For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

हद है

मान है सम्मान गर दौलत नगद है .. हद है,

लोभ बिन इंसान कब करता मदद है .. हद है,

हाल मैं ससुराल का कैसे बताऊँ सखियों,

सास बैरी है बहुत तीखी ननद है .. हद है,

स्वाद चखते थे कभी हम स्नेह की बातों का,

आज जहरीली जुबां कड़वा शबद है .. हद है,

कौन…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on January 12, 2013 at 11:00am — 10 Comments

दो-दोहे- अपने सुख की खोज में...

एक.

अपने सुख की खोज में,सब जा रहे विदेश।

वहां जा कर पता चला, कितना अच्छा देश।।

दो-

सब बदलने की कोशिश,करते हैं सब आज।

आदमी वहीं का वहीं, बदला नहीं समाज।।

Added by सूबे सिंह सुजान on January 12, 2013 at 10:57am — 7 Comments

आक्रोश

घटना ऐसी घटित हो गयी सुनकर भारत रोया है,

वीर सपूतो को फिर से इस मात्रभूमि ने खोया है.

छल कर गया पड़ोसी उसने अपनी जात दिखा डाली,

सोते सिंहो पर हमला अपनी औकात दिखा डाली.

खून हमारा उबल उठा है पाक तेरी नादानी से,

दिल्ली कैसे सहन कर गयी सोंचू मै हैरानी से.

आज हमारी सहनशक्ति का बाँध तोड़ डाला तूने,

सोये सिंह जगाकर अपना भाग्य फोड़ डाला तूने.

अरे भेंड़िये कायरपन पर बार-बार धिक्कार तुझे,

हिन्दुस्तानी बच्चा-बच्चा देता है ललकार तुझे.

कूटनीति अपनाने वाले…

Continue

Added by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on January 12, 2013 at 9:30am — 12 Comments

उमड़ते विचार ..

टूटती सी ताल है ,भेड़िये की खाल है ..

चीख भी न सुन सके ,कानों का ये हाल है।।

बात तो तपाक सी ,गंदली नापाक सी ..

रोम रोम जल उठे ,'तीन पात ढाक' सी ..

गंगा निर्मल कहाँ ,प्रण में अब बल कहाँ ..

स्वच्छ जलधार हो ,कोई भी हल कहाँ?

स्वदेश है पुकारता ,स्वजनों से हारता ,

हिन्द के लिए कहाँ ,स्वयं कोई वारता ?

कुर्सी में गोंद है, उठना मोहाल है …

Continue

Added by Lata R.Ojha on January 12, 2013 at 3:00am — 10 Comments

ककहरा

ककहरा



क- काले दिल कपड़े सफ़ेद

ख- खादी की नियत में छेद

ग- गद्दार देश को बेच रहे

घ- घर को रहे भालो से भेद

इसके बाद कुछ नहीं

मानो हुआ कुछ नहीं…



च- चिड़िया थी जो सोने की

छ- छलनी है आतंक की गोली से

ज- जहां तहां है ख़ून खराबा

झ- झगड़े, जात-धर्म की बोली से

इसके बाद कुछ नहीं

मानो हुआ कुछ नहीं…



ट - टंगी है आबरू चौराहे पे माँ की

ठ - ठगी सी आंसू बहाती है

ड - डरी हुयी है बलात्कारियों से

ढ - ढंग से जी नहीं…

Continue

Added by Ranveer Pratap Singh on January 11, 2013 at 11:30pm — 11 Comments

दो निरे ....

एक बच्चा था, अबोध, हमारे यहाँ की भाषा के उसे निरा कहते है| निरा अबोध बच्चा, अक्ल से कच्चा, दिल से सच्चा| एक दिन खेलते खेलते जाने कहाँ आ पहुचा, उसे नहीं पता था, उसने देखा कुछ लोग थे , अजीब दाड़ी टोपी लगाए, हँसते हुए, बांस की पंचटो के ढाँचे पर आटे की लेई से पतंगी कागज चिपकाते हुए| उसने देखा, कुछ बच्चे उस जैसे ही, निरे अबोध बच्चे, मदद कर रहे है अजीब दाड़ी टोपी वाले लोगे की, वो देखता रहा, बहुत देर तक देखता रहा, उसका दिल रंगीन कागजों में अटक गया था, वो चिपकाना चाहता था उस पतंगी कागज को, बांस की…

Continue

Added by अमि तेष on January 11, 2013 at 11:11pm — 4 Comments

एक बेटी सो गई

सांस उसकी थम गई

एक बेटी सो गई।

पर अब जागा हिंदूस्तां

हर आंख नम हो गई।।

मैं सजा दिलाना चाहती हूं

उन दरिंदों को मां।

ताकि अपवित्र ना हो

फिर कोई दामिनी मां।।

हौंसला बुलंद देखा

कुछ पलों के होश में।

देशवासी न्याय मांगे

हर कोई आक्रोश में।।

तेरा बलिदान हमेशा याद रहेगा

अब मेरा हिंदूस्तां नहीं सहेगा।

यू हीं घूमते रहे गर दरिंदे

तो आक्रोश यूं ही कायम रहेगा।।

चिंगारी जो जल चुकी है

अब नहीं बुझने देना।

बेटी की मौत औ

अपमान का…

Continue

Added by chandramauli pachrangia on January 11, 2013 at 8:33pm — 4 Comments

गजल -- हो रहा है फिर उजाला इस शहर में !!!

