोती-कुर्ता हमारी रहन-सहन में छिपी अंग्रेजीयत (कपड़े-खाने-शिक्षा आदि) को हटाने का प्रतीक बताने का प्रयास किया था, इसीलिए इसके पहले टाई को ठीक करते हुए वाली पंक्ति भी…"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"उत्साहवर्धन हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी, अंत में परिवर्तन करने का प्रयास कर रहा हूँ| सादर, "
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"रचना पर उपस्थिति और अपनी टिप्पणी द्वारा मेरे उत्साहवर्धन करने हेतु सादर आभार आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी सर|"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"आपके आशीर्वाद हेतु सादर आभार आदरणीय तेज वीर सिंह जी सर| अभी तो लघुकथा कहना ही सीख रहा हूँ, लघुकथा का शोधार्थी बनने में बहुत समय लगेगा| "
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, एक नवीन विषय को लेकर बहुत अच्छी रचना का सृजन किया है आपने| कई अनुत्तरित प्रश्नों का उत्तर भी हमें स्वयं को ही खोजना होता है| सादर बधाई स्वीकार करें इस बहुत अच्छे सृजन हेतु| कहीं-कहीं टंकण की छोटी-मोटी त्रुटियाँ हैं जैसे…"
Mar 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-24 (विषय: अनुत्तरित प्रश्न)
"  कई बार ऐसे प्रश्न सम्मुख आ जाते हैं जब हम उत्तर जानते हुए भी मर्यादावश कुछ न कहना ही उचित समझते हैं, बहुत अच्छे विषय का चयन किया है और रचना परिष्कृत होने के बाद बहुत अच्छी बन गयी है आदरणीय ओम प्रकाश क्षत्रिय जी सर, सादर बधाई स्वीकार करें|"
Mar 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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उसकी ज़रूरत (लघुकथा)

उसके मन में चल रहा अंतर्द्वंद चेहरे पर सहज ही परिलक्षित हो रहा था। वह अपनी पत्नी के बारे में सोच रहा था, “चार साल हो गए इसकी बीमारी को, अब तो दर्द का अहसास मुझे भी होने लगा है, इसकी हर चीख मेरे गले से निकली लगती है।“

 

और उसने मुट्ठी भींच कर दीवार पर दे मारी, लेकिन अगले ही क्षण हाथ खींच लिया। कुछ मिनटों पहले ही पत्नी की आँख लगी थी, वह उसे जगाना नहीं चाहता था। वह वहीँ ज़मीन पर बैठ गया और फिर सोचने लगा, “सारे इलाज कर लिये, बीमारी बढती जा रही है, क्यों न इसे इस दर्द से हमेशा के लिए…

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Posted on March 6, 2017 at 11:00am — 6 Comments

लहराता खिलौना (लघुकथा)

देश के संविधान दिवस का उत्सव समाप्त कर एक नेता ने अपने घर के अंदर कदम रखा ही था कि उसके सात-आठ वर्षीय बेटे ने खिलौने वाली बन्दूक उस पर तान दी और कहा "डैडी, मुझे कुछ पूछना है।"

 

नेता अपने चिर-परिचित अंदाज़ में मुस्कुराते हुए बोला, "पूछो बेटे।"

 

"ये रिपब्लिक-डे क्या होता है?" बेटे ने प्रश्न दागा।

 

सुनते ही संविधान दिवस के उत्सव में कुछ अवांछित लोगों द्वारा लगाये गए नारों के दर्द ने नेता के होंठों की मुस्कराहट को भेद दिया और नेता ने गहरी सांस भरते हुए…

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Posted on January 27, 2017 at 9:11am — 4 Comments

कोई तो मरा है (लघुकथा)

भोजन कक्ष में बैठ कर परिवार के सभी सदस्यों ने भोजन करना प्रारंभ किया ही था कि बाहर से एक कुत्ते के रोने की आवाज़ आई। घर की सबसे बुजुर्ग महिला यह आवाज़ सुनते ही चौंकी, उसने सभी सदस्यों की तरफ देखा और फिर चुपचाप भोजन करने लगी।

 

उसने मुश्किल से दो कौर ही खाये होंगे और कुत्ते के रोने की आवाज़ फिर आई, अब वह बुजुर्ग महिला चिंताग्रस्त स्वर में बोली, "यह कुत्ता क्यों रो रहा है?"

 

उसके पुत्र ने उत्तर दिया, "चिंता मत करो, होगी कुछ बात।"

 

"नहीं! यह तो अपशगुन…

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Posted on January 18, 2017 at 8:59pm — 11 Comments

अदृश्य जीत (लघुकथा)

जंगल के अंदर उस खुले स्थान पर जानवरों की भारी भीड़ जमा थी। जंगल के राजा शेर ने कई वर्षों बाद आज फिर खरगोश और कछुए की दौड़ का आयोजन किया था।

 

पिछली बार से कुछ अलग यह दौड़, जानवरों के झुण्ड के बीच में सौ मीटर की पगडंडी में ही संपन्न होनी थी। दोनों प्रतिभागी पगडंडी के एक सिरे पर खड़े हुए थे। दौड़ प्रारंभ होने से पहले कछुए ने खरगोश की तरफ देखा, खरगोश उसे देख कर ऐसे मुस्कुरा दिया, मानों कह रहा हो, "सौ मीटर की दौड़ में मैं सो जाऊँगा क्या?"

 

और कुछ ही क्षणों में दौड़ प्रारंभ…

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Posted on December 8, 2016 at 6:35pm — 14 Comments

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At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

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