For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,173)

सहारा (लघुकथा )

बेटा ख़ानदान का चराग़ और बुढ़ापे का सहारा होता है , बेटियां पराया धन हैं दूसरे के घर चली जाती हैं | शान्ती की यही सोच ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हो चुकी थी | ..... इकलौते बेटे को प्राइवेट कॉलिज में और बेटियों को सरकारी कालिज में पढ़ाया ,यही नहीं ज़ेवर बेचकर बेटे को एम बी ए कराया और बेटी इस से महरूम रह गयी | घर का खर्चा पति की पेंसन और सिलाई करने से चल रहा  था मगर हाय क़िस्मत बेटा भी बहू के बहकावे में आकर माँ और बहनों को बेसहारा छोड़ गया। ...... पति ज़िंदा होते तो यह दिन देखने न पड़ते | शान्ती दुखों…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 6, 2016 at 10:00pm — No Comments

भय (लघुकथा)

"कल आपका बेटा परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा गया है, यह आखिरी चेतावनी है, अब भी नहीं सुधरा तो स्कूल से निकाल देंगे|" सवेरे-सवेरे विद्यालय में बुलाकर प्राचार्य द्वारा कहे गए शब्द उसके मस्तिष्क में हथौड़े की तरह बज रहे थे| वो क्रोध से लाल हो रहा था, और उसके हाथ स्वतः ही मोटरसाइकिल की गति बढा रहे थे|

"मेरी मेहनत का यह सिला दिया उसने, कितना कहता हूँ कि पढ़ ले, लेकिन वो है कि.... आज तो पराकाष्ठा हो गयी है, रोज़ तो उसे केवल थप्पड़ ही पड़ते हैं, लेकिन आज जूते ही....|" यही सोचते हुए वो घर पहुँच…

Continue

Added by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on March 6, 2016 at 10:00pm — 5 Comments

शिवरात्रि विशेष

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर समस्त शिव भक्तों को सादर भेंट

.

जटाओं से निकल रही है, धार गंग नाथ शिव।

मुस्कुरा रहे गले में, धर भुजंग नाथ शिव।।

डमड्ड डमड्ड निनाद पर, हैं नृत्य कर रहे सभी।

मन लुभाये रूप आपका, मलंग नाथ शिव।।1।।



पाँव में कड़ा है और, त्रिशूल हाथ में धरे।

बाँध कर कमर में छाल, व्याह को चले हरे।।

चन्द्र ये ललाट पर, है विश्व दंग नाथ शिव।

मन लुभाये रूप आपका, मलंग नाथ शिव।।2।।



भंग की खुमार में हैं मस्त आज तो सभी।

सिर विहीन…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 6, 2016 at 9:30pm — 2 Comments


मुख्य प्रबंधक
लघुकथा : आस्तीन का साँप (गणेश जी बागी)

“मिस्टर सिंह, आप और आपकी टीम विगत छः माह से उस खूंखार आतंकवादी को पकड़ने में लगी हुई है, किन्तु अभी तक आपकी प्रगति शून्य है.”

“सर हम लोग पूरी निष्ठा और ईमानदारी से इस अभियान में लगें हैं, मुझे उम्मीद है कि हम शीघ्र सफल होंगे.”

“आई. बी. वालों ने भी सूचना दी थी कि वो पड़ोसी मित्र देश में छुपा हुआ है, फिर प्रॉब्लम क्या है ?”

“सर, यदि वो पड़ोसी देश में छुपा होता तो हम लोग उसे जिन्दा या मुर्दा दो दिन में ही पकड़ लेते,

लेकिन प्रॉब्लम तो यह है कि ....”

“क्या प्रॉब्लम…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 6, 2016 at 5:30pm — 13 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

221 1221 1221 22





करने को तो कर देते हैं हालात का चर्चा

लिखने में समाता नहीं जज़्बात का चर्चा



अब होश कहाँ मुझको तुझे देखने के बाद

लिखना भी अगर चाहूँ मुलाकात का चर्चा



वो रूठ गए हैं मेरे अंदाज़ से यारो

हर बात में करता था गई बात का चर्चा



देखा है फलक पे जो सितारों का ये जमघट

लगता है कि चलता है मेरी मात का चर्चा



हर बार बहा है मेरी मिट्टी का लहू ही

हरयाणा का कश्मीर का गुजरात का चर्चा



ए पर्दा नशी तेरे इशारो… Continue

Added by मनोज अहसास on March 6, 2016 at 10:36am — 5 Comments

नमक में हींग में हल्दी में आ गई हो तुम (ग़ज़ल)

