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ग़ज़ल(2122 1212 22 /112 )
आपका इन्तिख़ाब कर डाला
हमने कार-ए-सवाब कर डाला
**
बर्क़-ए-हुस्न-ओ-शबाब चमकी जब
आपको बे-हिज़ाब कर डाला
**
पी मय-ए-चश्म ख़ूब जी भर के
ख़ुद को मस्त-ए-शराब कर डाला
**
छा गई हुस्न की अदा हम पर
मौज़िजा लाजवाब कर डाला
**
लुत्फ़-ए-उल्फ़त मिला है खूब सनम
दिल मगर इज़्तिराब कर डाला
**
आपका अक़्स बन गए, ख़ुद को
इश्क़ में कामयाब कर डाला
**
क़ुर्बतें दे कभी फ़िराक़ कभी
क्या करम बे-हिसाब कर डाला
**
ठहरे ठहरे से मेरे जीवन में
क्या गज़ब इंक़लाब कर डाला
**
आपको पा के हर अधूरा 'तुरंत '
हमने कामिल है ख़्वाब कर डाला
**
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी

"मौलिक व अप्रकाशित" 

शब्दार्थ--इन्तिख़ाब =चयन, कार-ए-सवाब=
पुण्य का कार्य , बर्क़-ए-हुस्न-ओ-शबाब =
सौंदर्य और तरुणाई की बिजली ,मय-ए-चश्म=
आँखों की मदिरा , मस्त-ए-शराब=शराब में धुत ,
मौज़िजा =जादू/चमत्कार ,लुत्फ़-ए-उल्फ़त=
प्रेमानंद ,इज़्तिराब= बैचैन ,क़ुर्बतें=
नज़दीकियां ,फ़िराक़ =विरह ,कामिल=पूर्ण

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Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on December 1, 2022 at 10:20pm

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 1, 2022 at 9:16pm

आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on November 30, 2022 at 6:52pm

Zaif saheb बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Zaif on November 30, 2022 at 6:25pm

बहुत ख़ूब ग़ज़ल, सर जी। सादर।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on November 24, 2022 at 10:53pm

राखी जैन जी , आपकी आनंदित करने वाली सराहना से मन तृप्त हुआ | सृजन सार्थक हुआ | सादर आभार।

Comment by Rakhee jain on November 24, 2022 at 10:42pm

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on November 24, 2022 at 6:29pm

आदरणीय समर कबीर साहेब , ग़ज़ल पर आपकी नज़रसानी और आपकी हौसला बढ़ाती राय के लिए बहुत बहुत आभार | अवश्य इन पर ग़ौर करूँगा |

Comment by Samar kabeer on November 24, 2022 at 5:29pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'छा गई हुस्न की अदा हम पर
मौज़िजा लाजवाब कर डाला'
इस शे'र में 'मौजिज़:' शब्द उचित नहीं,इस पर विचार करें ।
'दिल मगर इज़्तिराब कर डाला'
इस मिसरे का वाक्य विन्यास ठीक नहीं है, देखिएगा ।
'हमने कामिल है ख़्वाब कर डाला'
इस मिसरे का वाक्य विन्यास ठीक नहीं है, देखिएगा ।
उर्दू के कुछ शब्दों में नुक़्ते लगे हैं कुछ में नहीं, देखिएगा ।

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