हो रहा है फिर उजाला इस शहर में,
जल उठी है मोमबत्ती मेरे घर में ।

आँधियों के पैर कतराने लगे हैं,
है समंदर आस का अब हर नजर में ।

देखकर कोंपल नयी खुश हो गये हम,
शेष है आशा घनी बूढ़े शजर में ।

शाम से महसूस होती है थकावट,
लौट आती है जवानी, नव सहर में ।

यूँ मिला किरदार जीवन का 'सलिल' को,
गीत गम का गुनगुनाया भी बहर में ।

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 11, 2013 at 6:32pm — 8 Comments

डा . तुकबंद की तबाहियां

डा . तुकबंद की तबाहियां

------------------------------

निकला मेरा जनाजा उनके इश्क की छाँव में

फूल बिछाए हमने बिखेरे कांटे उन्होंने राह में

भूल गए वो कि जनाजा तो काँधे पे जाएगा

गुजरेंगी इस राह से कोई बहुत याद आएगा

---------------------------------------------------------

आशिक और शायरों की है अलग पहचान

जानते हैं सब फिर भी बनते हैं अनजान

आशिकी में आशिक बस करते हैं आह आह

पढ़े गजल शायर लोग करते हैं वाह…

Continue

Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 11, 2013 at 5:57pm — 9 Comments

"ग़ज़ल"जिसे देखा नहीं हमने उसे भगवान बोलेंगे

===========ग़ज़ल=============

बहर-ए-हजज मुसम्मन सालिम 

वजन- 1222 / 1222 / 1222 / 1222 



गरीबों का दमन करके जो सीना तान बोलेंगे 

झुकाए सर उन्ही को आप तुर्रम खान बोलेंगे 



सिपाही काठ के पुतले बने फिरते हैं राहों में 

कसम खाई वो करने जो…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 11, 2013 at 3:30pm — 8 Comments

मेरे सपने में

बह रही थी एक नदी मेरे सपने में
रह गयी फिर भी प्यासी सपने में

जी रही थी इस दुनिया में मगर
देखती थी दूसरी दुनिया सपने में

करती थी इंतेजार उसका दिनभर
आता था जो आंसू पोछने सपने में

यकीन था आएगा वो पूरा करने
कर गया था वादे, जो सपने में

ढूढती हूँ एक वही चेहरा भीड़ में
बस गया था अक्श जिसका सपने में

काश ।अब सूरज ना निकले कभी
'शुभ' देखती रहे हरवक्त उसे सपने में

Added by shubhra sharma on January 11, 2013 at 10:00am — 17 Comments

कलम की नॊंक सॆ

कलम की नॊंक सॆ

===========

फ़ांसी कॆ फन्दॊं कॊ हम,गर्दन का दान दिया करतॆ हैं,

गॊरी जैसॆ शैतानॊं कॊ भी,जीवन-दान दिया करतॆ हैं,

क्षमाशीलता का जब कॊई, अपमान किया करता है,

अंधा राजपूत भी तब, प्रत्यंचा तान लिया करता है,

भारत की पावन धरती नॆं, ऎसॆ कितनॆं बॆटॆ जायॆ हैं,

मातृ-भूमि कॆ चरणॊं मॆं, जिननॆ निजशीश चढ़ायॆ हैं,

दॆश की ख़ातिर ज़िन्दगी हवन मॆं, झॊंकतॆ रहॆ हैं झॊंकतॆ रहॆंगॆ !!

कलम की नॊंक सॆ आँधियॊं कॊ हम,रॊकतॆ रहॆ हैं रॊकतॆ रहॆंगॆ…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 10, 2013 at 8:30pm — 16 Comments

दीवाने कहाँ जायें

अफ़सोस है दुनिया में दीवाने कहाँ जायें.

शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ जायें.



यातना वंचना असह्य हो,

सहचरी वेदना बनी सदा.

निर्जन पथ निर्मम मीत मिला,

व्याकुल करती मदहोश अदा.

उलझन में पड़ा जीवन सुलझाने कहाँ जायें.

शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ जायें.



