For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,172)

"लिखते लिखते"

"लिखते लिखते"



जमीं पे चाँद तारे

सूरज 

सब हैं दिखते

लिखते लिखते

नदियाँ, पहाड़, झरने

हाथी-घोड़ा

शेर, भालू, हिरने

कभी सजर

कभी…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on September 12, 2012 at 1:56pm — 11 Comments

हाथ मलते रह गए

पडौसी खावे मलाई, हम ताकत ही रहे,

शरनागाह बना देश, हम देखते ही रहे |



नीतियाँ उदारवादी, हमको ही खा रही,

स्वार्थ की राजनीति, सबको जला रही |



स्पष्ट निति के अभाव में,अभाव में जी रहे,

सहिष्णुता लोकतंत्र में, तपत हम सोना रहे |



समय हमें सिखलाएगा, काँटों पर चलना,

शहीद की शहादत को, अक्षुण बनाए रखना |



शीतल कैलाश हिम पर, है शिव शंकर बैठे,

पवित्र गंगा भी धारित, है जटा में समेटे |



त्रिनेत्र से भष्म कर दे, इसका…

Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 12, 2012 at 1:00pm — 2 Comments

अपनी अदा

अपनी अदा 
 

आज हम ग़म से वाकिफ हैं,असर तेरी दुआ का है

हर हाल में जीते हम यह अपनी अदा है दोस्त



हक़ दोस्ती-ओ-मुहब्बत का अदा हमको भी करना है

हम हँसते हुए कुर्वान हुए यह अपनी वफ़ा है दोस्त



दुनियाँ यकीं करे न करे तुम ज़रूर कर लेना

हमने तुमपे ऐतवार किया यह अपनी ख़ता है…

Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 12, 2012 at 11:30am — 8 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
मेहँदी वाले हाथ

पलकों पे टिकी शबनम को सुखा ले साथिया

धूप के जलते टुकड़े को बुला ले साथिया 

 

जुल्म ढा रही हैं मुझ पर  सेहरे की लडियां

इस  चाँद पर से बादल को हटा ले साथिया 

 

 बिछ गए फूल खुद  टूट कर  राहों में तेरी

 अब कैसे कोई  दिल को संभाले साथिया 

 

बिजली न गिर जाए तेरे दामन पे कोई 

कर दे मेरी तकदीर के हवाले साथिया 

 

देख के सुर्ख आँचल में  लहराती शम्मा 

दे देंगे जान इश्क में मतवाले साथिया 

 

यहाँ जल…

Continue

Added by rajesh kumari on September 12, 2012 at 11:00am — 17 Comments

ग़ज़ल

इन्साफ जो मिल जाय तो दावत की बात कर  

मुंसिफ के सामने न रियायत की बात कर

 

तूने किया है जो भी हमें कुछ गिला नहीं

ऐ यार अब तो दिल से मुहब्बत की बात कर

 

गर खैर चाहता है तो बच्चों को भी पढ़ा

आलिम के सामने न जहालत की बात कर

 

अपने ही छोड़ देते तो गैरों से क्या गिला

सब हैं यहाँ ज़हीन सलामत की बात कर

 

'अम्बर' भी आज प्यार की धरती पे आ बसा 

जुल्मो सितम को भूल के जन्नत की बात कर

--अम्बरीष श्रीवास्तव  

Added by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 10:30am — 26 Comments

गीत मे तू मीत मधुरिम नेह के आखर मिला

सौरभ जी से चर्चा के पश्चात जो परिवर्तन किये हैं उन्हें प्रस्तुत कर रही हूँ 

परिचर्चा के बिंदु सुरक्षित रह सके  इस हेतु  पूर्व की पंक्तियों को भी डिलीट नहीं किया है जिससे नयी पंक्तियाँ नीले text में हैं 

 

गीत मे तू मीत मधुरिम नेह के आखर मिला 

प्रीत के मुकुलित सुमन हो भाव मे भास्वर* मिला -----*सूर्य



हो सकल यह विश्व ही जिसके लिए परिवार सम 

नीर मे उसके नयन के स्नेह का सागर मिला …



Continue

Added by seema agrawal on September 12, 2012 at 10:00am — 34 Comments

दायित्व

दूंगा मैं लौटा तुम्हारी धरा ,

अगर तुम मेरे पंख बन कर उड़ो

संभालूँगा तुमको मैं हर मोड़ पर,

चलोगी कभी जब गलत राह पर

यही एक ख्वाहिश तुम्हारे हो मन में

मेरे साथ चलना बरस चौदह वन में

कभी राम का अनुसरण कर सकूँ तो

दायित्व सीता का गर तुम संभालो

कोई मित्र कलि युग की लंका दहन

भ्राता अगर मिल गया हो लखन

अगर रह सको तुम मन से भी पावन

तभी मर सकेगा यहाँ भ्रष्ट रावन

भारत बनेगा तभी फिर अयोध्या

कभी राम जैसे प्रकट होंगे योद्धा

गर कोई…

Continue

Added by Ashish Srivastava on September 12, 2012 at 8:30am — 1 Comment

'हम नहीं सुधरेंगें' (लघुकथा)

