For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

शारदी छंद "चले चलो पथिक"

(शारदी छंद)

चले चलो पथिक।

बिना थके रथिक।।

थमे नहीं चरण।

भले हुवे मरण।।

सुहावना सफर।

लुभावनी डगर।।

बढ़ा मिलाप चल।

सदैव हो अटल।।

रहो सदा सजग।

उठा विचार पग।।

तुझे लगे न डर।

रहो न मौन धर।।

प्रसस्त है गगन।

उड़ो महान बन।।

समृद्ध हो वतन।

रखो यही लगन।।

===========

*शारदी छंद* विधान:-

"जभाल" वर्ण धर।

सु'शारदी' मुखर।।

"जभाल" = जगण  भगण लघु

।2। 2।। । =7…

Continue

Added by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on May 18, 2021 at 4:01pm — 3 Comments

हवा भी दिलजली होगी-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२२/१२२२



जहाँ पर रोशनी होगी

वहीं पर तीरगी होगी।१।

*

गले तो  मौत  के लग लें

खफ़ा पर जिन्दगी होगी।२।

*

निशा  आयेगी  पहलू  में

किरण जब सो रही होगी।३।

*

उबासी  छोड़  दी  उस ने

यहाँ  कब  ताजगी  होगी।४।

*

धुएँ के साथ विष घुलता

हवा भी दिलजली होगी।५।

*

कली जो खिलने बैठी है

मुहब्बत  में   पगी  होगी।६।

*

न आया  साँझ  को बेटा

निशा भर माँ जगी होगी।७।…

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 18, 2021 at 7:36am — 3 Comments

ग़ज़ल-आख़िर

1222     1222     1222      1222

छुड़ाया  चाँद ने  दामन अँधेरी  रात में  आख़िर

परेशां  हूँ कमी  क्या है  मेरे ज़ज़्बात  में आख़िर

उसे कुछ कह नहीं सकता मगर चुप भी रहूँ कैसे

करूँ तो क्या करूँ उलझे हुए हालात में आख़िर

भुलाना  चाहता तो  हूँ मगर  मजबूरियाँ  भी  हैं

उसी की बात आ जाती मेरी हर बात में आख़िर

सुनो अय आँसुओं बेवक़्त का ढलना नहीं अच्छा

जलूँगा कब तलक मैं इस क़दर बरसात में आख़िर

मुख़ातिब हैं सभी मुझसे कि आगे…

Continue

Added by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 17, 2021 at 2:20pm — 6 Comments

हम होगें कामयाब

आज अपने मकसद को पाने में हम होगें कामयाब

मन में रख विश्वास, महामारी से जंग जीत जायेगें

कुदरत के सिद्धांतों पर जब हम चलना सीख जायेगें

जीवन में हम जैसा फल बोयेगें वैसा ही फल खायेगें

आज नहीं तो कल,लोग अपनी गलती समझ जायेगें

आज अपने मकसद को पाने में हम होगें कामयाब ॥

छल कपट राग द्वेश छोड जब जीना सीख जायेगें

लालच त्याग कर, दूसरों के दुख को समझ पायेगें

जिस दिन हम अपनी कमजोरी को ताकत बनायेगें

तभी कोरोना पर अपनी विजय का जश्न मनायेगें

आज अपने मकसद को…

Continue

Added by Ram Ashery on May 16, 2021 at 8:30am — No Comments

हम होगें कामयाब

लेन देन जगत में, कुदरत रखे सब हिसाब ।

मिलता न कुछ मुफ्त में, हम हो कामयाब ॥

अपने आतीत से सीख लें,

पलटकर देख लो इतिहास

मुसीबतों से कुछ सबक ले,

रख सुखी भविश्य की आस ।

हर बाधा की दिशा मोड दो,

कर जीवन में सतत प्रयास ।

विपत्ती में धैर्य से निर्णय लें,

ह्र्दय जगे सफलता की आस ।

मन में जगा विश्वास, आंखों से देखे ख्वाब !

