For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हिंदी की कक्षा

Information

हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"

Location: ओपन बुक्स ऑनलाइन
Members: 184
Latest Activity: Dec 31, 2022

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सम्मानित सदस्यों,


सादर अभिवादन,


मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि आदरणीय आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल" द्वारा हिंदी विषय पर कक्षा प्रारंभ की जा रही है | आप के द्वारा  शीघ्र ही भारतीय शास्त्रीय छन्द पर विशेष आलेख प्रस्तुत किया जायेगा । आप सब से अनुरोध है कि आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल" जी के अनुभवों से लाभ उठाये,
धन्यवाद |


  • आचार्य संजीव वर्मा सलिल : एक परिचय
पाठकों के लिये आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" ले कर प्रस्तुत हुए हैं "छंद और उसके विधानों" पर केन्द्रित आलेख माला।  आचार्य संजीव वर्मा सलिल को अंतर्जाल जगत में किसी परिचय की आवश्यकता नहीं। आपने नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा, बी.ई., एम.आई.ई., एम. आई. जी. एस., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम. ए., एल-एल. बी., विशारद, पत्रकारिता में डिप्लोमा, कंप्युटर ऍप्लिकेशन में डिप्लोमा किया है।

साहित्य सेवा आपको अपनी बुआ महीयसी महादेवी वर्मा तथा माँ स्व. शांति देवी से विरासत में मिली है। आपकी प्रथम प्रकाशित कृति 'कलम के देव' भक्ति गीत संग्रह है। 'लोकतंत्र का मकबरा' तथा 'मीत मेरे' आपकी छंद मुक्त कविताओं के संग्रह हैं। आपकी चौथी प्रकाशित कृति है 'भूकंप के साथ जीना सीखें'। आपने निर्माण के नूपुर, नींव के पत्थर, राम नाम सुखदाई, तिनका-तिनका नीड़, सौरभ:, यदा-कदा, द्वार खड़े इतिहास के, काव्य मन्दाकिनी 2008 आदि पुस्तकों के साथ साथ अनेक पत्रिकाओं व स्मारिकाओं का भी संपादन किया है। आपने हिंदी साहित्य की विविध विधाओं में सृजन के साथ-साथ कई संस्कृत श्लोकों का हिंदी काव्यानुवाद किया है। आपकी प्रतिनिधि कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद 'Contemporary Hindi Poetry" नामक ग्रन्थ में संकलित है। आपके द्वारा संपादित समालोचनात्मक कृति 'समयजयी साहित्यशिल्पी भागवत प्रसाद मिश्र 'नियाज़' बहुचर्चित है।

आपको देश-विदेश में 12 राज्यों की 50 सस्थाओं ने 75 सम्मानों से सम्मानित किया जिनमें प्रमुख हैं- आचार्य, वाग्विदाम्बर, 20वीं शताब्दी रत्न, कायस्थ रत्न, सरस्वती रत्न, संपादक रत्न, विज्ञान रत्न, कायस्थ कीर्तिध्वज, कायस्थ कुलभूषण, शारदा सुत, श्रेष्ठ गीतकार, भाषा भूषण, चित्रांश गौरव, साहित्य गौरव, साहित्य वारिधि, साहित्य शिरोमणि, साहित्य वारिधि, साहित्य दीप, साहित्य भारती, साहित्य श्री (3), काव्य श्री, मानसरोवर, साहित्य सम्मान, पाथेय सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, हरी ठाकुर स्मृति सम्मान, बैरिस्टर छेदीलाल सम्मान, शायर वाकिफ सम्मान, रोहित कुमार सम्मान, वर्ष का व्यक्तित्व(4), शताब्दी का व्यक्तित्व आदि।

आपने अंतर्जाल पर हिंदी के विकास में बडी भूमिका निभाई है। साहित्य शिल्पी पर "काव्य का रचना शास्त्र (अलंकार परिचय)" स्तंभ से पाठक पूर्व में भी परिचित रहे हैं।