 

बिरादरी में ऊँची नाक रखने वाले, दौलतमंद, पर स्वभावतः अत्यधिक कंजूस, सुलेमान भाई ने अपने प्लाट पर एक घर बनाने की ठानी| मौका देखकर इस कार्य हेतु उन्होंने, एक परिचित के यहाँ सेवा दे रहे आर्कीटेक्ट से बात की| आर्कीटेक्ट नें उनके परिचि त का ख़याल करते हुए, बतौर एडवांस, जब पन्द्रह हजार रूपया जमा कराने की बात कही, तो सुलेमान भाई अकस्मात ही भड़क गए, और बोले, "मैं पूरे काम के,…

Continue

Added by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 8:30am — 20 Comments

देश में हिंदी लाओ !

हिंदी दिवस मना रहे, अंग्रेजी की खान/

कैसे हो हिंदी भला, मिले इसे सम्मान//

मिले इसे सम्मान,ज्ञान का कोष अनूठा/

हर जिव्हा पर आज,शब्द परदेशी बैठा//

कह अशोक सुन बात,भाल पर जैसे बिंदी/

करो सुशोभित आज, देश की भाषा हिंदी//




लाओ फिरसे खोज कर,हिंदी के वह संत/

जिनसे थी प्रख्यात ये,चुभे विदेशी दंत//

चुभे  विदेशी   दंत,  बहा  दो   हिंदी गंगा/

करते जो बदनाम, करो अब उनको नंगा//

कह अशोक यह बात,…

Continue

Added by Ashok Kumar Raktale on September 12, 2012 at 8:30am — 13 Comments

एक छोटी सी कविता मेरी

एक छोटी सी कविता मेरी,

ना जाने कहाँ खो गयी है

सुबह, सीढियां चढ़ते वक्त तो थी

मेरी ही जेब में

फिर ना जाने कहाँ गयी

सारे दिन की भाग दौड़ में

मुझे भी न रहा ध्यान

न जाने कब खो गयी वो

छोटी सी ही थी

उस कविता में,

एक पेड़ था

पेड़ पे एक झूला

झूले पर झूलते मेरे दोस्त

आवाज़ देकर बुलाते हुए

वो सब उसी कविता में ही तो थे

अब वो भी ना जाने कैसे मिलेंगे?

खो गये वो भी

उस कविता में था

एक बेघर हुआ

चिड़िया का छोटा सा…

Continue

Added by Pushyamitra Upadhyay on September 11, 2012 at 10:07pm — 7 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
सद्गुरु त्रिगुणातीत (दोहावली )



सत् रज तम गुण से परे, सद्गुरु त्रिगुणातीत l
तुर्यावस्था लीन जो, लीला उनकी रीत ll1ll
**************************************************
गुरुवर दो ऐसी कृपा, पा जाएँ निज ज्ञान l
प्रेम समंदर उर बहे, तनिक न हो अभिमान ll2ll…
Continue

Added by Dr.Prachi Singh on September 11, 2012 at 6:00pm — 21 Comments

ताकि समझ सकूं

हे परमपिता
ना देना कभी
इतनी नजदीकी…
Continue

Added by राजेश 'मृदु' on September 11, 2012 at 2:52pm — 9 Comments

मिलन की बात है असंभव

तुम कंचन हो,

मै कालिख हूँ!

तुम पारस, मै

कंकड़ इक हूँ!

 

तुम सरिता हो,

मै कूप रहा!

तुम रूपा, इत

ना रूप रहा!

जो मानव नहीं है उसको, देव की पांत है असंभव!

है तुलना न अपनी कोई, मिलन की बात है असंभव!