टूटे न मन से आस, लोग होगें कामयाब !!

वक्त रहते आज तू संवार ले,

कल तेरा होगा न उपहास ।

दुख में हिम्मत हार…

Continue

Added by Ram Ashery on May 15, 2021 at 9:30am — No Comments

पावन छंद "सावन छटा"

(पावन छंद)

सावन जब उमड़े, धरणी हरित है।

वारिद बरसत है, उफने सरित है।।

चातक नभ तकते, खग आस युत हैं।

मेघ कृषक लख के, हरषे बहुत हैं।।

घोर सकल तन में, घबराहट रचा।

है विकल सजनिया, पिय की रट मचा।।

देख हृदय जलता, जुगनू चमकते।

तारक अब लगते, मुझको दहकते।।

बारिस जब तन पे, टपकै सिहरती।

अंबर लख छत पे, बस आह भरती।।

बाग लगत उजड़े, चुपचाप खग हैं।

आवन घर उन के, सुनसान मग हैं।।

क्यों उमड़ घुमड़ के, घन व्याकुल…

Continue

Added by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on May 13, 2021 at 9:00am — 1 Comment

देना कब सीखेंगे हम-कविता

नदी जीवन देती है

नदी पालती है

नदी सींचती है

नदी बहना सिखाती है

नदी सहना सिखाती है

नदी बदलाव समझाती है

नदी ठहराव समझाती है

नदी हंसना सिखाती है

नदी अंत तक साथ देती है.



पहाड़, धरती, प्रकृति भी

हमें यही सब सिखाते हैं,

लेकिन हम क्या कर रहे हैं?

हम नदी को धीरे धीरे,

तिल तिल कर मार रहे हैं,

हम अपना सारा कचरा

बेदर्दी से इसमें उड़ेल रहे हैं,

हम प्रकृति को बर्बाद कर रहे हैं

हम धरती को बंजर बना रहे हैं

हम पहाड़ों को…

Continue

Added by विनय कुमार on May 12, 2021 at 3:59pm — 2 Comments

हम क्यों जीते हैं--कविता

हम सांस लेते हैं, हम जीते हैं

और एक दिन आखिरी सांस लेते हैं

इस आखिरी सांस के पहले

हमारे पास वक़्त होता है

अपनों के लिए कुछ करने का

समाज को कुछ लौटाने का

ऐसी वजह बनाने का

जिससे लोग याद रखें

आखिरी सांस लेने के बाद भी,

मगर अमूमन हम

बस अपने लिए ही जीते हैं

और अंत में मर जाते हैं

बिना किसी के लिए कुछ किये.

हम पेड़ पौधों से नहीं सीखते

हम तमाम जानवरों से भी नहीं सीखते

हम नहीं सीखते औरों के लिए जीना

हमारी दुनिया वास्तव में…

Continue

Added by विनय कुमार on May 11, 2021 at 6:10pm — 6 Comments

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22

माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती है

माँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी होती है

मैंने शीश झुकाया जब चरणों में माँ के जाना

माँ के ही चरणों में तो जन्नत सारी होती है

दुनिया भर की धन दौलत भी काम नहीं आती जब

माँ की एक दुआ तब हर दुख पे भारी होती है

माँ से ही हर चीज के माने माँ से ही जग सारा

माँ ख़ुद इक हस्ती ख़ुद इक ज़िम्मेदारी होती है

और बताऊँ क्या मैं तुमको आज़ी माँ की…

Continue

Added by Aazi Tamaam on May 9, 2021 at 3:29pm — 6 Comments

अनजाना उन्माद

अनजाना  उन्माद

 

मिलते ही तुमसे हर बार

नीलाकाश सारा

मुझको अपना-सा लगे

बढ़ जाए फैलाव चेतना के द्वार

कण-कण मेरा पल्लवित हो उठे

कि जैसे नए वसन्त की नई बारिश

दूर उन खेतों के उस पार से ले आती

भीगी मिट्टी की नई सुगन्ध

कि जैसे कह रही झकझोर कर मुझसे ....

