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Ram Ashery
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  • सतविन्द्र कुमार
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

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Samar kabeer commented on Ram Ashery's blog post सुख
"जनाब राम आश्रय जी आदाब,ये रचना किस विधा में है, रचना के साथ लिख दिया करें ताकि कुछ कहने में आसानी हो ।"
Jan 14
Ram Ashery commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " बच्चा सोता मिला "
"अति सुंदर रचना के लिए आपको सहृदय बधाई स्वीकार  हो "
Jan 14
Ram Ashery shared पंकजोम " प्रेम "'s blog post on Facebook
Jan 14
Ram Ashery posted a blog post

सुख

सुख सुख! सुख! लोगों के जीवन में सुख है कहाँ जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी दुखी हैं यहाँ सुख हमारे जिंदगी में मृग तृष्णा जैसी है यहाँ सदा हमसे दूर ही देखने में नजर आती यहाँ अपने नेताओं को दौलत की खुशबू आती जहां सभी अपने ईमान को बेचकर टूट पड़ते वहाँ सभी लोग सुख खरीदने की कोशिस करते जहाँ माँ बाप भाई बहन पैसे के आगे सब झूठे यहाँ अपनों से लोग झूठ फरेब धोखा सब करते यहाँ थोड़ी सुख के लिए लोग अंगारों पर चलते यहाँ ज़िंदगी की नाव में परिवार पतवार जैसा है यहाँ जो सभी तूफानों से हमको बचाते हर क्षण…See More
Jan 13

Profile Information

Gender
Male
City State
surat
Native Place
Allahabad
Profession
service
About me
i am working in the institution as a teacher

क्यारी देखी फूल बिन ,माली हुआ उदास ।

कह दी मन की बात सब, जा पेड़ों के पास ॥

हिन्दी को समृद्धि करन हित, मन में जागी आस ।

गाँव गली हर शहर तक ,करना अथक प्रयास ॥

कदम बढ़ाओ सड़क पर ,मन में रख कर विश्वाश ।

मिली सफलता एक दिन ,सबकी पूरी आश ॥

सूरज चमके अम्बर में , करे तिमिर का नाश ।

अज्ञानता का भय मिटे, फैले जगत प्रकाश ॥

चंदा दमकी आसमान  ,गई जगत में छाय ।

हिन्दी पहुंची जन जन में, तब बाधा मिट जाय ॥

हिन्दी हमारी ताज अब, सबको रख कर पास ।

फूटा भांडा ढोंग का ,हुआ तिमिर का नाश ॥

घनी अंधेरी राह में जब राह न दिखती होय ।

हिन्दी साथ में तब चली, राह सुगम तब होय ॥

जब हिन्दी में बात करें, तो गर्व का अनुभव होय ।

गाँव शहर परदेश में , माथा नीच न होय ॥

पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, चहुं दिश हिन्दी आज ।

जाति धर्म के बंधन मिटे, आयी समता आज ॥  

दूध और पानी की तरह ,मिल गए सभी समाज  ॥

पर्वत सोहे न भाल बिन, नदी बहे बिन नीर ।

देश न सोहे हिन्दी बिन , जीवन रहित शरीर ॥

ध्वज फहराए विश्व में, नभ तक जाए छाय ।

ममता जागे हृदय में , हिन्दी सभी अपनाय ॥

 मौलिक एवं प्रकाशित 

 

      

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सुख

सुख

सुख! सुख! लोगों के जीवन में सुख है कहाँ

जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी दुखी हैं यहाँ

सुख हमारे जिंदगी में मृग तृष्णा जैसी है यहाँ

सदा हमसे दूर ही देखने में नजर आती यहाँ

अपने नेताओं को दौलत की खुशबू आती जहां

सभी अपने ईमान को बेचकर टूट पड़ते वहाँ

सभी लोग सुख खरीदने की कोशिस करते जहाँ

माँ बाप भाई बहन पैसे के आगे सब झूठे यहाँ

अपनों से लोग झूठ फरेब धोखा सब करते यहाँ

थोड़ी सुख के लिए लोग अंगारों पर चलते यहाँ

ज़िंदगी की नाव में परिवार…

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Posted on January 12, 2018 at 8:00pm — 1 Comment

(माँ रमा बाई

(माँ रमा बाई को यह कविता समर्पित )

माँ रमा बाई जी को कोटि कोटि वंदन

आओ हम सब करें फूलों से अभिनंदन

वक्त की पुकार समर्पित कर दो तन मन

ज्ञान की ज्योति से प्रकाशित करो वतन

अब समाज में समता लाकर रहेगें हम

नफरत सभी के दिलों से निकाल देगें हम

उनके अधूरे काम को अब पूरा करेगें हम

अज्ञान को संसार से मिटा कर रहेगें हम

जीवन के हर क्षण में याद रहे यह प्रण

टूटे दिलों को जोड़ एक माला बनाएँ हम

खुशियाँ सभी के राह में सदा बिछाएँ…

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Posted on May 27, 2017 at 3:00pm — 2 Comments

शिक्षा के पंख

शिक्षा के पंख लगे जब मानव तन में

रंक बने राजा हमारे देश के शासन में

झूमता हृदय सबका खुशी से उमंग में

संभव है सब कुछ आज इस जगत में

धरती को नापे डाले मात्र एक क्षण में

सागर को कैद करले अपनी मुट्ठी में

हिमालय जीत का स्वप्न रखे मन में

अपने यश की पताका गाड़दे अंबर में

भ्रम सारे टूट जाएँ जो फैले समाज में

नफरत मिट जाएँ आपसी व्यवहार में

विकास की नदी बहा दे अपने देश में

समता की फसल खूब लहरे समाज में

आज ममता, भाईचारा दिखे समाज…

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Posted on February 17, 2017 at 2:30pm — 6 Comments

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ।

दुनिया में है अपना देश महान

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ।

करुणा, दया,और धर्म से वंचित

मानवता को करते ये लज्जित

प्रभु के ऊपर खुद होते सुशोभित

कहते जग में हम सबसे विद्वान  

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ॥

शील समाधि प्रज्ञा सबसे वंचित

सभी को पता है इनकी हकीकत

अज्ञानता से चलती है सियासत

वेद ज्ञान से विमुख ये पुरोहित

देश में चहुं दिश फैला अज्ञान

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ॥

देव दासी प्रथा खूब थी…

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Posted on February 4, 2017 at 5:30pm — 5 Comments

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At 10:27pm on January 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामाश्रय जी, महोत्सव में आप अपनी रचना मुख्य पृष्ठ पर महोत्सव बैनर को क्लीक कर पोस्ट कर सकते हैं . 

 
 
 

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