बह्र : १२१२ ११२२ १२१२ २२

 

नमक में हींग में हल्दी में आ गई हो तुम

उदर की राह से धमनी में आ गई हो तुम

 

मेरे दिमाग से दिल में उतर तो आई हो

महल को छोड़ के झुग्गी में आ गई हो तुम

 

ज़रा सी पी के ही तन मन नशे में झूम उठा

कसम से आज तो पानी में आ गई हो तुम

 

हरे पहाड़, ढलानें, ये घाटियाँ गहरी

लगा शिफॉन की साड़ी में आ गई हो तुम

 

बदन पिघल के मेरा बह रहा सनम ऐसे

ज्यूँ अब के बार की गर्मी में आ गई हो…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 5, 2016 at 11:30pm — 10 Comments

प्रेम की वर्षा सूखी...

कुण्डलिया

धुंआ हवा को छेड़ती, पानी करे पुकार.

धरती निशदिन लुट रही, अम्बर है लाचार.

अम्बर है लाचार, प्रेम की वर्षा सूखी.

सरिता नदिया ताल, रेत में उलझी रूखी.

सूरज रखता खार, करें क्या सत्यम-फगुवा.

मानव अति बेशर्म, उड़ाता खुद…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 5, 2016 at 9:55pm — No Comments

साथ मेरे कभी रहो भी मियाँ

2122 1212 22/112



साथ मेरे कभी रहो भी मियाँ

कुछ सुनाओ तो कुछ सुनो भी मियाँ.



चाँद बन जाओ या सितारे तुम

पर कभी तो फ़लक बनो भी मियाँ.



क्या है तुझमें,नहीं है क्या तुझमें

ये कभी ख़ुद से पूछ लो भी मियाँ.



तुम बहुत बोलते हो बढ़ चढ़कर

ये कमी दूर तुम करो भी मियाँ.



अब ये दारोमदार है तुम पर

तुम जहाँ हो वहाँ टिको भी मियाँ.



राय क़ाइम न दूर से करते

पहले सबसे मिलो जुलो भी मियाँ.



ज़िंदगी में कहाँ सुकून… Continue

Added by shree suneel on March 5, 2016 at 5:51pm — 5 Comments

आघात – ( लघुकथा ) –

आघात – ( लघुकथा ) –

वर्मा जी ने जीवन भर की क़माई  अपने इकलौते बेटे पवन के भविष्य को बनाने में लगा दी!पहले तो मंहंगी से मंहंगी कोचिंग का खर्चा फ़िर आई आई टी की मंहंगी पढाई!तत्पश्चात बेटे की एम बी ए करने की फ़रमाइश ! बची खुची पूंजी बेटे की शादी में खर्च कर दी !सोचा कि और किसके लिये कमाया है! 

बेटा पवन नौकरी करने विदेश चला गया!मॉ बाप अकेले!हारी बीमारी कोई पूछने वाला नहीं!तीन साल से न बेटा आया न बहू!शुरू में तो होली दिवाली फ़ोन आजाता था!अब तो वह भी नहीं आता!वर्मा जी जब भी फ़ोन मिलाते…

