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Amitesh Jain (ami'ajim') replied to Admin's discussion प्रस्तावित OBO पुस्तक में रचना शामिल करने हेतु अनुरोध
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Amitesh Jain (ami'ajim') replied to Ganesh Jee "Bagi"'s discussion OBO के १००० सदस्य पुरे होने पर एक घोषणा
Amitesh Jain (ami'ajim') posted a videoPosted on May 28, 2011 at 12:13am 0 Comments 0 Likes
रात से हमने दोस्ती कर ली
लोग कहते है, दिल्लगी कर ली
ये फ़िज़ा बहकी, हवा महकी सी
शाम ने तेरी मुख़बिरी कर ली
ये हिज़्र मेरे बस की बात नहीं
लो सजा अपनी मुलतवी कर ली
तेरा ख्याल ले के सोये थे
ख्वाब में हमनें रोशनी कर ली
जो इल्म आया महोब्बत का 'अमि'
आशिको ने शायरी कर ली ~अमि'अज़ीम'
Posted on May 26, 2011 at 6:42pm 0 Comments 0 Likes
जिन्दगीं हर घड़ी
एक नया अनुभव लाती है
पर मैं क्या करु मेरा हर नया अनुभव
मेरे हर पुराने अनुभव से
कुछ कड़वा है, कुछ फ़ीका है, कुछ खारा है
कुछ दुर ही सही
मैं उसके साथ चलता हूँ
कभी सभ्लता हूँ, कभी फ़िसलता हूँ
मैं उसे नहीं बांटता
ये ही मुझे रफ़्ता रफ़्ता बांट देता है
मेरी इस छोटी सी जिन्दगी को
जो मेरे लिये ही काफ़ी नही
दो आयामों में काट देता है
वह मेरा सबसे पुराना मित्र है
और सबसे बड़ा…
ContinuePosted on April 29, 2011 at 9:49am 0 Comments 0 Likes
Posted on April 21, 2011 at 1:30pm 5 Comments 0 Likes
जो पत्थर दिल थे आँसू बहानें लगें हैं,
रु-ब-रु गर हो तो मुस्कुराने लगें हैं.
अज़ीब तर्ज है तकल्लुफ़ का फ़िज़ायों में,
छुपाते थे जो, सिलसिलें बतानें लगें हैं.
कल तलक मायूस थे जो ईद पर हम से,
अब मुखबरी मुहल्लें की सुनानें लगें हैं.…
Veerendra Jain said… Wishing you a very Happy Birthday.. Amitesh ji...
May GOD fulfill all your dreams this year...
Ganesh Jee "Bagi" said…
Veerendra Jain said…
Raju said…
PREETAM TIWARY(PREET) said…
Ganesh Jee "Bagi" said…
Admin said… आवश्यक सूचना:-
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