Discussion Forum

हिंदी लेखन की शुद्धता के नियम                                         -   डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव 2 Replies

हिंदी लेखन में बड़े लोग भी शुद्ध-अशुद्ध के विचार में प्रायशः चूक जाते हैं i नये लेखकों के तो लेखन का निकष भी यही होना चाहिए की वे कितना शुद्ध या अशुद्ध लिख रहे है I कम्प्यूटर का मंगल फांट तो अशुद्धियों से भरा है और उसमे बार-बार संशोधन करने के बाद भी…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव. Last reply by Sachidanand Singh May 14, 2021.

आंग्ल-साहित्य से हिन्दी=साहित्य में आये अलंकारो का सच - डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव 2 Replies

                 एक समय था जब हिन्दी साहित्य पर पाश्चात्य साहित्य के प्रभाव को लेकर विद्वानों में बड़ी बहस हुयी I यह माना गया कि हिन्दी में छायावाद अंग्रेजी साहित्य से आया I नए प्रतीक, लाक्षणिकता, बिम्ब, चित्रोपमता आदि प्रभाव इंग्लिश साहित्य की देन…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव. Last reply by Dr Ashutosh Mishra Nov 24, 2015.

कर्त्ता और क्रिया के व्यवस्थापक है कारक -- डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव 2 Replies

                      हिंदी शब्द सागर के अनुसार- व्याकरण में संज्ञा या सर्वनाम की उस व्यवस्था को कारक कहते है, जिसके द्वारा वाक्य में उसका क्रिया के साथ सम्बन्ध प्रकट होता है I यह अंग्रेजी व्याकरण के CASE की भांति है I CASE  को अंग्रेजी में निम्न…Continue

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव. Last reply by kanta roy Jan 27, 2016.

भाषा 9 Replies

भाषा- मानव-समाज के लिए भाषा बहुत महत्वपूर्ण तत्व है। इसके माध्यम से ही मनुष्य विचारों और भावों का आदान-प्रदान करता है। भाषा संप्रेषण का मुख्य साधन होती है। वैसे तो संप्रेषण संकेतों के माध्यम से भी हो सकता है लेकिन सांकेतिक क्रिया-कलापों को भाषा नहीं…Continue

Started by बृजेश नीरज. Last reply by kanta roy Sep 4, 2015.

संस्कृत है अंगरेजी का मूल : संजीव वर्मा 'सलिल' 8 Replies

संस्कृत है अंगरेजी का मूल :संजीव वर्मा 'सलिल'*                    भारत में अ-मृत वाणी संस्कृत को मृत, हिंदी को स्थानीय तथा अंगरेजी को विश्व भाष मानने की भ्रामक धारणा व्याप्त है। इसका मूल कारण यह है कि अंगरेजी विदेशी शासकों की भाषा रही है और हिंदी…Continue

Tags: verma, 'salil', sanjiv, bhasha, hindi

Started by sanjiv verma 'salil'. Last reply by kanta roy Sep 4, 2015.

अनुनासिक - अनुस्वार समझ मात्र गिनिये मीत: 11 Replies

अनुनासिक - अनुस्वार समझ मात्र गिनिये मीत: संजीव 'सलिल', दीप्ति गुप्ता                                           …Continue

Tags: matra, anunasik, anuswar, hindi

Started by sanjiv verma 'salil'. Last reply by kanta roy Sep 4, 2015.

संयुक्त अक्षरों की मात्रा गणना (आदरणीय संजीव वर्मा 'सलिल' जी से वार्तालाप के आधार पर ) 41 Replies

संयुक्त अक्षरों की मात्रा गणना: (आदरणीय संजीव वर्मा 'सलिल' जी से वार्तालाप के आधार पर )•जब दो अक्षर मिलकर संयुक्त अक्षर बनाते हैं तो जिस अक्षर की आधी ध्वनि होती है उसकी गणना पूर्व अक्षर के साथ होती है. यथा: अर्ध = (अ + आधा र) + ध = २ + १ = ३ मार्ग…Continue

Started by Dr.Prachi Singh. Last reply by Dr.Prachi Singh Sep 5, 2015.