 तुम ज्वाला हो,

मै…

Continue

Added by पीयूष द्विवेदी भारत on September 11, 2012 at 2:30pm — 58 Comments

दोपहर शाम शब् सहर जन्नत

दोपहर शाम शब् सहर जन्नत

हर घडी आ रही नज़र जन्नत



वक्ते फुरकत लगा जहन्नम सा

खंडहर हो गया है घर जन्नत



भूलना आपको हुआ मुश्किल

याद कर कर के हर पहर जन्नत



जिन्दगी किस तरह जियें तुझको…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on September 11, 2012 at 2:08pm — 4 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- २६

तेरे बगैर मज़ाभी क्या आये जीने का

शराब न हो तो क्या हो आबगीने का

 

तेरी ज़ुल्फ़से दोचार नफ्स मांग लेतेहैं

तेरेही इश्कने काम बढ़ाया है सीने का   

 

तू नमाज़ी है तो पाबन्द है औकातका

मैं खराबाती हूँ कोई वक्त नहीं पीनेका

 

नतुम न दरियएइश्क पार करनेको है

नाखुदा है खुदा काम क्या सफीने का

        

राज़ ज़रा संभल के खर्च करो मआश

अभीतो पूरा महीना पड़ा है महीने का    

 

© राज़…

Continue

Added by राज़ नवादवी on September 11, 2012 at 7:45am — 6 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
दोहे – कालजयी साहित्य

मान और सम्मान की,नहीं कलम को भूख

महक  मिटे  ना पुष्प  की , चाहे जाये सूख |

 

खानपान  जीवित  रखे , अधर रचाये पान

जहाँ  डूब कान्हा मिले , ढूँढो वह रस खान |…

Continue

Added by अरुण कुमार निगम on September 11, 2012 at 12:00am — 14 Comments

कवि-सम्मेलन का आयोजन (हास्य) // शुभ्रांशु

आज सुबह-सुबह बड़कऊ का बेटा कविता ’पुष्प की अभिलाषा’ पर रट्टा मार रहा था  --"चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ.. ." मैथिली शरण गुप्त जी ने बाल कविता लिखी है. शब्दों का चयन, सन्निहित भाव सबकुछ कालजयी है. आँखो को मूँदे कविता को आत्मसात करता हुआ मन ही मन राष्ट्रकवि को नमन किया. अभी मन के दरवाजे पर कुछ और शुद्ध विचार दस्तक देते कि घर के दरवाजे पर दस्तक हुई. सारे शुद्ध विचार एक बारगी हवा हो गये.. "कौन कमबख़्त सुबह-सुबह फ़ोकट की चाय पीने आ गया, यार ?"  झुंझलाता-झल्लाता…

Continue

Added by Shubhranshu Pandey on September 10, 2012 at 9:00pm — 11 Comments

सपनों का भारत

ये तो नही है
सपनों का भारत
देश ये मेरा

जला असम
कश्मीर में आग
सुलगे देश

आतंकवाद
का भारत देश में
है बोलबाला

भटक रहा
दर दर ईमान
फलता पाप

हुए पराये
हम भारत वासी
देश अपना

कोलगेट पे
मच रहा बवाल
है मुहं काला

ये तो नही है
सपनों का भारत
देश ये मेरा

Added by Rekha Joshi on September 10, 2012 at 8:00pm — 20 Comments

जागरूक बेटी (लघुकथा)

रामकरन अपनी पत्नी मुनिया से बोले-"श्यामा की अम्मा हमार करेजा तौ मुंहके आवत बाय।श्यामा 14 साल की हुइ गई ओकर सादी करेक हा।"

"हां हो हमहुक इहै चिंता खाये जात बाय।चिट्ठी पाती भरेक पढ़िये चुकी है,अउर इ जमाना बहुत खराब बाय,पता नाहीं कहां ऊंचे नीचे पैर परि जाय,समाज में नाक कटि जाय।............तौ कहूं,कवनो लरिका देख्यो सुनयो नाई?"-मुनिया ने प्रश्न वाचक दृष्टि से देखते हुए कहा।

"रमई के लरिका मुनेसर हैं बम्मई कमात हैं औ उमरियो ढेर नाई 24-25 साल होई।"-रामकरन ने कहा।

श्यामा पास ही आंगन में… Continue

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on September 10, 2012 at 7:18pm — 29 Comments

कितना रोता है

दर्द अगर न मिलता तो 
क्या जानते कैसा होता है
हमको सताकर वोह भी 
शायद कितना रोता है 
********
हादसों नें मुझको कहीं का न छोड़ा
फिर भी हमने दोस्तो  जीना नहीं छोड़ा
हर हाल में जीते रहे हम हँस हँस के यारो
घूँट दर्द-ओ-ग़म  का  पीना नहीं छोड़ा    
दीपक कुल्लुवी  

Added by Deepak Sharma Kuluvi on September 10, 2012 at 4:42pm — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहा छंद ++++++++++++ वार्ता निष्फल  शांति की, जारी है फिर युद्ध। कमी तेल औ’ गैस की,…"
29 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम् "
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Wednesday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Apr 11
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service