For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

"कुछ दोहे " (एक प्रयास)

यदि अंकुश हो क्रोध पर, सहनशीलता पास !

वहां पाप होता नहीं, हो खुशियों का वास !!

*********************************************

गुरुजन की सेवा करो, रहो बढ़ाते ज्ञान !

यदि करना जीवन सफल, दो इनको सम्मान !!

********************************************

धन की चंचल चाल है, क्यूँ करते विश्वास ,

कुछ दिन तेरे साथ है, कल फिर उसके पास !!

********************************************

लोगों  में संस्कार हो, उत्तम हो व्यवहार !

कलह क्लेश  ना फिर वहां, हो प्रसन्न…

Continue

Added by ram shiromani pathak on February 27, 2013 at 9:00pm — 18 Comments

रोला गीत

अपना काम निकाल,भूल हमको वो जाता।
कहता उसको आम,बना जो भाग्य विधाता॥
मन पछताये खूब,बेल विष नेता बोया।
ठगे गये हम लोग,देख अपनापन खोया॥

हमको ले पहचान,वोट लेना जब होता।
सबसे दुआ-सलाम,कौल जमके वह करता॥
सुधरा चतुर सियार,लगे हर जन को गोया।
ठगे गये हम लोग,देख अपनापन खोया॥

जीता चतुर सियार,चाल अब बदली उसकी।
भूला सारे कौल,हौल अब मन में उठती॥
टूटे सारे ख्वाब,हृदय विह्वल हो रोया।
ठगे गये हम लोग,देख अपनापन खोया॥

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 27, 2013 at 6:57pm — 14 Comments

आखरी वादा

आखरी वादा ..........

मैं तुझे भूल जाऊं,ना कभी याद आऊँ

यह आखरी वादा तुमने मुझसे ही लिया

जिस पल भी तेरी याद आयी

उस पल को ही मिटा दिया

काश, हवाओं को भी कुछ कह जाती 

मौसमो को भी यह कसम दे…

Continue

Added by pawan amba on February 27, 2013 at 3:58pm — 5 Comments

दोहा मुक्तिका: नेह निनादित नर्मदा संजीव 'सलिल'

दोहा मुक्तिका:

नेह निनादित नर्मदा

संजीव 'सलिल'

*

नेह निनादित नर्मदा, नवल निरंतर धार.

भवसागर से मुक्ति हित, प्रवहित धरा-सिंगार..



नर्तित 'सलिल'-तरंग में, बिम्बित मोहक नार.

खिलखिल हँस हर ताप हर, हर को रही पुकार..



विधि-हरि-हर तट पर करें, तप- हों भव के पार.

नाग असुर नर सुर करें, मैया की जयकार..



सघन वनों के पर्ण हैं, अनगिन बन्दनवार.

जल-थल-नभचर कर रहे, विनय करो उद्धार..



ऊषा-संध्या का दिया, तुमने रूप निखार.

तीर…

Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on February 27, 2013 at 6:30am — 26 Comments

मै आतंकी बनूँ अगर- माँ खुद "फंदा" ले आएगी

हम सहिष्णु हैं भोले भाले मूंछें ताने फिरते

अच्छे भले बोल मन काले हम को लूटा करते

भाई मेरे बड़े बहुत हैं खून पसीने वाले

अत्याचार सहे हम पैदा बुझे बुझे दिल वाले

कुछ प्रकाश की खातिर जग के अपनी कुटी जलाई

चिथड़ों में थी छिपी आबरू वस्त्र लूट गए भाई

माँ रोती है फटती छाती जमीं गयी घर सारा

घर आंगन था भरा हुआ -कल- कोई नहीं सहारा

बिना जहर कुछ सांप थे घर में देखे भागे जाते

बड़े विषैले इन्ही बिलों अब सीमा पार से आते

ज्वालामुखी दहकता दिल में मारूं काटूं…

Continue

Added by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on February 26, 2013 at 10:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल - उलझनों में गुम हुआ फिरता है दर-दर आइना

एक नई ग़ज़ल आपकी मुहब्बतों के हवाले कर रहा हूँ, जैसी लगे वैसे नवाजें



उलझनों में गुम हुआ फिरता है दर-दर आइना |

झूठ को लेकिन दिखा सकता है पैकर आइना |



शाम तक खुद को सलामत पा के अब हैरान है,

पत्थरों के शहर में घूमा था दिन भर आइना |



गमज़दा हैं, खौफ़ में हैं, हुस्न की सब देवियाँ,

कौन पागल बाँट आया है ये घर-घर आइना |



आइनों ने खुदकुशी कर ली ये चर्चा आम है,

जब ये जाना था की बन बैठे हैं पत्थर, आइना |



मैंने पल भर झूठ-सच पर…

Continue

Added by वीनस केसरी on February 26, 2013 at 10:00pm — 29 Comments

"कभी हँस भी लिया करो जी "

बस लो भाई राम का नाम ,

बन जायेंगे बिगड़े काम !!



