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Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

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Chandresh Kumar Chhatlani commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--मलिका
"खलील जिब्रान की रचनाओं की याद आ गयी, उन्हीं की तरह मारक रचना के सृजन हेतु दिली मुबारकबाद "
Oct 19
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"हालांकि प्रथम पात्र /जी हुजूर/, /जी-जी हुजूर/कहता हुआ आदरपूर्वक खड़े हुए ही बात कर रहा है, फिर भी एक प्रयास के रूप में एक और सुझाव/अभ्यास मात्र : //“जी-जी हुजूर... बेस्ट क्वालिटी।”// ==// अरे साब, ये भी कोई कहने की बात है! बेस्ट की ही…"
Oct 17
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"वाह। शीर्षक और उस गरिमामय अभिवादन/नारे 'जय हिन्द' के साथ आज के सत्य को पिरोकर बेहतरीन कटाक्षपूर्ण नवीनतम सृजन के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी जी। आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी की टिप्पणी से सहमत हूं। बड़े वाले संवाद को…"
Oct 17
Dr. Vijai Shanker commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश कुमार छटलानी जी , सुन्दर सूचनाप्रद कथा है। लेखन और प्रस्तुतिकरन भी अच्छा है , बधाई। एक निवेदन करूँ , स्थिति अब थोड़ी सी बदल चुकी है , अब सारे काम ' सिंगल विण्डो ' सिस्टम से होते हैं। इनसे कहना , उनसे कहना , किसी से क्या कहना…"
Oct 17
Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"जनाब चन्द्रेश कुमार जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 16
SALIM RAZA REWA commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post पराजित हिन्द (लघुकथा)
"जनाब चंद्रेश जी, ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई. तो... उन्हें यह ज़रूर कह देना कि लैपटॉप और ए.सी. छोटी-मोटी क्वालिटी का नहीं हो...” सुंदर.."
Oct 16
Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

पराजित हिन्द (लघुकथा)

“जय हिन्द सर।” उसने जोश भरे स्वर में कहा। मोबाइल फोन पर बात करते हुए वह तन कर भी खड़ा था।“जय हिन्द।” दूसरी तरफ से आवाज़ आई।“हुजूर, बात यह है कि... मॉडर्न स्कूल के प्रिंसिपल साब ने बुलाया था। दिवाली पर वे आपको लैपटॉप और ए.सी. उपहार में देना चाहते हैं।”“क्यूँ?” दूसरी तरफ से प्रश्न पूछा गया लेकिन संयत स्वर में।“हुजूर, उनके स्कूल में फीस दूसरे स्कूलों से थोड़ी-बहुत ज़्यादा है, ऐसी ही कुछ और छोटी-मोटी कमियाँ थीं तो... जिला शिक्षा अधिकारी साहब ने उनको पाबन्द कर दिया। प्रिंसिपल साहब बता रहे थे कि उन्हें…See More
Oct 16
Mahendra Kumar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post रावण का चेहरा (लघुकथा)
"बहुत उम्दा लघुकथा है आ. चन्द्रेश जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Oct 6
Rahila commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post रावण का चेहरा (लघुकथा)
"कमाल की रचना हुई आदरणीय सर जी!बेहद तीखा सटीक तंज ।बहुत बधाई इस रचना के लिए।सादर"
Oct 1
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"बहुत ही अच्छी लघुकथा का सृजन किया है आदरणीय वीर मेहता भाई जी, अंतिम पंक्ति बहुत ही प्रेरक है| सादर बधाई स्वीकार करें इस सृजन हेतु|"
Sep 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
" अच्छे विषय पर लघुकथा के सृजन हेतु सादर बधाई स्वीकार करें आदरणीया शिखा तिवारी जी"
Sep 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"रचना पर टिप्पणी कर मेरी हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ जनाब समर कबीर जी साहब"
Sep 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"रचना पर टिप्पणी कर मेरे उत्साहवर्धन और  मार्गदर्शन हेतु बहुत-बहुत आभार भाई महेंद्र कुमार जी|"
Sep 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"रचना पर टिप्पणी कर मेरी हौसला अफज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ जनाब तस्दीक़ अहमद खान साहब"
Sep 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"आपके आशीर्वाद हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी सर"
Sep 30
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"रचना पर टिप्पणी कर मेरे उत्साहवर्धन और  मार्गदर्शन हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहब|"
Sep 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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पराजित हिन्द (लघुकथा)