Continue

Added by TEJ VEER SINGH on March 5, 2016 at 3:36pm — 10 Comments

गीत- ये है पुलिस की नौकरी,

२२१२ २२१२ २२१२ २२१२



ये है पुलिस की नौकरी, ये है पुलिस की नौकरी ।

कानून की ये टोकरी, ये है पुलिस की नौकरी ।



मुजरिम को पकडे तो कहे कुछ लोग अत्याचार है।

गर चुप रहे तो कहते है करती पुलिस व्यापार है।

जब मस्तियों में गाँव हो या नींद में होता शहर।

ऐ दोस्तो वे हम ही है जो जागते आठों पहर।

सोने का या फिर खाने का यां वक्त कुछ निश्चित नहीं।

हो जुर्म कितना भी मगर हम है तो तुम चिंतित नहीं

फिर भी हमें है लाख तानें और हजारों बात है।

हर फर्ज पूरा कर… Continue

Added by Rahul Dangi Panchal on March 5, 2016 at 2:38pm — 2 Comments

खट्टी डकारें(लघुकथा )राहिला

13-14 साल के कबाड़ी को कबाड़ तुलवा रहे सेठजी!लम्बी-लम्बी डकारों से परेशान हो रहे थे । जब कुछ ना सूझा तो पास ही खड़ी सेठानी पर झुंझला पड़े । "लगता है आजकल तरकारी में खुले हाथ से तेल मसाला उड़ेल रही हो!मार डाला इन खट्टी डकारों ने "

"अरे कैसी बात करते हैं सेठजी! तेल मसाले खाने से थोड़े ना खट्टी डकारें आती हैं!हम तो रोज ढ़ाबे पर ग्राहकों की बची तेल मसाले वाली तरकारी खाते हैं जुगाड़ से ।

चेहरे से चंचल बातूना लड़का!चहक के बोला ।

"अच्छा..!तो तू बहुत बड़ा जानकार है।तुझे बहुत पता है।"वह… Continue

Added by Rahila on March 5, 2016 at 12:41pm — 10 Comments

चले हैं छोड़ घर अपना - ग़ज़ल

1222    1222    1222    1222     1222



हुनर की बात है सबको गमों में यूँ हँसाना तो नहीं आता

सभी के हाथ यारो ये मुहब्बत का खजाना तो नहीं आता



है हसरत तो  हमारी भी  लगाएँ दिल  हसीनों से जमाने में

हमें पर नाज कमसिन का जरा भी यों उठाना तो नहीं आता



हमेशा  लौट आता कारवाँ गर्दिश  का जैसे दोस्तों फिर फिर

कि वैसे लौटकर फिर  से  बुलंदी का जमाना तो नहीं आता



लगेगी जिंदगी कैसे  सजा से हट   किसी ईनाम के जैसी

सभी को यार होठों पर तबस्सुम को सजाना तो नहीं…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 5, 2016 at 10:57am — 15 Comments

सत्य का सम्मान - डॉo विजय शंकर

सत्य का
सम्मान करते हैं ,
दूर से
प्रणाम करते हैं।
उसके पास आने से
डरते हैं।
जानते हैं ,
काट नहीं लेगा
पर झूठ
जो फैला रखा है
अपने चारों ओर
उसे दूर करने से
डरते हैं।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Dr. Vijai Shanker on March 5, 2016 at 9:43am — 7 Comments

ग़ज़ल-पंकज मिश्र

2212 121 1222 212



इतना कमाल हुस्न, दिखाया ही किसलिये।

होनी नही थी बात, बुलाया ही किसलिये।।



मौका नहीं था देना, इबादत का ग़र हमें।

बुत से भला नक़ाब, हटाया ही किस लिये।।



सुननी नहीं थी तुमको, अगर मेरी आरज़ू।

फिर नाम का भजन ये, सिखाया ही किसलिये।।



हम भूल ही गये थे, कि लेनी है साँस भी।

जब मारना ही था तो, जिलाया ही किसलिये।।



अरमान सब थे दफ़्न, सुकूँ में बहुत थे हम।

बर्बाद गुल था करना, खिलाया ही किसलिये।।



मौलिक…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 5, 2016 at 12:00am — 9 Comments

कौन है देख लें रो रहा कौन है

कौन है देख लें रो रहा कौन है

कौन है उस पे हँसता हुआ कौन है

कौन है लूट कर बन गया ज़िन्दगी

ज़िन्दगी ऐ तुझे भा गया कौन है

कौन है जिसका इक बार टूटे न दिल

दिल मुकम्मल जहाँ में बचा कौन है

कौन है ढूंढ़ता इक बशर बेखता

बेखता आज कल दिख रहा कौन है

कौन है आशना जो मिटा डाले ग़म

ग़म से रब के सिवा आशना कौन है

कौन है देखलूँ हू ब हू फूल सा

"फूल सा मुस्कुराता हुआ कौन है"

कौन है जान लें 'राज़' का…

Continue

Added by Vivek Raj on March 4, 2016 at 8:30pm — 5 Comments

मुस्कुरा भर देती हूँ .....

मुस्कुरा भर देती हूँ .....

