For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

मुखरता से हो रहा बदलाव (आलेख)

मुखरता से हो रहा बदलाव..... और बदल रही तस्वीर...!



विश्व की अन्य महिलाओं की तरह भारत की महिलाओं को आजादी से जीने और अधिकारों का उपयोग कर सर्वांगीण विकास करने के लिए संघर्ष नही करना पड़ा।समय के साथ सकारात्मक बदलाव भी हुये।पुरूषवर्चस्व क्षेत्रों में अपना उपस्थिति दर्ज कराके अपनी आजादी की नई ईबारत लिखती हौसले बुलंद महिलाओं ने देश-विदेश में अपनी सफलता, उपलब्धियों का परचम फहराया। अपने संघर्ष, मेहनत,जज्बा,जुनून से हर सीमाओं को लांघकर कामयाबी हासिल कर नई ऊंचाईयां छूकर प्रेरणा…

Continue

Added by babitagupta on March 8, 2021 at 12:30pm — 3 Comments

डायन प्रथा पर एक पद्यात्मक कहानी

किसे सुनाऊँ अपनी पीड़ा, किसको मैं समझाऊँ

सब पत्थर के देव यहाँ हैं, किस  से सर टकराऊँ

युग  कोई  भी  यहाँ  रहा  हो, सबने  हमें ठगा है

माँ  ममता  की  मूरत  कहकर, देता  रहा दगा है

कल जैसी ही आज हमारी, वैसी भाग्य  निशानी

जुड़ी उसी से सुन लो यारा, अपनी एक  कहानी

शादी के दस साल हुए थे, पर ना  गोद  भरी  थी

बाँझ न रह जाऊँ जीवन भर, इससे बहुत डरी थी

देख किसी बच्चे को सोचूँ, झट  से  गले  लगा लूँ

छाती का मैं दूध पिलाकर, अपनी …

Continue

Added by नाथ सोनांचली on March 7, 2021 at 8:14pm — 6 Comments

ग़ज़ल : "जी ही पाते हैं की न मर पाते"

अरकान- 2122 1212 22

सिर्फ़ इतना हुनर जो पा जाते

काश हम भी किसी के हो पाते

क्यों तुम्हें इतनी जल्दी रहती है

मेरी सुनते कुछ अपनी फ़रमाते

हर किसी से अदब से मिलते हो

अच्छा होता जो थोड़ा इतराते

चारा गर ही हमारा रूठा है

हम किसे ज़ख़्म अपने दिखलाते

फ़िर कहाँ कोई दिल में यूँ चुभता

गर जो रिश्ता सभी से तोड़ आते

चाहतों में भी यूँ तो दीवाने

जी ही पाते हैं की न मर…

Continue

Added by Aazi Tamaam on March 7, 2021 at 1:30pm — 4 Comments

कुछ अतुकान्त

बच्चे सरायों में नहीं

घरों में पलते हैं

व्यक्तित्व आया से नहीं 

माँओं से बनते हैं

कितनी जल्दी लोग

पाला बदल लेते हैं

आज गँठजोड़ किसी से

कल,किसी और से कर लेते हैं

क्या कहें वक्त के सफ़र को हम

जहाँ निजता की चाह होती है

एक ही घर के बन्द कमरों में

अब,मोबाइल से बात होती है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on March 6, 2021 at 1:25am — 8 Comments

ग़ज़ल: "सनम हमको मिला"

2211  2122  1221  1222  12

चाहत में सिवा ही चाहत के क्या क्या न सनम हमको मिला

हर जख्म मिला है दिल को यूँ मरहम न सनम हमको मिला

किस को है पता यहाँ कौन कब हो जाये यूँ ही बे-वफ़ा

हम जान लुटा आये अपनी फिर भी न सनम हमको मिला

ता उम्र लगा रहा इश्क में भी यूँ तो मिलना बिछड़ना

मिलके न जुदा हो पर कोई ऐसा न सनम हमको मिला

थोड़ा तो क़रार आये या रब इस दिल ए बेजार को

थोड़ा भी सुकूँ गो चाहत में आखिर न सनम हमको…

Continue

Added by Aazi Tamaam on March 5, 2021 at 10:00pm — 2 Comments

वोट देकर मालिकाना हक गँवाया- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२/२१२२/२१२



दीप की लौ से निकलती रौशनी भी देख ली 

और उस की छाँव  बैठी  तीरगी भी देख ली।१।

*

वोट देकर मालिकाना हक गँवाया हमने यूँ

चार दिन में  सेवकाई  आपकी भी देख ली।२।

*

दुश्मनी का रंग हम ने जन्म से देखा ही था

आज संकट के समय में दोस्ती भी देख ली।३।

*

आ न पाये होश में क्यों आमजन से दोस्तो

दे के उस ने तो  हमें  संजीवनी भी देख ली।४।

*

खूब…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 5, 2021 at 2:09pm — 20 Comments