“जय हिन्द सर।” उसने जोश भरे स्वर में कहा। मोबाइल फोन पर बात करते हुए वह तन कर भी खड़ा था।

“जय हिन्द।” दूसरी तरफ से आवाज़ आई।

“हुजूर, बात यह है कि... मॉडर्न स्कूल के प्रिंसिपल साब ने बुलाया था। दिवाली पर वे आपको लैपटॉप और ए.सी. उपहार में देना चाहते हैं।”

“क्यूँ?” दूसरी तरफ से प्रश्न पूछा गया लेकिन संयत स्वर में।

“हुजूर, उनके स्कूल में फीस दूसरे स्कूलों से थोड़ी-बहुत ज़्यादा है, ऐसी ही कुछ और छोटी-मोटी कमियाँ थीं तो... जिला शिक्षा अधिकारी साहब ने उनको पाबन्द कर दिया।…

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Posted on October 16, 2017 at 4:30pm — 5 Comments

रावण का चेहरा (लघुकथा)

हर साल की तरह इस साल भी वह रावण का पुतला बना रहा था। विशेष रंगों का प्रयोग कर उसने उस पुतले के चेहरे को जीवंत जैसा कर दिया था। लगभग पूरा बन चुके पुतले को निहारते हुए उसके चेहरे पर हल्की सी दर्द भरी मुस्कान आ गयी और उसने उस पुतले की बांह टटोलते हुए कहा, "इतनी मेहनत से तुझे ज़िन्दा करता हूँ... ताकि दो दिनों बाद तू जल कर खत्म हो जाये! कुछ ही क्षणों की जिंदगी है तेरी..." 

कहकर वह मुड़ने ही वाला था कि उसके कान बजने लगे, आवाज़ आई,

"कुछ क्षण?"

वह एक भारी स्वर था जो उसके कान में…

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Posted on September 30, 2017 at 12:30pm — 4 Comments

तो क्या हुआ (लघुकथा)

घर के बाहर खुले आंगन में चेहरा लटका कर बैठे देख उसकी माँ ने उसके पास जाकर उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, "परेशान मत हो, अगली बार बेटा ही होगा।"

 

"नहीं माँ, अब बस। दो बच्चे हो गए हैं, तीसरा होने पर इन दोनों बच्चियों की परवरिश भी अच्छी तरह नहीं कर पाऊंगा।" वहीँ पालने में सो रही अपनी नवजात बेटी को देखते हुए उसने उत्तर दिया।

 

माँ के पीछे-पीछे तब तक आज ही हस्पताल से लौटी अंदर आराम कर रही उसकी पत्नी को तरह-तरह के निर्देश देकर कुछ और महिलायें भी बाहर आ गयीं थीं। उनमें से…

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Posted on August 4, 2017 at 12:27pm — 5 Comments

बैक टू बटालियन

सुनसान रात में लगभग तीन घंटे दौड़ने के बाद वह सैनिक थक कर चूर हो गया था और वहीँ ज़मीन पर बैठ गया। कुछ देर बाद साँस संयत होने पर उसने अपने कपड़ों में छिपाया हुआ मोबाईल फोन निकाला। उस पर नेटवर्क की दो रेखाएं देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गयी और बिना समय गंवाये उसने अपनी माँ को फोन लगाया। मुश्किल से एक ही घंटी बजी होगी कि माँ ने फोन उठा लिया।

 

सैनिक ने हाँफते स्वर में कहा, “माँ मैं घर आ रहा हूँ।”

 

“अच्छा! तुझे छुट्टी मिल गयी? कब तक पहुंचेगा?” माँ ने ख़ुश होकर प्रश्न…

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Posted on May 5, 2017 at 11:00pm — 8 Comments

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At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

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