कुछ तो है

तेरे मेरे मध्य

अव्यक्त सा //

शायद कोई शब्द

जो अभिव्यक्ति के लिए

अधरों पर छटपटा रहा हो //

या कोई पीछे छूटा पल

जो समय की आंधी में

अपने अहसासों को

बिखरने की वज़ह ढूंढ रहा हो //

या हृदय के अवगुंठन में

कोई उनींदी से चेतना

जो किसी के

स्नेह्पाश की प्रतीक्षा में

नयन दहलीज़ पर

अधलेटी सी बैठी हो //

क्या है आखिर

ये अव्यक्त और…

Continue

Added by Sushil Sarna on March 4, 2016 at 3:19pm — 10 Comments

अभिव्यक्ति की आजादी

पढ़ते हुए बच्चे का अनमना मन

टूटती ध्यान मुद्रा

बेचैनी बदहवासी

उलझन अच्छे बुरे की परिभाषा

खोखला करती खाए जा रही थी .......

कर्म ज्ञान गीता महाभारत

रामायण राम-रावण

भय डर आतंक

राम राज्य देव-दानव…

Continue

Added by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on March 4, 2016 at 11:00am — 6 Comments

अंतिम श्रृंगार (लघुकथा)

उसकी दाढ़ी बनाई गयी, नहलाया गया और नये कपडे पहना कर बेड़ियों में जकड़ लिया गया| जेलर उसके पास आया और पूछा, "तुम्हारी फांसी का वक्त हो गया है, कोई आखिरी इच्छा हो तो बताओ|"

उसका चेहरा तमतमा उठा और वो बोला, "इच्छा तो एक ही है-आज़ादी| शर्म आती है तुम जैसे हिन्दुस्तानियों पर, जिनके दिलों में यह इच्छा नहीं जागी|"

वो क्षण भर को रुका फिर कहा, “मेरी यह इच्छा पूरी कर दे, मैं इशारा करूँ, तभी मुझे फाँसी देना और मरने के ठीक बाद मुझे इस मिट्टी में फैंक देना फिर फंदा…

Continue

Added by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on March 4, 2016 at 7:30am — 11 Comments

हम भी होली खेलते जो होते अपने देश

हम भी होली खेलते जो होते अपने देश
विधि ने ऐसा वैर निकला भेज दिया परदेश
भेज दिया परदेश लेकिन भेजी न  सोगातें
अपने हिस्से में बस आई भूली बिसरी बातें
 …
Continue

Added by amita tiwari on March 3, 2016 at 11:42pm — 7 Comments

उसी से दिल्लगी......

गज़ल............उसी से दिल्लगी...

बहरे रुक्न.....हज़ज़ मुसम्मन सालिग

दिखा कर रोशनी जिसने किया है सृष्टि को पावन.

सघन तम में बसी जिसने किया है सृष्टि को पावन.

रही चर्चा यही जिसने किया है सृष्टि को पावन.

नहीं मिलती फली जिसने किया है सृष्टि को पावन.

हवाओं में, गुबारों में, समन्दर में वही साया

कहे मुझको परी जिसने किया है सृष्टि को पावन.

दिवाकर सांझ से मिलकर सितारे रात से कहते

वही सबसे बली जिसने किया है…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 3, 2016 at 10:12pm — 8 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
10 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
11 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
14 hours ago
Admin replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"लगभग 90 हजार प्रति वर्ष"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर नमस्कार और आदाब सम्मानित मंच। ओबीओ के वाट्सएप समूह से इस दुखद सूचना और यथोचित चर्चा की जानकारी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय, ओ.बी.ओ. को बंद करने का निर्णय दुखद होने के साथ साथ संचालक मण्डल की मानसिक पराजय, थकान आदि…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"नीचे आए हुए संदेशों से यह स्पष्ट है कि अब भी कुछ लोग हैं जो जलते शहर को बचाने के लिए पानी आँख में…"
Monday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय जी  ओबीओ को बन्द करने की सूचना बहुत दुखद है । बहुत लम्बे समय से इसके साथ जुड़ा हूँ कुछ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओबीओ से पिछले बारह साल से जुड़ी हूँ। इसके बंद हो जाने की बात से मन भारी हो रहा है।मेरे कच्चे-पक्के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service