मानो मेरी बात, तुम जागो फिर एक बार    

सुनो, आज प्यार यह इस बार कुछ और है

 

और तुम ...…

Continue

Added by vijay nikore on May 9, 2021 at 2:30pm — 2 Comments

मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



नौ माह जिसने कोख में पाला सँभाल कर

आये जो गोद  में  तो  उछाला सँभाल कर।१।

*

कोई  बुरी  निगाह  न  पलभर  असर  करे

काजल हमारी आँखों में डाला सँभाल कर।२।

*

बरतन घरों के  माज  के पाया जहाँ कहीं

लायी बचा के आधा निवाला सँभाल कर।३।

*

सोये अगर  तो  हाल  भी  चुप के से जानने

हाथों का रक्खा रोज ही आला सँभाल कर।४।

*

माँ ही थी जिसने प्यार से सँस्कार दे के यूँ

घर को बनाया  एक  शिवाला सँभाल कर।५।

*

सुख दुख में राह देता…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 9, 2021 at 6:59am — 10 Comments

जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

22 22 22 2

जग में नाम कमाना है

इक दिन तो मर जाना है. (1)

अपना दर्द छुपा कर रख

दिल में जो तहख़ाना है. (2)

ग़ैर समझता है मुझको

जिसको अपना माना है. (3)

मार नहीं सकती है भूख

गर क़िस्मत में दाना है. (4)

नई सुराही ले आए

पानी मगर पुराना है. (5)

चिड़िया उड़ जाए न कहीँ

इक पिंजरा बनवाना है. (6)

शक्ल ज़रा सी है बदली

पर जाना-पहचाना है. (7)

*मौलिक…

Continue

Added by सालिक गणवीर on May 8, 2021 at 9:00am — 6 Comments

दोहे

देना दाता वर यही, ऐसी हो पहचान | 
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सब, बोलें यह इंसान ||
. 
कभी धूप कुहरा घना, कभी दुखी मुस्कान | 
खेल खेलती जिंदगी, कभी मान अपमान ||…
Continue

Added by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on May 6, 2021 at 4:00pm — 4 Comments

दस वर्षीय का सवाल

सपूत को स्कूल वापिसी पर उदास देखा

चेहरा लटका हुआ आँखों में घोर क्रोध रेखा

कलेजा मुंह को आने लगा

कुछ पूछने से पहले जी घबराने लगा

 

आखिर पूछना तो था ही

जवाब से जूझना तो था ही

जवाब मिला

ग्लोबल वार्मिंग !!

 

ग्लोबल वार्मिंग ??

माथा ठनका !

बेचारी उषमिता ने ऐसा क्या कर दिया

कि लाल को इतना लाल कर दिया

 

जवाब जारी था कि

आपकी पीढी का सब किया कराया है

पारे को इतना ऊपर पहुँचाया…

Continue

Added by amita tiwari on May 4, 2021 at 9:30pm — 3 Comments

मुहब्बतनामा (उपन्यास अंश)

दूसरी मुहब्बत के नाम

मेरे दूसरे इश्क़,

तुम मेरे जिंदगी में न आते तो मैं इसके अँधेरे में खो जाता, मिट जाता। तुम मेरी जिन्दगी में तब आये जब मैं अपना पहला प्यार खो जाने के ग़म में पूरी तरह डूब चुका था। पढ़ाई से मेरा मन बिल्कुल उखड़ चुका था। स्कूल बंक करके आवारा बच्चों के साथ इधर-उधर घूमने लगा था। घर वालों से छुपकर सिगरेट और शराब पीने लगा था। आशिकी, पुकार और भी न जाने कौन-कौन से गुटखे खाने लगा था। मेरे घर के पीछे बने ईंटभट्ठे के मजदूरों के साथ जुआ खेलने लगा था। दोस्तों के साथ मिलकर…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on May 3, 2021 at 10:30pm — No Comments

कुछ उक्तियाँ

पृथ्वी सम्हलती नहीं

मंगल सम्हालेंगे

यहाँ ऑक्सीजन नष्ट की

वहाँ डेरा डालेंगे

बहुत मनाईं देवियाँ

बहुत मनाए देव

कर्म-लेख मिटता कहाँ ?