विशेष लेखमाला: जगवाणी हिंदी का वैशिष्टय् व्याकरण और छंद विधान - 2 8 Replies

विशेष लेखमाला: जगवाणी हिंदी का वैशिष्टय् व्याकरण और छंद विधान - 2  जन-मन को भायी चौपाई छंद पर इस महत्वपूर्ण लेख माला की प्रथम श्रंखला में आपने जाना कि  वेद के 6 अंगों 1. छंद, 2. कल्प, 3. ज्योतिऽष , 4. निरुक्त, 5. शिक्षा तथा 6. व्याकरण में छंद का…Continue

Started by sanjiv verma 'salil'. Last reply by Saurabh Pandey Feb 5, 2016.

लेखमाला: जगवाणी हिंदी का वैशिऽष्टय् छंद और छंद विधान: 1 --आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल 9 Replies

आत्मीय!वन्दे मातरम. इस विषय पर कुछ सामग्री पहले प्रेषित की थी. उसे संशोधित-परिवर्तित कर पुनः भेज रहा हूँ. कृपया पूर्व सामग्री को निरस्त कर उपयुक्त प्रतीत होने पर इसे प्रयोग करें. लेखमाला:              जगवाणी हिंदी का वैशिऽष्टय् छंद और छंद विधान:…Continue

Tags: छंद_विधान

Started by sanjiv verma 'salil'. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Apr 20, 2016.

Comment Wall

Comment

You need to be a member of हिंदी की कक्षा to add comments!

Comment by somesh kumar on October 6, 2014 at 4:50pm

कविता लिखते समय किस पक्ष पे जोर दिया जाना चाहिए -कला पक्ष /भाव पक्ष या व्याकरणिक नियम 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 22, 2014 at 12:23pm

आदरणीय संजीव जी यह आपका  सराहनीय प्रयास है l इस से  हमको निश्चित तौर प् शुद्ध हिंदी , छंद , रस आदि की जानकारी मिलेगी इससे सराहनीय और क्या होगा l  सुन्दर और क्या होगा   ... हिंदी साहित्य के उत्तरोत्तर प्रगति के लिए ये बहुत जरुरी भी है , आचार्य सलिल जी का तथा और विद्वद जनों का सानिध्य और स्नेह भी मिलेगा

Comment by Monnmani Antaryami on September 8, 2013 at 8:41pm

sir ji saadar pranaam... ek sandeh duur karein...

jaise "naya" khwaab hai,
waise "nayi" kitaab bhi hai..

TOH "नई" SAHI HAI YA PHIR "नयी" 

waise hi... जाए sahi hai ya phir जाये ... (as in kiya jaaye)

Comment by aman kumar on August 29, 2013 at 11:00am

obo परिवार एवं आदरनिये सलिल जी का आभार !

Comment by Bhakta Prasad Babu on February 21, 2013 at 10:48pm

Sir ji , lingved ka upar kuch class kijie.

Comment by Suresh k 'Saurabh' on January 29, 2013 at 2:03pm
आरम्भ व प्रारम्भ में क्या अन्तर है?
Comment by Nand kishor tak on October 2, 2012 at 9:49am

manyawar,

natya sashtra me 11 rason ki charch ki gayi he jabiki kavya sashatra me 9 rashonn ki charcha ki gayi he kripaya sujhaye ki hame kitane ras manane chahiye.

Comment by Ashish Srivastava on July 15, 2012 at 3:21pm

"Shilp ki drashti" iska kya matlab hai vistarr se bataieyn  

Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on June 25, 2012 at 12:18pm

"मातृभाषा हिन्दी को गहराई से सीखने का सुनहरा अवसर मिला है | ओ बी ओ का धन्यवाद

Comment by DEEP ZIRVI on June 21, 2012 at 9:23am

प्रवेश की आज्ञा?

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service