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DEEP ZIRVI
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DEEP ZIRVI's Discussions

हम बोलेगा तो बोलो गे की बोलता है ...
12 Replies

देखो मित्रो ! अब हम बोलें भी तो क्या बोलें। क्यों बोलें ?! देखो न कुछ लोग बोलते हैं सुनते नहीं और कुछ लोग सिर्फ बोलते हैं सुनते नही और कुछ कुछ भी बोले बिना सिर्फ सुनते जाते हैं .यूं की बोलने वालों पे…Continue

Tags: charcha

Started this discussion. Last reply by DEEP ZIRVI Dec 8, 2010.

 

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ZIRA PUNJAB
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TEACHING
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पेशे से अध्यापक ,दिल से शायर . गुरमुखी और देवनागरी में लिखने का प्रयास ; गुरमुखी में ३ पुस्तकें प्रकाशित १ शब्दा दी लो (गजल} २ चतुभुज दा पंजवान कोण {वा''र्ता } ३. चुप्प दी हूक { गजलें}....हिंदी में प्रथम सोपान ...बोलोगे की बोलता है 2012

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DEEP ZIRVI's Blog

अगर किसी को न भाई हो

कुछ हल्का-फुल्का

इश्क-विश्क का फंडा ,यारा टेंशन वेंशन भूल .

और झमेले लाखों यारा ,रख अपने को cool .

'हिंदी वाले 'फूल' से चेहरे ,दिल्फैंकों को अक्सर .

मान के चलते सोच के चलते , इंग्लिश वाले 'fool '

कलयुग आया ,लड़का लडकी प्रेमिका प्रेमी कम हैं ;

इक दूजे को use ये करते समझ समझ के tool .

खूब निभे गी यारी यारा मेरी तेरी सब की ;

खुद की ego मार दबा दे ,दे न खुद को तूल.

आप को जो इक लाफा…

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Posted on August 3, 2012 at 2:30pm — 1 Comment

राखी .

मानो तो रूह क़ा नाता है जी ये राखी

न मानो कच्चा धागा है जी ये राखी .

 

जो राखी को दम्भ-आडम्बर मानते हैं ;

उन का मन भी तो अपनाता है ये राखी .

 

बहना के मन से उपजी हर इक दुआ है ये ;

भाई-बहन से बंधवाता है ये राखी .

 

सभ्य समाज की नींव के पत्थर नातों का…

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Posted on July 27, 2012 at 7:00pm — 1 Comment

रिश्ते...

उगते रिश्ते ,ढलते रिश्ते ;

रुकते रिश्ते चलते रिश्ते .

मन के रिश्ते मन से रिश्ते

तन के रिश्ते तन से रिश्ते

अपने रिश्ते बनते रिश्ते

सपने रिश्ते तनते रिश्ते .

उसके रिश्ते इसके रिश्ते

रिसते रिश्ते ,घिसते रिश्ते .

शासक रिश्ते शासित रिश्ते ,

बेदम रिश्ते ,बा-दम रिश्ते .

रिश्ते नीरज ,नीरस रिश्ते

रिश्ते सुधा कहीं गरल रिश्ते .

आंगन रिश्ते उपवन रिश्ते ,

हैं धरा जलद गगन रिश्ते .

रिश्ते पूनम क़ा चाँद भी हैं ,

तारे नयनाभिराम भी…

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Posted on July 24, 2012 at 6:30am — 2 Comments

भूखे को तो चंदा में रोटी दीखे;

रोती रोटी  क्यों रो रही ,कर लो बात ,

रोटी रोटी क्यों हो रही ,कर लो बात;'



तरकारी के भाव चले विन्ध्याचल को

तन्हा रोटी यों रो रही ,कर लो बात .



धान ज्वारी मक्का बासमती पेटेंट ;

नयनन जल रोटी ले रो रही कर लो बात.



भूखे को तो चंदा में रोटी दीखे;

चंदा रोटी एक हो रही ? कर लो बात .



रात को खा के सोए सुबह पेट ;

रोटी रोटी देख हो रही कर लो बात .



तीरों तलवारों से न टूटे छल बल से ;

टूटे भूखे पेट वो…

Continue

Posted on July 17, 2012 at 5:30pm — 1 Comment

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