आशिकी का बुखार चढ़ा है ,

आशिकी में करना है नाम!

भेजो ऐसी सुन्दर कन्या ,

जो पिलाए इश्क का ज़ाम!!



इधर ढूंढा,उधर ढूंढा,

हो गई सुबह से शाम !

बेबस ,लाचार सा बैठा .

छोड़कर सब अपने काम !



गर्ल्स होस्टल के चक्कर काटकर,

बन गया हूँ उनका दुश्मन!

लड़कियाँ खोज़ती रहती मुझको ,

लिए हाँथ हाकी तमाम !



गर पिट गया तो गम नहीं ,

चलो ये दर्द भी सह लूँगा !

लेकिन अंत में भेज…

Continue

Added by ram shiromani pathak on February 26, 2013 at 9:22pm — 5 Comments

दम तोड़ देगी

कविता कराह रही है

गली के नुक्कड़ पर पड़ी हुई

 

तेज रफ्तार जिंदगी

रौंदकर चली गयी उसे

 

स्वार्थ और वासना के वस्त्रों पर

प्रेम की ओढ़नी ओढ़े

समाज तमाशबीन…

Continue

Added by बृजेश नीरज on February 26, 2013 at 7:33pm — 13 Comments

समय चक्र

जगाता रहा

समय का चाबुक

जन जन को !

निगाहों पर

तस्वीरों के निशान

उभर आते !

सोयी आँखों में

सपने बनकर

बिचरते हैं !

संकेत देते

बढ़ते कदमो को

संभलने का !

इंसानी तन

लिप्त था लालसा में

नजरें फेरे !

संभले कैंसे

रफ़्तार पगों की

बेखबर दौड़े !

रचना – राजेन्द्र सिंह कुँवर ‘फरियादी’

Added by राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' on February 26, 2013 at 7:30pm — 4 Comments

बोल मेरे अर्पण

बोल मेरे अर्पण

तुझको क्‍या लुभाए

डैनें बांध रहना

या उड़ना जग उठाए

मूड़ता जो माथा

है वह अनादि गाथा

आवर्त की ये रूनझुन

पथ में सभी ने पाए

रोहित न हो तू लोहित

आकर है तू तो शोभित

स्‍वर दे जरा गमक दे

अनहद तुझे बुलाए

इक दृष्टि अपलक दे

सोंधी सी इक धमक दे

यह चक्र जो अनघ है

सबको ही आजमाए

नीरव निशा जो रहती

श्‍यामल सी चोट सहती

भासित उसी से…

Continue

Added by राजेश 'मृदु' on February 26, 2013 at 10:54am — 4 Comments

शाम आना है सुब्ह जाना है-- ग़ज़ल सलीम रज़ा रीवा

                  || ग़ज़ल ||

शाम आना  है  सुब्ह     जाना है ||

दिल सितारों  से क्या लगाना है…
Continue

Added by SALIM RAZA REWA on February 25, 2013 at 9:00pm — 4 Comments

जूनून -ए-इश्क में आबाद, ना बर्बाद हो पाए मुहब्बत में तुम्हारी कैद ना ,आज़ाद हो पाए

दोस्तों एक गजल लिखने की कोशिश की है अपने कुछ मित्रों के सहयोग से आशा है आप लोग अवलोकित करके मुझे मार्गदर्शित करेंगे |

+++++++++++++++++++++++++++++

जूनून -ए-इश्क में आबाद, ना बर्बाद हो पाए 

मुहब्बत में तुम्हारी कैद ना ,आज़ाद हो पाए ||



कहानी तो हमारी भी बहुत ,मशहूर थी लेकिन 

जुदा होकर न तुम शीरी न हम, फरहाद हो पाए ||



न कुछ तुमने छुपाया था ,न कुछ हमने छुपाया था 

न तुम…

Continue

Added by Manoj Nautiyal on February 25, 2013 at 6:00pm — 12 Comments

रस की हो बरसात

नेता जन नायक बने, उत्तम हो पहचान,      

अभिनेता नेता बने, रखे हास्य का मान ।

************************************** 
खलनायक नेता बने,रखे विरोधी शान,     
नेता अभनेता बने, माइक पर ही ध्यान। 
***************************************
संसद में गर कवि रहे,छंदों में हो बात,    …
Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 25, 2013 at 5:00pm — 20 Comments

