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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"भाई  Mahendra Kumar जी ,बे'पनाह, मुहब्बतों, नवाज़िशों का दिल से बे'हद शुक्रिया ! शाद-औ-आबाद रहें"
Wednesday
Mahendra Kumar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"उम्दा ग़ज़ल हुई है आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Wednesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"Mahendra Kumar जी ,आपकी स्नेहिल सराहना से अभिभूत हूँ | सादर नमन | "
Wednesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"Md. anis sheikh साहेब  बे'पनाह, मुहब्बतों, नवाज़िशों का दिल से बे'हद शुक्रिया ! शाद-औ-आबाद रहें"
Wednesday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"//वाह वाह इस्लाह पर ही दाद क़ुबूल फरमाएं// बहुत शुक्रिया जनाब,महब्बत है आपकी । "
Wednesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: पांचों घी में रहती है जब सरकारी कारिन्दों की.............(१३)
"स्नेहिल सराहना के लिए हार्दिक आभार भाई Mahendra Kumar जी सादर नमन | "
Wednesday
Mahendra Kumar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: पांचों घी में रहती है जब सरकारी कारिन्दों की.............(१३)
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी, बढ़िया लगी आपकी ग़ज़ल. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Wednesday
Mahendra Kumar commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी वगरना क़ल्ब में मुमकिन है कोई घाव कभी  ...बहुत ख़ूब! इस बढ़िया ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी. सादर."
Wednesday
Md. anis sheikh commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत "तुरंत "जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई हैं बहुत बहुत बधाई ,आपको पढ़ने में लुत्फ़ आता हैं "
Wednesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
Wednesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी , सदर नमस्कार | आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार | जी बिलकुल आदरणीय Samar kabeer साहेब की इस्लाह निश्चित रूप से मेरे कलाम को बेहतर बनाने में अमूल्य योगदान दे रही…"
Wednesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"आद0 गिरधारी सिंह गहलोत जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल पर दिली मुबारकबाद,, शेष आद0 समर साहब के बातों का संज्ञान लीजियेगा।"
Wednesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: पांचों घी में रहती है जब सरकारी कारिन्दों की.............(१३)
"भाई  Ravi Shukla जी , हार्दिक आभार और अभिनंदन आपका।हाँ ,मैं बीकानेर राजस्थान का ही हूँ | हालाँकि अपने एकांतिक स्वभाव के कारण बीकानेर के काव्य जगत के लोगों से परिचय नहीं है | किसी कवि -सम्मेलन /मुशायरा आदि में भी अभी तक नहीं गया हूँ |…"
Tuesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"भाई Ajay Tiwari जी  खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया  |"
Tuesday
Ajay Tiwari commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"आदरणीय गिरधारी जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है.हार्दिक बधाई."
Tuesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)
"आदरणीय  Samar kabeer साहेब आदाब | वाह वाह इस्लाह पर ही दाद क़ुबूल फरमाएं | ग़ज़ल के प्रयास की सराहना के लिए सादर आभार | "
Tuesday

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ग़ज़ल: ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत को न समझे कोई (१४)

(२१२२ ११२२ ११२२ २२/११२ )

ख़त्म इकबाल-ए-हुकूमत* को न समझे कोई 

और लाचार अदालत को न समझे कोई 

***

मीर सब आज वुजूद अपना बचाने में लगे 

आम जनता की ज़रूरत को न समझे कोई 

***

ख़ून के रिश्ते भुला देती है जो इक पल में 

हैफ़ !भारत की सियासत को न समझे कोई 

***

जिस्म को छू लिया और इश्क़ मुकम्मल समझा 

इतना आसाँ भी महब्बत…

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Posted on January 14, 2019 at 12:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल: पांचों घी में रहती है जब सरकारी कारिन्दों की.............(१३)

(२२ २२ २२ २२ २२ २२ २२ २ )

***

पांचों घी में रहती है जब सरकारी कारिन्दों की 

कौन सुने फ़रियाद अँधेरी नगरी के बाशिन्दों की 

***

टूटी है मिजराबें फिर भी साज़ बजाना पड़ता है 

बे-सुर होते सुर तो इसमें ग़ल्ती क्या साजिन्दों की 

***

फेंक दिया करते कचरे में क्या क्या लोग पुलिंदों में 

असली कीमत आज समझते कचराबीन पुलिंदों की …

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Posted on January 9, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )

(१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२ )

***

न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी 

वगरना क़ल्ब में मुमकिन है कोई घाव कभी 

***

इमारतें जो बनाते जनाब रिश्तों की 

उन्हें भी चाहिए होता है रखरखाव कभी 

***

हयात का ये सफर एक सा कहाँ होता 

कभी ख़ुशी तो मिले ग़म का भी पड़ाव कभी 

***

न इश्क़ की भी ख़ुमारी सदा रहे…

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Posted on January 8, 2019 at 7:00pm — 17 Comments

'तुरंत' के दोहे (पुच्छल )

प्रस्तुत है कुछ पुच्छल दोहे 

=====================

प्रेम और उत्साह जब ,पैदा करें तरंग | 

छोड़ कुसुम के तीर तब , विहँसे तनिक अनंग || 

मिलन का क्षण ही ऐसा | 

***

देश प्रेम की हर समय ,उठती रहे हिलोर | 

उन्नति की फिर देश में ,निश्चित होगी भोर || 

यही हो लक्ष्य हमेशा | 

***

ह्रदय सभी के आ सकें ,थोड़े से भी पास | 

फिर निश्चित इस देश में ,छा जाये…

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Posted on January 6, 2019 at 2:30pm — 5 Comments

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