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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

ये ज़ीस्त रोज़ सूरत-ए-गुलरेज़ हो जनाब(६३)

ये ज़ीस्त रोज़ सूरत-ए-गुलरेज़ हो जनाबराह-ए-गुनाह से सदा परहेज़ हो जनाब**मंज़िल कहाँ से आपके चूमें क़दम कभीकोशिश ही जब तलक न जुनूँ-ख़ेज़ हो जनाब**क्या लुत्फ़ ज़िंदगी का लिया आपने अगरमक़सद ही ज़िंदगी का न तबरेज़ हो जनाब**मुमकिन कहाँ कि ज़िंदगी की पीठ पर कभीलगती किसी के ग़म की न महमेज़ हो जनाब**उस जा पे फ़स्ल बोने की ज़हमत न कीजियेजिस जा अगर ज़मीं ही न ज़रखेज़ हो जनाब**इस बात को न भूलें मुसीबत के दिनों मेंपैमाना दिल का सब्र से लबरेज़ हो जनाब**रस्ते सदाकतों के चुने जब हैं आपनेकैसे न फिर ज़बीं पे कोई तेज़ हो जनाब**खूँरेज़…See More
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रब है ज़रूर आपको दिखता भले न हो (६१)
"//जलव-ए-हूर से मात्रा गड़बड़ होती है ,क्या चेहरा-ए-हूर किया जा सकता है ?// "चहर-ए-हूर" में भी वही गड़बड़ है,कुछ और सोचें ।"
Sep 10
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
Sep 10
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रब है ज़रूर आपको दिखता भले न हो (६१)
"आदरणीय Samar kabeer साहेब  , आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | आप सही कह रहे हैं ,मैंने तो यही समझ कर लिखा है कुछ लोगों में कुछ प्राप्त करने का फितूर होता है जो दिखता नहीं | जलव-ए-हूर से मात्रा गड़बड़ होती है ,क्या…"
Sep 9
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रब है ज़रूर आपको दिखता भले न हो (६१)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जोश-ओ-जुनून से किये हासिल कई मुक़ाम होता फ़ितूर आपको दिखता भले न हो' इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं है,देखियेगा । 'जलवा-ए-हूर आपको दिखता भले…"
Sep 9
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मुबाइल से हुए रिश्ते मुतासिर आज हैं इतने कि रहते मुंतज़िर हैं हम कोई अहबाब आएगा' इस शैर के ऊला में 'सहीह शब्द है…"
Sep 7
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )
"भाई Sushil Sarna जी , आपकी हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | अहसासों को कागज़ पर उतारने के मामले में आप सिद्धहस्त हैं ,तभी अहसास समझ सकते हैं | चंद गिनती के लोग हैं जो गद्य में पद्य सा आनंद प्रदान करते हैं ,आप उनमें से एक हैं ,वरना…"
Sep 5
Sushil Sarna commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )
"कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगाहमारे गाँव की चौपाल तक अब आब आएगा**खिलौना जानकर कुछ लोग उसको तोड़ डालेंगेअगर तालाब की तह में उतर महताब आएगा आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी ऐसे खूबसूरत अहसासों को आप कैसे लफ़्ज़ों में उत्तर लेते हैं , ये आप ही के बस की…"
Sep 5
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )
"आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट  स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार एवं नमन "
Sep 5
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )
"गिरधारी जी शानदार गज़ल्म बधाई"
Sep 5
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )

कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा हमारे गाँव की चौपाल तक अब आब आएगा ** खिलौना जानकर कुछ लोग उसको तोड़ डालेंगे अगर तालाब की तह में उतर महताब आएगा ** हमेशा ख़्वाब देखें और मेहनत भी करेंगे तो हक़ीक़त में उतर कर एक दिन वो ख़्वाब आएगा **नहीं था इल्म हमको ये कि जिस फ़रज़न्द को पालावही बेआब करने सूरत-ए-कस्साब आएगा ** ग़रीबी से दिलाएगा  निज़ात अब कौन और कैसे अमीरी का रियाया को कभी क्या ख़्वाब आएगा  **सफ़र जारी रखो  पैहम  अगर हैं आप तिश्नालब कि ख़ुद  चलकर नहीं कोई कभी   तालाब आएगा ** हमें उम्मीद बिलकुल भी न…See More
Sep 3
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"विजय निकोरे जी आपकी स्नेहिल सराहना के लिए सादर आभार "
Sep 2
vijay nikore commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी , अच्छी रचना के लिए बधाई।"
Sep 2
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post सीखे सबक़ हयात से भूला नहीं कोई (५९ )
"आपकी क़ीमती दाद मेरे लिए वाइस-ए-फ़ख्र है मोहतरम Samar kabeer   साहेब | नवाज़िश-ओ-करम का दिल से शुक्रिया |"
Sep 1
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post सीखे सबक़ हयात से भूला नहीं कोई (५९ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 1
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"आदरणीया pratibha pande जी सराहना के लिए सादर आभार एवं नमन | "
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ये ज़ीस्त रोज़ सूरत-ए-गुलरेज़ हो जनाब(६३)

ये ज़ीस्त रोज़ सूरत-ए-गुलरेज़ हो जनाब

राह-ए-गुनाह से सदा परहेज़ हो जनाब

**

मंज़िल कहाँ से आपके चूमें क़दम कभी

कोशिश ही जब तलक न जुनूँ-ख़ेज़ हो जनाब

**

क्या लुत्फ़ ज़िंदगी का लिया आपने अगर

मक़सद ही ज़िंदगी का न तबरेज़ हो जनाब

**

मुमकिन कहाँ कि ज़िंदगी की पीठ पर कभी

लगती किसी के ग़म की न महमेज़ हो जनाब

**

उस जा पे फ़स्ल बोने की ज़हमत न कीजिये

जिस जा अगर ज़मीं ही न ज़रखेज़ हो…

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Posted on September 15, 2019 at 4:00pm

अरसा गुज़र गया है कोई गुफ़्तुगू नहीं (६२ )

अरसा गुज़र गया है कोई गुफ़्तुगू नहीं 

ख़त भी नहीं ख़बर नहीं है जुस्तजू नहीं 

***

दरिया-ए-इश्क़ जो कि उफ़नता था थम गया

यूँ लग रहा है जैसे कि दिल में लहू नहीं

***

ख़ामोश ताकते हैं दरीचा तिरा सनम
हालाँकि इल्म है कि वहां पे भी तू नहीं
***

यादें हैं ख्वाब भी है तस्सवुर भी है तेरा

अफ़सोस बस यही है कि तू…
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Posted on September 10, 2019 at 12:00am

रब है ज़रूर आपको दिखता भले न हो (६१)

ग़ज़ल(२२१ २१२१ १२२१ २१२ )

.

रब है ज़रूर आपको दिखता भले न हो

हर सू है नूर आपको दिखता भले न हो

**

होता ज़रूर है किसी में कम किसी में ख़ूब

दिल का गुरूर आपको दिखता भले न हो

**

जोश-ओ-जुनून से किये हासिल कई मुक़ाम

होता फ़ितूर आपको दिखता भले न हो

**

मौज़ूदगी है उनकी तसव्वुर में आपके

जलवा-ए-हूर आपको दिखता भले न हो

**

अनजान कोई रह सके क्या उसके दर्द से

दिल चूर चूर आपको दिखता भले न हो

**

हर वक़्त डोलता रहे…

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Posted on September 6, 2019 at 11:30pm — 3 Comments

कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा (६० )



कभी देखा नहीं सुनते रहे सैलाब आएगा

हमारे गाँव की चौपाल तक अब आब आएगा

**

खिलौना जानकर कुछ लोग उसको तोड़ डालेंगे

अगर तालाब की तह में उतर महताब आएगा

**

हमेशा ख़्वाब देखें और मेहनत भी करेंगे तो

हक़ीक़त में उतर कर एक दिन वो ख़्वाब आएगा

**

नहीं था इल्म हमको ये कि जिस फ़रज़न्द को पाला

वही बेआब करने सूरत-ए-कस्साब आएगा

**

ग़रीबी से दिलाएगा  निज़ात अब कौन और कैसे

अमीरी का रियाया को कभी क्या ख़्वाब आएगा …

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Posted on September 2, 2019 at 11:00pm — 5 Comments

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