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Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

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Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आदरणीय कल्पना दी, रचना को पसंद कर अपनी टिपण्णी द्वारा मेरी हौसला अफज़ाई हेतु हृदय से आभारी हूँ| भाई सतविन्द्र जी की बात सही है, हालांकि इस रचना में भैंस को भी गाय के साथ बताने का कारण पूर्व टिपण्णी में अपने अनुसार बताने का प्रयास किया है| सादर,"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"रचना के मूल में जाकर इस विश्लेषण हेतु बहुत-बहुत आभार भाई सतविन्द्र कुमार जी| यह प्रश्न रचना कहते समय मेरे दिमाग में भी घूम रहा था कि भैंस सड़कों पर दिखाई तो देती है, लेकिन गाय कि तुलना में कम, लेकिन इसके अतिरिक्त यह भी दिमाग में था कि कई लोग गाय-भैंस…"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"रचना के इस प्रयास पर आपकी टिपण्णी ने मेरा मनोबल उच्च किया है आदरणीय अजय तिवारी जी, इस हेतु आपका हृदय से आभारी हूँ"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"बहुत-बहुत आभार भाई महेंद्र कुमार जी, आपको यह प्रयास ठीक लगा और आपने अपनी टिपण्णी द्वारा मेरा उत्साहवर्धन भी किया|"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"इस प्रयास पर टिपण्णी कर मेरी हौसला अफज़ाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर जी साहब"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आपकी मनोबल बढ़ाती टिपण्णी हेतु हार्दिक आभारी हूँ आदरणीय कालिपद प्रसाद मंडल जी|"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"लघुकथा की इस कोशिश पर अपनी टिपण्णी द्वारा मेरे उत्साहवर्धन हेतु दिली आभार जनाब तस्दीक़ अहमद खान जी साहब"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"रचना के समर्थन और मनोबल बढाती टिप्पणी हेतु हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी साहब"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"रचना पर अपने आशीर्वाद के लिए सादर आभार आदरणीय तेज वीर सिंह जी सर"
Dec 20, 2017
Chandresh Kumar Chhatlani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"रचना के इस प्रयास पर आपकी उत्साह बढ़ाती टिपण्णी हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय सोमेश कुमार जी| "
Dec 20, 2017
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश जी, आपकी लेखन शैली ने हमेशा ही प्रभावित किया है| इस बार भी कथा बहुत सुंदर हुई है | इस कथा में मैं सतविन्द्र भैया से सहमत हूँ | सादर |"
Dec 20, 2017
सतविन्द्र कुमार commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आदरणीय चन्द्रेश भाई जी एक उम्दा विषय को छूती हुई लघुकथा बनी है इसके लिए हार्दिक बधाई, यहाँ भैंस का भी गायों की तरह आवारा हो जाने का आभास  फैक्ट से दूर है. ग्रामीण और किसान होने के नाते यह बात पूरे दावे के साथ कहता हूँ कि भैंस चाहे दूध न भी दे…"
Dec 19, 2017
Ajay Tiwari commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश जी, एक नयी दृष्टि से संपन्न प्रभावी लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई. सादर."
Dec 19, 2017
Mahendra Kumar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"आ. चन्द्रेश जी, इस उम्दा कटाक्षपूर्ण लघुकथा के लिए मेरी तरफ़ से भी हार्दिक बधाई प्रेषित है. सादर."
Dec 18, 2017
Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"जनाब डॉ.चन्द्रेश छतलानी जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, बहतरीन कटाक्ष पूर्ण लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 18, 2017
Neelam Upadhyaya commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post वैध बूचड़खाना (लघुकथा)
"शहरीकरण के कारण पशुओं के चरागाह सिमट कर रह गए हैं । प्लास्टिक के चलन से पर्यावरण को पहुँचने वाला नुकसान अलग से एक सिसरदर्द बना हुआ है । प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के प्रति समाज में लोगो का जागरूक नहीं होना/ लापरवाही – इन सब ज्वलंत समस्याओं…"
Dec 18, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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वैध बूचड़खाना (लघुकथा)