शम्स हरदम छुपा नहीं रहता......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 1212 22/112

शम्स हरदम छुपा नहीं रहता

बादलों से ढका नही रहता (1)

लोग मुझको न ढूँढ पाएँगे

मैं कहाँ हूँ पता नहीं रहता  (2)

इश्क़ में काम इतने होते हैं

फिर कोई काम का नहीं रहता  (3)

लोग आपस में बाँट लेते हैं

मेरा हिस्सा बचा नहीं रहता (4)

हम सभी मिल के एक होते तो

मुल्क इतना बँटा नहीं रहता (5)

लौट आया है सुख मिरे घर में

देख रहता है या नहीं रहता (6)

इक न इक…

Continue

Added by सालिक गणवीर on March 5, 2021 at 4:42am — 5 Comments

गीत

उतरा है मधु मास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !

जन गण के तन मन सुरा घुली

गुनगुनी धूप की चोट लगी

कली खुल, वन प्रसफुटित हुई,

मुस्काय बेला चमेली है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !!

कमल खिले हैं सरोवरों मेंं

मौज करे हम नावों में

मगन चिड़िया झील के तन हैं

वर बसन्त, प्रकृति मुस्काई है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय  पर मस्ती  छाई है !!

बाण चलाया कामदेव ने

घायल चम्पा गुलमोहर…

Continue

Added by Chetan Prakash on March 5, 2021 at 1:30am — 3 Comments

'जब मैं सोलह का था': ग़ज़ल

22/22/22/22/22/22



जब मैं सोलह का था, और तुम तेरह की थी

मैं भी  भोला  सा था, तुम  भी  मीरा  सी थी।

दिल तब बच्चा सा था, आलम अच्छा सा था..

बातें सच्ची सी थीं, आँख वो वीणा सी थी।

शामें खुशबू सी थीं, रातें जादू सी थीं..

दुनिया दिलकश सी थी, मोहब्बत पहली थी।



बारिश प्यारी सी थी, पतझड़ क्यारी सा था..

गर्मी शीतल सी थी, सर्दी आँचल सी थी ।



दुपहर साया सा था, तुमको पाया सा था..

दिल के द्वारे पे धक-धक दस्तक तेरी…

Continue

Added by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 4, 2021 at 11:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल (निगाहों-निगाहों में क्या माजरा है)

122-122-122-122

निगाहों-निगाहों में क्या माजरा है

न उनको ख़बर है न हमको पता है

न  तुमने  कहा  कुछ न  मैंने  सुना है 

निगाहों  से  ही  सब  बयाँ  हो रहा है

ख़ुमारी फ़ज़ा में ये छाई है कैसी  

ख़िरामा ख़िरामा नशा छा रहा है 

मुहब्बत की  ऐसी  हवा चल  पड़ी ये

मुअत्तर  महब्बत  में सब  हो गया है 

मिलाकर निगाहें तेरा मुस्कुराना 

मेरे दिल पे जानाँ ग़ज़ब ढा गया है 

निगाहें …

Continue

Added by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on March 4, 2021 at 10:28pm — 2 Comments

लो चढ़ आया फिर पूर्वी फेरी वाला

लो चढ़ आया फिर पूर्वी फेरी वाला
सीधी कमर
उठाए स्वर्ण की छाबड़ी…
Continue

Added by amita tiwari on March 4, 2021 at 8:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल: 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'

22 22 22 22

इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत

रश्क मुसीबत रंज कयामत।

**

किसको क्या होना है हासिल

कोई न जाने अपनी किस्मत।

**

क्यूँ मैं छोडूं यार तेरा दर

हक है मेरा करना इबादत।

**

देख ली हमने सारी दुनिया

तुझसी न भायी कोई सूरत।

**

जोर आजमा ले तू भी पूरा..

देखूँ इश्क़ मुझे या वहशत?

