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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी इस चमन में साथ साथ फूल भी हैं ख़ार भी **देखते बदलते रंग मौसमों के इश्क़ में हिज्र की ख़िज़ाँ कभी विसाल की बहार भी **इंतज़ार की घड़ी नसीब ही नहीं जिसेक्या पता उसे है चीज़ लुत्फ़-ए-इंतिज़ार भी **कीजिये सुकून चैन की न बात इश्क़ में इश्क़ में क़रार भी है इश्क़ बे-क़रार भी **चश्म इश्क़ में ज़ुबान का हुआ करे बदल जो शरर बने कभी कभी है आबशार भी **प्यार एक फ़लसफ़ा है और नैमत-ए-ख़ुदा रंज़ है इसे बनाते लोग कार-ओ-बार भी **इश्क़ जो करे जनाब रूह से उसे नसीब अज्मल-ए-जहान और ज़बीन पर निखार भी…See More
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)
"आदरणीय  Samar kabeer  साहेब ,आपकी इस्लाह बहुत ही पुरअसर है और मिसरे को वाजिब अर्थ देने के लिए आवश्यक भी | संशोधन कर रहा हूँ | सादर आभार एवं नमन | इसी तरह कृपा बनायें रखें | "
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'हिज्र है विसाल भी है वस्ल और है तड़प' इस मिसरे का शिल्प बहुत कमज़ोर है,आप जो कहना चाहते हैं,बयाँ नहीं हो रहा,इसे बदलने का प्रयास करें…"
Tuesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी इस चमन में साथ साथ फूल भी हैं ख़ार भी **देखते बदलते रंग मौसमों के इश्क़ में हिज्र की ख़िज़ाँ कभी विसाल की बहार भी **इंतज़ार की घड़ी नसीब ही नहीं जिसेक्या पता उसे है चीज़ लुत्फ़-ए-इंतिज़ार भी **कीजिये सुकून चैन की न बात इश्क़ में इश्क़ में क़रार भी है इश्क़ बे-क़रार भी **चश्म इश्क़ में ज़ुबान का हुआ करे बदल जो शरर बने कभी कभी है आबशार भी **प्यार एक फ़लसफ़ा है और नैमत-ए-ख़ुदा रंज़ है इसे बनाते लोग कार-ओ-बार भी **इश्क़ जो करे जनाब रूह से उसे नसीब अज्मल-ए-जहान और ज़बीन पर निखार भी…See More
Monday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मन के आँगन में फूटा जो प्रीतांकुर नवजात |(४८ )
"आदरणीय  Samar kabeer साहेब आपकी सराहना से मन गदगद है ,इसी तरह स्नेह बनाये रखें और मार्गदर्शन भी करते रहें | सादर नमन | "
Monday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मन के आँगन में फूटा जो प्रीतांकुर नवजात |(४८ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,बहुत अच्छा गीत रचा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

मन के आँगन में फूटा जो प्रीतांकुर नवजात |(४८ )

एक गीत==========मन के आँगन में फूटा जोप्रीतांकुर नवजात |खाद भरोसे की देकर अबसींच इसे दिन-रात |**ध्यान रहे यह इस जीवन काबीत गया बचपन |आतुर है दस्तक देने कोअब मादक यौवन |उर-आँगन में जगमग हर पलसपनों के दीपकऔर रही झकझोर हृदय कोयह बढ़ती धड़कन |वयः संधि का काल हृदय मेंभावों का उत्पात |खाद भरोसे की देकर अबसींच इसे दिन-रात |**सावधान रह खो मत देनामधुर प्रीत के पल |स्वाभाविक है मन-सागर मेंलहरें जो चञ्चल |आकर्षण का जाल परस्परलाता नित्य निकटअनजाने ही परवश होताजाता अंतस्तल |मौन साध कर भी हो जातीनयनों से है…See More
Sunday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै (४७ )
"Rakshita Singh जी रचना की सराहना के लिए सादर आभार एवं नमन | "
Sunday
Rakshita Singh commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै (४७ )
"आदरणीय गिरधारी जी नमस्कार,  काम तमाम तरह के शायद ही पीछा छोड़ें ख़ुद को ख़ुद से मिलना है तो वक़्त ज़रा दीजै ।  बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ बहुत बहुत बधाई ।"
Saturday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"vijay nikore साहेब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला आफजाई के लिए | "
Jun 18
vijay nikore commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"गज़ल अच्छी लिखी है। बधाई गिरधारी सिंह जी"
Jun 18
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
Jun 13
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"बे'पनाह, मुहब्बतों, नवाज़िशों का दिल से बे'हद शुक्रिया ! शाद-औ-आबाद रहें आदरणीय Samar kabeer साहेब   "
Jun 12
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए' इस मिसरे को यूँ कर लें,इसमें 'हज़फ़-ए-लफ़्ज़ का ऐब है:- 'कैसे होते हैं फ़ना प्यार निभाने के…"
Jun 11
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )

कैसे होते हैं  फ़ना प्यार निभाने के लिए  छोड़ जाऊंगा नज़ीर ऐसी ज़माने के लिए  ** रूह का हुस्न जिसे दिखता वही आशिक़ है  जिस्म का हुस्न तो होता है लुभाने के लिए  ** दरमियाँ गाँठ दिलों के जो पड़ी कब सुलझी  कौन दीवार उठाता है गिराने के लिए  ** अच्छे लोगों की कमी रहती है क्या जन्नत में  क्यों ख़ुदा उनको है तैयार बुलाने के लिए  ** आग को देना हवा काम बचा लोगों का  कोशिशें कोई न करता है बुझाने के लिए  ** दाँत खाने के जुदा जिनके दिखाने के जुदा  लोग ऐसे हैं ख़तरनाक ज़माने के लिए  **दिन ब दिन और हुए जाते हैं हालात…See More
Jun 8
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है (४५ )
" गिरिराज भंडारी जी आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | सादर नमन | तक़बूले रदीफ़ संज्ञान में तो था लेकिन शिल्प की दृष्टि से इस लम्बी बह्र में इग्नोर किया क्योंकि मुझे तीरगी को  खीरगी से मिलाना था | वैसे अहमद फ़राज़ जैसे शायर…"
Jun 1

Profile Information

Gender
Male
City State
BIKANER (RAJASTHAN)
Native Place
BIKANER
Profession
RETIRED GOVT EMPLOYEE
About me
POET WRITER

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हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी

इस चमन में साथ साथ फूल भी हैं ख़ार भी

**

देखते बदलते रंग मौसमों के इश्क़ में

हिज्र की ख़िज़ाँ कभी विसाल की बहार भी

**

इंतज़ार की घड़ी नसीब ही नहीं जिसे

क्या पता उसे है चीज़ लुत्फ़-ए-इंतिज़ार भी

**

कीजिये सुकून चैन की न बात इश्क़ में

इश्क़ में क़रार भी है इश्क़ बे-क़रार भी

**

चश्म इश्क़ में ज़ुबान का हुआ करे बदल

जो शरर बने कभी कभी है आबशार भी

**

प्यार एक फ़लसफ़ा है और नैमत-ए-ख़ुदा

रंज़ है इसे बनाते लोग…

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Posted on June 24, 2019 at 1:30pm — 2 Comments

मन के आँगन में फूटा जो प्रीतांकुर नवजात |(४८ )

एक गीत

==========

मन के आँगन में फूटा जो

प्रीतांकुर नवजात |

खाद भरोसे की देकर अब

सींच इसे दिन-रात |

**

ध्यान रहे यह इस जीवन का

बीत गया बचपन |

आतुर है दस्तक देने को

अब मादक यौवन |

उर-आँगन में जगमग हर पल

सपनों के दीपक

और रही झकझोर हृदय को

यह बढ़ती धड़कन |

वयः संधि का काल हृदय में

भावों का उत्पात |

खाद भरोसे की देकर अब

सींच इसे दिन-रात…

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Posted on June 23, 2019 at 12:30pm — 2 Comments

ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै (४७ )

ताज़ा गर दिल टूटा है तो वक़्त ज़रा दीजै 

क़ायम रखना रिश्ता है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

सिर्फ़ शनासाई से होता प्यार कहाँ मुमकिन 

इश्क़ मुक़म्मल करना है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

पहले के दिल के ज़ख़्मों का भरना है बाक़ी 

ज़ख़्म नया गर देना है तो वक़्त ज़रा दीजै 

**

ख़्वाब कभी क्या बुनने से ही होता है कामिल 

पूरा करना सपना है तो वक़्त ज़रा…

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Posted on June 13, 2019 at 1:30am — 2 Comments

किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )

कैसे होते हैं  फ़ना प्यार निभाने के लिए 

छोड़ जाऊंगा नज़ीर ऐसी ज़माने के लिए 

**

रूह का हुस्न जिसे दिखता वही आशिक़ है 

जिस्म का हुस्न तो होता है लुभाने के लिए 

**

दरमियाँ गाँठ दिलों के जो पड़ी कब सुलझी 

कौन दीवार उठाता है गिराने के लिए 

**

अच्छे लोगों की कमी रहती है क्या जन्नत में 

क्यों ख़ुदा उनको है तैयार बुलाने…

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Posted on June 8, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

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