OBO सदस्य डॉ सूर्या बाली को “अनस्टापेबल इंडियन” पुरस्कार

साथियों बड़े हर्ष के साथ सूचित करना है कि ओ बी ओ सदस्य डॉ सूर्या बाली "सूरज" को विगत दिनों होटल ताज नई दिल्ली में भारत के उप राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी द्वारा पुरुस्कृत किया गया | यह पुरस्कार डॉ बाली की एक डाक्टर के तौर पर की गयी सामाजिक सेवाओं के लिए है जिसे आप…

Continue

Added by Admin on February 25, 2013 at 4:30pm — 27 Comments

प्यार होना चाहिए ...

दिलनशीं और पुरमहक, किरदार होना चाहिए |

प्यार है दिल में अगर, तो प्यार होना चहिये ||

अहद कर लो, ना बुराई हम करेंगे, उम्र भर |

चाहो गिर्द अपने अगर, गुलज़ार होना चाहिए ||

छोड़ के खुदगार्जियाँ, खल्क-ए-खुदा की सोचिये |

मुफलिस-ओ-लाचार का, गमख्वार होना चाहिए ||

राह की दुश्वारियाँ, सब दूर करने के लिए |

हमसफ़र, हमराह, रब्ब सा, यार होना चाहिए ||

जानते हो मायने, गर लफ्ज़े-उल्फत के ‘शशि’ |

तब मोहम्मद मुस्तफ़ा से, प्यार…

Continue

Added by Shashi Mehra on February 25, 2013 at 2:00pm — 7 Comments

दुआ

जिसके हक़ में, मैं सदा, दिल से दुआ करता रहा |

वो हमेशा, मुझपे जाने, क्यूँ शुबहा करता रहा ||

दोस्त था कहने को मेरा, दोस्ती न कर सका |

दोस्ती के नाम पर ही वो, दगा करता रहा ||

हमकदम था चल रहा, पर हमनफस न बन सका |

मैं भला करता रहा, और वो बुरा करता रहा…

Continue

Added by Shashi Mehra on February 25, 2013 at 2:00pm — 8 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
आवरण

जब घिर जाता है तिमिर में,
शून्य सलीब पर

टंग जाता है तन
और मुक्ति चाहता है मन
माँगती हूँ परिदों से
पंख उधार
और कल्पना की पराकाष्ठा
 छूने निकल जाती हूँ
मलय के संग
उडती हुई पतझड़ के
पत्ते की तरह
जुड़ जाती हूँ
बकुल श्रंखला में
चुपके से,
मेघों के साथ लुकाछिपी
का खेल खलते हुए
जब थक जाती हूँ
फिर बूंदों के संग
लुढ़कती हुई
चली आती हूँ धरा पर
वापस
अपने आवरण में||

Added by rajesh kumari on February 25, 2013 at 12:07pm — 22 Comments

मैं तो पानी हूँ

नमन करूँ मैं इस धरती माँ को,

जिसने मुझको आधार दिया,

पल पल मर कर जीने का

सपना ये साकार किया !

हिम शिखर के चरणों से मैं,

दुःख मिटाने निकला था,…

Continue

Added by राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' on February 25, 2013 at 10:00am — 8 Comments

कच्चा रास्ता( कविता)

कच्चे रास्ते में, रास्ता होने की,

असली खुश्बू होती है।

वह चलता है और चलाता है

उसमें खुद को बदलने की हिम्मत है

वह कभी अहम नहीं करता।

वह बरसात की खुशबू को,

सुंदरता को,अच्छी तरह से परख़ता,

पहचानता है।

क्योंकि वह बरसात को सीने से लगा लेता है

वह आस-पास के पेड-पौधों से नहीं शर्माता।

उसे पता है कि शर्म उसकी खुशियों को रोकती है

उसे यह भी पता है

कि यह काम लोगों का है उसका नहीं।

वह अपने तन को धूल…

Continue

Added by सूबे सिंह सुजान on February 25, 2013 at 9:30am — 20 Comments

मसले होते हिंस्र, जाय ना खटमल मसले-

मौलिक

अप्रकाशित

मसले सुलझाने चला, आतंकी घुसपैठ ।

खटमल स्लीपर सेल बना, रेकी रेका ऐंठ ।



रेकी…

Continue

Added by रविकर on February 25, 2013 at 9:14am — 10 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
14 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
18 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service