सड़क पर एक लड़के को रोटी हाथ में लेकर आते देख अलग-अलग तरफ खड़ीं वे दोनों उसकी तरफ भागीं। दोनों ही समझ रही थीं कि भोजन उनके लिए आया है। कम उम्र का वह लड़का उन्हें भागते हुए आते देख घबरा गया और रोटी उन दोनों में से गाय की तरफ फैंक कर लौट गया। दूसरी तरफ से भागती आ रही भैंस तीव्र स्वर में बोली, “अकेले मत खाना इसमें मेरा भी हिस्सा है।”

गाय ने उत्तर दिया, “यह तेरे लिए नहीं है... सवेरे की पहली रोटी मुझे ही मिलती है।”

“लेकिन क्यूँ?” भैंस ने उसके पास पहुँच कर प्रश्न…

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Posted on December 17, 2017 at 2:03pm — 21 Comments

पराजित हिन्द (लघुकथा)

“जय हिन्द सर।” उसने जोश भरे स्वर में कहा। मोबाइल फोन पर बात करते हुए वह तन कर भी खड़ा था।

“जय हिन्द।” दूसरी तरफ से आवाज़ आई।

“हुजूर, बात यह है कि... मॉडर्न स्कूल के प्रिंसिपल साब ने बुलाया था। दिवाली पर वे आपको लैपटॉप और ए.सी. उपहार में देना चाहते हैं।”

“क्यूँ?” दूसरी तरफ से प्रश्न पूछा गया लेकिन संयत स्वर में।

“हुजूर, उनके स्कूल में फीस दूसरे स्कूलों से थोड़ी-बहुत ज़्यादा है, ऐसी ही कुछ और छोटी-मोटी कमियाँ थीं तो... जिला शिक्षा अधिकारी साहब ने उनको पाबन्द कर दिया।…

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Posted on October 16, 2017 at 4:30pm — 5 Comments

रावण का चेहरा (लघुकथा)

हर साल की तरह इस साल भी वह रावण का पुतला बना रहा था। विशेष रंगों का प्रयोग कर उसने उस पुतले के चेहरे को जीवंत जैसा कर दिया था। लगभग पूरा बन चुके पुतले को निहारते हुए उसके चेहरे पर हल्की सी दर्द भरी मुस्कान आ गयी और उसने उस पुतले की बांह टटोलते हुए कहा, "इतनी मेहनत से तुझे ज़िन्दा करता हूँ... ताकि दो दिनों बाद तू जल कर खत्म हो जाये! कुछ ही क्षणों की जिंदगी है तेरी..." 

कहकर वह मुड़ने ही वाला था कि उसके कान बजने लगे, आवाज़ आई,

"कुछ क्षण?"

वह एक भारी स्वर था जो उसके कान में…

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Posted on September 30, 2017 at 12:30pm — 4 Comments

तो क्या हुआ (लघुकथा)

घर के बाहर खुले आंगन में चेहरा लटका कर बैठे देख उसकी माँ ने उसके पास जाकर उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, "परेशान मत हो, अगली बार बेटा ही होगा।"

 

"नहीं माँ, अब बस। दो बच्चे हो गए हैं, तीसरा होने पर इन दोनों बच्चियों की परवरिश भी अच्छी तरह नहीं कर पाऊंगा।" वहीँ पालने में सो रही अपनी नवजात बेटी को देखते हुए उसने उत्तर दिया।

 

माँ के पीछे-पीछे तब तक आज ही हस्पताल से लौटी अंदर आराम कर रही उसकी पत्नी को तरह-तरह के निर्देश देकर कुछ और महिलायें भी बाहर आ गयीं थीं। उनमें से…

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Posted on August 4, 2017 at 12:27pm — 5 Comments

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At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

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