भाग्य लिखा सो होय

बुज़ुर्ग बेमिसाल होते हैं

समस्त जीवन के अनुभवों की

अलिखित किताब होते हैं

बुज़ुर्ग बेमिसाल होते हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on May 3, 2021 at 8:04pm — No Comments

जो पेड़ शूल वाले थे-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



किस्मत कहें न कैसे सँवारी गयी बहुत

हर दिन नजर हमारी उतारी गयी बहुत।१।

*

जो पेड़ शूल  वाले  थे  मट्ठे से सींचकर

पत्थर को चोट फूल से मारी गयी बहुत।२।

*

भूले से अपनी ओर  न  आँखें उठाए वो

जो शय बहुत बुरी थी दुलारी गयी बहुत।३।

*

धनवान मौका  मार  के  ऊँचा चढ़ा मगर

निर्धन के हाथ आ के भी बारी गयी बहुत।४।

*

बेटी का ब्याह शान से करने को बिक गये

ऐसे भी  बाजी  मान  की …

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 1, 2021 at 9:25pm — No Comments

आशा ......



आशा .......

बहुत कोशिश की

मगर हार गई मैं

उस अनुपस्थिति से

जो हर लम्हा मेरे जहन में जीती है

एक खौफ के लिबास में

मुझे ठेंगा दिखाते हुए

भोर से लेकर साँझ तक

दिनभर की व्यस्ततम गतिविधियों के बीच

हमेशा झकझोरती है

किसी ग़ैर की मौजूदगी

मेरे अंतःस्थल को

उस की अनुपस्थिति के लिए

निराशा की स्वर वीचियों के बीच कहाँ लुप्त होते हैं

आशा को प्रज्वलित करते अनुपस्थिति के स्वर

थकान की पराकाष्ठा पर

जब बदन निढाल होकर…

Continue

Added by Sushil Sarna on April 30, 2021 at 4:15pm — 3 Comments

नग़मा: जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

1222 1222 1222 1222

जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

हमारा क्या है हम तो बेसहारा हैं सो जी लेंगे

तुम्हारा दिल अगर टूटा तो फ़िर तुम जी न पाओगे

मिरे लख़्त-ए-जिगर सुन लो गमों को पी न पाओगे

जरा सा नर्म रक्खो इस गुमाँ के सख़्त लहजे को

ये चादर फट गयी गर ज़िंदगी की सी न पाओगे

यहाँ हर शय पे रहता है मिरी जाँ वक़्त का पहरा

अगर जो वक़्त बदला तो बचा हस्ती न पाओगे

हमें आदत है पीने की सो हम तो…

Continue

Added by Aazi Tamaam on April 30, 2021 at 11:22am — No Comments

विसंगति —डॉo विजय शंकर

बीते कुछ दिनों में लगा
कि हम कुछ बड़े हो गये ,
अहंकार से फूलने लगे
और फूलते...चले गए।
फूले इतना कि हर समस्या
के सामने बौने हो गये।
यकीन नहीं होता कि
आदमी खुद कुछ नहीं होता ,
ये जानने के बाद भी ,
कुछ का ख्याल हैं कि
लूटो-खाओ, पाप-पुण्य
कहीं कुछ नहीं होता ,
भगवान भी कहीं नहीं होता।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Dr. Vijai Shanker on April 30, 2021 at 10:48am — 2 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
17 hours ago
Sushil posted blog posts
17 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
17 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service