पल में विचलित कर देती हैं,

ये प्यार मुहब्बत की बातें.

नयनों मे कोष अश्रुओं का,

क्यूँ काटे नहीं कटती रातें.

राँझा की तरह बोलो मिट जाने कहाँ जायें..

शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ…

Continue

Added by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on January 10, 2013 at 8:00pm — 10 Comments

हाइकु मुक्तिका: संजीव 'सलिल'

हाइकु मुक्तिका:संजीव 'सलिल'

*

जग माटी का

एक खिलौना, फेंका

बिखरा-खोया.

फल सबने

चाहे पापों को नहीं

किसी ने ढोया.

*

गठरी लादे

संबंधों-अनुबंधों

की, थक-हारा.

मैं ढोता, चुप

रहा- किसी ने नहीं

मुझे क्यों ढोया?

*

करें भरोसा

किस पर कितना,…

Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on January 10, 2013 at 7:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल : नाव ही नाख़ुदा हो गई

राहबर जब हवा हो गई
नाव ही नाखुदा हो गई

प्रेम का रोग मुझको लगा
और दारू दवा हो गई

जा गिरी गेसुओं में तेरे
बूँद फिर से घटा हो गई

चाय क्या मिल गई रात में
नींद हमसे खफ़ा हो गई

लड़ते लड़ते ये बुज़दिल नज़र
एक दिन सूरमा हो गई

जब सड़क पर बनी अल्पना
तो महज टोटका हो गई

माँ ने जादू का टीका जड़ा
बद्दुआ भी दुआ हो गई

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 10, 2013 at 4:30pm — 20 Comments

जाने कौन कहां से आकर

जाने कौन कहां से आकर

मुझको कुछ कर जाता है

मेरी गहरी रात चुराकर

तारों से भर जाता है

जाने कौन.........



देख नहीं मैं पाउं उसको

दबे पांव वह आता है

और न जाने कितने सपने

आंखों में बो जाता है

जाने कौन.......



एक दिन उसको चांद ने देखा

झरी लाज से उसकी रेखा

मारा-मारा फिरता है अब

दूर खड़ा घबराता है

जाने कौन....



चैताली वो रात थी भोली

नीम नजर भर नीम थी डोली

वही तराने सावन-भादो

उमड़-घुमड़ कर गाता है …

Continue

Added by राजेश 'मृदु' on January 10, 2013 at 3:00pm — 6 Comments

मौन का,इम्तिहान न लो ..!!

नोंच डालो ,

अस्मिता को ,बेच डालो ,

हम यही कहते रहेंगे

मौन का ...

इम्तिहान न लो ..!!

सूरज से युद्ध 

करने का  दुस्साहस

करता जुगनू प्रतिदिन

आकाश बँधाता ढाढस

ज़ुल्म हम सहते रहेंगे ,

हम यही कहते रहेंगे

शौर्य का

अनुमान न लो ..!!

चीखती रह जाएँगीं

विधवा घाटियाँ

जर्जर सी छत की

छूट गईं लाठियाँ

प्रतीक्षारत ,आक्रमण का

अनुचित परिणाम न हो

हम यही कहते रहेंगे ,

हौसले का ,

अनुमान न लो ..!!

मौन का,इम्तिहान न…

Continue

Added by भावना तिवारी on January 10, 2013 at 2:30pm — 5 Comments

हाथ मिलाते रहिये

दिल मिले या ना मिले हाथ मिलाते रहिये,

प्यार की रस्म को आगे बढ़ाते रहिये |



अंधेरों मे ही ना गुजर जाय जीवन का सफ़र,

प्यार की शमा को दिल मे जलाते रहिये |



रहता यूँ चमन मे बिजलियों के गिरने का डर,

चाहत के फूलों को दिल मे खिलाते रहिये |



रोने गाने मे हो ना जाएँ सारी उमर तमाम,

उलफत के जाम को खुद पीकर पिलाते रहिये |



चले है जब तो मिल ही जाएगी मंज़िल हमको

अलबिदा कहते हुए हाथ हिलाते रहिये |

  • Dr.Ajay Khare…
Continue

Added by Dr.Ajay Khare on January 10, 2013 at 2:30pm — 3 Comments

प्रहार

प्रहार 

दहक उठे अंगारे धरती हुई रक्त से फिर पग पग  लाल 

जूझ पड़े वीर बाँकुरे झुके नहीं हँस  कटा दिए निज भाल
माँ  के लहराते आँचल में कायर  अरि  कंटक नित फंसाते 
धन्य है  भारत वीर भूमि जहाँ  बलिदानी पलकन चुनते जाते 
अरि मर्दन करने को खड़े रहते सीमा  पर प्रहरी  सीना  ताने 
हर बार लड़े  हर बार मिटे…
Continue

Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 2:01pm — 6 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service