**

'जान' ये दिन भी कट जायेंगे

देखी है जब उनकी नफरत।

**

तेरे ही दम से सारे भरम हैं

वर्ना क्या दोज़ख़ क्या…

Continue

Added by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 4, 2021 at 5:00pm — 11 Comments

समूची धरा बिन ये अंबर अधूरा है

ये जो है लड़की

हैं उसकी जो आँखे

हैं उनमें जो सपने

जागे से सपने

भागे से सपने

सपनों में

पंख

पंखों में

परवाज

बंद खामोशी में पुरज़ोर आवाज

आवाज़ में

वादा

बहुत सच्चा, बहुत सीधा -बहुत सादा

कि

मुझे आसमान दे दो

छोटा सही इक जहान दे दो

बदले में देती हूँ वादा

कि अकेली आसमान नहीं ओढ़ूँगी

ओढ़ ही नहीं पाऊँगी

ऐसी ही बनी हूँ मैं

स्वंय को छोड़ ही नहीं…

Continue

Added by amita tiwari on March 3, 2021 at 10:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल: "ठहर सी जाती है"

22 22 22 22 22 22 22 22

जब तन्हाई में यादों की बरसात ठहर सी जाती है

इक हूक सी उठती है दिल में ह'यात ठहर सी जाती है



चुपके चुपके आँखों ही आँखों में इश्क़ जवाँ होता है

गर जुम्बिश ना हो आँखों में शुरुआत ठहर सी जाती है



हर पल मिलने की चाहत में पल पल बेताबी रहती है

दिन ढलते ढलते ढल जाता है रात ठहर सी जाती है



होठों पर बात न आ जाये दिल बेचैनी में रहता है

होठों पर आते ही दिल की हर बात ठहर सी जाती है



रह रह कर आहें…

Continue

Added by Aazi Tamaam on March 2, 2021 at 9:30pm — No Comments

चाँदनी

चाँदनी ,,,,,,,
चमकने लगे हैं
केशों में चाँदी के तार
शायद
उम्र के सफर का है ये
आखिरी पड़ाव
थोड़ा जलता
थोड़ा बुझता
साँसों का अलाव…
Continue

Added by Sushil Sarna on March 2, 2021 at 7:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल-क्या करे कोई

221 2121 1221 212

1

हमसे शगुफ़्तगी की तमन्ना करे कोई 

अब और दर्द देने न आया करे कोई

2

आकर क़रीब इश्क़ जताया करे कोई

सच्चा नहीं तो झूठा ही वादा करे कोई…

Continue

Added by Rachna Bhatia on March 2, 2021 at 7:08pm — 14 Comments

"कोई क्यों रहे "

1212 222 212

चढ़ान   में   भी    कोई   क्यों   रहे

ढलान में भी कोई क्यों रहे

सियासती   हो   रंग  ए  आसमाँ

उड़ान में भी कोई क्यों रहे

दुकान-ए-दिल ही जब हो लुट चुकी

अमान…

Continue

Added by Aazi Tamaam on March 1, 2021 at 10:30am — No Comments

पाँच बासंती दोहेः

चम्पई गंध बसे मन, स्वर्णिम हुआ प्रभात ।

कौन बसा  प्राणों, प्रकृति, तन - मन के निर्वात ।।



धूप हुई मन फागुनी, रजनीगंधा रात ।

नद-नाले मचलते वन,गंगा तीर प्रपात।।



रजत रश्मियाँ हँसे नद, चाँद झील के गात ।

काँप जाय है चाँदनी, बरगद हृदय आत ।।



पोर- पोर टेसू हुआ, प्राणों बसे पलाश ।

गुलाबी रंग मन अहा, घर नीला आकाश ।।



रंग - बिरंगी छटा वन, सतरंगा आकाश ।

इन्द्रधनुष रच रहा, पत्ती फूल पलाश।।…





Continue

Added by Chetan Prakash on February 28, 2021 at 1:30pm — 4 Comments

जग मिटा कर दुख सुनाने- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२

मत निकल तलवार लेकर

जय  मिलेगी  प्यार लेकर।१।

*

युद्ध  नित   बर्बाद  करता

जी तनिक यह सार लेकर।२।

*

जग मिटा कर दुख सुनाने

जायेगा  किस  द्वार लेकर।३।

*

इस भवन का क्या करूँगा

तुम  गये   आधार   लेकर।४।

*

नेह की दुनिया अलग है

हो जा हल्का भार लेकर।५।

*

बोझ सा हरपल है लगता

दब  गये  आभार  लेकर।६।

*

कर गया कंगाल सब को

हर  भरा  सन्सार  लेकर।७।

*

टूटती  रिश्तों  की माला

जोड़ ले कुछ तार…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 26, 2021 at 10:38pm — 4 Comments

किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे (131 )

ग़ज़ल( 2122 1122 1122 22 /112 )
किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे
ज़ीस्त भर के लिए क्यों हिज्र के बिच्छू देखे
**
था कभी वक़्त तुझे दिखती थी बस अच्छाई
जब भी देखे तू मेरी अब तो बुरी खू देखे
**
सूखे टुकड़े भी हैं देखे किसी थाली में कभी
जाम-ए-मय संग कहीं सजते हैं काजू देखे
**…
Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 23, 2021 at 9:30pm — No Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service